CJP Parliament March: संसद मार्च से पहले दिल्ली में बवाल! पुलिस ने क्यों किया लाठीचार्ज?

CJP Parliament March

दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP Parliament March को लेकर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रम देखने को मिला। हजारों प्रदर्शनकारी ‘चलो संसद’ मार्च के लिए इकट्ठा हुए, जिसके बाद दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर यह विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था।

आखिर क्या है 'Chalo Sansad' मार्च?

Cockroach Janta Party (CJP) ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ‘चलो संसद’ मार्च का आह्वान किया था। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य NEET समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाना था। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

CJP Parliament March
Image Source: ANI

CJP Parliament March के दौरान दिल्ली में क्या हुआ?

सोमवार सुबह हजारों की संख्या में CJP समर्थक दिल्ली की सड़कों पर उतरे। दिल्ली पुलिस ने पहले ही इस मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया था और कई इलाकों में धारा 163 (पूर्व में धारा 144 जैसी निषेधात्मक व्यवस्था) के तहत बड़े जमावड़ों पर रोक लगा दी गई थी।इसके बावजूद प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई।

दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति किसी भी प्रकार की रैली, मार्च या पांच से अधिक लोगों के अनधिकृत जमावड़े की अनुमति नहीं है। पुलिस ने नागरिकों से कानून का पालन करने और केवल निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर ही विरोध प्रदर्शन करने की अपील की।सुरक्षा कारणों से केंद्रीय दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गईं। इसके अलावा राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और सेवा तीर्थ समेत पांच मेट्रो स्टेशनों को भी अगले आदेश तक बंद रखा गया।

कौन हैं Cockroach Janta Party और क्यों चर्चा में है?

Cockroach Janta Party (CJP) की शुरुआत मई 2026 में अभिजीत दिपके ने एक व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन के रूप में की थी। यह संगठन सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुआ और लाखों लोगों का समर्थन हासिल करने में सफल रहा।अभिजीत दिपके अमेरिका से भारत लौटकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। इस आंदोलन को कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं का समर्थन भी मिला है।

 

सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़े 

प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। हालांकि स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई।अस्पताल से जारी अपने हस्तलिखित संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका अनशन तब तक समाप्त नहीं होगा जब तक सरकार कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की खामियों की जिम्मेदारी नहीं लेती या सांसद इस मुद्दे को संसद में उठाने का भरोसा नहीं देते।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?

  • NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
  • शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार।
  • पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय की जाए।
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए।

 

निष्कर्ष

CJP Parliament March ने एक बार फिर देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर बहस को तेज कर दिया है। दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की मांगों ने इस मुद्दे को संसद के मानसून सत्र के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष इस मामले पर क्या रुख अपनाते हैं।

FAQs:

यह NEET समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आयोजित एक विरोध मार्च है, जिसे Cockroach Janta Party ने बुलाया था।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, मार्च के लिए अनुमति नहीं दी गई थी और प्रदर्शनकारी निषेधात्मक आदेशों का उल्लंघन कर रहे थे।

नहीं। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से इस मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

सोनम वांगचुक शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं और उन्होंने भूख हड़ताल भी की थी।

कई मेट्रो स्टेशनों को बंद किया गया, मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाई गई और संसद क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए।