Ethanol Blended Petrol Testing को लेकर देशभर के पेट्रोल पंप संचालकों ने सरकार से नई मांग की है। डीलरों का कहना है कि सरकार ने राज्यों को मानकों के अनुरूप नहीं मिलने वाले एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) की बिक्री पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, लेकिन पेट्रोल पंपों के पास इसकी गुणवत्ता और एथेनॉल की मात्रा जांचने के लिए न तो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) है और न ही आवश्यक टेस्टिंग उपकरण। ऐसे में कार्रवाई का खतरा सीधे डीलरों पर आ सकता है।
पेट्रोल पंप संचालक SOP और टेस्टिंग उपकरण क्यों मांग रहे हैं?
पेट्रोल पंप डीलरों का कहना है कि वे केवल तेल विपणन कंपनियों (OMCs) से मिलने वाले ईंधन की बिक्री करते हैं। उनके पास केवल ईंधन की डेंसिटी (Density) जांचने की सुविधा होती है, लेकिन यह पता लगाने का कोई उपकरण नहीं है कि पेट्रोल में एथेनॉल कितनी मात्रा में मिला है। इसलिए वे सरकार से स्पष्ट SOP, वैज्ञानिक दिशा-निर्देश और टेस्टिंग उपकरण उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

Ethanol Blended Petrol Testing को लेकर क्या है पूरा मामला?
8 जुलाई को पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर निर्देश दिया कि पेट्रोलियम उत्पादों में मिलावट रोकने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस, सिविल सप्लाई विभाग, कानूनी माप विज्ञान विभाग (Legal Metrology), तेल विपणन कंपनियां (OMCs) और परीक्षण प्रयोगशालाएं मिलकर नियमित जांच और अचानक निरीक्षण करें। इस आदेश के बाद देशभर के पेट्रोल पंप संचालकों ने चिंता जताई है कि यदि जांच में कोई गड़बड़ी मिलती है तो कार्रवाई का सामना उन्हें करना पड़ सकता है, जबकि ईंधन की आपूर्ति सरकारी तेल कंपनियों द्वारा की जाती है।
पंप डीलरों की चिंता क्या है?
देश के अलग–अलग राज्यों के डीलरों का कहना है कि वर्तमान Marketing Discipline Guidelines (MDG) के तहत वे केवल ईंधन की डेंसिटी जांच सकते हैं।
उनकी प्रमुख चिंताएं हैं–
- एथेनॉल की वास्तविक मात्रा मापने का कोई उपकरण उपलब्ध नहीं है।
- OMCs ने एथेनॉल प्रतिशत जांचने के लिए कोई SOP जारी नहीं किया है।
- भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने भी इस संबंध में कोई मानक परीक्षण प्रक्रिया प्रकाशित नहीं की है।
- स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं होने से अधिकारियों द्वारा अनावश्यक कार्रवाई या उत्पीड़न की आशंका है।
डीलरों का यह भी सवाल है कि यदि ईंधन की ब्लेंडिंग रिफाइनरी या सप्लाई स्तर पर होती है तो उसकी जिम्मेदारी केवल खुदरा विक्रेताओं पर क्यों डाली जा रही है।
E20 पेट्रोल क्या है और विवाद क्यों हो रहा है?
E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। भारत सरकार का उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देना है। इसी लक्ष्य के तहत देश में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम चलाया जा रहा है। हालांकि, कुछ वाहन मालिकों ने शिकायत की है कि E20 पेट्रोल से इंजन प्रभावित हो रहे हैं। सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि 2023 के बाद निर्मित वाहन E20 ईंधन के अनुकूल (Compatible) बनाए जा रहे हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल 5% और 10% एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को अलग-अलग उपलब्ध कराना लॉजिस्टिक कारणों से संभव नहीं है।
तेल कंपनियों और सरकार का क्या रुख है?
इस मामले पर पेट्रोलियम मंत्रालय तथा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों–इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। हालांकि, तेल कंपनियों के अधिकारियों ने बताया कि ईंधन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम को और मजबूत किया गया है।
अब आगे क्या हो सकता है?
यदि सरकार पेट्रोल पंप संचालकों की मांग पर विचार करती है तो भविष्य में–
- एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की जांच के लिए मानकीकृत SOP जारी हो सकती है।
- पेट्रोल पंपों को नए टेस्टिंग उपकरण उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
- ईंधन गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक बन सकती है।
- डीलरों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए जवाबदेही स्पष्ट हो सकती है।
निष्कर्ष
Ethanol Blended Petrol Testing को लेकर उठी बहस केवल पेट्रोल पंप संचालकों की चिंता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ईंधन की गुणवत्ता, उपभोक्ता सुरक्षा और सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से भी जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। डीलरों की मांग है कि कार्रवाई से पहले उन्हें स्पष्ट SOP, वैज्ञानिक परीक्षण मानक और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि ईंधन की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच संभव हो सके।
FAQ
- पेट्रोल पंप संचालक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए SOP क्यों मांग रहे हैं?
डीलरों का कहना है कि उनके पास एथेनॉल की मात्रा जांचने के लिए न तो उपकरण हैं और न ही कोई मानकीकृत SOP। ऐसे में कार्रवाई होने पर उन्हें अनावश्यक परेशानी हो सकती है।
- एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) क्या है?
E20 पेट्रोल में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण होता है। इसे सरकार स्वच्छ ईंधन और आयातित तेल पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से बढ़ावा दे रही है।
- पेट्रोल की गुणवत्ता जांचने के लिए किन उपकरणों की आवश्यकता होगी?
डीलरों के अनुसार, ऐसे उपकरणों की जरूरत है जो पेट्रोल में एथेनॉल की वास्तविक मात्रा और गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कर सकें। फिलहाल अधिकांश पंपों पर केवल डेंसिटी जांच की सुविधा उपलब्ध है।
- सरकार का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम क्या है?
यह भारत सरकार की पहल है, जिसका उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और गन्ना उत्पादकों सहित किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराना है।
- E20 पेट्रोल से वाहन चालकों को क्या लाभ होगा?
E20 पेट्रोल के उपयोग से जीवाश्म ईंधन की खपत कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सरकार के अनुसार E20 का बेहतर उपयोग उन वाहनों में होगा जो इसके अनुरूप डिजाइन किए गए हैं।

