India Gas Demand : मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज संकट के बीच भारत की प्राकृतिक गैस मांग (India Gas Demand) जून 2026 में तेजी से सुधरकर 197 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (mmscmd) पहुंच गई। Equirus की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मई की तुलना में 7% और पिछले साल के जून से 2% अधिक है। खास बात यह है कि गैस की बढ़ती जरूरत पूरी करने में आयातित LNG की भूमिका तेजी से बढ़ी है। मई-जुलाई के दौरान भारत ने करीब 7.08 मिलियन टन LNG आयात किया, जबकि कतर से आयात 91% घट गया और अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LNG सप्लायर बन गया। इसी बीच LPG के मामले में भी अमेरिका की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।
जून में गैस की खपत 7% बढ़ी, आयात पर निर्भरता 56% हुई
Equirus के अनुसार, जून में भारत की कुल प्राकृतिक गैस खपत 197 mmscmd रही। मई के मुकाबले इसमें 7% और जून 2025 के मुकाबले 2% की बढ़ोतरी हुई।
अगर बिजली क्षेत्र की खपत को अलग कर दें तो गैस की मांग 176 mmscmd रही। इसमें महीने-दर-महीने 7% और सालाना आधार पर 4% की वृद्धि हुई। इससे पता चलता है कि गैस की मांग सिर्फ पावर सेक्टर तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूसरे उद्योगों में भी खपत बढ़ी है।
इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह आयातित गैस रही। जून में LNG की खपत 110 mmscmd पहुंच गई, जो मई से 13% और पिछले साल के मुकाबले 10% ज्यादा है।
दूसरी ओर, घरेलू गैस की आपूर्ति महीने-दर-महीने 87 mmscmd पर स्थिर रही, लेकिन सालाना आधार पर इसमें 8% की गिरावट दर्ज हुई। इसका सीधा असर भारत की आयात निर्भरता पर पड़ा और जून में देश की गैस जरूरत का करीब 56% हिस्सा आयात से पूरा हुआ।

मई का आंकड़ा पहले से ज्यादा निकला, गैस रिकवरी और मजबूत हुई
Equirus ने मई के आंकड़ों में भी बड़ा संशोधन किया है। पहले मई में गैस की खपत 169 mmscmd बताई गई थी, जिसे संशोधित करके 184 mmscmd कर दिया गया।
इसी तरह मई में LNG की खपत का आंकड़ा भी पहले के 83 mmscmd से बढ़ाकर 97 mmscmd कर दिया गया।
इस संशोधन से गैस मांग की तस्वीर बदल गई है। यानी जून में हुई रिकवरी अचानक नहीं हुई, बल्कि मई में ही मांग पहले के अनुमान से कहीं ज्यादा मजबूत थी।
सिटी गैस और रिफाइनरी से बढ़ी मांग
जून में गैस की मांग लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ी। इसमें City Gas Distribution (CGD), अन्य औद्योगिक उपयोग और रिफाइनरी सेक्टर प्रमुख रहे।
CGD सेक्टर की खपत महीने-दर-महीने 2.3 mmscmd बढ़कर 58 mmscmd हो गई। दूसरे उपयोगकर्ताओं की मांग 3.9 mmscmd बढ़कर 41 mmscmd रही।
रिफाइनरी सेक्टर में गैस की खपत 2.6 mmscmd बढ़कर 15 mmscmd पहुंच गई। इस दौरान रिफाइनरी के आयात में भी 25% की बढ़ोतरी हुई।
फर्टिलाइजर और पावर सेक्टर की मांग में भी सुधार हुआ। पेट्रोकेमिकल सेक्टर की गैस खपत बढ़कर 7 mmscmd हुई, लेकिन यह पिछले साल के स्तर से अभी भी काफी कम रही।
जुलाई में मांग मजबूत, अगस्त में थोड़ी नरमी का अनुमान
Equirus का अनुमान है कि जुलाई में भारत की गैस मांग मजबूत बनी रह सकती है। हालांकि, जून के मुकाबले इसमें थोड़ी नरमी आ सकती है क्योंकि पावर सेक्टर से गैस की मांग कम रहने की संभावना है।
अगस्त में मांग और कमजोर हो सकती है। रिपोर्ट में इसके पीछे Morbi से जुड़ी खपत में कमी और मौसमी कारणों को बताया गया है।
इसका मतलब है कि फिलहाल गैस की मांग में रिकवरी बनी हुई है, लेकिन आने वाले महीनों में अलग-अलग सेक्टर की जरूरत के हिसाब से इसमें उतार-चढ़ाव हो सकता है।
कतर से LNG आयात 91% घटा, अमेरिका सबसे बड़ा सप्लायर बना
भारत के LNG आयात के स्रोत में पिछले कुछ महीनों में बड़ा बदलाव आया है। मई से जुलाई 2026 के बीच भारत ने करीब 7.08 मिलियन टन LNG आयात किया, जो पिछले साल की समान अवधि से करीब 15% ज्यादा है।
इस दौरान कतर से LNG की सप्लाई में भारी गिरावट आई। कतर से भारत का आयात सालाना आधार पर 91% घटकर सिर्फ 0.23 मिलियन टन रह गया।
इसके उलट अमेरिका से LNG की सप्लाई तेजी से बढ़ी। मई-जुलाई के दौरान अमेरिका ने करीब 2.19 मिलियन टन LNG भारत को भेजा और वह भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया।
