भारत में E10 Petrol for Older Vehicles को फिर से उपलब्ध कराने की मांग ने E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस को नया मोड़ दे दिया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन और आर्थिक मामलों के विभाग के सलाहकार आकाश पूजारी ने सुझाव दिया है कि पुराने दोपहिया वाहनों के लिए E20 के साथ E10 पेट्रोल का विकल्प बहाल किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने चेताया है कि भविष्य में E27 या E30 जैसे ज्यादा ethanol blends पर जाने से पहले food, feed और water security पर पड़ने वाले असर को भी देखना जरूरी है।
प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब E20 पेट्रोल को लेकर पुराने वाहन मालिकों की चिंताएं सामने आती रही हैं। सरकार फिलहाल E20 नीति पर कायम है और 20% ethanol blending के बाद इससे आगे बढ़ने का कोई तत्काल फैसला नहीं लिया गया है।
E10 Petrol for Older Vehicles का सुझाव क्यों आया?
नागेश्वरन और पूजारी के मुताबिक भारत की सड़कों पर BS-IV से पहले बने और carburettor से लैस करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन मौजूद हैं।
पुराने carburettor-based engines में आधुनिक fuel-injection systems की तरह ethanol blend के हिसाब से air-fuel mixture को adjust करने की क्षमता नहीं होती। लेखकों का तर्क है कि E20 में मौजूद अतिरिक्त ethanol और oxygen के कारण कुछ पुराने engines में fuel-air mixture अपेक्षाकृत lean हो सकता है, जिससे इंजन ज्यादा गर्म चल सकता है।
उन्होंने पुराने rubber components को लेकर भी चिंता जताई है, क्योंकि ये जरूरी नहीं कि ज्यादा ethanol concentration के लिए डिजाइन किए गए हों।
इसी वजह से E10 Petrol for Older Vehicles को एक transitional option के तौर पर वापस लाने का सुझाव दिया गया है।

E10 और E20 Petrol में आखिर अंतर क्या है?
E10 पेट्रोल में करीब 10% ethanol और बाकी हिस्सा petrol होता है, जबकि E20 में ethanol का हिस्सा 20% होता है।
भारत में ethanol blending बढ़ाने के पीछे सरकार का उद्देश्य crude oil imports पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा बचाना और किसानों के लिए ethanol feedstock की अतिरिक्त मांग पैदा करना रहा है।
लेकिन ज्यादा ethanol blending का मतलब ज्यादा ethanol production भी है। इसके लिए sugarcane, maize, rice और दूसरे agricultural feedstocks की जरूरत पड़ती है।
यहीं से E10 vs E20 Petrol की बहस सिर्फ वाहन के engine तक सीमित नहीं रहती, बल्कि agriculture और संसाधनों तक पहुंच जाती है।
E20 के बाद E27 और E30 क्यों चिंता का विषय?
CEA के लेख में सवाल उठाया गया है कि अगर भारत E20 के बाद E27 या E30 जैसे higher ethanol blends की तरफ बढ़ता है, तो इसके लिए अतिरिक्त agricultural feedstock कहां से आएगा।
मसलन, maize का इस्तेमाल ethanol बनाने के साथ–साथ poultry और livestock feed में भी होता है। अगर ethanol producers की मांग बढ़ती है, तो maize की कीमत और उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
इससे एक बड़ा सवाल पैदा होता है–एक ही फसल का इस्तेमाल fuel के लिए किया जाए या food और animal feed के लिए?
लेखकों ने इसी trade-off को ध्यान में रखते हुए चेताया है कि ethanol policy को आगे बढ़ाते समय सिर्फ crude oil savings और foreign exchange benefits नहीं, बल्कि agricultural economy की पूरी लागत को देखना चाहिए।
Ethanol Policy में Sugarcane और Maize का कितना रोल?
भारत में ethanol production के लिए sugarcane के अलावा maize, rice और अन्य grains का भी इस्तेमाल होता है।
Sugarcane को लेकर भी fuel और food के बीच trade-off सामने आया है। ज्यादा sugarcane ethanol production के लिए इस्तेमाल होने पर sugar production के लिए उपलब्ध संसाधनों पर असर पड़ सकता है।
अगर सरकार sugarcane से ethanol का इस्तेमाल सीमित करती है, लेकिन E20 blending बनाए रखना चाहती है, तो ethanol की जरूरत पूरी करने के लिए maize और दूसरे grains पर निर्भरता बढ़ सकती है।
यानी एक feedstock से दबाव हटाने पर दूसरा feedstock ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
सिर्फ Food नहीं, Water का भी है बड़ा सवाल
इस बहस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा water consumption है।
Ethanol के फायदे आमतौर पर crude oil substitution, foreign exchange savings, emissions और farmers’ income के संदर्भ में गिने जाते हैं। लेकिन CEA के लेख में सवाल उठाया गया है कि ethanol के लिए इस्तेमाल होने वाली फसलों को उगाने में कितना पानी खर्च होता है।
खास तौर पर sugarcane जैसी water-intensive crop के मामले में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।
यानी असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ethanol plant को कितना पानी चाहिए, बल्कि यह भी है कि जिस crop से ethanol बनाया जा रहा है, उसे उगाने में कितना पानी इस्तेमाल होगा और उस पानी का दूसरा उपयोग क्या हो सकता था।
पुराने वाहनों के लिए E10 क्या समाधान हो सकता है?
