Air India Crash Investigation: क्या था अहमदाबाद विमान हादसे का असली कारण, जानिए जांच के आखिरी चरण में क्या आया सामने ?

Air India Crash Investigation

Air India Crash Investigation: 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर (फ्लाइट AI171) उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोगों समेत कुल 260 लोगों की मौत हुई थी, जबकि जमीन पर भी एक व्यक्ति की जान गई थी। यह भारत के नागरिक उड्डयन इतिहास की सबसे गंभीर दुर्घटनाओं में से एक मानी जाती है।

अब इस Air India Crash Investigation में बड़ा अपडेट सामने आया है। भारत की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) ने अदालत में दाखिल एक हलफनामे में बताया है कि जांच अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) का पूरा ट्रांसक्रिप्ट तैयार किया जा चुका है, मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी (Psychological Autopsy) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब तकनीकी व मानव व्यवहार से जुड़े अंतिम विश्लेषण किए जा रहे हैं।

हालांकि AAIB ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और अंतिम रिपोर्ट आने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

Air India Crash Investigation: जांच अब अंतिम विश्लेषण के चरण में

AAIB के अनुसार अब जांच का फोकस केवल दुर्घटना के तकनीकी कारणों तक सीमित नहीं है। जांच टीम विमान संचालन (Operational Factors), तकनीकी पहलुओं (Technical Factors), मानव व्यवहार (Human Factors) और संगठनात्मक प्रक्रियाओं (Organisational Factors) का संयुक्त विश्लेषण कर रही है।

एजेंसी ने अदालत को बताया कि अधिकांश जांच पूरी हो चुकी है और केवल कुछ बाहरी तकनीकी विश्लेषण (External Dependencies) बाकी हैं। इनमें इंजन मॉनिटरिंग यूनिट (Engine Monitoring Unit) से प्राप्त डेटा का विस्तृत विश्लेषण भी शामिल है, जिसे मई 2026 के अंत में रिकवर किया गया था।

यदि यह प्रक्रिया तय समय पर पूरी हो जाती है तो अगले लगभग छह सप्ताह में जांच पूरी होने की संभावना है। इसके बाद अक्टूबर 2026 के आसपास अंतिम रिपोर्ट का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।

कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से क्या मिला?

AAIB ने पुष्टि की है कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (Cockpit Voice Recorder) का पूरा ट्रांसक्रिप्ट तैयार कर लिया गया है। CVR में उड़ान के दौरान पायलटों के बीच हुई बातचीत, कॉकपिट की आवाजें और महत्वपूर्ण चेतावनियां रिकॉर्ड होती हैं।

हालांकि एजेंसी ने ट्रांसक्रिप्ट की सामग्री सार्वजनिक नहीं की है और न ही यह बताया है कि रिकॉर्डिंग से क्या निष्कर्ष निकले हैं।

पिछले वर्ष Reuters ने अमेरिकी अधिकारियों के शुरुआती आकलन के आधार पर रिपोर्ट दी थी कि कॉकपिट रिकॉर्डिंग से यह संकेत मिलता है कि टेकऑफ के तुरंत बाद इंजनों में ईंधन की आपूर्ति बंद होने से संबंधित घटनाक्रम सामने आया था। लेकिन AAIB ने उस समय भी कहा था कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और आज भी एजेंसी का यही आधिकारिक रुख है।

Psychological Autopsy भी जांच का हिस्सा बनी

इस जांच में पहली बार चर्चा में आया शब्द है Psychological Autopsy। AAIB ने अदालत में बताया कि उसने मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी भी कराई है, लेकिन यह नहीं बताया कि यह किस व्यक्ति की की गई और इससे क्या निष्कर्ष निकले।

मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति, निर्णय लेने की क्षमता, तनाव, व्यवहार, कार्यशैली और परिस्थितियों का वैज्ञानिक अध्ययन होता है। इसमें परिवार, सहकर्मियों, मेडिकल रिकॉर्ड, कार्य इतिहास और अन्य उपलब्ध जानकारियों का विश्लेषण किया जाता है ताकि यह समझा जा सके कि दुर्घटना से पहले संबंधित व्यक्ति की मानसिक एवं व्यवहारिक स्थिति कैसी थी।

AAIB ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं बल्कि दुर्घटना के सभी संभावित मानवीय पहलुओं को समझना है।

 

जांच में किन-किन लोगों से पूछताछ हुई?

AAIB ने अदालत को बताया कि जांच केवल दुर्घटनाग्रस्त विमान के पायलटों तक सीमित नहीं रही।

जांच अधिकारियों ने एयर इंडिया के बोइंग 787 उड़ाने वाले कई अन्य पायलटों, केबिन क्रू, विमान तैयार करने वाले तकनीकी कर्मचारियों, एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों, मौसम विभाग के अधिकारियों और Human Factors विशेषज्ञों से भी पूछताछ की है।

इसके अलावा दोनों पायलटों के साथ पहले काम कर चुके कर्मचारियों से भी बातचीत की गई ताकि उनकी कार्यशैली, निर्णय लेने के तरीके और सामान्य व्यवहार को समझा जा सके।

जांच के शुरुआती चरण में दोनों पायलटों के परिवारों से भी उनके घर जाकर बातचीत की गई थी।

 

पायलट के पिता की याचिका के बाद सामने आई जानकारी

यह जानकारी दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक मामले के दौरान सार्वजनिक हुई।

विमान के कप्तान कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता पुष्कर राज सभरवाल ने अदालत में याचिका दायर कर स्वतंत्र जांच की मांग की थी। उनका आरोप था कि दुर्घटना के बाद AAIB के दो अधिकारियों ने उनसे मुलाकात के दौरान यह संकेत दिया था कि उनके बेटे ने टेकऑफ के तुरंत बाद इंजनों की ईंधन आपूर्ति बंद कर दी थी।

AAIB ने अदालत में इस आरोप का कोई समर्थन नहीं किया। एजेंसी ने कहा कि मीडिया में चल रही अटकलों और पायलटों को दोषी ठहराने वाली खबरों के कारण कई गवाह खुलकर सहयोग करने से बच रहे हैं, जिससे जांच प्रभावित हो रही है।

 

दोनों पायलटों का अनुभव कैसा था?

