Kejriwal Sisodia Discharge Case में आज दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को दिल्ली शराब नीति मामले में discharge कर दिया गया था। अब हाईकोर्ट यह देखेगा कि CBI की चुनौती पर आगे सुनवाई की जानी चाहिए या नहीं।
केजरीवाल और सिसोदिया ने भी CBI की revision petition को खारिज करने की मांग की है। दोनों नेताओं का आरोप है कि जांच एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद बेहद जल्दबाजी में हाईकोर्ट का रुख किया।
Kejriwal Sisodia Discharge Case में आज क्या होगा?
दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस मनोज जैन CBI की उस याचिका पर सुनवाई करेंगे, जिसमें ट्रायल कोर्ट के discharge order को चुनौती दी गई है।
इसके साथ ही अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की ओर से दाखिल उन applications पर भी सुनवाई होनी है, जिनमें CBI की revision petition को ही maintainable न होने के आधार पर खारिज करने की मांग की गई है।
दोनों नेताओं ने 13 अगस्त को दाखिल अपनी अलग–अलग applications में CBI पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उनका कहना है कि ट्रायल कोर्ट के 500 से अधिक पन्नों के फैसले का जांच एजेंसी ने ठीक से अध्ययन नहीं किया और discharge order के महज चार घंटे के भीतर revision petition दाखिल कर दी।

ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल-सिसोदिया को क्यों किया था Discharge?
27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को discharge कर दिया था।
ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष का मामला न्यायिक जांच के सामने टिक नहीं पाया और उसकी पूरी कहानी पर सवाल खड़े हुए।
कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान तीन महीने से ज्यादा समय तक तथ्यों और दलीलों पर विचार किया था।
यही वजह है कि केजरीवाल और सिसोदिया अब हाईकोर्ट में CBI की चुनौती पर सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि अगर जांच एजेंसी ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत मानती है, तो उसे यह बताना चाहिए कि फैसले में कौन–सी specific finding कानूनी तौर पर गलत या perverse है।
CBI ने Discharge Order को क्यों बताया ‘Illegal’?
CBI ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए इसे “patently illegal” और “perverse” बताया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि ट्रायल कोर्ट ने charges तय करने के चरण में ही मामले के सबूतों की ऐसी विस्तृत जांच कर दी, जो एक तरह से “mini-trial” के बराबर थी।
CBI का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के मामले और उपलब्ध evidence का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि फैसले में जांच एजेंसी और उसके अधिकारियों के खिलाफ अनावश्यक प्रतिकूल टिप्पणियां की गईं।
अब हाईकोर्ट के सामने मुख्य सवाल यही है कि CBI की revision petition पर आगे विचार किया जाए या ट्रायल कोर्ट का discharge order बरकरार रहे।
केजरीवाल और सिसोदिया का CBI पर क्या आरोप है?
केजरीवाल और सिसोदिया ने CBI की याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि CBI ने discharge order आने के सिर्फ चार घंटे के भीतर हाईकोर्ट का रुख किया। उनके मुताबिक यह कदम असाधारण जल्दबाजी में उठाया गया।
दोनों नेताओं ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने 500 से ज्यादा पन्नों के विस्तृत फैसले में मामले की जांच की थी और तीन महीने से अधिक समय तक इस पर विचार किया था।
उनका तर्क है कि CBI ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में आखिर कौन–सी finding कानूनी या प्रक्रियात्मक तौर पर गलत थी।
अब आगे क्या होगा?
आज की सुनवाई मामले के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट को CBI की revision petition और केजरीवाल–सिसोदिया की आपत्तियों पर विचार करना है।
हालांकि, इस सुनवाई का मतलब यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने आरोपों या discharge order पर अंतिम फैसला सुना दिया है। अदालत के सामने फिलहाल CBI की चुनौती और उससे जुड़ी कानूनी आपत्तियां हैं।
इसलिए Kejriwal Sisodia Discharge Case में आज की सुनवाई यह तय करने की दिशा में अहम कदम हो सकती है कि ट्रायल कोर्ट के discharge order को चुनौती देने वाली CBI की याचिका आगे किस तरह बढ़ेगी।
FAQs
- CBI ने Arvind Kejriwal और Manish Sisodia के Discharge को चुनौती क्यों दी?
CBI का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का discharge order कानूनी तौर पर गलत था और अदालत ने charges के चरण में ही evidence का विस्तृत मूल्यांकन कर दिया। - Kejriwal Sisodia Discharge Case क्या है?
यह दिल्ली शराब नीति मामले से जुड़ा कानूनी विवाद है, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को discharge कर दिया था और CBI ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। - Delhi Liquor Policy Case में Trial Court ने क्या फैसला दिया था?
27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को discharge कर दिया था। - CBI की Petition पर Hearing Today में क्या होगा?
दिल्ली हाईकोर्ट CBI की revision petition पर सुनवाई करेगा। साथ ही केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से petition को खारिज करने की मांग वाली applications पर भी सुनवाई होगी। - Delhi High Court में CBI ने क्या मांग की है?
CBI ने ट्रायल कोर्ट के discharge order को चुनौती दी है और इसे कानूनी रूप से गलत बताते हुए revision petition दाखिल की है। - Arvind Kejriwal और Manish Sisodia को Discharge क्यों किया गया था?
ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष का मामला न्यायिक जांच के सामने टिक नहीं पाया और अभियोजन की कहानी पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

