मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। विश्व बैंक (World Bank) ने गुरुवार को जारी अपनी ताजा रिपोर्ट में वर्ष 2026 के लिए वैश्विक आर्थिक विकास दर (Global Growth Projection) का अनुमान घटाकर 2.5% कर दिया है। संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि ऊर्जा आपूर्ति संकट और गहरा हुआ तथा वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी, तो वैश्विक विकास दर गिरकर केवल 1.3% तक पहुंच सकती है।
विश्व बैंक की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका और इजराइल द्वारा फरवरी 2026 में ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष चौथे महीने में प्रवेश कर चुका है। इस युद्ध के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे दुनिया भर में महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ गई है।
दुनिया की दो-तिहाई अर्थव्यवस्थाओं का अनुमान घटाया
अपनी नई World Bank Economic Outlook रिपोर्ट में विश्व बैंक ने बताया कि युद्ध के प्रभाव को देखते हुए उसने दुनिया के लगभग दो-तिहाई देशों के आर्थिक विकास अनुमान में कटौती की है। सबसे अधिक असर मध्य पूर्व के देशों पर पड़ा है, जहां ऊर्जा निर्यात युद्ध की वजह से प्रभावित हुआ है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इराक और क्षेत्र के अन्य ऊर्जा निर्यातक देशों की विकास दर के अनुमान में सबसे बड़ी कटौती की गई है। विश्व बैंक के अनुसार, मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान क्षेत्र की विकास दर 2026 में घटकर 1.6% रह सकती है, जबकि 2025 में यह 4% थी।
तेल संकट बना सबसे बड़ी चिंता
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद किए जाने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। दुनिया के लगभग 20% तेल और प्राकृतिक गैस का व्यापार इसी मार्ग से होता है।
विश्व बैंक का अनुमान है कि इस वर्ष ब्रेंट क्रूड ऑयल की औसत कीमत 94 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36% अधिक है। जनवरी के अनुमान के मुकाबले यह वृद्धि लगभग 50% ज्यादा है।
ऊर्जा कीमतों में इस उछाल ने दुनियाभर में महंगाई का दबाव बढ़ा दिया है। साथ ही उर्वरकों की कीमतों में भी तेज वृद्धि हुई है, जिससे भविष्य में खाद्य संकट की आशंका बढ़ गई है।

हालात बिगड़े तो विकास दर 1.3% तक गिर सकती है
विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कई जोखिम वाले परिदृश्य भी पेश किए हैं। यदि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा लंबे समय तक बनी रहती है और तेल की औसत कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तो वैश्विक विकास दर घटकर 2.1% रह सकती है।
वहीं यदि ऊर्जा संकट के साथ वित्तीय बाजारों में भी गंभीर तनाव पैदा होता है, निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता है और बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव आता है, तो वैश्विक विकास दर सिर्फ 1.3% तक गिर सकती है।
विश्व बैंक के उप मुख्य अर्थशास्त्री अयहान कोसे ने कहा कि ऊर्जा और वित्तीय दबाव एक साथ बढ़े तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर बेहद गंभीर हो सकता है।
भारत बना रहेगा दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत के लिए विश्व बैंक का दृष्टिकोण अपेक्षाकृत सकारात्मक बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार India GDP Growth वर्ष 2026 में 6.6% रहने का अनुमान है, जबकि 2025 में यह 7% थी।
विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंदरमीत गिल ने कहा कि भारत आने वाले दो दशकों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रह सकता है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितता और ऊर्जा कीमतों का असर भारत की विकास दर पर भी देखने को मिलेगा।
चीन, यूरोप और जापान की रफ्तार भी धीमी
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की विकास दर 2026 में 4.2% रहने का अनुमान है, जो 2025 के 5% से कम है।
यूरो क्षेत्र (Eurozone) की विकास दर 0.8% रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि 2025 में यह 1.4% थी। जापान की अर्थव्यवस्था भी धीमी पड़ती दिखाई दे रही है और उसकी विकास दर 0.7% रहने का अनुमान है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका की विकास दर के अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विश्व बैंक का अनुमान है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था 2026 में 2.2% की दर से बढ़ेगी। इसका एक बड़ा कारण अमेरिका का स्वयं बड़ा ऊर्जा उत्पादक होना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्षेत्र में बढ़ता निवेश माना जा रहा है।
विकास दर पर लंबे समय तक रहेगा दबाव
विश्व बैंक का मानना है कि 2027 और 2028 में वैश्विक विकास दर कुछ सुधार के साथ 2.8% तक पहुंच सकती है। इसके बावजूद यह 2010 के दशक की औसत विकास दर से लगभग 0.4 प्रतिशत अंक कम रहेगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि धीमी जनसंख्या वृद्धि, निजी निवेश में कमी, बढ़ता सार्वजनिक कर्ज और वैश्विक व्यापार की कमजोर गति जैसे कारक आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास पर दबाव बनाए रखेंगे।

निष्कर्ष:
World Bank Global Growth Forecast में की गई कटौती यह संकेत देती है कि ईरान युद्ध अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। बढ़ती ऊर्जा कीमतें, महंगाई और व्यापारिक अनिश्चितता दुनिया के अधिकांश देशों के लिए चुनौती बन चुकी हैं। हालांकि इन चुनौतियों के बीच भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
FAQs
Why did the World Bank cut the global growth forecast?
विश्व बैंक ने ईरान युद्ध, ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान, बढ़ती तेल कीमतों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण विकास दर का अनुमान घटाया है।
What is the latest global growth projection?
विश्व बैंक ने 2026 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान 2.5% रखा है।
Why is India still the fastest-growing major economy?
मजबूत घरेलू मांग, निवेश और आर्थिक गतिविधियों के कारण भारत की विकास दर 6.6% रहने का अनुमान है, जो अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से अधिक है।
How does the World Bank forecast impact markets?
विश्व बैंक की रिपोर्ट निवेशकों की धारणा को प्रभावित करती है और इससे वैश्विक बाजारों, निवेश प्रवाह और नीतिगत फैसलों पर असर पड़ सकता है।
What challenges are affecting global growth?
ऊर्जा संकट, महंगाई, युद्ध, सप्लाई चेन में व्यवधान, बढ़ती ब्याज दरें और वैश्विक व्यापार की सुस्ती प्रमुख चुनौतियां हैं।

