Sheikh Hasina Press Conference : लगभग दो साल तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहने के बाद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना एक बार फिर सामने आई हैं। उन्होंने 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए देश और दुनिया को संबोधित किया। यह वही तारीख थी, जिस दिन वर्ष 2024 में छात्र आंदोलन और हिंसक घटनाओं के बीच उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़कर बांग्लादेश से निकलना पड़ा था।
करीब 25 मिनट तक चले इस संबोधन में हसीना ने साफ कहा कि चाहे उन्हें जेल भेज दिया जाए या उनकी हत्या कर दी जाए, फिर भी वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे सभी मामलों को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है।
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस केवल एक राजनीतिक बयान नहीं थी, बल्कि इसे उनकी संभावित राजनीतिक वापसी का संकेत भी माना जा रहा है। यही वजह है कि भारत और बांग्लादेश दोनों देशों में इस कार्यक्रम पर लगातार नजर रखी गई।

दो साल बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से आईं, लेकिन कैमरा बंद रखा
शेख हसीना आखिरी बार 5 अगस्त 2024 को सार्वजनिक रूप से दिखाई दी थीं। उसी दिन प्रदर्शनकारी उनके सरकारी आवास तक पहुंच गए थे, जिसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया और सेना के विमान से भारत आ गईं।
इसके बाद से वह सार्वजनिक मंचों से लगभग पूरी तरह गायब रहीं। हालांकि इस दौरान उन्होंने कई बार ऑनलाइन संदेश जारी किए, लेकिन पहली बार उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देने के लिए वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
दिलचस्प बात यह रही कि पूरे कार्यक्रम के दौरान उनका कैमरा बंद रहा और केवल उनकी आवाज सुनाई दी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण सुरक्षा से जुड़ा है। माना जा रहा है कि यदि कैमरा चालू होता तो उनके आसपास का बैकग्राउंड, लोकेशन या सुरक्षा व्यवस्था सार्वजनिक हो सकती थी। दूसरा कारण भारत और बांग्लादेश के बीच चल रहा कूटनीतिक तनाव माना जा रहा है। बांग्लादेश पहले ही भारत से कह चुका है कि भारतीय जमीन से शेख हसीना की राजनीतिक गतिविधियां दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं। तीसरा कारण उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई और प्रत्यर्पण की मांग को माना जा रहा है।
“मैं अपनी मर्जी से देश नहीं छोड़ा”, हसीना ने बताई 5 अगस्त 2024 की कहानी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना ने पहली बार विस्तार से बताया कि उन्होंने अपनी इच्छा से बांग्लादेश नहीं छोड़ा था।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी तेजी से प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे और उनके पास वहां से निकलने के लिए केवल 30 से 40 मिनट का समय बचा था। उनका दावा था कि उस समय उन्हें यह भी नहीं पता था कि वे देश छोड़कर जा रही हैं।
हसीना के मुताबिक वह अपने पैतृक गांव तुंगीपाड़ा जाने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन हालात इतने तेजी से बदले कि उन्हें बांग्लादेश छोड़ना पड़ा।
उन्होंने कहा कि अगर उस समय वह वहीं रुक जातीं तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
“जेल या मौत से नहीं डरती”, दिसंबर में वापसी का किया ऐलान
प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनका बांग्लादेश लौटने का ऐलान रहा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि उनके विरोधी उन्हें जेल भेज सकते हैं या उनकी हत्या भी कर सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश लौटेंगी।
उन्होंने कहा कि लोगों का समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और वह दिसंबर में हर हाल में बांग्लादेश लौटने का प्रयास करेंगी। हसीना ने कहा कि उन्हें पहले भी कई बार रोकने की कोशिश की गई थी, लेकिन उनके विरोधी सफल नहीं हुए। इस बार भी उन्हें विश्वास है कि वह अपने देश वापस जाएंगी।

अपने खिलाफ चल रहे मामलों को बताया राजनीतिक साजिश
शेख हसीना ने अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को पूरी तरह राजनीतिक बताया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ जो मुकदमे चलाए जा रहे हैं, वे न तो संवैधानिक हैं और न ही कानूनी रूप से उचित हैं। उनका आरोप था कि यह सब केवल उन्हें राजनीति से बाहर रखने के लिए किया जा रहा है।
गौरतलब है कि बांग्लादेश के विशेष ट्रिब्यूनल ने जुलाई 2024 के आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामले में उन्हें गैरहाजिरी में मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद से बांग्लादेश सरकार लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है।
इसी मुद्दे पर बोलते हुए हसीना ने कहा कि उनके खिलाफ चल रही पूरी प्रक्रिया राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है।
जुलाई 2024 का आंदोलन पहले से तय साजिश था: हसीना
अपने भाषण में हसीना ने जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ था, बल्कि पहले से योजनाबद्ध था। उनके मुताबिक इस पूरे आंदोलन के पीछे कुछ ऐसे लोग थे जो पर्दे के पीछे रहकर घटनाओं को नियंत्रित कर रहे थे।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस स्वयं यह स्वीकार कर चुके हैं कि यह आंदोलन काफी सोच-समझकर तैयार किया गया था। हसीना का कहना था कि इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि दूसरे रास्तों से सत्ता हासिल करना था।
पुलिस थानों में आग और सुरक्षाबलों पर हमले का लगाया आरोप
जुलाई 2024 की हिंसा को लेकर भी उन्होंने कई गंभीर दावे किए। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान 450 से अधिक पुलिस थानों को आग के हवाले कर दिया गया था। कई सरकारी इमारतों पर हमला किया गया और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की हत्या हुई।
उन्होंने दावा किया कि कुछ पुलिसकर्मियों को जिंदा जलाया गया। हसीना ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी थी और उन्होंने वही किया। लेकिन बाद में उसी कार्रवाई को उनके खिलाफ इस्तेमाल किया गया।
अवामी लीग के नेताओं पर अत्याचार का आरोप
हसीना ने दावा किया कि उनकी पार्टी अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है, कई लोग लापता हैं और बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
उनके अनुसार करीब 10 हजार लोग मारे गए या लापता हैं, जबकि 10 लाख से अधिक लोगों के खिलाफ अज्ञात आरोपी बनाकर मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने की कोशिश कर रही है।

भारत को बताया सच्चा मित्र देश
अपने संबोधन में शेख हसीना ने भारत का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा बांग्लादेश का अच्छा मित्र रहा है। चाहे 1971 का मुक्ति संग्राम हो, 1975 के बाद का दौर हो या आज की परिस्थितियां, भारत ने हर कठिन समय में बांग्लादेश का साथ दिया है।
उन्होंने कहा कि सरकारों के बीच संबंध अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन दोनों देशों की मित्रता ऐतिहासिक है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी अंतिम इच्छा अपने देश और अपने लोगों के बीच लौटने की है।
प्रत्यर्पण संधि का मुद्दा फिर उठा, भारत से जवाब मिलने का इंतजार
शेख हसीना के संबोधन के बाद बांग्लादेश ने एक बार फिर भारत के सामने प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया।
विदेश मंत्रालय ने याद दिलाया कि वर्ष 2013 में भारत और बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि हुई थी। इसी समझौते के तहत ढाका ने भारत से शेख हसीना को वापस भेजने का औपचारिक अनुरोध किया था, लेकिन अब तक नई दिल्ली की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है।
सरकार का कहना है कि वह भारत के साथ संप्रभु समानता, आपसी सम्मान और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत पर आधारित संबंध चाहती है। हालांकि, उसके अनुसार भारत की धरती से शेख हसीना की राजनीतिक गतिविधियां इन संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं।
यही वजह है कि बांग्लादेश सरकार लगातार यह कह रही है कि हसीना को किसी भी प्रकार का राजनीतिक मंच उपलब्ध नहीं कराया जाना चाहिए।
शाकिब अल हसन के घर पर हमले से बढ़ा तनाव
शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बांग्लादेश क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और पूर्व सांसद शाकिब अल हसन भी वर्चुअली शामिल हुए थे। इसके कुछ समय बाद उनके पैतृक घर पर हमला होने की खबर सामने आई।

यह घटना मगुरा जिले के सहपारा इलाके में हुई, जहां कुछ अज्ञात लोगों ने उनके घर के मुख्य गेट पर आग लगाने वाली सामग्री फेंकी। स्थानीय लोगों के अनुसार हमलावरों ने ईंट-पत्थर भी फेंके, जिससे घर की कई खिड़कियों के शीशे टूट गए।

घटनास्थल से कोल्ड ड्रिंक की दो खाली बोतलें बरामद हुईं, जिनकी जांच की जा रही है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि हमलावरों ने पेट्रोल बम का इस्तेमाल किया था।
घटना के समय शाकिब अल हसन बांग्लादेश में नहीं थे। वह श्रीलंका में मौजूद थे। हालांकि इस हमले ने बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया।
सरकार को हिंसा की आशंका थी, लेकिन देश अपेक्षाकृत शांत रहा
शेख हसीना के संबोधन से पहले बांग्लादेश में व्यापक हिंसा की आशंका जताई जा रही थी। इसकी सबसे बड़ी वजह फरवरी 2025 की घटना थी, जब हसीना के पहले वर्चुअल संबोधन के बाद ढाका के धानमंडी-32 स्थित बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान के ऐतिहासिक आवास और अवामी लीग के कई नेताओं के घरों पर हमले हुए थे।
इसी अनुभव को देखते हुए इस बार सुरक्षा एजेंसियां सतर्क थीं और कई स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त होने के बाद बांग्लादेश में किसी बड़े पैमाने पर हिंसा या राजनीतिक टकराव की खबर सामने नहीं आई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार सभी पक्षों ने अपेक्षाकृत संयम बरता।
विशेषज्ञों ने शांत माहौल की अलग-अलग वजह बताई
बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हसन तारिक चौधरी का मानना है कि पिछले दो वर्षों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बदलाव आया है। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करने की बात कर रहा है। इसका असर मौजूदा माहौल पर भी दिखाई दिया।
वहीं वरिष्ठ पत्रकार मंजुरुल आलम पन्ना का कहना है कि इस बार हसीना का भाषण पहले जैसा राजनीतिक प्रभाव पैदा नहीं कर सका। उनके अनुसार सरकार की ओर से अलग-अलग बयान आने से भ्रम की स्थिति बनी, जिसके कारण भाषण को अपेक्षा से अधिक प्रचार जरूर मिला, लेकिन व्यापक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं हुई।
राजनीतिक दलों ने भी फौरन कोई प्रतिक्रिया नहीं दी
शेख हसीना के संबोधन के बाद बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने भी काफी हद तक संयमित रुख अपनाया।
बीएनपी के कई वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि अवामी लीग से जुड़े मामलों पर फैसला सरकार और अदालतों को करना चाहिए।
जमात-ए-इस्लामी ने भी तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी और कहा कि पूरा भाषण देखने के बाद पार्टी अपना रुख स्पष्ट करेगी।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ बांग्लादेश ने भी यही कहा कि हसीना और अवामी लीग का राजनीतिक रूप से सक्रिय रहना स्वाभाविक है, लेकिन पूरे भाषण का अध्ययन करने के बाद ही कोई टिप्पणी की जाएगी।
सोशल मीडिया पर तीन अलग-अलग नैरेटिव दिखाई दिए
शेख हसीना के संबोधन के साथ ही सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई। फेसबुक, एक्स और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर #SheikhHasina, #AwamiLeague, #August5, #JulyUprising और #IndiaBangladesh जैसे हैशटैग ट्रेंड करते रहे।
रिपोर्टों के अनुसार सोशल मीडिया पर तीन प्रमुख विचार सामने आए।
पहला नैरेटिव बांग्लादेश सरकार का था, जिसमें हसीना को फरार अपराधी बताते हुए उन्हें किसी भी प्रकार का राजनीतिक मंच न देने की बात कही गई।
दूसरा नैरेटिव छात्र आंदोलन और उससे जुड़े राजनीतिक समूहों का था। उनका कहना था कि यदि हसीना बांग्लादेश लौटती हैं तो उन्हें अदालत का सामना करना चाहिए।
तीसरा नैरेटिव अवामी लीग समर्थकों का था। उनका मानना है कि शेख हसीना ही देश में राजनीतिक स्थिरता ला सकती हैं और उनके बिना निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी बढ़ी चर्चा
