Ethanol Blended Diesel Safety Test में बड़ा झटका! डीजल में इथेनॉल मिलाने का प्रयोग क्यों हुआ फेल? सरकार ने संसद में बताया कारण

Ethanol Blended Diesel Safety Test

डीजल में इथेनॉल मिलाने का प्रयोग फिलहाल आगे बढ़ता नहीं दिख रहा है। सरकार ने संसद में बताया कि Ethanol Blended Diesel Safety Test के दौरान इथेनॉल मिलाने से डीजल का flash point काफी कम हो गया, जिसके चलते यह निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर सका। ऐसे में डीजल में इथेनॉल की व्यापक blending को फिलहाल आगे बढ़ाने पर रोक जैसी स्थिति बन गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत की पूरी ethanol policy पर सवाल खड़ा हो गया है। सरकार पेट्रोल में 20% ethanol blending के लक्ष्य को लेकर अलग नीति चला रही है और इससे आगे blending बढ़ाने का फैसला फिलहाल नहीं लिया गया है।

Ethanol Blended Diesel Safety Test में आखिर क्या सामने आया?

सरकारी तेल कंपनियों यानी OMCs ने अपने Research and Development centres के जरिए डीजल में ethanol blending का वैज्ञानिक परीक्षण किया। इस प्रक्रिया में मान्यता प्राप्त laboratories और vehicle manufacturers की भी भागीदारी रही।परीक्षण के दौरान पाया गया कि diesel में ethanol मिलाने के बाद उसके flash point में महत्वपूर्ण गिरावट आई। Flash point वह न्यूनतम तापमान होता है जिस पर किसी तरल से निकलने वाली वाष्प ignition source के संपर्क में आने पर आग पकड़ सकती है।इसी वजह से ethanol-diesel blend निर्धारित fuel safety specifications पर खरा नहीं उतर पाया। सरकार के मुताबिक यही मुख्य कारण है कि इस मिश्रण के व्यापक इस्तेमाल को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।

Flash Point कम होना इतना बड़ा मुद्दा क्यों है?

Fuel safety के लिहाज से flash point एक महत्वपूर्ण parameter है। किसी fuel का flash point निर्धारित specification से नीचे जाने पर उसके handling, storage और transportation से जुड़े safety considerations बदल जाते हैं।यही वजह है कि Ethanol Diesel Safety Test में सामने आई कमी को केवल performance से जुड़ा technical issue नहीं माना जा सकता। Fuel को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में लाने से पहले यह जरूरी है कि वह निर्धारित safety और quality standards को पूरा करे। इस मामले में ethanol मिलाने के बाद diesel का flash point तय सीमा से काफी नीचे चला गया। इसलिए फिलहाल इसे व्यापक स्तर पर लागू करने के बजाय सरकार ने testing के नतीजों को प्राथमिकता दी है।

क्या डीजल में Isobutanol भी मिलाया जा रहा है?

संसद में सरकार से यह भी पूछा गया कि क्या diesel में isobutanol की blending की जा रही है।सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल diesel में isobutanol blending नहीं की जा रही है।यानी अभी diesel में ethanol या isobutanol के इस्तेमाल को लेकर कोई व्यापक commercial blending programme लागू नहीं है। Ethanol के मामले में किए गए परीक्षणों के बाद सामने आई safety concern के कारण diesel blending को लेकर आगे बढ़ने से पहले technical compatibility और safety requirements को पूरा करना जरूरी होगा।

 

Petrol में 20% Ethanol Blending का क्या होगा?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।Ethanol Blending in Diesel का परीक्षण सफल नहीं रहा, लेकिन इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि petrol में ethanol blending भी बंद की जा रही है।भारत ने petrol में 20% ethanol blending यानी E20 का लक्ष्य हासिल कर लिया है। सरकार ने जुलाई 2026 में संसद में स्पष्ट किया था कि petrol में 20% से आगे ethanol blending बढ़ाने पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। भविष्य में ऐसा कोई फैसला detailed scientific और technical studies तथा automobile manufacturers, OMCs और research institutions से consultation के बाद लिया जाएगा,यानी फिलहाल सरकार का approach साफ है -जहां blending technical और safety standards पर खरी उतर रही है, वहां programme जारी है; जहां testing में समस्या सामने आई है, वहां आगे बढ़ने से पहले तकनीकी समाधान जरूरी है।

 

