Maharashtra EV Mandate: महाराष्ट्र में Swiggy-Zomato और Zepto पर नए नियमों की तैयारी, जानिए EV से लेकर 2% वेलफेयर लेवी तक क्या होगा बदलाव? 

Maharashtra EV Mandate

Maharashtra EV Mandate: महाराष्ट्र में अब Swiggy, Zomato, Zepto और Blinkit जैसी फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए नियम और सख्त हो सकते हैं। राज्य सरकार के परिवहन विभाग ने डिलीवरी और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को भी बाइक-टैक्सी रेगुलेशन के दायरे में लाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत इन कंपनियों को इलेक्ट्रिक वाहन यानी EV से डिलीवरी कराने, वाहनों और ड्राइवरों की GPS ट्रैकिंग, बीमा और राज्य के तय किराए से जुड़े नियमों का पालन करना पड़ सकता है।

सबसे अहम प्रस्ताव ड्राइवर वेलफेयर फंड का है। इसके तहत हर राइड के किराए का 2% हिस्सा इस फंड में जमा करने का प्रावधान रखा गया है। इस रकम का इस्तेमाल ड्राइवरों की पेंशन, दुर्घटना बीमा, EV खरीदने के लिए लोन और उनके बच्चों की शिक्षा में मदद जैसी सुविधाओं के लिए किया जा सकता है।

हालांकि, ये नियम अभी लागू नहीं हुए हैं। प्रस्ताव को महाराष्ट्र के कानून एवं न्याय विभाग के पास कानूनी जांच के लिए भेजा गया है। मंजूरी के बाद ही इन्हें लागू किया जा सकेगा।

 

अब डिलीवरी ऐप भी बाइक-टैक्सी नियमों के दायरे में आ सकते हैं

महाराष्ट्र सरकार के परिवहन विभाग ने मौजूदा महाराष्ट्र बाइक-टैक्सी नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अभी ये नियम मुख्य रूप से राइड-हेलिंग एग्रीगेटर्स पर लागू होते हैं। प्रस्ताव पास होने पर ‘डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर’ की नई श्रेणी इसमें जोड़ी जाएगी।

इस श्रेणी में ऐसे संस्थान आएंगे जो सामान, पार्सल या पैकेज पहुंचाने के लिए वाहनों का बेड़ा चलाते या संचालित करते हैं। इसी वजह से Swiggy, Zomato, Blinkit और Zepto जैसे प्लेटफॉर्म प्रस्तावित व्यवस्था के दायरे में आ सकते हैं।

इससे पहली बार महाराष्ट्र में फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियों के वाहन संचालन को राज्य स्तर पर एक अलग परिवहन नियामक ढांचे के तहत लाने की कोशिश होगी। अभी इन कारोबारों पर मुख्य रूप से केंद्रीय कानून लागू होते हैं, जिनमें Consumer Protection Act, 2019, Consumer Protection (E-Commerce) Rules, 2020 और Code on Social Security, 2020 शामिल हैं।

EV से डिलीवरी, GPS ट्रैकिंग और बीमा भी जरूरी हो सकता है

प्रस्तावित नियमों में डिलीवरी प्लेटफॉर्म के लिए EV को लेकर सख्त व्यवस्था रखी गई है। मंजूरी मिलने पर संबंधित कंपनियों को इलेक्ट्रिक वाहन आधारित फ्लीट चलानी पड़ सकती है।

इसके साथ वाहनों और ड्राइवरों की GPS के जरिए निगरानी, बीमा कवर और परिवहन प्राधिकरण यानी Regional Transport Authority द्वारा तय किराए से जुड़े नियमों का पालन करना होगा। प्लेटफॉर्म को एक Unique Licence Identification Number यानी विशिष्ट लाइसेंस पहचान संख्या भी हासिल करनी पड़ सकती है।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने प्रस्ताव की पुष्टि करते हुए कहा है कि 15 किलोमीटर से कम दूरी वाली यात्राओं पर चलने वाले वाहनों को प्रस्तावित नीति के दायरे में लाया जाएगा। EV और अन्य अनुपालन संबंधी शर्तें संबंधित एग्रीगेटर्स पर लागू होंगी, अगर संशोधन मंजूर हो जाते हैं।

 

हर राइड के किराए से 2% जाएगा ड्राइवर वेलफेयर फंड में

प्रस्ताव में ड्राइवरों के लिए वेलफेयर फंड बनाने की भी बात कही गई है। प्लेटफॉर्म को हर राइड के किराए का 2% इस फंड में जमा करना होगा।

इस फंड का इस्तेमाल ड्राइवरों को सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं देने में किया जा सकता है। इसमें पेंशन लाभ, दुर्घटना बीमा, इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए लोन और ड्राइवरों के बच्चों की शिक्षा के लिए सहायता शामिल है।

यानी प्रस्ताव सिर्फ कंपनियों के वाहन और लाइसेंस को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है। इसका एक बड़ा हिस्सा उन लाखों लोगों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा है, जो ऐप आधारित डिलीवरी और प्लेटफॉर्म इकॉनमी में काम करते हैं।

 

सरकार के पास डिलीवरी कंपनियों की निगरानी का अधिकार भी बढ़ेगा

महाराष्ट्र सरकार का तर्क है कि डिलीवरी और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म राज्य में कारोबार तो करते हैं, लेकिन अभी बाइक-टैक्सी नियमों के दायरे में नहीं आते। इससे परिवहन विभाग के लिए उनके वाहन संचालन की निगरानी करना और किसी विवाद या शिकायत की स्थिति में जवाबदेही तय करना मुश्किल होता है।

नए प्रस्ताव का मकसद इसी अंतर को खत्म करना है। अगर डिलीवरी प्लेटफॉर्म इस ढांचे में आते हैं, तो सरकार के पास उनके वाहनों, ड्राइवरों और संचालन से संबंधित ज्यादा स्पष्ट नियामक अधिकार होंगे।

यह व्यवस्था महाराष्ट्र में पहले से लागू हो रहे ऐप-आधारित परिवहन नियमों के व्यापक ढांचे से भी जुड़ती है। राज्य ने जुलाई 2026 में Maharashtra Motor Vehicle Aggregator Rules, 2026 को नोटिफाई किया था। इन नियमों में एग्रीगेटर्स के लिए लाइसेंस, Unique Licence Identification Number, किराया नियंत्रण, GPS ट्रैकिंग, ग्राहक शिकायत व्यवस्था और ड्राइवर वेलफेयर जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

 

रियल टाइम में दिखेगा कौन सा वाहन कहां चल रहा है

महाराष्ट्र के नए एग्रीगेटर नियमों में राज्य परिवहन आयुक्त द्वारा विकसित एक समर्पित पोर्टल के जरिए बाइक-टैक्सी वाहनों की रियल टाइम निगरानी का प्रावधान है।

अगर इसी तरह की व्यवस्था डिलीवरी सेवाओं पर भी लागू की जाती है, तो परिवहन विभाग को ऐप आधारित डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर चलने वाले वाहनों और ड्राइवरों की ज्यादा सीधी निगरानी मिल सकती है।

इसका फायदा यह हो सकता है कि किसी वाहन की लोकेशन, ड्राइवर और संचालन की जानकारी जरूरत पड़ने पर सरकारी सिस्टम के जरिए देखी जा सके। इससे शिकायतों और विवादों के निपटारे में भी मदद मिल सकती है।

 

स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की नीति से भी जुड़ा है फैसला

डिलीवरी प्लेटफॉर्म को रेगुलेट करने का प्रस्ताव महाराष्ट्र सरकार की स्थानीय रोजगार बढ़ाने की नीति से भी जुड़ा है।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने पहले विधानसभा में कहा था कि बाइक-टैक्सी ड्राइवरों के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट और सरकार की ओर से जारी पब्लिक सर्विस व्हीकल बैज जैसी शर्तें लाई जाएंगी। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है।

डिलीवरी प्लेटफॉर्म को भी राज्य के परिवहन ढांचे में शामिल करने से सरकार को इस क्षेत्र में काम करने वाले ड्राइवरों के लिए नियम और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का रास्ता मिल सकता है।

 

प्रस्ताव अभी कानून विभाग के पास, अंतिम फैसला बाकी

परिवहन विभाग ने जो बदलाव प्रस्तावित किए हैं, उन्हें अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। प्रस्ताव को राज्य के Law and Judiciary Department के पास कानूनी जांच के लिए भेजा गया है।

इसलिए फिलहाल Swiggy, Zomato, Zepto या Blinkit के सभी डिलीवरी वाहनों पर EV अनिवार्यता या 2% वेलफेयर लेवी लागू नहीं हुई है। आगे सरकार की मंजूरी और नियमों के अंतिम स्वरूप के बाद ही यह साफ होगा कि कौन-कौन से प्लेटफॉर्म और वाहन किस सीमा तक इन शर्तों के तहत आएंगे।

 

