भारत ने हिंद महासागर में अपनी निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए अमेरिका से दो और MQ-9B Sea Guardian ड्रोन लीज पर लिए हैं। रक्षा मंत्रालय ने 17 अगस्त 2026 को अमेरिकी कंपनी General Atomics Aeronautical Systems (GA-ASI) के साथ करीब 1,943 करोड़ रुपये का करार किया। ये दोनों ड्रोन भारतीय नौसेना को 30 महीने के लिए मिलेंगे। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के लिए किया जाएगा।
इन ड्रोन की खासियत यह है कि ये लंबे समय तक ऊंचाई पर उड़कर बड़े समुद्री इलाके की निगरानी कर सकते हैं। नौसेना को इससे Maritime Domain Awareness यानी समुद्र में क्या हो रहा है, इसकी लगातार जानकारी और ISR यानी खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और टोह लेने की क्षमता मजबूत होगी।

भारत को अभी ड्रोन की जरूरत क्यों पड़ी?
सवाल यह है कि जब भारत पहले ही इन ड्रोन को खरीदने का फैसला कर चुका है, तो फिर दो MQ-9B को अलग से लीज पर लेने की जरूरत क्यों पड़ी?
दरअसल, भारत ने अक्टूबर 2024 में अमेरिका से 31 MQ-9B ड्रोन खरीदने का समझौता किया था। इनमें 15 Sea Guardian नौसेना के लिए और 16 Sky Guardian सेना व वायुसेना के लिए हैं। लेकिन इन खरीदे गए ड्रोन की डिलीवरी 2029 से शुरू होने की उम्मीद है।
यानी भारत के सामने करीब ढाई साल का ऐसा समय था, जब उसकी जरूरत बनी हुई थी लेकिन खरीदे गए नए ड्रोन उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में लीज पर दो और ड्रोन लेना एक तरह से अंतरिम व्यवस्था है, ताकि नौसेना की निगरानी क्षमता में कोई खालीपन न आए।
भारत पहले भी इसी तरह MQ-9B को लीज पर इस्तेमाल कर चुका है। नवंबर 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन तनाव के बाद नौसेना ने General Atomics से दो Sea Guardian ड्रोन लीज पर लिए थे। इनका इस्तेमाल हिंद महासागर में निगरानी के लिए किया गया।

1,943 करोड़ रुपये सिर्फ ‘ड्रोन का किराया’ नहीं है
1,943 करोड़ रुपये की रकम देखकर सवाल उठ सकता है कि दो ड्रोन के 30 महीने के लिए इतना बड़ा खर्च क्यों किया जा रहा है। लेकिन लीज की रकम को केवल दो ड्रोन के एयरफ्रेम का किराया समझना सही नहीं होगा।
ऐसे समझिए कि भारत को केवल उड़ने वाला ड्रोन नहीं मिलता, बल्कि उसके साथ ऑपरेशन, तकनीकी सहायता, रखरखाव, सेंसर और दूसरे जरूरी सपोर्ट सिस्टम भी करार का हिस्सा हो सकते हैं। यही वजह है कि लीज की कुल कीमत को सीधे ड्रोन की खरीद कीमत से तुलना करना सही नहीं है।
भारत की रक्षा खरीद व्यवस्था में लीज का विकल्प इसी तरह की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 2020 में भी नौसेना ने दो MQ-9B लीज पर लिए थे और बाद में उनकी लीज बढ़ाई गई।
MQ-9B Sea Guardian में ऐसा क्या खास है?
MQ-9B Sea Guardian को खास तौर पर लंबी दूरी की समुद्री निगरानी के लिए तैयार किया गया है। यह MQ-9 परिवार का ज्यादा आधुनिक संस्करण है और हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस कैटेगरी में आता है।

इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी एंड्योरेंस यानी लंबे समय तक हवा में रहने की क्षमता है। अलग-अलग कॉन्फिगरेशन और मिशन के आधार पर MQ-9B करीब 30 से 40 घंटे तक हवा में रह सकता है और लगभग 40,000 फीट तक की ऊंचाई पर ऑपरेट कर सकता है। इसका मतलब है कि एक मिशन में यह बहुत बड़े समुद्री क्षेत्र पर लंबे समय तक निगरानी बनाए रख सकता है।
Sea Guardian को समुद्री मिशनों के लिए खास सेंसर और सिस्टम के साथ तैयार किया गया है। इसमें समुद्री सतह पर निगरानी के लिए रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर तथा दूसरे इंटेलिजेंस सिस्टम लगाए जा सकते हैं। इनकी मदद से नौसेना दूर मौजूद जहाजों और दूसरी गतिविधियों की पहचान कर सकती है और जरूरत के मुताबिक उनका ट्रैक बनाए रख सकती है।
इसकी भूमिका सिर्फ किसी एक जहाज को ढूंढने तक सीमित नहीं है। यह किसी बड़े समुद्री इलाके की लगातार निगरानी कर सकता है, संदिग्ध गतिविधि को ट्रैक कर सकता है और जमीन पर मौजूद कमांड सेंटर तक जानकारी पहुंचा सकता है। यही वजह है कि ऐसे ड्रोन को आधुनिक नौसैनिक ऑपरेशन में फोर्स मल्टीप्लायर माना जाता है।
हिंद महासागर पर चीन की बढ़ती मौजूदगी भी बड़ी वजह
भारत के लिए हिंद महासागर केवल समुद्र नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा क्षेत्र है। चीन पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक गतिविधियां बढ़ा रहा है। चीनी युद्धपोतों और अन्य समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भारत को लगातार निगरानी की जरूरत है।
यही वजह है कि Sea Guardian जैसे लंबे समय तक उड़ने वाले ड्रोन नौसेना के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये बड़े इलाके में लंबे समय तक निगरानी कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर नौसेना के दूसरे प्लेटफॉर्म को जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।
भारत पहले से P-8I Poseidon जैसे मानवयुक्त समुद्री निगरानी विमान इस्तेमाल करता है। MQ-9B जैसे ड्रोन इन विमानों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं और नियमित निगरानी के कई काम संभाल सकते हैं।
2020 में लीज पर लिए ड्रोन से भारत को क्या फायदा हुआ?
नौसेना को MQ-9B का इस्तेमाल करने का अनुभव नया नहीं है। 2020 में लिए गए दो ड्रोन ने भारत को इस प्लेटफॉर्म की वास्तविक क्षमता समझने का मौका दिया।
सितंबर 2024 में इनमें से एक ड्रोन को चेन्नई के पास तकनीकी खराबी आने के बाद समुद्र में नियंत्रित तरीके से उतारना पड़ा था। उस समय नौसेना ने बताया था कि ड्रोन नियमित निगरानी मिशन पर था और उसमें तकनीकी समस्या आई थी।
इस घटना से यह भी सामने आया कि लीज व्यवस्था में रखरखाव की जिम्मेदारियां किस तरह निर्माता के साथ जुड़ी होती हैं। भारत को इस प्लेटफॉर्म के संचालन का कई वर्षों का अनुभव भी मिल चुका है।
अब 31 खरीदे गए ड्रोन कब मिलेंगे?
भारत ने 31 MQ-9B ड्रोन खरीदने का फैसला पहले ही कर लिया है। आधिकारिक तौर पर 2023 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 16 Sky Guardian और 15 Sea Guardian समेत 31 MQ-9B की खरीद के लिए मंजूरी दी थी।
बाद में अक्टूबर 2024 में खरीद का समझौता हुआ। इनमें से 15 Sea Guardian नौसेना को और बाकी Sky Guardian ड्रोन सेना और वायुसेना की जरूरतों के लिए हैं। खरीदे गए ड्रोन की डिलीवरी 2029 से शुरू होने की उम्मीद है।
इसलिए अगस्त 2026 का नया 30 महीने का लीज करार काफी हद तक इसी अंतर को भरने के लिए है। जब भारत के अपने खरीदे हुए ड्रोन आने शुरू होंगे, तब मौजूदा लीज की जरूरत भी कम हो सकती है।
भारत के लिए असली फायदा क्या है?
इस पूरे सौदे का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारत को 2029 तक इंतजार करते हुए अपनी समुद्री निगरानी क्षमता कम नहीं करनी पड़ेगी।
हिंद महासागर में जहाजों की आवाजाही, रणनीतिक समुद्री रास्तों और दूसरे देशों की नौसैनिक गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के लिए भारत को लंबे समय तक हवा में रहने वाले निगरानी प्लेटफॉर्म की जरूरत है। नए दो Sea Guardian इस क्षमता को तत्काल बढ़ाएंगे।
यानी 1,943 करोड़ रुपये का यह सौदा नए ड्रोन खरीदने का विकल्प नहीं, बल्कि खरीदे गए 31 MQ-9B की डिलीवरी शुरू होने तक नौसेना की निगरानी क्षमता को बनाए रखने की अंतरिम व्यवस्था है। यही इस पूरे सौदे को समझने की सबसे अहम बात है।
FAQ
1. MQ-9B Sea Guardian Drone Lease Deal क्या है?
भारत ने अमेरिकी कंपनी General Atomics से भारतीय नौसेना के लिए दो MQ-9B Sea Guardian ड्रोन 30 महीने के लिए लीज पर लेने का करीब 1,943 करोड़ रुपये का करार किया है।
2. भारत ने MQ-9B Sea Guardian को लीज पर क्यों लिया?
भारत ने 31 MQ-9B ड्रोन पहले ही खरीद रखे हैं, लेकिन उनकी डिलीवरी 2029 से शुरू होने की उम्मीद है। तब तक हिंद महासागर में निगरानी क्षमता बनाए रखने के लिए दो ड्रोन लीज पर लिए गए हैं।
3. India MQ-9B Drone Deal की कीमत कितनी है?
दो MQ-9B Sea Guardian ड्रोन की 30 महीने की लीज का करार करीब 1,943 करोड़ रुपये का है।
4. Indian Navy को कितने MQ-9B Sea Guardian मिलेंगे?
इस नए लीज करार के तहत नौसेना को दो MQ-9B Sea Guardian मिलेंगे। इससे पहले नौसेना दो ऐसे ड्रोन लीज पर संचालित कर रही थी।
5. भारत ने कुल कितने MQ-9B ड्रोन खरीदे हैं?
भारत ने अमेरिका से कुल 31 MQ-9B ड्रोन खरीदने का समझौता किया है। इनमें 15 Sea Guardian नौसेना के लिए और 16 Sky Guardian सेना और वायुसेना के लिए हैं।
6. MQ-9B Sea Guardian की प्रमुख खूबियां क्या हैं?
यह एक हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (HALE) ड्रोन है, जो लंबे समय तक हवा में रहकर समुद्री निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक करने में सक्षम है।
7. MQ-9B की Range और Endurance कितनी है?
MQ-9B की क्षमता उसके कॉन्फिगरेशन पर निर्भर करती है। General Atomics के अनुसार यह 30 घंटे से ज्यादा समय तक उड़ान भर सकता है, जबकि अलग-अलग कॉन्फिगरेशन में इसकी endurance करीब 36 घंटे तक बताई जाती है। इसकी लंबी उड़ान क्षमता इसे हिंद महासागर जैसे बड़े समुद्री क्षेत्र की निगरानी के लिए उपयोगी बनाती है।