नाइजीरिया करीब 1.31 मिलियन टन के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ओमान से LNG सप्लाई में सबसे तेज बढ़ोतरी हुई और इसमें 341% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
इस बदलाव का मतलब है कि भारत ने LNG की सप्लाई के लिए कतर पर निर्भरता कम करते हुए अमेरिका, अफ्रीका और गैर-कतरी मिडिल ईस्ट के सप्लायर्स की तरफ खरीद बढ़ाई है।

होर्मुज संकट के बाद LPG की सप्लाई में भी अमेरिका की बड़ी भूमिका
LNG के साथ-साथ LPG के मामले में भी भारत ने अपने सप्लाई स्रोतों में बड़ा बदलाव किया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को CII के कार्यक्रम में कहा कि होर्मुज संकट के बाद अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बन गया है। उनके मुताबिक, इस समय भारत की जरूरत की करीब 67% LPG सप्लाई अमेरिका से आ रही है।
भारत पहले LPG के लिए मुख्य रूप से खाड़ी देशों पर निर्भर था। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में संसद में बताया था कि संकट से पहले भारत अपनी LPG जरूरत का करीब 60% हिस्सा कतर, UAE, सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आयात करता था और करीब 40% घरेलू उत्पादन से पूरा होता था। संकट के बाद अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से खरीद बढ़ाई गई।
भारत ने 2026 के लिए अमेरिका से करीब 2.2 मिलियन टन प्रति वर्ष LPG खरीदने का एक साल का स्ट्रक्चर्ड कॉन्ट्रैक्ट भी किया था, जो उस समय भारत के सालाना LPG आयात का करीब 10% था।
भारत ने 27 देशों तक फैलाया क्रूड सप्लाई नेटवर्क
होर्मुज संकट के दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) पर भी सवाल उठे, क्योंकि युद्ध से पहले देश अपने करीब 50% क्रूड ऑयल और करीब 90% LPG के लिए इस समुद्री रास्ते पर निर्भर था।
पुरी के मुताबिक, संकट के बाद भारत ने अपने क्रूड सप्लाई स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिया।
सरकार ने घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने के साथ वैकल्पिक देशों से आयात भी बढ़ाया। पुरी ने यह भी कहा कि भारत के पास हमेशा करीब 60 दिनों का क्रूड ऑयल कवर मौजूद रहा।
उन्होंने दावा किया कि होर्मुज संकट के बावजूद देश के 1.07 लाख से ज्यादा फ्यूल आउटलेट्स में से कोई भी पंप सूखा नहीं रहा। 2014 में देश में करीब 52,000 फ्यूल आउटलेट्स थे।
ग्लोबल LNG बाजार में भारत के लिए नई चुनौती
भारत ने LNG आयात बढ़ाकर घरेलू गैस की कमी को काफी हद तक पूरा किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से आगे चुनौती भी बढ़ सकती है।
Equirus के मुताबिक, मई से जुलाई के बीच भारत ने करीब 7 मिलियन टन LNG आयात किया, जो पिछले साल की समान अवधि से 15% अधिक है। लेकिन इसी समय चीन की LNG खरीद बढ़ रही है, जिससे लचीले LNG कार्गो (Flexible Cargoes) के लिए भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
जुलाई में एशियाई स्पॉट LNG कीमतें 20 डॉलर प्रति MMBtu से ऊपर बनी हुई थीं। इससे भारत के लिए बाजार से LNG खरीदना महंगा हो सकता है।
यूरोप में गैस स्टोरेज भी ऐतिहासिक औसत से नीचे है। ऐसे में एशिया और यूरोप दोनों तरफ से LNG की मांग बनी रहने पर भारत को अतिरिक्त कार्गो के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।
हालांकि, दुनियाभर में नए LNG प्रोजेक्ट शुरू होने और मौजूदा प्रोजेक्ट्स में उत्पादन बढ़ने से आगे चलकर बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है। इससे LNG कार्गो की उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
फिर भी शिपिंग की समस्या, प्रतिबंध (Sanctions) और भुगतान से जुड़े जोखिम यह तय करने में अहम रहेंगे कि अतिरिक्त LNG भारत जैसे खरीदारों तक कितनी आसानी और किस कीमत पर पहुंचती है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए ₹84,084 करोड़ का समुद्र मंथन कार्यक्रम
सरकार ने लंबे समय में आयात पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹84,084 करोड़ के ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम को मंजूरी दी है।
यह योजना गहरे समुद्र यानी Deepwater और Ultra-Deepwater क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। इसका उद्देश्य घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना और विदेशी तेल-गैस पर निर्भरता कम करना है।
