Once Weekly Insulin: अब रोज नहीं, हफ्ते में सिर्फ 1 बार लगेगा इंसुलिन – भारत में लॉन्च हुई नई थेरेपी, जानिए कैसे बदलेगी डायबिटीज़ का इलाज ?

Once Weekly Insulin

Once Weekly Insulin: भारत में डायबिटीज़ के इलाज में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डेनमार्क की दवा कंपनी Novo Nordisk ने Awiqli (इंसुलिन आइकोडेक/Insulin Icodec) नाम से दुनिया का पहला सप्ताह में एक बार लगने वाला बेसल इंसुलिन (Once Weekly Basal Insulin) लॉन्च किया है। यह दवा 18 वर्ष से अधिक आयु के Type 1 और Type 2 डायबिटीज़ के उन मरीजों के लिए है जिन्हें इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता होती है। अब तक ऐसे मरीजों को हर दिन इंसुलिन लेना पड़ता था, लेकिन नई थेरेपी के बाद पूरे साल में 365 इंजेक्शन की जगह केवल 52 इंजेक्शन लगाने होंगे।

यह लॉन्च ऐसे समय हुआ है जब भारत दुनिया में सबसे अधिक डायबिटीज़ प्रभावित देशों में शामिल है। देश में लगभग 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज़ और करीब 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज़ से पीड़ित हैं। इसके अलावा लगभग 9 लाख लोग Type 1 डायबिटीज़ के साथ जीवन जी रहे हैं, जबकि Type 2 डायबिटीज़ के करीब 10% मरीजों को भी समय के साथ इंसुलिन की आवश्यकता पड़ती है।

Awiqli क्या है और यह कैसे काम करता है?

Awiqli, इंसुलिन आइकोडेक (Insulin Icodec) पर आधारित एक लॉन्ग-एक्टिंग बेसल इंसुलिन है। बेसल इंसुलिन शरीर में पूरे दिन और रात रक्त शर्करा (Blood Sugar) को नियंत्रित रखने का काम करता है।

यह दवा FlexTouch Pen के माध्यम से लगाई जाती है। इसमें इंसुलिन की सांद्रता (Concentration) सामान्य इंसुलिन की तुलना में काफी अधिक होती है। एक मिलीलीटर में 700 यूनिट इंसुलिन मौजूद रहता है, जो शरीर में धीरे-धीरे अवशोषित होकर लगभग सात दिनों तक लगातार काम करता है। इसी वजह से मरीज को रोज इंजेक्शन लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

रोजाना इंजेक्शन की जरूरत क्यों पड़ती थी?

Type 1 डायबिटीज़ में शरीर स्वयं इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। वहीं कई Type 2 मरीजों में समय के साथ शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या उसका सही उपयोग नहीं कर पाता। ऐसे मरीजों को ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए रोज इंसुलिन लेना पड़ता है। कई मरीजों को दिन में एक से अधिक बार भी इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं।

भारत में बड़ी समस्या यह रही है कि कई मरीज रोजाना इंजेक्शन लगाने के डर, दर्द और असुविधा के कारण इंसुलिन शुरू ही नहीं करते। Novo Nordisk के अनुसार, इसी वजह से भारत में कई मरीजों में इंसुलिन शुरू करने में औसतन 7 से 9 वर्ष की देरी हो जाती है।

भारत में इसकी कीमत कितनी रखी गई है?

कंपनी ने Awiqli की कीमत को अपेक्षाकृत किफायती रखने की कोशिश की है। 700 यूनिट वाला 1 ml FlexTouch Pen ₹2,611 में मिलेगा, जबकि 2,100 यूनिट वाला 3 ml Pen ₹7,833 का होगा। इसका प्रति यूनिट खर्च लगभग ₹3.73 पड़ता है, जो कंपनी के अनुसार मौजूदा कई दैनिक बेसल इंसुलिन की तुलना में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ता है।

यदि किसी मरीज को प्रतिदिन लगभग 10 यूनिट इंसुलिन की आवश्यकता होती है, तो उसे सप्ताह में लगभग 70 यूनिट इंसुलिन लगेगा, जिसकी लागत करीब ₹261 से ₹263 प्रति सप्ताह होगी।

 

यह पारंपरिक इंसुलिन से कितना अलग है?

