पेट्रोल की वजह से बढ़ रही है चीनी की कीमत? गन्ने से Ethanol पर लग सकती है रोक, सरकार का बड़ा प्लान

Ethanol Blending Policy

चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है। अब सरकार नए सीजन में गन्ने से Ethanol बनाने की मात्रा सीमित करने पर विचार कर रही है। वजह यह है कि कम बारिश के कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में अगले साल चीनी उत्पादन को लेकर आशंका बढ़ गई है। ऐसे में सरकार घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए गन्ने को ethanol की जगह चीनी उत्पादन की ओर मोड़ सकती है।यानी जिस गन्ने से पेट्रोल में मिलाने के लिए ethanol तैयार किया जा रहा है, अब उसका बड़ा हिस्सा वापस चीनी बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर सरकार यह फैसला लेती है, तो इससे बाजार में करीब 30 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त चीनी उपलब्ध होने की संभावना है।

India Ethanol Cane Sugar Market में क्यों आया बड़ा बदलाव?

भारत में पेट्रोल में ethanol blending बढ़ाने की नीति के तहत गन्ने से मिलने वाले विभिन्न feedstocks का इस्तेमाल ethanol बनाने में किया जाता है। लेकिन इस समय तस्वीर बदलती दिख रही है।महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश ने अगले sugar season में गन्ने और चीनी के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से सरकार के सामने दो प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है-एक तरफ पेट्रोल में ethanol blending का लक्ष्य और दूसरी तरफ घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रखना।सरकार और उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले नए सीजन में गन्ने के इस्तेमाल को ethanol की ओर divert करने पर कुछ सीमाएं लगाई जा सकती हैं। अंतिम फैसला अगले सीजन से पहले किए जाने की उम्मीद है।

चीनी से Ethanol बनाने पर रोक क्यों लग सकती है?

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह चीनी की बढ़ती कीमत और घरेलू supply को लेकर चिंता है।मौजूदा सीजन में चीनी मिलों ने करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी के बराबर मात्रा ethanol production की ओर divert की, जो कुल उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत है। अगर अगले सीजन में इस diversion को सीमित किया जाता है, तो इतनी ही मात्रा घरेलू बाजार में अतिरिक्त चीनी के रूप में उपलब्ध हो सकती है।यह अतिरिक्त supply ऐसे समय में महत्वपूर्ण होगी जब महाराष्ट्र और कर्नाटक में कमजोर बारिश के कारण उत्पादन में कमी की आशंका जताई जा रही है।यही वजह है कि सरकार के सामने फिलहाल एक सीधा सवाल है- क्या ethanol production को प्राथमिकता दी जाए या पहले घरेलू चीनी बाजार को स्थिर किया जाए?

चीनी की कीमत एक महीने में 10% क्यों बढ़ी?

भारत में चीनी की कीमत पिछले एक महीने में करीब 10 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। इसके पीछे घरेलू उपलब्धता में कमी के साथ-साथ त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग भी एक कारण बताई जा रही है।त्योहारी सीजन में मिठाइयों और दूसरे खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से चीनी की खपत भी बढ़ती है। ऐसे समय में अगर उत्पादन को लेकर पहले से ही चिंता हो, तो बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।सरकार पहले ही चीनी निर्यात पर रोक लगा चुकी है और व्यापारियों के पास रखे जाने वाले चीनी stock पर भी सीमाएं लगाई गई हैं। अब ethanol के लिए गन्ने और sugar-derived feedstock के इस्तेमाल को लेकर संभावित नए प्रतिबंध इसी कोशिश का अगला कदम हो सकते हैं।

 

B-Heavy Molasses से Ethanol पर भी लग सकती है रोक

प्रस्तावित बदलाव केवल गन्ने के रस तक सीमित नहीं हो सकता। सूत्रों के मुताबिक मिलों को sugarcane juice और B-heavy molasses से ethanol बनाने से रोकने पर विचार किया जा रहा है।B-heavy molasses चीनी बनाने की प्रक्रिया से निकलने वाला ऐसा उप-उत्पाद है जिसमें अपेक्षाकृत अधिक sugar content बचा रहता है। इससे ethanol बनाने की जगह अगर अधिक चीनी निकाली जाती है, तो घरेलू बाजार में supply बढ़ाई जा सकती है।वहीं, मिलों को C-heavy molasses से ethanol बनाने की अनुमति जारी रह सकती है। C-heavy molasses वह उप-उत्पाद है जिसमें चीनी निकालने की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी होती है। इससे सरकार sugar production को प्राथमिकता देते हुए ethanol supply को पूरी तरह रोकने से बच सकती है।

 

Ethanol blending का लक्ष्य फिर कैसे पूरा होगा?

यहीं इस पूरे फैसले की सबसे बड़ी चुनौती है।भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत ethanol blending का लक्ष्य रखा है। अगर गन्ने से ethanol production घटता है, तो इस लक्ष्य को बनाए रखने के लिए सरकार को दूसरे feedstocks पर निर्भरता बढ़ानी होगी।इसमें सबसे अहम भूमिका मक्का और चावल की हो सकती है। Reuters के अनुसार फिलहाल इन दोनों की उपलब्धता पर्याप्त बताई जा रही है, इसलिए सरकार गन्ने से कम ethanol बनने की स्थिति में maize और rice-based ethanol को बढ़ावा दे सकती है।यानी सरकार के सामने विकल्प यह नहीं है कि ethanol blending खत्म कर दी जाए। बल्कि संभावित रणनीति यह हो सकती है कि गन्ने से मिलने वाले ethanol का हिस्सा कम करके दूसरे स्रोतों से इसकी भरपाई की जाए।

 

Sugarcane Farmers पर क्या होगा असर?

