India Australia Uranium Deal: 12 साल बाद खुला रास्ता! क्या अब भारत की परमाणु ताकत बदलने वाली है?

India Australia Uranium Deal

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच India Australia Uranium Deal आखिरकार नई दिशा में बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान दोनों देशों ने ऐसा समझौता किया है, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया भारत को परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए यूरेनियम निर्यात करेगा। यह समझौता सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी, स्वच्छ ऊर्जा और भविष्य की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देगा।

भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम समझौता क्या है?

India Australia Uranium Deal के तहत ऑस्ट्रेलिया भारत को केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों यानी बिजली उत्पादन के लिए यूरेनियम उपलब्ध कराएगा। इस समझौते में यह सुनिश्चित किया गया है कि परमाणु ईंधन का उपयोग हथियारों के लिए नहीं बल्कि केवल Civil Nuclear Energy के विकास में होगा।

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India Australia Uranium Deal भारत के लिए क्यों है इतना अहम?

भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त Nuclear Fuel की जरूरत होगी। ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े Australia Uranium Exports करने वाले देशों में शामिल है। ऐसे में भारत को भरोसेमंद सप्लाई मिलने से देश की Energy Security मजबूत होगी और कोयले पर निर्भरता भी धीरे-धीरे कम हो सकेगी। यह समझौता भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को भी गति देगा।

दोनों देशों के बीच किन क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग?

यूरेनियम के अलावा भारत और ऑस्ट्रेलिया ने कई अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।

  • Renewable Energy
  • Green Hydrogen
  • Critical Minerals
  • Low-carbon Aluminium
  • Infrastructure Investment
  • Clean Energy Technologies

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत में सड़क, रेलवे, बंदरगाह और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में दीर्घकालिक निवेश का भी न्योता दिया।

12 साल पहले हुआ था समझौता, फिर अब क्या बदला?

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2014 में India Australia Nuclear Cooperation समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।हालांकि, उस समय यूरेनियम निर्यात सीमित रहा क्योंकि ऑस्ट्रेलिया को आशंका थी कि इसका इस्तेमाल कहीं सैन्य कार्यक्रम में न हो जाए। अब नए समझौते में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला Uranium Supply Agreement केवल शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में ही इस्तेमाल होगा।

भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों को क्या फायदा होगा?

 

भारत को फायदे

  • परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
  • स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य हासिल करना आसान होगा।
  • कोयले पर निर्भरता घटेगी।
  • 2047 तक 100 GW Nuclear Power India लक्ष्य को गति मिलेगी।

 

ऑस्ट्रेलिया को फायदे

  • चीन पर व्यापारिक निर्भरता कम होगी।
  • यूरेनियम के लिए बड़ा नया बाजार मिलेगा।
  • भारत के साथ Strategic Partnership मजबूत होगी।
  • भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के नए अवसर मिलेंगे।
  • भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में नया अध्याय
  • ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोनों देशों के बीच “Living Bridge” बताया।

भारत आज ऑस्ट्रेलिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वहीं ऑस्ट्रेलिया में लगभग 10 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाते हैं।

 

निष्कर्ष

India Australia Uranium Deal सिर्फ यूरेनियम खरीदने-बेचने का समझौता नहीं है। यह भारत की Energy Security, Clean Energy, Civil Nuclear Energy और दोनों देशों की Strategic Partnership को नई ऊंचाई देने वाला कदम है। यदि यह सहयोग तय योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को बड़ी गति मिल सकती है।

FAQs:

यह समझौता ऑस्ट्रेलिया से भारत को शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए यूरेनियम निर्यात की अनुमति देता है।

भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए।

हाँ। समझौते में स्पष्ट किया गया है कि यूरेनियम का उपयोग केवल बिजली उत्पादन जैसे नागरिक परमाणु कार्यक्रमों में होगा।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।

ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार हैं और वह प्रमुख वैश्विक निर्यातकों में शामिल है।