दुर्घटनाग्रस्त विमान के कप्तान कैप्टन सुमीत सभरवाल 56 वर्ष के थे। उनके पास एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस था, जो मई 2026 तक वैध था। उन्हें बोइंग 787, बोइंग 777 और एयरबस A310 जैसे विमानों को कमांड करने की अनुमति प्राप्त थी। उनके पास कुल 15,638 घंटे का उड़ान अनुभव था, जिसमें 8,596 घंटे केवल बोइंग 787 पर थे।

विमान के सह-पायलट क्लाइव कुंदर 32 वर्ष के थे। उनके पास 2020 में जारी कमर्शियल पायलट लाइसेंस था, जो सितंबर 2025 तक वैध था। उन्होंने कुल 3,403 घंटे उड़ान भरी थी, जिनमें 1,128 घंटे बोइंग 787 के सह-पायलट के रूप में थे। उन्होंने पहले एयरबस A320 उड़ाई थी और बाद में बोइंग 787 बेड़े में शामिल हुए थे।

दोनों पायलटों का अनुभव जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन AAIB ने अब तक किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया है।

 

अंतिम रिपोर्ट कब आएगी?

AAIB ने अदालत को बताया कि जांच पूरी होने के बाद पहले अंतिम रिपोर्ट का एक ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। यह ड्राफ्ट उन सभी देशों और एजेंसियों को भेजा जाएगा जो अंतरराष्ट्रीय विमान दुर्घटना जांच नियमों के तहत इस जांच में भाग ले रही हैं।

इनमें अमेरिका का National Transportation Safety Board (NTSB) भी शामिल है क्योंकि दुर्घटनाग्रस्त विमान बोइंग द्वारा निर्मित था।

सभी पक्षों की टिप्पणियां प्राप्त होने के बाद अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी। वर्तमान समय-सीमा के अनुसार यह रिपोर्ट अक्टूबर 2026 के आसपास जारी हो सकती है, हालांकि तकनीकी विश्लेषण पूरा होने पर ही इसकी अंतिम तारीख तय होगी।

FAQ

1. एयर इंडिया विमान दुर्घटना की जांच किस चरण में पहुंची है?

एयर इंडिया विमान दुर्घटना की जांच अब अंतिम विश्लेषण (Final Analysis) चरण में पहुंच चुकी है। Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) ने कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) का ट्रांसक्रिप्ट तैयार कर लिया है, मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी पूरी कर ली है और तकनीकी, मानव व्यवहार तथा संगठनात्मक पहलुओं का अंतिम विश्लेषण कर रहा है। कुछ बाहरी तकनीकी जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट का मसौदा तैयार किया जाएगा।

 

2. AAIB क्या है?

Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत काम करने वाली वह एजेंसी है, जो देश में होने वाली विमान दुर्घटनाओं और गंभीर घटनाओं की स्वतंत्र जांच करती है। इसका उद्देश्य दोष तय करना नहीं, बल्कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा संबंधी सिफारिशें देना होता है।

 

3. मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी (Psychological Autopsy) क्या होती है?

मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी एक वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यक्ति की दुर्घटना या मृत्यु से पहले की मानसिक स्थिति, व्यवहार, तनाव, निर्णय लेने की क्षमता और कार्य परिस्थितियों का अध्ययन किया जाता है। इसके लिए परिवार, सहकर्मियों, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध जानकारियों का विश्लेषण किया जाता है। इसका उद्देश्य किसी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार से जुड़े संभावित कारणों को समझना होता है।

 

4. एयर इंडिया दुर्घटना की जांच कौन कर रहा है?

इस दुर्घटना की जांच भारत का Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) कर रहा है। जांच में अमेरिका के National Transportation Safety Board (NTSB), विमान निर्माता Boeing, इंजन निर्माता GE Aerospace और अन्य अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी तकनीकी सहयोग दे रहे हैं, जैसा कि अंतरराष्ट्रीय विमान दुर्घटना जांच नियमों में प्रावधान है।

 

5. अंतिम जांच रिपोर्ट कब जारी हो सकती है?

AAIB ने अदालत में बताया है कि शेष जांच कार्य अगले कुछ सप्ताह में पूरे होने की उम्मीद है। इसके बाद अक्टूबर 2026 के आसपास अंतिम रिपोर्ट का मसौदा (Draft Final Report) तैयार किया जाएगा। इस मसौदे को संबंधित देशों और एजेंसियों की टिप्पणियों के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी।

 

6. दुर्घटना के संभावित कारण क्या बताए जा रहे हैं?

फिलहाल दुर्घटना का कोई आधिकारिक कारण घोषित नहीं किया गया है। शुरुआती जांच में कॉकपिट रिकॉर्डिंग, फ्लाइट डेटा, इंजन मॉनिटरिंग यूनिट, तकनीकी सिस्टम, मानव व्यवहार और संगठनात्मक प्रक्रियाओं समेत सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। मीडिया में पायलट की कार्रवाई और ईंधन आपूर्ति से जुड़े दावे सामने आए हैं, लेकिन AAIB ने स्पष्ट कहा है कि अंतिम रिपोर्ट जारी होने से पहले किसी भी संभावित कारण को सही या अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।