भारत के Power Sector में New Agriculture DISCOMs को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। बिजली वितरण कंपनियों यानी DISCOMs की लगातार बिगड़ती वित्तीय स्थिति के बीच कुछ राज्य कृषि उपभोक्ताओं का बिजली लोड अलग करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। Telangana और Maharashtra में Agriculture-focused entities बनाई जा चुकी हैं, जबकि Haryana ने भी अलग Agriculture DISCOM का प्रस्ताव रखा है। सरकारों का तर्क है कि इससे खेती के लिए बिजली आपूर्ति को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा और मौजूदा DISCOMs के वित्तीय दबाव को कम किया जा सकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या Agriculture DISCOMs वास्तव में DISCOM Debt Crisis का समाधान हैं या सिर्फ घाटे को एक अलग कंपनी में ट्रांसफर करने का तरीका?
New Agriculture DISCOMs की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?
New Agriculture DISCOMs के पीछे सबसे बड़ा कारण कृषि बिजली की भारी सब्सिडी और उससे पैदा होने वाला वित्तीय दबाव है। खेती भारत में बिजली की खपत का करीब पांचवां हिस्सा इस्तेमाल करती है, जबकि किसानों को बिजली अक्सर लागत से काफी कम दर पर दी जाती है। इस अंतर की भरपाई राज्य सरकारों की Subsidy और दूसरे उपभोक्ता वर्गों से मिलने वाली Cross-Subsidy के जरिए होती है। जब सरकारों की ओर से Subsidy का भुगतान समय पर नहीं होता, तो DISCOMs की Working Capital स्थिति प्रभावित होती है। इसका असर बिजली नेटवर्क के रखरखाव और नए Infrastructure पर होने वाले निवेश पर भी पड़ सकता है। CAG की State Finances 2024-25 रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यों ने 2024-25 में Energy Subsidies पर करीब Rs.1.89 लाख करोड़ खर्च किए। यह राज्यों के कुल Subsidy Expenditure का लगभग 43.4% था और बिजली क्षेत्र राज्य सब्सिडी का सबसे बड़ा हिस्सा रहा।

Telangana का Rythu DISCOM मॉडल क्या है?
Telangana ने कृषि और कुछ अन्य Subsidised Consumer Categories के लिए Telangana Rythu Power Distribution Company Limited (TGRPDCL) नाम की तीसरी DISCOM बनाई है। TGRPDCL के दायरे में Agriculture के अलावा Lift Irrigation Schemes, Mission Bhagiratha/Composite Protected Water Supply Scheme, Hyderabad Metropolitan Water Supply and Sewerage Board और अलग Distribution Transformers वाले Municipal Water Connections को शामिल किया गया है। कंपनी ने Distribution Licence के लिए Telangana Electricity Regulatory Commission में आवेदन भी किया है। इस restructuring में करीब 29.08 लाख consumers को नई entity में ट्रांसफर करने का प्रावधान है। साथ ही करीब Rs.26,950 करोड़ की Payables और Rs.9,032 करोड़ के Working Capital Loans को भी नई DISCOM से जोड़ा गया है। यानी यहां सिर्फ उपभोक्ता ही अलग नहीं हुए, बल्कि उनके साथ जुड़ी कुछ Assets, Receivables, Payables और Liabilities भी नई व्यवस्था में चली गईं।
क्या Telangana मॉडल से DISCOM का घाटा खत्म होगा?
यही सबसे बड़ा सवाल है। आलोचकों का तर्क है कि अगर कृषि जैसे भारी Subsidised Load को अलग कर दिया जाए और Commercial तथा Industrial जैसे अपेक्षाकृत बेहतर Revenue वाले Consumer Segments पुराने DISCOM में रह जाएं, तो पुराने DISCOM की Balance Sheet बेहतर दिखाई दे सकती है। लेकिन नई Agriculture DISCOM खुद Subsidy पर ज्यादा निर्भर हो सकती है। Telangana की Regulatory प्रक्रिया में भी इस मॉडल की Financial Viability को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
Maharashtra ने कैसे अलग किया Farm Power Load?
Maharashtra में भी कृषि बिजली को अलग व्यवस्था में ले जाने की दिशा में कदम उठाया गया है। MSEB Solar Agro Power Ltd (MSAPL) को कृषि उपभोक्ताओं के लिए Distribution और Retail Supply से जोड़ने की योजना है। MSEB Holding Company की आधिकारिक वेबसाइट पर MSAPL को उसकी Subsidiaries में शामिल किया गया है। महाराष्ट्र की योजना का एक बड़ा वित्तीय पहलू भी है। रिपोर्ट के अनुसार, MSEDCL के कृषि क्षेत्र से जुड़े बड़े Receivables में से एक हिस्से को अलग व्यवस्था में ले जाने और सरकार द्वारा देनदारी संभालने की योजना बनाई गई है। MSEDCL पर करीब ₹90,000 करोड़ का Borrowing Burden होने की बात भी सामने आई है। यानी यहां Agriculture Electricity Distribution Companies बनाने का मकसद केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि DISCOM की Balance Sheet को भी पुनर्गठित करना है।
Haryana में भी बनेगा Agriculture DISCOM, लेकिन विरोध क्यों?