लेखकों के मुताबिक पुराने वाहनों को E10 उपलब्ध कराने से उन्हें E20 के बजाय lower ethanol blend का विकल्प मिल सकता है, जब तक कि उनके engines और components को upgrade या retrofit नहीं किया जाता।
उनका कहना है कि पुराने vehicles को ethanol-compatible components के साथ retrofit करना संभव है, लेकिन करोड़ों वाहनों के बड़े fleet को upgrade करने में समय लगेगा।
इस दौरान E10 Petrol for Older Vehicles को उपलब्ध कराना एक practical transition option हो सकता है।
इससे पुराने vehicle owners को ज्यादा ethanol concentration वाले fuel से बचने का विकल्प मिलेगा और देश की कुल ethanol requirement भी उस स्थिति की तुलना में कम रहेगी, जिसमें पूरे vehicle fleet को E20 पर चलाया जाए।
क्या सरकार E20 को वापस लेने जा रही है?
नहीं। उपलब्ध स्रोत के मुताबिक यह सरकार की घोषित नीति में बदलाव नहीं है, बल्कि मुख्य आर्थिक सलाहकार और उनके सह–लेखक का policy suggestion है।
सरकार ने E20 पेट्रोल का बचाव करते हुए कहा है कि extensive testing में व्यापक स्तर पर engine damage के प्रमाण नहीं मिले हैं। सरकार का मौजूदा रुख E20 blending को जारी रखने का है और फिलहाल E20 से आगे जाने का कोई तत्काल निर्णय नहीं बताया गया है।
इसलिए E10 Petrol for Older Vehicles की वापसी को फिलहाल एक प्रस्ताव या सुझाव के रूप में देखना चाहिए, न कि पूरे देश में E10 की वापसी की आधिकारिक घोषणा के तौर पर।
E20 Debate अब सिर्फ Mileage और Engine की नहीं
भारत में E20 को लेकर बहस अक्सर mileage, engine compatibility और पुराने वाहनों के performance के आसपास घूमती रही है। लेकिन CEA के इस सुझाव ने बहस को एक बड़े economic question से जोड़ दिया है।
अगर भारत ethanol blending को और बढ़ाता है, तो उसे यह भी देखना होगा कि इसके लिए कितनी agricultural land, water और crops की जरूरत होगी और उसका food तथा animal feed markets पर क्या असर पड़ेगा।
यानी ethanol policy के फायदे हैं, लेकिन उसके hidden costs और trade-offs को भी calculation में शामिल करना होगा।
निष्कर्ष
E10 Petrol for Older Vehicles को वापस उपलब्ध कराने का सुझाव भारत की E20 नीति पर चल रही बहस को नया आयाम देता है। पुराने carburettor-based दोपहिया वाहनों के लिए E10 को एक temporary transition option के तौर पर देखा गया है।
साथ ही, मुख्य आर्थिक सलाहकार की ओर से उठाया गया बड़ा सवाल यह है कि E20 के बाद E27 या E30 जैसे blends की ओर बढ़ने से पहले भारत को food, animal feed और water security पर पड़ने वाले असर का पूरा आकलन करना चाहिए।
फिलहाल E20 सरकार की नीति बनी हुई है। इसलिए E10 की वापसी अभी फैसला नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण policy recommendation है।
FAQs
- E10 Petrol for Older Vehicles की मांग क्यों उठी है?
पुराने carburettor-based वाहनों को ज्यादा ethanol concentration वाले fuel के साथ compatibility संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए उनके लिए E10 को transition के दौरान विकल्प के तौर पर सुझाया गया है। - E10 और E20 Petrol में क्या अंतर है?
E10 में करीब 10% ethanol और E20 में करीब 20% ethanol blending होती है। - क्या E20 Petrol पुराने वाहनों के लिए सुरक्षित है?
सरकार ने extensive testing का हवाला देते हुए व्यापक engine damage के दावों को खारिज किया है। हालांकि, CEA के लेखकों ने खास तौर पर पुराने carburettor-equipped vehicles के लिए E10 विकल्प की जरूरत पर जोर दिया है। - क्या पुराने Cars और Bikes में E10 Petrol इस्तेमाल किया जा सकता है?
CEA के प्रस्ताव में खास तौर पर पुराने दोपहिया वाहनों का उल्लेख किया गया है। किसी खास वाहन की fuel compatibility उसके manufacturer specifications पर निर्भर करेगी। - क्या सरकार E10 Petrol को फिर से लागू करने वाली है?
अभी ऐसा कोई आधिकारिक फैसला नहीं बताया गया है। E10 की वापसी फिलहाल CEA और उनके सह–लेखक द्वारा दिया गया सुझाव है। - E20 Petrol Debate में Food और Water का मुद्दा क्यों आया?
क्योंकि ज्यादा ethanol production के लिए sugarcane, maize और अन्य agricultural feedstocks की जरूरत बढ़ सकती है। इससे food, animal feed, land और water resources पर दबाव पड़ने की संभावना का आकलन करना जरूरी है।

