Hezbollah Israel Ceasefire: क्या अमेरिकी दबाव में माने नेतन्याहू? ट्रंप के दावे ने बढ़ाए नए सवाल

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने Hezbollah Israel Ceasefire को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने इजरायली नेतृत्व को हिजबुल्लाह के साथ युद्धविराम का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया था। यह बयान ऐसे समय आया है जब इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लेबनान मोर्चे पर नया युद्धविराम लागू हुआ है। हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की थी या नहीं, लेकिन उनके बयान ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिका की कूटनीतिक पहल इस समझौते में अहम रही।

 

क्या है Hezbollah Israel Ceasefire? 

Hezbollah Israel Ceasefire इजरायल और लेबनान स्थित हिजबुल्लाह के बीच हुआ युद्धविराम है, जो अमेरिका और कतर की मध्यस्थता के बाद लागू हुआ। समझौते का उद्देश्य सीमा पर बढ़ती हिंसा को रोकना है, हालांकि दोनों पक्षों ने साफ किया है कि यदि हमला हुआ तो वे जवाबी कार्रवाई करेंगे।

 

ट्रंप ने क्या दावा किया?

NBC News को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजरायली नेतृत्व से युद्धविराम की कोशिशों का समर्थन करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम अच्छी बात है और इसे उन्होंने सोने पर सुहागा बताया।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने सीधे बेंजामिन नेतन्याहू से बात की थी, तो उन्होंने इसका सीधा जवाब नहीं दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि उनके और नेतन्याहू के रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं।

 

ट्रंप ने कहा,

“कभी-कभी शांत रहने और समझदारी से काम लेने की जरूरत होती है।”

ट्रंप का कहना है कि लेबनान में बढ़ती हिंसा से ईरान के साथ संभावित शांति प्रयास प्रभावित हो सकते थे, इसलिए उन्होंने युद्धविराम का समर्थन किया।

 

Hezbollah Israel Ceasefire कैसे हुआ?

CNN की रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम शुक्रवार सुबह लागू हुआ।

राजनयिक सूत्रों के मुताबिक

  • अमेरिका और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
  • एक अन्य सूत्र के अनुसार ईरान ने भी समझौते को आसान बनाने में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई।
  • दोनों पक्षों ने संघर्ष रोकने पर सहमति जताई।
  • हालांकि यह पूर्ण शांति समझौता नहीं बल्कि युद्धविराम है।
  • इजरायल ने साफ किया- सेना पीछे नहीं हटेगी

युद्धविराम के बावजूद इजरायल ने संकेत दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान के तथाकथित सिक्योरिटी जोन में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, “अगर हम पर हमला हुआ तो हम जवाब देंगे।” यानी युद्धविराम के बावजूद तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

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हिजबुल्लाह ने भी रखी अपनी शर्त

हिजबुल्लाह के संसदीय गुट Loyalty to the Resistance के सदस्य इब्राहिम अल-मौसावी ने कहा कि संगठन युद्धविराम का पालन करेगा, लेकिन केवल तब तक जब तक इजरायल भी समझौते की शर्तों का सम्मान करेगा।

इससे स्पष्ट है कि दोनों पक्ष फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

चार सैनिकों की मौत के बाद नेतन्याहू का कड़ा संदेश

युद्धविराम से ठीक पहले लेबनान में चार इजरायली सैनिकों की मौत हुई थी।

इसके बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि हिजबुल्लाह ने युद्धविराम का उल्लंघन किया था और इसी कारण उन्होंने इजरायली सेना (IDF) को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए, यानी सैन्य स्तर पर इजरायल अब भी आक्रामक रुख बनाए हुए है।

 

क्या सचमुच अमेरिकी दबाव में माना इजरायल?

फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि इजरायल केवल अमेरिकी दबाव की वजह से युद्धविराम पर राजी हुआ।

तथ्य यह हैं:

  • ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने युद्धविराम का समर्थन करने के लिए इजरायली नेतृत्व को प्रोत्साहित किया।
  • उन्होंने यह नहीं कहा कि नेतन्याहू ने उनके कहने पर ही समझौता किया।
  • इजरायल सरकार ने भी ऐसा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है कि अमेरिकी दबाव निर्णायक कारण था।

इसलिए यह कहना कि “नेतन्याहू अमेरिकी दबाव में झुक गए” फिलहाल उपलब्ध तथ्यों से साबित नहीं होता। इसे ट्रंप का राजनीतिक दावा माना जाएगा, न कि स्थापित तथ्य।

 

निष्कर्ष

Hezbollah Israel Ceasefire फिलहाल सीमा पर हिंसा कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि युद्धविराम लागू हो चुका है, लेकिन इजरायल और हिजबुल्लाह दोनों ने साफ कर दिया है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा। वहीं डोनाल्ड ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने युद्धविराम के लिए इजरायल को प्रेरित किया, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह युद्धविराम कितना टिकाऊ साबित होता है और क्या क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में कोई ठोस प्रगति होती है।

 

FAQs

  1. Hezbollah Israel Ceasefire क्या है?

यह इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लेबनान सीमा पर लागू किया गया युद्धविराम है, जिसका उद्देश्य सीमा पर हिंसा रोकना है।

 

  1. ट्रंप ने क्या दावा किया?

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजरायली नेतृत्व को युद्धविराम का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया था, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्होंने सीधे नेतन्याहू से बात की थी या नहीं।

 

  1. क्या अमेरिका ने मध्यस्थता की?

हाँ। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और कतर ने युद्धविराम समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

 

  1. क्या इजरायल लेबनान से अपनी सेना हटाएगा?

नहीं। इजरायली अधिकारियों के अनुसार सेना दक्षिणी लेबनान के सिक्योरिटी जोन में बनी रहेगी।

 

  1. क्या अमेरिकी दबाव में ही युद्धविराम हुआ?

फिलहाल इसका कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है। ट्रंप ने ऐसा दावा किया है, लेकिन इजरायल सरकार ने इसकी पुष्टि नहीं की है।