150 साल तक जीने का सपना: पुतिन का मेगा एंटी-एजिंग मिशन, इंसानी अंग उगाने से लेकर जीन थेरेपी तक पर होगा काम

रूस ने एक ऐसे महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक मिशन की शुरुआत की है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार अब इंसानों की उम्र बढ़ाने और उम्र बढ़ने की रफ्तार को धीमा करने के लिए बड़े पैमाने पर रिसर्च कर रही है। इस कार्यक्रम का नाम ‘न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज’ रखा गया है।

इस परियोजना के तहत वैज्ञानिक कई आधुनिक तकनीकों पर काम कर रहे हैं। इनमें जीन थेरेपी, 3D बायोप्रिंटिंग, पेप्टाइड थेरेपी, क्रायोथेरेपी और विशेष नस्ल के मिनी-पिग्स के शरीर में इंसानी अंग विकसित करने जैसी तकनीकें शामिल हैं। रूस का दावा है कि इस मिशन का मकसद केवल लंबी उम्र देना नहीं, बल्कि लोगों को अधिक समय तक स्वस्थ बनाए रखना भी है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यदि यह योजना सफल रहती है तो दशक के अंत तक लगभग 1.75 लाख लोगों की जान बचाई जा सकती है।

 

उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने पर फोकस

रूस के वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसानी शरीर में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को पूरी तरह रोकना भले ही अभी संभव न हो, लेकिन उसे काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कई प्रयोग किए जा रहे हैं।

रूस के उप विज्ञान मंत्री डेनिस सेकिरीनस्की ने पहले बताया था कि वैज्ञानिक ऐसी जीन थेरेपी विकसित कर रहे हैं जो शरीर की कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की गति को कम कर सकती है। अगर यह तकनीक सफल होती है तो इससे उम्र से जुड़ी कई बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

 

जीन थेरेपी क्या है?

जीन थेरेपी ऐसी तकनीक है जिसमें इंसान के डीएनए या जीन में बदलाव करके बीमारी का इलाज करने की कोशिश की जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कई बीमारियां जीन से जुड़ी होती हैं। ऐसे में जीन को सुधारकर या बदलकर स्वास्थ्य बेहतर किया जा सकता है।

रूस इस तकनीक को केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसका इस्तेमाल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए भी करना चाहता है।

 

3D प्रिंटर से तैयार किए जाएंगे इंसानी अंग

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 3D बायोप्रिंटिंग है। इस तकनीक में विशेष बायो-इंक और जीवित कोशिकाओं की मदद से शरीर के ऊतकों और अंगों को तैयार किया जाता है।

रूसी वैज्ञानिक दावा कर चुके हैं कि वे इंसानी कार्टिलेज और चूहों की थायरॉयड ग्रंथि जैसे जैविक हिस्से विकसित करने में सफलता हासिल कर चुके हैं। अब उनका लक्ष्य भविष्य में ऐसे अंग तैयार करना है जिन्हें मरीजों के शरीर में प्रत्यारोपित किया जा सके।

अगर यह तकनीक सफल होती है तो अंगदान की कमी जैसी बड़ी समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है

Putin mega anti-aging mission

मिनी-पिग्स में उगाए जाएंगे इंसानी अंग

रूस की योजना का सबसे चर्चित हिस्सा विशेष नस्ल के मिनी-पिग्स के शरीर में इंसानी अंग विकसित करना है। वैज्ञानिक ऐसे आनुवंशिक रूप से संशोधित मिनी-पिग्स पर काम कर रहे हैं जिनमें इंसानी लिवर, किडनी और दिल जैसे अंग विकसित किए जा सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक लाखों मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है, क्योंकि दुनिया भर में प्रत्यारोपण के लिए अंगों की भारी कमी है।

हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और इसे लेकर वैज्ञानिक समुदाय में कई बहसें भी चल रही हैं।

 

