‘डेढ़ घंटे तक आसमान में मंडराएगा और फिर करेगा हमला’  –  भारत के आत्मघाती ड्रोन ‘वायु अस्त्र-1’ का सफल परीक्षण

भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में स्वदेशी आत्मघाती ड्रोन ‘वायु अस्त्र-1’ का सफल परीक्षण किया गया। इस आधुनिक ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दुश्मन के इलाके में करीब डेढ़ घंटे तक उड़ान भरते हुए टारगेट पर नजर रख सकता है और सही मौका मिलते ही सटीक हमला कर सकता है।

इस ड्रोन का परीक्षण सिर्फ रेगिस्तान तक सीमित नहीं रहा। उत्तराखंड के जोशीमठ-मलारी क्षेत्र में भी इसे ऊंचे पहाड़ों और बेहद कम तापमान वाले इलाके में परखा गया। दोनों जगहों पर ड्रोन ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। इससे साफ है कि भविष्य के युद्धों में भारतीय सेना अब तेजी से आधुनिक और स्मार्ट हथियारों की तरफ बढ़ रही है।

India suicide drone Vayu Astra-1 successfully tested

रेगिस्तान से पहाड़ तक सफल रहा परीक्षण

‘वायु अस्त्र-1’ का परीक्षण अप्रैल 2026 में दो अलग-अलग इलाकों में किया गया। पहला परीक्षण राजस्थान के पोकरण फायरिंग रेंज में हुआ, जहां इसकी सटीक निशानेबाजी और दुश्मन के सैनिकों या ठिकानों को खत्म करने की क्षमता को जांचा गया। रेतीले धोरों और गर्म मौसम में भी ड्रोन ने बिना किसी परेशानी के काम किया।

दूसरा परीक्षण उत्तराखंड के जोशीमठ-मलारी इलाके में किया गया। यहां 14 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई और बेहद ठंडे मौसम में इसकी उड़ान क्षमता को परखा गया। इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन कम होती है और मौसम बेहद कठिन होता है, लेकिन ड्रोन ने वहां भी लगातार उड़ान भरकर अपनी ताकत दिखाई।

 

पहली ही कोशिश में 100 किलोमीटर दूर टारगेट तबाह

परीक्षण के दौरान ‘वायु अस्त्र-1’ ने पहली ही कोशिश में 100 किलोमीटर दूर मौजूद लक्ष्य को निशाना बनाया। ड्रोन 10 किलोग्राम विस्फोटक लेकर उड़ान भरा था और उसने सीधे टारगेट पर हमला किया।

सबसे खास बात इसका बेहद कम सर्कुलर एरर प्रोबेबल यानी CEP रहा। इसका मतलब है कि ड्रोन लक्ष्य से एक मीटर भी इधर-उधर नहीं भटका। इतनी सटीकता आधुनिक युद्ध में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे कम समय में ज्यादा असरदार हमला किया जा सकता है।

 

क्या है ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ सिस्टम?

‘वायु अस्त्र-1’ को लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम कहा जाता है। आसान भाषा में समझें तो यह ऐसा आत्मघाती ड्रोन है जो पहले आसमान में मंडराता है, टारगेट की पहचान करता है और फिर सही समय देखकर हमला करता है।

यह पारंपरिक मिसाइलों से अलग है। सामान्य मिसाइल छोड़े जाने के बाद सीधे लक्ष्य की तरफ बढ़ती है, लेकिन यह ड्रोन दुश्मन के इलाके में लंबे समय तक रह सकता है। अगर टारगेट बदल जाए तो यह खुद को नए लक्ष्य की तरफ मोड़ सकता है।

 

हवा में ही बदला जा सकता है मिशन

‘वायु अस्त्र-1’ की सबसे आधुनिक खूबियों में से एक इसका स्मार्ट मिशन कंट्रोल सिस्टम है। अगर मिशन के दौरान स्थिति बदल जाए या दुश्मन अपनी जगह बदल ले, तो ड्रोन का रास्ता हवा में ही बदला जा सकता है।

जरूरत पड़ने पर हमला रोका भी जा सकता है। यहां तक कि यदि मिशन पूरी तरह रद्द करना पड़े तो इसे सुरक्षित वापस बेस तक लाया जा सकता है। यानी यह सिर्फ एक बार इस्तेमाल होने वाला सिस्टम नहीं है, बल्कि सही हालात में दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