शेख हसीना के इस कार्यक्रम के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों को लेकर भी बहस तेज हो गई।
बांग्लादेश के कई प्रमुख अखबारों ने लिखा कि भारत को अपने पड़ोसी देश के साथ संबंधों को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। कुछ संपादकीयों में यह भी कहा गया कि भारतीय जमीन से इस तरह की राजनीतिक गतिविधियां दोनों देशों के हालिया संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं।
दूसरी ओर, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्यक्रम निजी स्तर पर आयोजित किया गया था और इसे भारत सरकार की आधिकारिक नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दो साल बाद वापसी की कोशिश, लेकिन राह अब भी आसान नहीं
शेख हसीना ने अपने संबोधन के जरिए यह स्पष्ट कर दिया है कि वह सक्रिय राजनीति से दूर रहने वाली नहीं हैं। उन्होंने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का सार्वजनिक ऐलान करके अपने समर्थकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि उनकी राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
हालांकि उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। बांग्लादेश में उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, अदालत उन्हें सजा सुना चुकी है और सरकार लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। दूसरी ओर, अवामी लीग के समर्थक अभी भी उन्हें देश की राजनीति का महत्वपूर्ण चेहरा मानते हैं।
ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या शेख हसीना वास्तव में बांग्लादेश लौट पाती हैं या उनकी वापसी केवल राजनीतिक संदेश बनकर रह जाती है। इतना जरूर है कि दो साल की चुप्पी तोड़कर उन्होंने एक बार फिर बांग्लादेश की राजनीति को नई बहस के केंद्र में ला दिया है।

FAQ
1. शेख हसीना ने दो साल बाद क्या ऐलान किया है?
शेख हसीना ने दो साल बाद पहली बार वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि वह दिसंबर 2026 में हर हाल में बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने कहा कि जेल या मौत का डर उन्हें अपने देश वापस जाने से नहीं रोक सकता।
2. शेख हसीना ने बांग्लादेश छोड़ने को लेकर क्या कहा?
हसीना का दावा है कि उन्होंने अपनी इच्छा से बांग्लादेश नहीं छोड़ा था। उनके अनुसार 5 अगस्त 2024 को प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे और उनके पास वहां से निकलने के लिए केवल 30 से 40 मिनट का समय था।
3. बांग्लादेश सरकार ने शेख हसीना के भाषण पर क्या प्रतिक्रिया दी?
बांग्लादेश सरकार ने भारत में हुए उनके संबोधन पर नाराजगी जताई। विदेश मंत्रालय ने कहा कि एक दोषी घोषित व्यक्ति को भारतीय धरती से राजनीतिक बयान देने की अनुमति देना दोनों देशों के संबंधों के लिए उचित नहीं है और इससे बांग्लादेश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।
4. शेख हसीना का कैमरा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बंद क्यों था?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरक्षा कारणों, भारत-बांग्लादेश के कूटनीतिक तनाव और उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों को देखते हुए उन्होंने केवल ऑडियो के जरिए प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कैमरा बंद रखा।
5. शाकिब अल हसन के घर पर हमला क्यों चर्चा में है?
बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेटर और पूर्व सांसद शाकिब अल हसन शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वर्चुअली शामिल हुए थे। इसके बाद उनके पैतृक घर पर आग लगाने और पत्थरबाजी की घटना सामने आई, जिससे राजनीतिक माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
6. शेख हसीना की वापसी का भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शेख हसीना की राजनीतिक गतिविधियां भारत से जारी रहती हैं या उनकी वापसी को लेकर विवाद बढ़ता है, तो इसका असर भारत-बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है। हालांकि दोनों देशों की सरकारें आधिकारिक स्तर पर संबंध सामान्य बनाए रखने की बात कह रही हैं।