सबसे बड़ा अंतर इसकी डोज़िंग (Dosing) में है। पहले जहां मरीजों को रोज इंजेक्शन लगाना पड़ता था, वहीं अब पूरे सप्ताह के लिए एक ही इंजेक्शन पर्याप्त होगा।

इसे केवल सुविधा तक सीमित नहीं माना जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, दवा शरीर में धीरे-धीरे और स्थिर गति से इंसुलिन छोड़ती है। इससे रक्त शर्करा का स्तर अधिक स्थिर बना रहता है और अचानक बहुत कम होने (Hypoglycaemia) का खतरा भी कम हो सकता है।

डॉक्टर अब मरीज की डोज़ का मूल्यांकन हर सप्ताह या पखवाड़े में कर सकेंगे, जबकि पहले कई मामलों में हर कुछ दिनों में डोज़ समायोजित करनी पड़ती थी।

 

क्लिनिकल ट्रायल में क्या परिणाम मिले?

Novo Nordisk के ONWARDS Clinical Trial Programme में इस दवा की तुलना रोज लगने वाले इंसुलिन ग्लार्जिन (Insulin Glargine U100) सहित विभिन्न इंसुलिन उपचारों से की गई।

कंपनी के अनुसार अध्ययन में पाया गया कि Awiqli ने कई मामलों में HbA1c (पिछले लगभग तीन महीनों का औसत ब्लड शुगर स्तर) को अधिक प्रभावी ढंग से कम किया। साथ ही मरीजों का Time in Range भी बेहतर रहा, यानी उनका ब्लड शुगर अधिक समय तक सामान्य सीमा में बना रहा।

Type 2 डायबिटीज़ के अधिक मरीजों ने HbA1c को 7% से नीचे बनाए रखा और ऐसा करते समय गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया के मामले भी तुलनात्मक रूप से कम देखे गए।

 

डॉक्टर क्या कह रहे हैं?

मुंबई के डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. राजीव कोविल ने कहा कि सबसे बड़ी बात इसकी प्रतिस्पर्धी कीमत है। उनके अनुसार यह केवल एक प्रीमियम इनोवेशन नहीं, बल्कि आम मरीजों की पहुंच में आने वाली तकनीक बन सकती है। उन्होंने कहा कि क्लिनिकल ट्रायल्स में यह दवा कई परिस्थितियों में दैनिक बेसल इंसुलिन जितनी या उससे बेहतर साबित हुई है।

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. एस.के. वांगनू के अनुसार रोजाना इंजेक्शन का डर भारत में इंसुलिन थेरेपी शुरू करने की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। सप्ताह में एक बार वाली यह थेरेपी मरीजों की स्वीकार्यता बढ़ा सकती है और समय पर इलाज शुरू कराने में मदद कर सकती है।

 

भारत में इसकी जरूरत इतनी ज्यादा क्यों है?

भारत में डायबिटीज़ तेजी से बढ़ रही है। हालिया NFHS-6 के आंकड़े बताते हैं कि शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी हाई ब्लड शुगर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

वहीं ICMR और Madras Diabetes Research Foundation द्वारा 2022 में किए गए एक राष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया कि ज्ञात डायबिटीज़ मरीजों में केवल हर तीन में से एक व्यक्ति का ब्लड शुगर सही नियंत्रण में था।

Novo Nordisk इंडिया के प्रबंध निदेशक विक्रांत श्रोत्रिया के अनुसार वर्तमान में भारत में लगभग 60 लाख लोग इंसुलिन ले रहे हैं, जबकि कम से कम दोगुने लोगों को इसकी आवश्यकता हो सकती है। उनका मानना है कि यदि सप्ताह में एक बार लगने वाला इंसुलिन इस अंतर को कम कर पाता है, तो यह भारत में डायबिटीज़ उपचार के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।

 

Novo Nordisk की रणनीति क्या है?

