बारिश में भीगा 1 करोड़ का सोना, बंदरों ने बिखेर दिया! 19 साल पुराने Lakhimpur Kheri Malkhana Case में अब आया चौंकाने वाला मोड़

 

Lakhimpur Kheri Malkhana Case एक बार फिर चर्चा में है। उत्तर प्रदेश के इस बेहद अनोखे मामले में पुलिस का दावा था कि करीब 1 करोड़ रुपये के सोने के गहने बारिश में भीग गए थे, इसलिए उन्हें छत पर सुखाने के लिए रखा गया, जहां बंदर (Monkeys) उन्हें बिखेर ले गए। अब इस मामले में नया मोड़ सामने आया है। कोर्ट के आदेश पर दर्ज FIR की जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन पीड़ित परिवार को आज तक न तो मुआवजा मिला और न ही गायब हुए गहनों का कोई सुराग।

 

क्या है Lakhimpur Kheri Malkhana Case?

यह मामला दीवाली 2007 का है। लखीमपुर खीरी की रहने वाली रानी अग्रवाल उर्फ जूली की कथित तौर पर आत्महत्या के बाद पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम के दौरान उनके शरीर से निकाले गए सोने के गहनों में एक नाक की कील, सोने की चेन और लॉकेट, अंगूठी तथा 10 सोने की चूड़ियां शामिल थीं। इन गहनों को केस प्रॉपर्टी के तौर पर पुलिस के मालखाने (Malkhana) में जमा कराया गया था। बाद में महिला के मायके वालों की शिकायत पर दहेज हत्या का मामला भी दर्ज हुआ।

 

Rain Damaged Gold और Monkey Story: आखिर क्या था पुलिस का दावा?

मामला तब सुर्खियों में आया जब पुलिस ने अदालत में बताया कि मालखाना में रखा सोना बारिश में भीग गया था।

दावा किया गया कि गहनों को सुखाने के लिए छत पर रखा गया, लेकिन इसी दौरान बंदर (Monkeys) वहां पहुंच गए और गहनों को इधर-उधर बिखेर दिया। इस दावे ने पूरे देश में हैरानी पैदा कर दी थी और सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर खूब चर्चा हुई।

Lakhimpur Kheri Malkhana Case में जांच में क्या सामने आया?

कोर्ट के आदेश पर दर्ज FIR के बाद पुलिस ने जांच की।

लखीमपुर खीरी की एसपी ख्याति गर्ग के अनुसार जांच में पाया गया कि गायब केस प्रॉपर्टी उस समय मलकाने की जिम्मेदारी संभाल रहे दो पूर्व हेड कांस्टेबलों के कार्यकाल में गायब हुई थी।हालांकि जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दोनों पुलिसकर्मियों की अब मृत्यु हो चुकी है। कानूनी प्रावधानों के तहत मृत व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इसी आधार पर पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी है।

 

परिवार को अब तक क्यों नहीं मिला मुआवजा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर केस की जांच पूरी हो चुकी है, तो पीड़ित परिवार को अब तक मुआवजा क्यों नहीं मिला? करीब 19 साल पुराने इस मामले में गहने अब तक बरामद नहीं हुए हैं। FIR दर्ज हुए भी एक साल से ज्यादा समय गुजर चुका है, लेकिन परिवार अभी भी अदालत और प्रशासन से न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। यही वजह है कि यह मामला केवल गायब हुए सोने का नहीं, बल्कि केस प्रॉपर्टी की सुरक्षा और पुलिस जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

Malkhana Management पर क्यों उठ रहे सवाल?

भारत में पुलिस मालखानों में करोड़ों रुपये की नकदी, सोना, हथियार और अन्य जब्त सामान सुरक्षित रखा जाता है। ऐसे में Lakhimpur Kheri Malkhana Case ने यह बहस फिर तेज कर दी है कि संवेदनशील केस प्रॉपर्टी की सुरक्षा के लिए आधुनिक डिजिटल रिकॉर्ड, CCTV निगरानी और नियमित ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं कितनी जरूरी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर केस प्रॉपर्टी की निगरानी मजबूत होती, तो शायद इस तरह की स्थिति पैदा नहीं होती।

Image Source: etv bharat

 

निष्कर्ष

Lakhimpur Kheri Malkhana Case आज भी भारतीय पुलिस व्यवस्था के सबसे चर्चित मामलों में गिना जाता है। बारिश में भीगा सोना, बंदरों द्वारा गहने बिखेरने का दावा और अब जांच के बाद दोनों जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की मौत—इन घटनाओं ने इस केस को और भी असाधारण बना दिया है। हालांकि पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी है, लेकिन पीड़ित परिवार के लिए न्याय और मुआवजे का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है।

 

FAQs

Q1. Lakhimpur Kheri Malkhana Case क्या है?

यह उत्तर प्रदेश का चर्चित मामला है, जिसमें पोस्टमार्टम के बाद पुलिस मलकाने में जमा सोने के गहने गायब हो गए थे।

 

Q2. पुलिस ने सोना गायब होने पर क्या दावा किया था?

पुलिस ने कहा था कि बारिश में भीगे गहनों को छत पर सुखाने रखा गया था, जहां बंदरों ने उन्हें बिखेर दिया।

 

Q3. गायब हुए गहनों की कीमत कितनी थी?

परिवार के अनुसार गायब हुए सोने के गहनों की कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

 

Q4. जांच में क्या सामने आया?

जांच में पाया गया कि केस प्रॉपर्टी दो पूर्व हेड कांस्टेबलों के कार्यकाल में गायब हुई थी। दोनों की अब मृत्यु हो चुकी है, इसलिए पुलिस ने अदालत में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी।

 

Q5. परिवार को मुआवजा मिला या नहीं?

नहीं। FIR दर्ज होने के एक साल बाद भी परिवार को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है।