दिल्ली और हरियाणा में भी डिलीवरी फ्लीट को EV बनाने की कोशिश

महाराष्ट्र ऐसा पहला राज्य नहीं होगा जो डिलीवरी और राइड-एग्रीगेटर वाहनों के इलेक्ट्रिफिकेशन की दिशा में नियम बना रहा है।

दिल्ली के Motor Vehicle Aggregator and Delivery Service Provider Scheme, 2023 में ऐसे फ्लीट के लिए चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने का प्रावधान है। हरियाणा ने भी Haryana Motor Vehicles (Amendment) Rules, 2026 के तहत डिलीवरी और राइड-एग्रीगेटर वाहनों के धीरे-धीरे इलेक्ट्रिफिकेशन की व्यवस्था की है।

हालांकि, महाराष्ट्र के प्रस्ताव में एक महत्वपूर्ण अंतर है। दिल्ली और हरियाणा के इन ढांचों में महाराष्ट्र की तरह हर राइड के किराए का 2% किसी अलग ड्राइवर वेलफेयर फंड में जमा करने का प्रावधान नहीं है। वहां ड्राइवरों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा मुख्य रूप से व्यापक श्रम कानूनों और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स से जुड़े नियमों के जरिए तय होती है।

 

ग्राहकों और डिलीवरी पार्टनर्स पर क्या असर पड़ेगा

अगर प्रस्तावित नियम मंजूर होते हैं, तो डिलीवरी कंपनियों को अपने वाहन संचालन में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है। EV फ्लीट, GPS निगरानी, बीमा और लाइसेंस जैसी शर्तों से कंपनियों की अनुपालन लागत बढ़ सकती है।

दूसरी तरफ, ड्राइवरों के लिए पेंशन, दुर्घटना बीमा, EV खरीदने का लोन और बच्चों की शिक्षा सहायता जैसी सुविधाएं सामाजिक सुरक्षा को मजबूत कर सकती हैं।

ग्राहकों के लिए इसका सीधा असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां बढ़ी हुई लागत को किस तरह संभालती हैं। अगर कंपनियां इसका कुछ हिस्सा डिलीवरी शुल्क या दूसरे चार्ज में शामिल करती हैं, तो भविष्य में ग्राहकों की लागत बढ़ सकती है। हालांकि, प्रस्तावित नियमों में ऐसा कोई निश्चित ग्राहक शुल्क तय नहीं किया गया है।

 

FAQ

1. महाराष्ट्र में Swiggy, Zomato और Zepto के लिए नया EV नियम क्या है?

महाराष्ट्र सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि डिलीवरी और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को बाइक-टैक्सी नियामकीय ढांचे में लाया जाए और संबंधित वाहनों के लिए EV समेत कई शर्तें लागू की जाएं। अभी यह प्रस्ताव कानूनी जांच के स्तर पर है।

 

2. डिलीवरी कंपनियों पर EV इस्तेमाल करने की अनिवार्यता क्यों प्रस्तावित की गई है?

प्रस्ताव का उद्देश्य डिलीवरी और ऐप आधारित वाहनों के संचालन को राज्य के नियामकीय ढांचे में लाना और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। अंतिम नियमों में इसकी सटीक शर्तें स्पष्ट होंगी।

 

3. Rider Welfare Levy क्या है?

यह प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हर राइड के किराए का 2% हिस्सा ड्राइवर वेलफेयर फंड में जमा करने की व्यवस्था है। इस फंड से पेंशन, दुर्घटना बीमा, EV खरीदने के लिए लोन और ड्राइवरों के बच्चों की शिक्षा में सहायता देने का प्रस्ताव है।

 

4. इस लेवी का भुगतान कौन करेगा?

प्रस्ताव के अनुसार 2% राशि संबंधित डिलीवरी या एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म की ओर से ड्राइवर वेलफेयर फंड में जमा की जाएगी।

 

5. नए नियमों का डिलीवरी पार्टनर्स पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

ड्राइवरों को पेंशन, दुर्घटना बीमा, EV खरीदने के लिए लोन और बच्चों की शिक्षा जैसी प्रस्तावित सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। साथ ही GPS ट्रैकिंग, इंश्योरेंस और अन्य नियमों के कारण उनके काम का नियमन बढ़ सकता है।

 

6. क्या सभी डिलीवरी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलना होगा?

प्रस्ताव में EV-only fleets की बात कही गई है, लेकिन अंतिम रूप से कितने वाहनों पर और किस समयसीमा में यह शर्त लागू होगी, यह अभी तय नहीं है। प्रस्ताव को कानूनी जांच और मंजूरी के बाद ही अंतिम रूप मिलेगा।