Haryana ने 2026-27 के Budget में तीसरी बिजली वितरण कंपनी Haryana Agri DISCOM बनाने का प्रस्ताव रखा था। इसका उद्देश्य राज्य के किसानों को कृषि बिजली की आपूर्ति के लिए अलग व्यवस्था देना है। प्रस्तावित DISCOM करीब 5,084 Agricultural Feeders और 7.12 लाख Farm Consumers को सेवा देने वाला है। सरकार का तर्क है कि इससे किसानों को बिजली आपूर्ति, Tubewell Connections, Transformer Replacement और शिकायतों के निपटारे जैसी सेवाओं को ज्यादा केंद्रित तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है। लेकिन Power Sector Employees और Engineers के संगठनों ने इसका विरोध किया है। उनका आरोप है कि Agriculture DISCOM, Parallel Distribution Licences और Smart Metering जैसे कदम मिलकर Distribution Sector में Privatisation का रास्ता खोल सकते हैं।
DISCOM Debt Crisis India इतना बड़ा मुद्दा क्यों है?
भारत की Public Sector DISCOMs पहले से ही भारी वित्तीय दबाव में हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, Public Sector DISCOMs का कुल Accumulated Loss करीब Rs.6.77 लाख करोड़, जबकि Borrowings करीब Rs.7.11 लाख करोड़ हैं। इस संकट की कई वजहें हैं- बिजली खरीद की लागत, Technical और Commercial Losses, कम Tariff Recovery, Subsidy पर निर्भरता और राज्य सरकारों से Subsidy Payments में देरी। कृषि बिजली इसमें खास भूमिका निभाती है क्योंकि किसानों को सामाजिक और राजनीतिक कारणों से सस्ती बिजली उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन अगर इसकी लागत और वास्तविक Revenue Recovery के बीच बड़ा अंतर बना रहे, तो DISCOM की वित्तीय स्थिति पर दबाव बना रह सकता है।
क्या New Agriculture DISCOMs से Privatisation का रास्ता खुलेगा?
यही इस पूरी कवायद का सबसे विवादित पहलू है। सरकारों की ओर से अलग Agriculture DISCOM बनाने के पीछे Financial Management, Targeted Subsidy और बेहतर Power Supply जैसे तर्क दिए जा रहे हैं। लेकिन Power Sector Unions को डर है कि पहले Loss-making Agriculture Consumers को अलग किया जाएगा और फिर Commercial, Industrial और Urban Consumers वाले हिस्से में Private Players के लिए जगह बनाई जा सकती है। Haryana में Parallel Distribution Licence को लेकर कर्मचारियों के विरोध ने इस आशंका को और बढ़ाया है। हालांकि, Agriculture DISCOMs बनना अपने आप में Privatisation का प्रमाण नहीं है। यह कहना अभी जल्दबाजी होगा कि इन restructuring exercises का अंतिम परिणाम निजीकरण ही होगा। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नई entities की Tariff Policy, Subsidy Payments, Financial Support और Regulation किस तरह काम करते हैं।
किसानों पर क्या होगा असर?
किसानों के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि इस बदलाव के बाद उनकी बिजली महंगी होगी या नहीं। अलग Agriculture DISCOM बनने से अपने आप Farm Electricity Tariff बढ़ना जरूरी नहीं है। Tariff और Subsidy का निर्धारण संबंधित राज्य की Policy और Electricity Regulatory Commission के फैसलों पर निर्भर करेगा। अगर नई व्यवस्था से Transformer Maintenance, Fault Repair, New Connections और Supply Management बेहतर होता है, तो किसानों को Service Quality में फायदा मिल सकता है। लेकिन दूसरी तरफ, अगर Agriculture DISCOM की Financial Viability पूरी तरह Government Subsidy पर निर्भर हो जाती है और Subsidy Payments में देरी होती है, तो लंबे समय में इसकी Sustainability पर सवाल बने रहेंगे।
घाटा कम होगा या सिर्फ कंपनी बदलेगी?
