Trump Hyderabad Road Renamed : भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक नया प्रतीक जुड़ गया है। हैदराबाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर एक सड़क का नाम ‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू’ रखा गया है। इसके बाद खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर भारत का धन्यवाद करते हुए लिखा, “हैदराबाद, भारत में नया Donald Trump Avenue… किसी अमेरिकी राष्ट्रपति को पहली बार इस तरह सम्मान मिला है। धन्यवाद।” ट्रंप ने सड़क के उद्घाटन समारोह की तस्वीर भी साझा की। यह पहली बार है जब भारत में किसी मौजूदा या पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर किसी सड़क का आधिकारिक नाम रखा गया है। इस फैसले को केवल एक स्थानीय प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों और हैदराबाद की वैश्विक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि फरवरी 2026 में राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी की भारत यात्रा के बाद अब उनकी यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देने का अवसर होगी। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समृद्धि और विकास के लिए मिलकर काम करेंगे।
आखिर ‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू’ कहां है और इसका उद्घाटन किसने किया?
25 जून 2025 को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और हैदराबाद स्थित अमेरिकी महावाणिज्य दूत लॉरा विलियम्स ने नानकरामगुडा (Nanakramguda) इलाके में इस सड़क के नए नाम की आधिकारिक नेमप्लेट का अनावरण किया।

यह इलाका हैदराबाद के फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट में स्थित है, जहां अमेरिकी वाणिज्य दूतावास, कई बड़ी अमेरिकी आईटी कंपनियां, टेक्नोलॉजी पार्क, एयरोस्पेस और डिफेंस कंपनियों के दफ्तर मौजूद हैं। इसलिए इस सड़क का नाम केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि उस क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय पहचान से भी जुड़ा माना जा रहा है।
सड़क का नाम ट्रंप के नाम पर रखने का फैसला क्यों लिया गया?
आधिकारिक तौर पर यह कदम अमेरिका की स्वतंत्रता के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मनाए जा रहे ‘Freedom 250’ समारोह का हिस्सा बताया गया है। तेलंगाना सरकार के अनुसार यह अमेरिका के प्रति सम्मान व्यक्त करने और भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक है। समारोह में राजनयिकों के अलावा व्यापार, एयरोस्पेस, रक्षा और टेक्नोलॉजी क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
हालांकि राजनीतिक और रणनीतिक विश्लेषक इसे केवल समारोह तक सीमित नहीं मानते। उनके अनुसार यह फैसला हैदराबाद को एक वैश्विक निवेश केंद्र और अंतरराष्ट्रीय शहर के रूप में स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी है।
हैदराबाद की ‘ग्लोबल सिटी’ बनाने की योजना क्या है?
दरअसल नवंबर 2025 में यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) को संबोधित करते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा था कि भारत में अधिकांश सड़कें राजनीतिक नेताओं के नाम पर हैं, लेकिन हैदराबाद में प्रमुख सड़कों का नाम दुनिया की बड़ी कंपनियों और वैश्विक हस्तियों के नाम पर रखा जाएगा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा था कि शहर में Google Street, Meta Street, TCS Street और Infosys Street जैसे नाम होने चाहिए। बाद में दिसंबर 2025 में आयोजित Telangana Rising Global Summit के दौरान ‘Donald Trump Avenue’ की योजना सार्वजनिक की गई।
इसी नीति के तहत गूगल के नए कैंपस के पास वाली सड़क का नाम Google Street रखने की भी योजना है। यह कैंपस अमेरिका के बाहर गूगल का सबसे बड़ा कार्यालय बनने जा रहा है। इसी तरह Microsoft Road नाम रखने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि तेलंगाना सरकार हैदराबाद को दुनिया के प्रमुख टेक्नोलॉजी और निवेश केंद्रों की श्रेणी में स्थापित करना चाहती है।
क्या इसके पीछे अमेरिका से तेलंगाना के खास रिश्ते भी हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि तेलंगाना और अमेरिका के बीच पहले से ही बेहद मजबूत सामाजिक और आर्थिक संबंध हैं। 2023 में अमेरिका द्वारा जारी किए गए सभी भारतीय छात्र वीजा में से लगभग 56 प्रतिशत केवल आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के छात्रों को मिले थे। वहीं 2024 तक अमेरिका में रहने वाले तेलुगु भाषी लोगों की संख्या लगभग 12.3 लाख पहुंच चुकी थी।
अमेरिका की लगभग 350 विदेशी भाषाओं में तेलुगु अब सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल हो चुकी है और इसे 11वीं सबसे अधिक बोली जाने वाली विदेशी भाषा माना जाता है। यही कारण है कि तेलंगाना सरकार अमेरिका के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
इसी जुड़ाव का एक सांस्कृतिक उदाहरण है हैदराबाद के पास स्थित चिलकुर बालाजी मंदिर, जिसे लोग ‘वीजा बालाजी मंदिर’ भी कहते हैं। बड़ी संख्या में छात्र और नौकरी के इच्छुक लोग अमेरिकी वीजा मिलने की कामना लेकर यहां दर्शन करने आते हैं।
Trump Hyderabad Road Renamed : अमेरिकी राजदूत ने क्या कहा?