पेप्टाइड थेरेपी पर भी खास ध्यान

पेप्टाइड शरीर में पाए जाने वाले छोटे प्रोटीन जैसे तत्व होते हैं, जो कोशिकाओं को अलग-अलग काम करने के संकेत देते हैं।

पेप्टाइड थेरेपी में कृत्रिम रूप से तैयार किए गए पेप्टाइड्स का उपयोग किया जाता है। माना जाता है कि इससे शरीर की मरम्मत प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है और उम्र से जुड़ी कुछ समस्याओं को कम किया जा सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस में इस तकनीक पर कई वर्षों से काम हो रहा है और इसे एंटी-एजिंग रिसर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

 

पुतिन और क्रायोथेरेपी का पुराना संबंध

क्रायोथेरेपी को आमतौर पर कोल्ड थेरेपी भी कहा जाता है। इसमें शरीर को कुछ मिनटों के लिए बेहद कम तापमान वाले वातावरण में रखा जाता है।

इस प्रक्रिया के दौरान तापमान लगभग -100 डिग्री सेल्सियस से -140 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है। समर्थकों का दावा है कि इससे शरीर को ताजगी मिलती है और कुछ स्वास्थ्य लाभ भी हो सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लंबे समय से क्रायोथेरेपी और पेप्टाइड थेरेपी में रुचि रखते रहे हैं। ऑस्ट्रिया के पूर्व चांसलर सेबास्टियन कुर्ज ने भी एक बार बताया था कि पुतिन ने उन्हें इस तकनीक के संभावित फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी।

 

शी जिनपिंग के साथ चर्चा भी बनी थी सुर्खियां

पिछले वर्ष चीन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत भी चर्चा में रही थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच इंसानी जीवन को लंबा करने, अंग प्रत्यारोपण और भविष्य में लोगों के 150 वर्ष तक जीवित रहने की संभावनाओं पर बातचीत हुई थी। बाद में इस चर्चा को रूस की लंबी उम्र संबंधी रिसर्च योजनाओं से जोड़कर देखा जाने लगा।

 

पुतिन की बेटी भी प्रोजेक्ट से जुड़ी

इस महत्वाकांक्षी परियोजना में राष्ट्रपति पुतिन की बेटी मारिया वोरोन्त्सोवा की भी अहम भूमिका बताई जा रही है। वह पेशे से एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हैं और हार्मोन तथा डायबिटीज से जुड़े चिकित्सा क्षेत्र में काम करती हैं।

इसके अलावा रूस के प्रमुख वैज्ञानिक मिखाइल कोवालचुक भी इस मिशन के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। वे लंबे समय से ऐसी तकनीकों के समर्थक रहे हैं जो भविष्य में शरीर के अंगों की मरम्मत और बदलाव को आसान बना सकें।

 

क्या वास्तव में संभव है लंबी उम्र का सपना?

रूस की इस परियोजना को लेकर उत्साह जितना है, उतने ही सवाल भी उठ रहे हैं। कई वैज्ञानिकों का कहना है कि इन तकनीकों से जुड़े कई दावे अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह प्रमाणित नहीं हुए हैं।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक शोध के नतीजे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित नहीं होते, तब तक इन दावों को सावधानी से देखना चाहिए।

आलोचकों का यह भी कहना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण रूसी वैज्ञानिकों का वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय से संपर्क पहले की तुलना में सीमित हुआ है, जिससे रिसर्च की स्वतंत्र जांच कठिन हो सकती है।

 

भविष्य की ओर रूस का बड़ा कदम

फिलहाल रूस का यह एंटी-एजिंग मिशन दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य केवल जीवन की अवधि बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों को अधिक समय तक स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखना भी है।

हालांकि इन तकनीकों को आम लोगों तक पहुंचने में अभी कई साल लग सकते हैं, लेकिन रूस ने यह साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने से जुड़ी रिसर्च उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहने वाली है।