UP Expressway Sinks को लेकर उत्तर प्रदेश में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से बना कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे उद्घाटन के महज तीन सप्ताह बाद ही कई जगह धंसने (Sinking) और सड़क की सतह खिसकने (Surface Slippage) की घटनाओं का शिकार हो गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि NHAI को कई हिस्सों की सड़क दोबारा खोदकर निर्माण कराना पड़ा। साथ ही टोल वसूली भी अस्थायी रूप से रोक दी गई है।
UP Expressway Sinks क्या है?
UP Expressway Sinks से जुड़ा मामला कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क धंसने और सतह खिसकने का है। NHAI ने मरम्मत के लिए टोल वसूली रोक दी है, IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम से जांच कराने का फैसला लिया है और निर्माण कंपनी सहित कई अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

कब शुरू हुआ था यह एक्सप्रेसवे?
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को किया गया था। इस परियोजना की प्रमुख बातें–
- कुल लागत: लगभग ₹4,200 करोड़
- उद्देश्य: लखनऊ और कानपुर के बीच तेज और सुगम यात्रा
- डिजाइन स्पीड: 120 किमी प्रति घंटा
- निर्माण मॉडल: Hybrid Annuity Model (HAM)
लेकिन उद्घाटन के सिर्फ 13 दिन बाद ही पहली बार सड़क धंसने की शिकायत सामने आ गई।
UP Expressway Sinks:आखिर सड़क क्यों धंस गई?
NHAI की प्रारंभिक जांच के अनुसार–
- बारिश का पानी सड़क के नीचे तक पहुंच गया।
- नीचे की मिट्टी गीली होकर कमजोर हो गई।
- मिट्टी बैठने (Settlement) के कारण सड़क की ऊपरी सतह भी धंस गई।
हालांकि अंतिम कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। प्रभावित हिस्सों से निकाले गए निर्माण सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
कई जगह दोबारा क्यों खोदी जा रही है सड़क?
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र किलोमीटर 64 के आसपास पाया गया। यहां–
- पहले लगभग 120 मीटर सड़क की मरम्मत की गई।
- बाद में आशंका बढ़ने पर करीब 300 मीटर हिस्से को पूरी तरह खोदकर दोबारा बनाया जा रहा है।
- कई अन्य स्थानों पर भी सड़क की सतह खिसकने और धंसने की शिकायतें मिली हैं।
मरम्मत के लिए JCB, रोलर और अन्य भारी मशीनों की मदद से सड़क का पुनर्निर्माण किया जा रहा है।
यात्रियों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?
मरम्मत कार्य के कारण यात्रियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य समस्याएं–
- एक ही कैरिजवे पर दोनों दिशाओं का ट्रैफिक
- कई स्थानों पर बैरिकेडिंग
- लंबा डायवर्जन
- उन्नाव प्रवेश बिंदु पर U-Turn लेकर विपरीत दिशा में चलना
- कई वाहन चालकों के FASTag से टोल कटने के बाद ही डायवर्जन की जानकारी मिलना
कई यात्रियों ने शिकायत की कि 100 किमी प्रति घंटे की गति पर वाहन उछलने लगते हैं क्योंकि कई हिस्सों में सड़क बैठ चुकी है।
NHAI ने क्या कार्रवाई की?
घटना के बाद NHAI ने कई बड़े कदम उठाए हैं। इनमें शामिल हैं–
- पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली अस्थायी रूप से बंद
- निर्माण कंपनी PNC Infratech को नोटिस
- कंपनी को “Non-Performer” घोषित करने की प्रक्रिया
- सभी मरम्मत कार्य कंपनी के खर्च पर कराने का आदेश
- लगभग ₹3 करोड़ की मरम्मत लागत कंपनी से वसूलने की तैयारी
किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई?
NHAI ने कई अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है। कार्रवाई में–
- प्रोजेक्ट मैनेजर को हटाया गया
- स्वतंत्र इंजीनियर टीम के अधिकारियों को परियोजना से हटाया गया
- वर्तमान और पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर के खिलाफ चार्जशीट जारी
- स्वतंत्र इंजीनियर कंपनी पर भी डिबारमेंट की कार्रवाई शुरू
IIT खड़गपुर करेगी जांच
NHAI ने पूरे मामले की तकनीकी जांच के लिए IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम नियुक्त की है। टीम–
- सड़क धंसने की वास्तविक वजह तलाशेगी।
- स्थायी समाधान सुझाएगी।
- पूरी सड़क का Laser Profilometer तकनीक से निरीक्षण किया जाएगा।
- मरम्मत पूरी होने के बाद Safety Audit भी कराया जाएगा।
क्या टोल अभी लिया जाएगा?
NHAI ने स्पष्ट किया है कि
- मरम्मत पूरी होने तक पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली बंद रहेगी।
- टोल से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई निर्माण कंपनी PNC Infratech से की जाएगी।
निष्कर्ष
UP Expressway Sinks का मामला देश की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उद्घाटन के कुछ ही सप्ताह बाद सड़क धंसना, दोबारा खुदाई, टोल बंद करना और अधिकारियों पर कार्रवाई यह दिखाता है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। अब सभी की नजर IIT खड़गपुर की जांच रिपोर्ट और स्थायी समाधान पर रहेगी।
FAQs:
NHAI की प्रारंभिक जांच के अनुसार बारिश का पानी सड़क के नीचे पहुंचने से मिट्टी कमजोर हुई, जिसके कारण सड़क की सतह बैठ गई। अंतिम कारण विशेषज्ञ जांच के बाद स्पष्ट होगा।
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को किया गया था।
कई स्थानों पर बार-बार धंसाव और सतह खिसकने की समस्या सामने आने के बाद प्रभावित हिस्सों को पूरी तरह खोदकर दोबारा बनाया जा रहा है।
हां। उद्घाटन के कुछ ही सप्ताह बाद सड़क खराब होने के कारण निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। इसी वजह से निर्माण कंपनी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई भी शुरू की गई है।
NHAI ने टोल वसूली रोक दी है, मरम्मत कार्य शुरू कराया है, निर्माण कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की है और IIT खड़गपुर से तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया है।
हां। IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम को सड़क धंसने के कारणों की जांच और स्थायी समाधान सुझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

