पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। TMC internal conflict अब खुलकर सामने आ गया है और हालात ऐसे बन गए हैं कि ममता बनर्जी के नेतृत्व को पिछले कई वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती मिलती दिखाई दे रही है। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मुलाकात कर दावा किया है कि उन्हें 58 TMC विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
अगर यह दावा सही साबित होता है तो 80 विधायकों वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर दो-तिहाई से अधिक विधायक बागी खेमे के साथ हैं, जिससे पश्चिम बंगाल में एक नई राजनीतिक लड़ाई शुरू हो सकती है।

क्या है पूरा मामला? TMC vs TMC Crisis कैसे शुरू हुआ?
विवाद की शुरुआत नेता विपक्ष के चयन को लेकर हुई। TMC नेतृत्व ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता विपक्ष नियुक्त करने का प्रस्ताव स्पीकर को भेजा था।
लेकिन विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से लगाए गए हैं। दोनों विधायकों ने विधानसभा सचिवालय में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के बाद मामला और गंभीर हो गया। जांच शुरू हुई और बाद में दोनों विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद बागी खेमे ने खुलकर नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
TMC Internal Conflict: 58 विधायकों का दावा कितना बड़ा है?
बुधवार (6 जून) को लगभग 60 विधायक विधानसभा पहुंचे। यह संख्या TMC के कुल 80 विधायकों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है।
91वें संविधान संशोधन और दलबदल कानून के तहत यदि किसी दल के दो-तिहाई विधायक अलग होने का फैसला लेते हैं तो उन्हें तत्काल अयोग्यता का सामना नहीं करना पड़ता।
बागी गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता घोषित किया है। साथ ही जावेद खान, संदीपन साहा और सिउली साहा को उपनेता तथा अखरुज्जमान को चीफ व्हिप बनाया गया है।
यही कारण है कि यह Trinamool Congress faction fight अब केवल नाराजगी नहीं बल्कि एक संगठित शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखी जा रही है।
TMC से अलग गुट बनाने वाले दो बड़े फेस


ममता बनर्जी ने बागियों को बताया ‘मीर जाफर’
बढ़ते संकट के बीच ममता बनर्जी ने कोलकाता में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और विधायकों को नई तृणमूल कांग्रेस बनाने के लिए उकसाया जा रहा है।
ममता ने बागियों की तुलना “मीर जाफर” से करते हुए कहा कि पार्टी को कमजोर करने की साजिश चल रही है। हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया कि संकट के बावजूद TMC और मजबूत होकर उभरेगी।
Mamata Banerjee Leadership Challenge क्यों बढ़ गया है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ विधायकों की बगावत नहीं है बल्कि पार्टी नेतृत्व को लेकर असंतोष का संकेत भी है।
बागी विधायक ममता बनर्जी को अभी भी पार्टी अध्यक्ष मान रहे हैं, लेकिन वे अभिषेक बनर्जी की भूमिका और विधायक दल से जुड़े फैसलों का विरोध कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बागी विधायक एकजुट बने रहते हैं तो TMC के भीतर शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।
महाराष्ट्र मॉडल की चर्चा क्यों हो रही है?
पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति की तुलना महाराष्ट्र में हुई शिवसेना और एनसीपी की टूट से की जा रही है।
शिवसेना उदाहरण
2022 में एकनाथ शिंदे 40 से अधिक विधायकों के साथ अलग हो गए थे। बाद में चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को असली शिवसेना और पार्टी का चुनाव चिन्ह सौंप दिया।
एनसीपी उदाहरण
2023 में अजित पवार समर्थक विधायकों के साथ अलग हुए। फरवरी 2024 में चुनाव आयोग ने अजित पवार गुट को आधिकारिक NCP के रूप में मान्यता दे दी।

इसी वजह से पश्चिम बंगाल में भी “महाराष्ट्र मॉडल” की चर्चा तेज हो गई है।
क्या बागी विधायक अभी TMC पर कब्जा कर सकते हैं?
फिलहाल स्थिति इतनी आसान नहीं है। किसी भी राजनीतिक दल पर आधिकारिक दावा करने के लिए केवल विधायकों का समर्थन पर्याप्त नहीं होता। चुनाव आयोग कई पहलुओं पर विचार करता है:
- पार्टी संगठन किसके साथ है?
- राष्ट्रीय और राज्य कार्यकारिणी का समर्थन किसे है?
- पार्टी संविधान क्या कहता है?
- निर्वाचित प्रतिनिधियों का बहुमत किसके साथ है?
इसी संदर्भ में ममता बनर्जी ने राज्य की सभी पार्टी समितियों और फ्रंटल संगठनों को भंग कर पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पश्चिम बंगाल में आगे क्या हो सकता है?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार आने वाले दिनों में तीन संभावनाएं उभर सकती हैं:
- बागी विधायक और TMC नेतृत्व के बीच समझौता।
- बागी गुट का औपचारिक विभाजन और अलग पहचान की मांग।
- मामला चुनाव आयोग और अदालत तक पहुंचना।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 58 विधायकों का दावा वास्तव में मजबूत है या यह केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है।
निष्कर्ष
पश्चिम Bengal की राजनीति में चल रहा TMC internal conflict अब एक बड़े सत्ता संघर्ष का रूप ले चुका है। इस विवाद ने ममता बनर्जी की राजनीतिक पकड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बागी विधायक अपनी ताकत बरकरार रख पाते हैं या ममता बनर्जी संगठन पर दोबारा मजबूत नियंत्रण स्थापित कर लेती हैं। फिलहाल इतना तय है कि TMC vs TMC पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा घटनाक्रम बन चुका है।
FAQs
Q1. TMC vs TMC internal conflict में बागी विधायकों ने कितने MLAs का समर्थन होने का दावा किया है?
बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उन्हें 58 TMC विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
Q2. Mamata Banerjee faces major setback as TMC faction fight intensifies का क्या मतलब है?
इसका अर्थ है कि TMC के भीतर बड़े पैमाने पर असंतोष सामने आया है, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती मिल रही है।
Q3. Are 50 MLAs really supporting rebels in TMC?
बागी गुट का दावा है कि 58 विधायक उनके साथ हैं। हालांकि इसकी अंतिम पुष्टि विधानसभा और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद ही होगी।
Q4. Is TMC breaking apart?
फिलहाल पार्टी आधिकारिक रूप से नहीं टूटी है, लेकिन हालात महाराष्ट्र की शिवसेना और एनसीपी जैसी स्थिति की ओर बढ़ते दिख रहे हैं।
Q5. Will TMC split in West Bengal?
यह अभी स्पष्ट नहीं है। यदि बागी गुट दो-तिहाई समर्थन बनाए रखता है तो मामला चुनाव आयोग और अदालत तक पहुंच सकता है।

