वाराणसी के बहुचर्चित Gyanvapi Case में सुप्रीम कोर्ट ने श्रावण मास के दौरान ज्ञानवापी परिसर के सील किए गए हिस्से में पूजा-अर्चना की अनुमति देने की मांग पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि “यह सही समय नहीं है” और मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद करने का निर्णय लिया। ऐसे में इस साल श्रावण मास में विवादित क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठानों की अनुमति मिलने की संभावना फिलहाल टल गई है।यह मामला धार्मिक आस्था, संवैधानिक अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा होने के कारण लंबे समय से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा:
“This is not the right time wait for some time.”
सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए याचिका को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल विवादित और सील किए गए हिस्से में पूजा की अनुमति नहीं दी जा सकती।

Gyanvapi Case में याचिकाकर्ताओं ने क्या मांग की थी?
हिंदू पक्ष की ओर से दायर याचिका में मांग की गई थी कि श्रावण मास के दौरान श्रद्धालुओं को निम्न धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति दी जाए:
- पूजा–अर्चना
- जलाभिषेक
- दर्शन
- भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करना
- अन्य पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि यदि अनुमति दी जाती है, तो वे अदालत द्वारा निर्धारित सभी सुरक्षा और समय संबंधी शर्तों का पालन करेंगे।
आखिर ज्ञानवापी विवाद क्या है?
ज्ञानवापी विवाद वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर से जुड़ा हुआ है।
हिंदू पक्ष का दावा है कि:
- मस्जिद परिसर में एक शिवलिंग मौजूद है।
- मुगल काल में प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण किया गया था।
वहीं मुस्लिम पक्ष और अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति का कहना है कि:
- जिस संरचना को शिवलिंग बताया जा रहा है, वह वजूखाना (Wazukhana) में मौजूद एक फव्वारे का हिस्सा है।
- यह मामला Places of Worship Act, 1991 के तहत संरक्षित है।
सील किए गए हिस्से को लेकर विवाद क्यों है?
मई 2022 में अदालत द्वारा कराए गए सर्वे के बाद ज्ञानवापी परिसर के विवादित हिस्से को सील कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय:
- विवादित क्षेत्र को संरक्षित रखने का आदेश दिया था।
- मस्जिद के अन्य हिस्सों में नमाज जारी रखने की अनुमति दी थी।
विवादित स्थल वही क्षेत्र है, जहां हिंदू पक्ष शिवलिंग होने का दावा करता है।
क्या अभी ज्ञानवापी परिसर में कहीं पूजा होती है?
जी हां। वर्ष 2024 में न्यायालय के आदेश के बाद श्रद्धालुओं को ज्ञानवापी परिसर के दक्षिणी तहखाने (Southern Basement Chamber) में पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई थी।
इसलिए वर्तमान में:
- दक्षिणी तहखाने में पूजा जारी है।
- सील किए गए विवादित हिस्से में पूजा की अनुमति नहीं है।
श्रावण मास का धार्मिक महत्व क्या है?
श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण महीनों में से एक माना जाता है। इस दौरान देशभर में करोड़ों श्रद्धालु:
- जलाभिषेक करते हैं।
- शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते हैं।
- विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार (Article 25) के तहत श्रद्धालुओं को सीमित और नियंत्रित पूजा की अनुमति दी जानी चाहिए।
Gyanvapi Case में आगे क्या होगा?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दो सप्ताह के लिए टाल दिया है। इसके अलावा:
- इलाहाबाद हाईकोर्ट वजूखाना क्षेत्र के ASI सर्वे से संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रहा है।
- सुप्रीम कोर्ट में ASI सर्वे को लेकर दायर अपील भी लंबित है।
- विवादित क्षेत्र की वैज्ञानिक जांच पर फिलहाल अंतरिम रोक लगी हुई है।
आने वाले समय में अदालत का निर्णय इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
क्या फिलहाल धार्मिक अनुष्ठानों की अनुमति मिली है?
सुप्रीम कोर्ट ने श्रावण मास के लिए विवादित और सील किए गए हिस्से में पूजा-अर्चना की अनुमति नहीं दी है। याचिका पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
निष्कर्ष
Gyanvapi Case एक संवेदनशील और लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद है, जिसमें धार्मिक आस्था और संवैधानिक प्रावधान दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल श्रावण मास के दौरान विवादित स्थल पर पूजा की अनुमति देने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया है कि “अभी सही समय नहीं है।” आने वाली सुनवाई में अदालत का फैसला इस बहुचर्चित मामले के अगले चरण को निर्धारित करेगा।
FAQs:
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित स्थल पर पूजा की अनुमति देने के लिए “अभी सही समय नहीं है” और मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद करने का निर्णय लिया।
अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार किया है।
श्रावण मास के दौरान विवादित स्थल पर पूजा, जलाभिषेक और दर्शन की अनुमति मांगी गई थी।
यह विवाद मस्जिद परिसर में कथित शिवलिंग और उसके धार्मिक स्वरूप को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों के दावों से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दो सप्ताह के लिए स्थगित किया है।
नहीं, सील किए गए विवादित हिस्से में फिलहाल किसी धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति नहीं दी गई है।

