दुनिया इस समय बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के बीच अब एक बड़ी खबर सामने आई है – रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin इस साल भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। यह जानकारी रूस की तरफ से आधिकारिक तौर पर दी गई है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने पुष्टि करते हुए कहा कि पुतिन इस सम्मेलन में “निश्चित रूप से” भाग लेंगे। खास बात यह है कि यह एक साल से भी कम समय में उनकी दूसरी भारत यात्रा होगी, जो दोनों देशों के मजबूत संबंधों की ओर इशारा करती है।
भारत में होगा बड़ा वैश्विक जमावड़ा
इस साल का BRICS शिखर सम्मेलन भारत में आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अगुवाई में भारत इस संगठन की मेजबानी करेगा। यह सम्मेलन सितंबर 2026 में होने की उम्मीद है और इसमें दुनिया की कई बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता शामिल होंगे।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया कई संकटों से जूझ रही है – जैसे युद्ध, आर्थिक अस्थिरता और ऊर्जा से जुड़े मुद्दे। ऐसे में BRICS का यह सम्मेलन वैश्विक मंच पर काफी अहम माना जा रहा है।

एक साल में दूसरी बार भारत आएंगे पुतिन
Vladimir Putin इससे पहले दिसंबर 2025 में भी भारत आए थे। उस समय उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था।
इस यात्रा का एक खास पहलू यह भी था कि भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे हुए थे। यह साझेदारी साल 2000 में पुतिन की पहली भारत यात्रा के दौरान शुरू हुई थी। तब से लेकर आज तक दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत होते गए हैं।
BRICS क्या है और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
BRICS दुनिया के उन देशों का समूह है जो तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाएं माने जाते हैं। शुरुआत में इसमें सिर्फ पांच देश थे – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका।
लेकिन अब यह समूह काफी बड़ा हो चुका है। इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे देश भी शामिल हो चुके हैं। इस तरह BRICS अब 11 देशों का एक बड़ा मंच बन गया है।
इसके अलावा बेलारूस, नाइजीरिया, मलेशिया और वियतनाम जैसे देशों को पार्टनर के तौर पर जोड़ा गया है। इससे यह साफ है कि BRICS अब सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि एक बड़ा वैश्विक नेटवर्क बनता जा रहा है।
BRICS की शुरुआत कैसे हुई?
BRICS की नींव 2006 में रखी गई थी, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कुछ देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी। इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।
साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS पड़ा। तब से लेकर अब तक यह संगठन लगातार विस्तार कर रहा है और इसकी वैश्विक भूमिका भी बढ़ती जा रही है।
भारत की अध्यक्षता में क्या होगा खास?
भारत ने जनवरी 2026 से BRICS की अध्यक्षता संभाली है। इस बार भारत ने एक खास थीम तय की है – “Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” यानी मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास।
इस थीम के तहत भारत कई अहम मुद्दों पर ध्यान देना चाहता है। इनमें शामिल हैं –
- वैश्विक संस्थाओं में सुधार
- आर्थिक मजबूती बढ़ाना
- स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देना
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
- स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना
- आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाना
- जलवायु वित्त और ऊर्जा बदलाव पर काम करना
- देशों के बीच लोगों के स्तर पर जुड़ाव बढ़ाना
भारत का फोकस खास तौर पर “ग्लोबल साउथ” यानी विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर है।
क्यों अहम है पुतिन की मौजूदगी?
Vladimir Putin की इस सम्मेलन में मौजूदगी कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक तरफ रूस पश्चिमी देशों के साथ तनाव में है, वहीं दूसरी तरफ वह एशिया और अन्य उभरते देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करना चाहता है।
भारत और रूस के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं, खासकर रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में। ऐसे में पुतिन की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच भरोसे को और मजबूत कर सकती है।
वैश्विक राजनीति में BRICS की भूमिका
आज के समय में BRICS को पश्चिमी देशों के प्रभाव के विकल्प के तौर पर भी देखा जाता है। यह समूह वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाने की कोशिश करता है।
BRICS देश मिलकर कई मुद्दों पर अपनी अलग राय रखते हैं – जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार, डॉलर पर निर्भरता कम करना और विकासशील देशों के हितों की रक्षा करना।
क्या बदलेंगे वैश्विक समीकरण?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का BRICS सम्मेलन सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं होगा, बल्कि इसमें कई बड़े फैसले हो सकते हैं। खासकर ऐसे समय में जब दुनिया में कई संघर्ष चल रहे हैं, यह मंच संवाद और सहयोग का एक महत्वपूर्ण जरिया बन सकता है।
पुतिन की मौजूदगी, भारत की मेजबानी और नए सदस्य देशों की भागीदारी इस सम्मेलन को और भी खास बना देती है।
आगे क्या उम्मीद की जा सकती है?
आने वाले महीनों में इस सम्मेलन को लेकर तैयारियां और तेज होंगी। भारत की कोशिश होगी कि यह सम्मेलन सफल रहे और इससे दुनिया को एक सकारात्मक संदेश मिले।
साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि BRICS देश मिलकर किन मुद्दों पर सहमति बना पाते हैं और किस तरह वैश्विक चुनौतियों का सामना करते हैं।
निष्कर्ष:
पुतिन की भारत यात्रा और BRICS सम्मेलन का आयोजन सिर्फ एक कूटनीतिक घटना नहीं है, बल्कि यह बदलती दुनिया की दिशा को भी दिखाता है। यह बताता है कि अब वैश्विक ताकतें कैसे नए मंचों के जरिए अपनी भूमिका तय कर रही हैं।