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने उद्घाटन समारोह में कहा कि आज अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी की सबसे तेज तस्वीर अगर कहीं दिखाई देती है तो वह हैदराबाद है। उनके अनुसार हाईटेक सिटी, एयरोस्पेस, रक्षा उद्योग और तकनीकी क्षेत्र में हो रहा सहयोग दोनों देशों के रिश्तों की नई दिशा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि हैदराबाद केवल एक भारतीय शहर नहीं, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
ट्रंप ने भारत को कहा ‘धन्यवाद’?
उद्घाटन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने लिखा कि भारत में उनके नाम पर सड़क बनाया जाना उनके लिए सम्मान की बात है और भारत का धन्यवाद किया।

ट्रंप ने यह भी लिखा कि किसी अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत में पहली बार इस तरह सम्मान मिला है। उनके इस पोस्ट के बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ गया।
भारत में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर पहली सड़क
डोनाल्ड ट्रंप अब भारत में सड़क के नाम से सम्मानित होने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए हैं। हालांकि भारत में किसी अमेरिकी नागरिक के नाम पर सड़क पहले भी मौजूद है।
कोलकाता में मार्टिन लूथर किंग सरणी का नाम 1986 में अमेरिका के महान नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर के सम्मान में रखा गया था। लेकिन किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर सड़क रखने का यह पहला अवसर है।
भारत में विदेशी नेताओं के नाम पर पहले से कौन-कौन सी सड़कें हैं?
भारत में विदेशी नेताओं और वैश्विक हस्तियों के सम्मान में पहले भी कई सड़कों का नाम रखा जा चुका है। नई दिल्ली में नेल्सन मंडेला मार्ग, मुस्तफा कमाल अतातुर्क मार्ग, साइमन बोलीवार मार्ग, हैले सेलासी मार्ग और कोपरनिकस मार्ग जैसे कई प्रमुख मार्ग मौजूद हैं।
इनका नामकरण संबंधित देशों के साथ भारत की मित्रता और उन नेताओं के वैश्विक योगदान के सम्मान में किया गया था। हालांकि आजादी के बाद भारत में किसी विदेशी नेता के नाम पर किसी शहर या जिले का नाम नहीं रखा गया। ऐसे सम्मान केवल सड़कों, मार्गों और सार्वजनिक स्थलों तक ही सीमित रहे हैं।
क्या इस फैसले का कूटनीतिक महत्व भी है?
विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला केवल सड़क का नाम बदलने तक सीमित नहीं है। ऐसे समय में जब भारत और अमेरिका रक्षा, तकनीक, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, निवेश और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं, ट्रंप के नाम पर सड़क का नामकरण एक सकारात्मक कूटनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।
हालांकि कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि ऐसे समय में जब ट्रंप प्रशासन की कुछ नीतियों को भारत के हितों के खिलाफ माना जाता रहा है, तब यह सम्मान क्यों दिया गया। दूसरी ओर समर्थकों का कहना है कि यह फैसला किसी एक नीति का समर्थन नहीं, बल्कि दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक और आर्थिक संबंधों का प्रतीक है।
कुल मिलाकर, ‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू’ केवल एक सड़क का नया नाम नहीं है, बल्कि हैदराबाद की वैश्विक महत्वाकांक्षा, भारत-अमेरिका साझेदारी और शहर को अंतरराष्ट्रीय निवेश व टेक्नोलॉजी हब के रूप में स्थापित करने की रणनीति का भी प्रतीक बन गया है।
FAQs
हैदराबाद में किस सड़क का नाम ट्रंप के नाम पर रखा गया?
हैदराबाद के नानकरामगुडा स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास की सड़क का नाम आधिकारिक रूप से ‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू’ रखा गया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत का धन्यवाद क्यों किया?
सड़क का नाम उनके नाम पर रखे जाने के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर भारत का धन्यवाद करते हुए इसे सम्मान बताया।
सड़क का नाम बदलने का फैसला किसने लिया?
यह फैसला तेलंगाना सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसके तहत हैदराबाद की प्रमुख सड़कों का नाम वैश्विक हस्तियों और बड़ी कंपनियों के नाम पर रखा जा रहा है।
क्या भारत में पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर सड़क बनी है?
हां। डोनाल्ड ट्रंप भारत में सड़क के नाम से सम्मानित होने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों के लिए इसका क्या महत्व है?
इसे भारत-अमेरिका के बढ़ते रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग का प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है। साथ ही यह हैदराबाद की वैश्विक निवेश और टेक्नोलॉजी हब बनने की महत्वाकांक्षा को भी दर्शाता है।