इस फैसले का असर गन्ना किसानों पर भी पड़ेगा, लेकिन इसका प्रभाव एकतरफा होना जरूरी नहीं है।अगर चीनी की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और मिलों को sugar बेचने से ethanol की तुलना में बेहतर आय मिलती है, तो मिलों के लिए चीनी उत्पादन को प्राथमिकता देना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है। उद्योग से जुड़े सूत्रों ने भी संकेत दिया है कि प्रस्तावित restrictions से sugar industry को बड़ा नुकसान होने की संभावना नहीं है।दूसरी ओर, ethanol programme ने गन्ना उद्योग के लिए एक अतिरिक्त बाजार तैयार किया है। इसलिए लंबे समय में sugar और ethanol के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा, ताकि किसानों और मिलों दोनों को स्थिर बाजार मिल सके।

 

क्या सरकार गन्ने से Ethanol पूरी तरह बंद करने जा रही है?

नहीं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सरकार गन्ने से ethanol production पूरी तरह बंद करने का फैसला नहीं कर रही है।विचार मुख्य रूप से इस बात पर है कि नए सीजन में sugarcane juice और B-heavy molasses के diversion को सीमित किया जाए और चीनी उत्पादन को प्राथमिकता दी जाए। C-heavy molasses से ethanol production जारी रखने का विकल्प भी चर्चा में है।इसलिए इसे ethanol policy को खत्म करने के बजाय sugar supply और fuel blending के बीच अस्थायी संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।

 

सरकार के सामने दोहरी चुनौतीचीनी भी सस्ती हो, Ethanol भी चलता रहे

भारत के लिए यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि sugar और ethanol दोनों अब कृषि अर्थव्यवस्था और energy policy के अहम हिस्से बन चुके हैं।एक तरफ महंगी चीनी से घरेलू उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी तरफ ethanol blending से पेट्रोल में fossil fuel की निर्भरता कम करने और घरेलू feedstocks का इस्तेमाल बढ़ाने की नीति जुड़ी हुई है।इसलिए सरकार को ऐसा संतुलन बनाना होगा जिसमें चीनी की घरेलू supply भी पर्याप्त रहे और ethanol blending programme भी प्रभावित न हो।फिलहाल संकेत यही हैं कि सरकार गन्ने से ethanol production को कुछ हद तक सीमित करके इस कमी को मक्का और चावल जैसे वैकल्पिक स्रोतों से पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। अंतिम allocation और नियम नए marketing year से पहले स्पष्ट होने की उम्मीद है।

 

निष्कर्ष

India Ethanol Cane Sugar Market में आया यह बदलाव सिर्फ चीनी की कीमतों का मामला नहीं है। इसके पीछे भारत की food security, sugar industry, किसानों की आय और ethanol blending programme-चारों जुड़े हुए हैं।करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी को ethanol की ओर divert किए जाने और अगले सीजन में उत्पादन पर मौसम की चिंता के बीच सरकार अब घरेलू sugar supply को प्राथमिकता देने पर विचार कर रही है।अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होता है, तो गन्ने से ethanol बनाने की मात्रा सीमित हो सकती है, जबकि मक्का और चावल से ethanol production बढ़ाकर 20 प्रतिशत blending target को बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।यानी आने वाले सीजन में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि चीनी कितनी बनेगी, बल्कि यह भी होगा कि गन्ने का कितना हिस्सा मिठास देगा और कितना पेट्रोल में घुलेगा।

FAQs:

चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और महाराष्ट्र-कर्नाटक में कम बारिश के कारण अगले सीजन में sugar production को लेकर चिंता बढ़ी है। इसलिए सरकार घरेलू supply बढ़ाने के लिए गन्ने को ethanol की जगह sugar production की ओर मोड़ने पर विचार कर रही है।

मौजूदा सीजन में करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी के बराबर मात्रा ethanol production की ओर divert हुई। सरकार का मानना है कि इस diversion को सीमित करने से घरेलू बाजार में अतिरिक्त sugar supply उपलब्ध कराई जा सकती है।

पिछले एक महीने में भारत में चीनी की कीमत करीब 10 प्रतिशत बढ़ी है। कम होती उपलब्धता, अगले सीजन के उत्पादन को लेकर चिंता और त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

गन्ने या sugar-rich feedstocks को ethanol production की ओर divert करने पर उतनी मात्रा में चीनी बाजार में नहीं आती। इसलिए जब घरेलू supply पहले से कम हो, तो diversion सीमित करने से उपलब्ध चीनी की मात्रा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

सरकार ethanol blending के लक्ष्य को बनाए रखते हुए चीनी की घरेलू supply भी पर्याप्त रखना चाहती है। इसलिए अगर sugarcane-based ethanol घटता है, तो मक्का और चावल जैसे दूसरे feedstocks से ethanol production बढ़ाने का विकल्प मौजूद है।