New Agriculture DISCOMs को लेकर सबसे बड़ा आर्थिक सवाल यही है कि क्या यह Structural Reform है या केवल Accounting और Organisational Restructuring। अगर कृषि बिजली के घाटे को अलग करके Subsidy को पारदर्शी बनाया जाता है, समय पर सरकारी भुगतान होता है और नई कंपनियां बेहतर तरीके से बिजली वितरण करती हैं, तो यह मॉडल उपयोगी साबित हो सकता है। लेकिन अगर सिर्फ पुराने DISCOM की Balance Sheet को साफ दिखाने के लिए Liabilities और Losses को नई entity में ट्रांसफर किया जाता है, तो इससे Power Sector की मूल समस्या खत्म नहीं होगी। आखिरकार, DISCOM Crisis का स्थायी समाधान केवल Consumer Load को अलग करने से नहीं, बल्कि Cost Recovery, Subsidy Discipline, बेहतर Billing-Collection, AT&C Loss Reduction और समय पर Government Payments जैसे Structural Reforms से आएगा।
निष्कर्ष
New Agriculture DISCOMs भारत के Power Sector में एक महत्वपूर्ण प्रयोग बनकर सामने आए हैं। Telangana ने Rythu DISCOM के जरिए अलग मॉडल शुरू किया है, Maharashtra ने Agriculture-focused entity के जरिए restructuring की है और Haryana ने भी Agriculture DISCOM का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य किसानों की बिजली व्यवस्था को अलग तरीके से संभालना और मौजूदा DISCOMs पर पड़ने वाले Subsidy Burden को व्यवस्थित करना बताया जा रहा है। लेकिन असली परीक्षा अब Financial Viability की होगी। अगर नई व्यवस्था से Supply Quality और Subsidy Transparency बढ़ती है, तो यह Power Sector Reform साबित हो सकती है। लेकिन अगर इससे सिर्फ घाटे एक कंपनी से दूसरी कंपनी में चले जाते हैं, तो DISCOM Debt Crisis India की मूल समस्या जस की तस बनी रहेगी।
FAQs
1. Agriculture DISCOMs क्या हैं?
Agriculture DISCOMs ऐसी अलग बिजली वितरण कंपनियां हैं जिनका मुख्य उद्देश्य कृषि उपभोक्ताओं को बिजली की Supply और उससे जुड़ी Distribution Services उपलब्ध कराना है। इनका मकसद कृषि बिजली के Load, Subsidy और Financial Accounting को मौजूदा DISCOM से अलग करना हो सकता है।
2. States नए Agriculture DISCOMs क्यों बना रहे हैं?
मुख्य वजह कृषि बिजली पर भारी Subsidy, कम Tariff Recovery और मौजूदा DISCOMs पर बढ़ता Financial Pressure है। अलग entity बनाने से सरकारें कृषि बिजली की लागत और Subsidy को अलग से Track और Manage कर सकती हैं।
3. Agriculture DISCOMs का Farmers और Farm Electricity Supply से क्या संबंध है?
इनका सीधा संबंध कृषि उपभोक्ताओं को बिजली पहुंचाने से है। अलग DISCOM बनने पर Agricultural Feeders, Transformers, Connections, Billing और Supply Management को एक Dedicated Utility के तहत संभाला जा सकता है।
4. DISCOM Debt Crisis India कितना बड़ा है?
Public Sector DISCOMs के Accumulated Losses करीब Rs.6.77 लाख करोड़ और Borrowings करीब Rs.7.11 लाख करोड़ बताए गए हैं। यह वित्तीय दबाव Distribution Infrastructure और बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में निवेश की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
5. Farmers को मिलने वाली Electricity Subsidy से DISCOMs पर क्या असर पड़ता है?
कम कृषि Tariff और बिजली की वास्तविक लागत के बीच के अंतर की भरपाई सरकार की Subsidy से होती है। अगर Subsidy समय पर नहीं मिलती, तो DISCOMs की Cash Flow और Working Capital स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।
6. Farm Power Subsidy का राज्यों पर कितना Financial Burden है?
CAG के अनुसार, राज्यों ने 2024-25 में Energy Subsidies पर करीब Rs1.89 लाख करोड़ खर्च किए। यह कुल State Subsidy Expenditure का लगभग 43.4% था और इसमें किसानों तथा घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली सहायता भी शामिल थी।
7. Agriculture DISCOMs में Privatisation की बात क्यों उठ रही है?
Power Sector Employee Unions का तर्क है कि कृषि जैसे Subsidised और Loss-making Consumers को अलग करने के बाद बाकी Commercial और Industrial Consumers वाले हिस्से में Private Distribution Players के लिए ज्यादा गुंजाइश बन सकती है। हालांकि, Agriculture DISCOM बनना अपने आप में Privatisation का प्रमाण नहीं है।
8. DISCOM Privatisation से Farmers की Electricity Tariff पर क्या असर पड़ सकता है?
इसका सीधा असर तय नहीं है। Farmers की बिजली Tariff राज्य सरकार की Subsidy Policy और Regulatory Commission के फैसलों पर निर्भर करेगी। केवल DISCOM का अलग होना अपने आप Tariff बढ़ने का मतलब नहीं है।