OMCs 10.48 अरब लीटर Ethanol खरीदेंगी

देश में ethanol ecosystem को लेकर सरकार की नीति हालांकि काफी सक्रिय है। 2025-26 के Ethanol Supply Year के लिए सरकारी oil marketing companies ने लगभग 10.5 अरब लीटर ethanol खरीदने का tender जारी किया था। इसके मुकाबले करीब 17.6 अरब लीटर की offers मिलीं। बाद में 378 registered suppliers को कुल 10.485 अरब लीटर ethanol आवंटित किया गया।इससे साफ है कि diesel blending का परीक्षण अलग मुद्दा है, जबकि petrol के लिए ethanol procurement और blending programme बड़े स्तर पर जारी है।सरकार के अनुसार 2025-26 में petrol में ethanol blending 20% तक पहुंच चुकी है। 2013-14 में यह 1.5% से भी कम थी। साथ ही ethanol production capacity भी 2026 में करीब 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंचने की जानकारी सरकार ने दी है।

 

Cooking Fuel के तौर पर भी Ethanol की तैयारी

Ethanol को लेकर सरकार केवल transport fuel तक सीमित नहीं रहना चाहती। सरकार इसे cooking fuel के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है।इसका उद्देश्य देश में उपलब्ध अतिरिक्त ethanol production capacity का इस्तेमाल करना और cooking fuel के क्षेत्र में LPG imports पर निर्भरता कम करने की संभावनाएं तलाशना है।इससे ethanol के लिए एक और संभावित domestic market तैयार हो सकता है। हालांकि cooking fuel के तौर पर इसके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले भी safety, infrastructure और consumer-use से जुड़े मानकों को देखना जरूरी होगा।

 

Ethanol Policy में Diesel और Petrol का रास्ता अलग क्यों?

भारत की ethanol policy का मूल फोकस petrol blending रहा है। सरकार ने इसे energy security, crude oil imports कम करने, किसानों के लिए अतिरिक्त market और renewable fuel को बढ़ावा देने से जोड़ा है।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2014-15 से मई 2026 तक ethanol blending programme के जरिए ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक foreign exchange की बचत, 310 लाख मीट्रिक टन से अधिक crude oil substitution और करीब 930 लाख मीट्रिक टन CO₂ emissions reduction का अनुमान है। इसी अवधि में किसानों की अतिरिक्त आय भी ₹1.60 लाख करोड़ से अधिक बताई गई है।इसलिए diesel में ethanol blending के एक technical trial में आई समस्या को पूरी ethanol policy की विफलता के तौर पर देखना सही नहीं होगा।

 

सरकार का संदेश साफ: Safety से समझौता नहीं

पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि alternative fuel को बढ़ावा देने के बावजूद सरकार safety standards को लेकर समझौता नहीं करना चाहती।Ethanol Blended Diesel Safety Test में flash point से जुड़ी समस्या सामने आने के बाद diesel में ethanol blending को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने से पहले तकनीकी समाधान जरूरी होगा।वहीं petrol में E20 blending programme जारी है और 20% से आगे बढ़ने का कोई फैसला अभी नहीं हुआ है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में higher blends पर निर्णय detailed scientific और technical assessment के बाद ही लिया जाएगा।

 

निष्कर्ष

Ethanol Blended Diesel Safety Test में सामने आई कमी ने diesel में ethanol blending की राह फिलहाल रोक दी है। परीक्षण में ethanol मिलाने के बाद diesel का flash point निर्धारित सुरक्षा सीमा से नीचे चला गया, जिसके कारण blend आवश्यक safety specifications पर खरा नहीं उतर सका। लेकिन इसे भारत की पूरी ethanol strategy की नाकामी समझना गलत होगा। Petrol में E20 programme अलग तरीके से जारी है और सरकार ethanol के इस्तेमाल को cooking fuel जैसे नए क्षेत्रों में भी तलाश रही है।अब असली चुनौती यह है कि भारत alternative fuel की अपनी महत्वाकांक्षा और fuel safety के कड़े मानकों के बीच सही संतुलन कैसे बनाता है।

FAQs:

Ethanol-blended diesel वह fuel है जिसमें diesel के साथ ethanol को मिलाने का प्रयास किया जाता है। भारत में इसके इस्तेमाल को लेकर परीक्षण किए गए हैं, लेकिन व्यापक commercial use के लिए आवश्यक safety requirements पूरी होना जरूरी है।

सरकार के अनुसार ethanol मिलाने के बाद diesel का flash point काफी कम हो गया, जिसके कारण blend निर्धारित safety specifications को पूरा नहीं कर सका।

सरकार ने फिलहाल diesel में ethanol blending को व्यापक रूप से आगे बढ़ाने का रास्ता नहीं अपनाया है। परीक्षण में सामने आई safety समस्या के समाधान के बिना इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

नहीं। Petrol में 20% ethanol blending programme जारी है। सरकार ने 20% से आगे blending बढ़ाने पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया है और भविष्य में फैसला technical studies तथा stakeholder consultations के बाद होगा।

सरकार ethanol को cooking fuel के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य संभावित रूप से LPG import dependence कम करना और domestic ethanol capacity का बेहतर इस्तेमाल करना है।