इस कार्यक्रम के तहत सरकार निजी कंपनियों और अन्य ऊर्जा कंपनियों को गहरे समुद्र में खोज और ड्रिलिंग के लिए प्रोत्साहित करेगी। ऐसे क्षेत्रों में खोज का खर्च और जोखिम जमीन के मुकाबले काफी ज्यादा होता है, इसलिए सरकारी सहायता का प्रावधान किया गया है।
सरकार के अनुसार, आर्थिक सहायता प्रति कुएं ₹650 करोड़ तक या ड्रिलिंग लागत के 50% तक, जो भी कम हो, दी जा सकती है।
इस योजना का व्यापक उद्देश्य सिर्फ तत्काल गैस जरूरत पूरी करना नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में भारत की घरेलू ऊर्जा क्षमता बढ़ाना और आयात पर निर्भरता घटाना भी है।
भारत के लिए LNG महंगा हुआ तो क्या असर पड़ेगा
भारत की गैस मांग बढ़ रही है और घरेलू उत्पादन इसके मुकाबले पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ रहा। ऐसे में आयातित LNG की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
अगर अंतरराष्ट्रीय LNG कीमतें ऊंची रहती हैं तो भारत के लिए गैस खरीद की लागत बढ़ सकती है। इसका असर उन उद्योगों पर पड़ सकता है जो प्राकृतिक गैस को ईंधन या कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
दूसरी तरफ, अगर वैश्विक LNG सप्लाई बढ़ती है और कीमतों में नरमी आती है तो भारत के लिए आयात करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
फिलहाल Equirus का आकलन है कि जुलाई में भारत की गैस मांग मजबूत रहने की संभावना है, जबकि अगस्त में कुछ सेक्टरों की खपत कम होने से थोड़ी नरमी आ सकती है।
FAQs
1. भारत की गैस मांग प्री-डिसरप्शन स्तर पर क्यों लौट आई है?
जून 2026 में भारत की कुल प्राकृतिक गैस खपत 197 mmscmd पहुंच गई। CGD, रिफाइनरी, फर्टिलाइजर, पावर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में मांग बढ़ी। आयातित LNG की उपलब्धता बढ़ने से भी घरेलू मांग को पूरा करने में मदद मिली।
2. भारत में प्राकृतिक गैस की मांग किन क्षेत्रों से बढ़ रही है?
जून में CGD सेक्टर सबसे बड़ा ग्राहक रहा और इसकी खपत 58 mmscmd रही। अन्य उपयोगकर्ताओं की मांग 41 mmscmd और रिफाइनरी की खपत 15 mmscmd रही। फर्टिलाइजर और पावर सेक्टर में भी सुधार हुआ।
3. LNG क्या है और भारत के लिए इसका क्या महत्व है?
LNG यानी Liquefied Natural Gas (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) प्राकृतिक गैस को बहुत कम तापमान पर तरल बनाकर जहाजों से दूसरे देशों तक पहुंचाने का तरीका है। भारत में घरेलू गैस उत्पादन जरूरत से कम होने के कारण LNG आयात देश की गैस सप्लाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
4. वैश्विक LNG प्रतिस्पर्धा क्यों बढ़ रही है?
चीन की LNG खरीद बढ़ने से एशिया में उपलब्ध फ्लेक्सिबल कार्गो के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। साथ ही यूरोप में गैस स्टोरेज ऐतिहासिक औसत से नीचे है। इससे LNG की मांग और कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
5. LNG की वैश्विक कीमतों का भारत पर क्या प्रभाव पड़ता है?
भारत अपनी गैस जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय LNG कीमत बढ़ने पर आयात की लागत बढ़ सकती है। जुलाई में एशियाई स्पॉट LNG कीमतें 20 डॉलर प्रति MMBtu से ऊपर थीं।
6. Equirus की रिपोर्ट में भारत की गैस मांग को लेकर क्या कहा गया है?
रिपोर्ट के मुताबिक जून में भारत की गैस खपत 197 mmscmd रही, जो महीने-दर-महीने 7% और सालाना 2% अधिक है। जुलाई में मांग मजबूत रहने का अनुमान है, जबकि अगस्त में Morbi से जुड़ी खपत और मौसमी कारणों से इसमें कुछ नरमी आ सकती है।
7. भारत ने LNG और LPG के लिए सप्लायर क्यों बदले हैं?
होर्मुज और मिडिल ईस्ट संकट के कारण खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा सप्लाई पर जोखिम बढ़ा। इसके बाद भारत ने अमेरिका, नाइजीरिया, ओमान और अन्य देशों से खरीद बढ़ाई। इसी वजह से LNG और LPG दोनों के सप्लाई नेटवर्क में बदलाव आया है।
8. क्या भारत अभी भी ऊर्जा आयात पर निर्भर है?
हां। जून में प्राकृतिक गैस की आयात निर्भरता करीब 56% रही। इसलिए सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ आयात के स्रोतों को भी अलग-अलग देशों में बांट रही है। गहरे समुद्र में तेल-गैस खोज के लिए ₹84,084 करोड़ का समुद्र मंथन कार्यक्रम भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