Novo Nordisk पहले से ही भारत में इंसुलिन बाजार की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। Mixtard और Ryzodeg जैसे कई लोकप्रिय इंसुलिन ब्रांड भी इसी कंपनी के हैं। कंपनी ने भारत में इनके वितरण के लिए Abbott के साथ साझेदारी की हुई है।

कंपनी का कहना है कि Awiqli को महंगा प्रीमियम उत्पाद बनाने के बजाय बड़ी संख्या में मरीजों तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई गई है। इसी वजह से इसकी कीमत को वर्तमान इंसुलिन विकल्पों के करीब रखा गया है।

साथ ही कंपनी भविष्य में GLP-1 आधारित नई दवाओं, ओरल Wegovy, CagriSema, Zenagamtide और सप्ताह में एक बार दिए जाने वाले ग्रोथ हार्मोन जैसी नई थेरेपी पर भी काम कर रही है।

 

क्या यह डायबिटीज़ के इलाज में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह दवा डायबिटीज़ का इलाज नहीं है, बल्कि इंसुलिन थेरेपी को अधिक सुविधाजनक बनाने वाला एक नया विकल्प है। यदि मरीजों में रोज इंजेक्शन लगाने का डर कम होता है और वे समय पर इंसुलिन शुरू करते हैं, तो लंबे समय में ब्लड शुगर नियंत्रण बेहतर हो सकता है और डायबिटीज़ से जुड़ी जटिलताओं का जोखिम भी कम किया जा सकता है।

हालांकि, Awiqli का उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए। कौन-सा इंसुलिन किस मरीज के लिए उपयुक्त रहेगा, इसका निर्णय मरीज की उम्र, डायबिटीज़ के प्रकार, ब्लड शुगर नियंत्रण और अन्य चिकित्सीय स्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाता है।

 

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी योग्य चिकित्सक की सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। डायबिटीज़ या किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए दवा शुरू करने, बदलने या बंद करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से अवश्य परामर्श करें। यहां दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय की जिम्मेदारी पाठक की स्वयं होगी।

 

FAQ

  1. सप्ताह में एक बार लगने वाला इंसुलिन क्या है?
    यह एक लॉन्ग-एक्टिंग बेसल इंसुलिन है, जिसे केवल सप्ताह में एक बार लगाया जाता है। भारत में लॉन्च हुई Awiqli (Insulin Icodec) दुनिया की पहली ऐसी बेसल इंसुलिन थेरेपी है, जो सात दिनों तक लगातार ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में मदद करती है।
  2. यह इंसुलिन भारत में किस कंपनी ने लॉन्च किया है?
    इस इंसुलिन को डेनमार्क की दवा कंपनी Novo Nordisk ने भारत में लॉन्च किया है। कंपनी पहले से भी भारत में कई प्रमुख इंसुलिन ब्रांड उपलब्ध कराती है।
  3. यह पारंपरिक इंसुलिन से कैसे अलग है?
    पारंपरिक बेसल इंसुलिन आमतौर पर रोजाना लगाया जाता है, जबकि Awiqli को केवल सप्ताह में एक बार लगाना होता है। यह शरीर में धीरे-धीरे अवशोषित होकर पूरे सप्ताह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने का काम करती है।
  4. किन मरीजों के लिए यह उपयुक्त है?
    यह दवा 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन मरीजों के लिए है जिन्हें Type 1 या Type 2 डायबिटीज़ के इलाज में बेसल इंसुलिन की आवश्यकता होती है। इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
  5. क्या इससे डायबिटीज़ प्रबंधन आसान होगा?
    विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना इंजेक्शन की जगह सप्ताह में केवल एक बार इंजेक्शन लगने से इलाज का बोझ कम हो सकता है। इससे मरीजों के लिए नियमित रूप से इंसुलिन लेना आसान हो सकता है और इलाज का पालन (Treatment Adherence) बेहतर होने की संभावना बढ़ सकती है।
  6. क्या यह Type 1 और Type 2 दोनों मरीजों के लिए है?
    हाँ। Awiqli को 18 वर्ष से अधिक आयु के Type 1 और Type 2 डायबिटीज़ दोनों प्रकार के मरीजों के लिए मंजूरी दी गई है, यदि उन्हें बेसल इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता हो।
  7. इस इंसुलिन के क्या फायदे हैं?
    इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि पूरे वर्ष में 365 इंजेक्शन की जगह केवल 52 इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। क्लिनिकल अध्ययनों में यह ब्लड शुगर नियंत्रण, HbA1c में सुधार और कई मरीजों में हाइपोग्लाइसीमिया के कम जोखिम के साथ प्रभावी पाई गई है। साथ ही इसकी कीमत भी कई मौजूदा दैनिक बेसल इंसुलिन विकल्पों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी रखी गई है।