रात के अंधेरे में भी दुश्मन नहीं बच पाएगा

इस ड्रोन में आधुनिक इन्फ्रारेड कैमरे लगाए गए हैं। इसकी मदद से यह रात के अंधेरे में भी दुश्मन की गाड़ियों, टैंकों और सैनिकों की पहचान कर सकता है।

रात में किए गए परीक्षणों में भी इसने बख्तरबंद वाहनों पर सटीक हमला किया। सेना के लिए यह क्षमता बेहद अहम है, क्योंकि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ दिन में नहीं बल्कि चौबीसों घंटे लड़े जाते हैं।

 

दुश्मन के इलाके में 90 मिनट तक सक्रिय

‘वायु अस्त्र-1’ करीब 90 मिनट तक लगातार आसमान में सक्रिय रह सकता है। इस दौरान यह दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखता है। जैसे ही कोई हलचल दिखती है, यह तुरंत हमला करने में सक्षम है।

युद्ध के समय ऐसी तकनीक सेना को बड़ा फायदा देती है। इससे सैनिकों की जान जोखिम में डाले बिना दुश्मन के ठिकानों पर हमला किया जा सकता है।

 

भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती ताकत

इस ड्रोन को पुणे की निजी रक्षा तकनीक कंपनी ‘नाइब लिमिटेड’ ने तैयार किया है। यह दिखाता है कि अब भारत सिर्फ सरकारी संस्थानों पर निर्भर नहीं है, बल्कि निजी कंपनियां भी रक्षा क्षेत्र में तेजी से आगे आ रही हैं।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी की है। रक्षा निर्माण का आंकड़ा 1.54 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। सरकार लगातार स्वदेशी हथियारों और तकनीकों को बढ़ावा दे रही है।

 

पाकिस्तान के ड्रोन हमलों के बाद बदली रणनीति

भारतीय सेना अब ड्रोन युद्ध को भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती मान रही है। पिछले साल पाकिस्तान की तरफ से हजारों छोटे ड्रोन भेजे गए थे। उनका मकसद भारत की एयर डिफेंस क्षमता को परखना और महंगे मिसाइल सिस्टम को आर्थिक नुकसान पहुंचाना था।

इसी के बाद भारत ने बड़े स्तर पर ड्रोन तकनीक और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर काम तेज किया। अब सेना सस्ते दुश्मन ड्रोन से निपटने के लिए जैमिंग, स्पूफिंग और लेजर आधारित तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है।

 

हर जवान के पास हो सकता है अपना ड्रोन

भारतीय सेना भविष्य में ऐसी व्यवस्था बनाना चाहती है, जहां हर सैनिक को बेसिक ड्रोन ट्रेनिंग दी जाए। सेना की योजना है कि हर कोर में हजारों ड्रोन शामिल किए जाएं।

जानकारों के मुताबिक आने वाले समय में युद्ध सिर्फ बंदूक और टैंकों से नहीं लड़े जाएंगे। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सबसे बड़ा रोल निभाएंगे।

 

अब भारत में ही बन रहा हथियारों का ‘दिल और दिमाग’

पहले मिसाइलों और ड्रोन के कई अहम हिस्से विदेशों से आते थे, लेकिन अब भारत में ही इनके इंजन, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तैयार हो रहे हैं।

भारतीय कंपनियां अब मिसाइल सीकर, इंजन और एडवांस कंट्रोल सिस्टम जैसी तकनीक विकसित कर रही हैं। इससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता तेजी से बढ़ रही है।

 

राफेल मिसाइलों का रखरखाव भी भारत में

इसी बीच भारत ने यूरोपीय रक्षा कंपनी MBDA के साथ भी बड़ा समझौता किया है। इसके तहत राफेल लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाली MICA मिसाइलों का रखरखाव अब भारत में ही किया जाएगा।

इसके लिए देश में मरम्मत और ओवरहॉल सुविधा तैयार की जाएगी। इससे भारत की तकनीकी क्षमता और मजबूत होगी।

 

भविष्य का युद्ध होगा पूरी तरह तकनीकी

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले युद्ध जमीन, आसमान, समुद्र और साइबर दुनिया में एक साथ लड़े जाएंगे। ऐसे में ड्रोन सबसे अहम हथियार बन सकते हैं।

भविष्य में ऐसे ड्रोन भी आ सकते हैं जिन्हें जैम करना मुश्किल होगा और जो बिना GPS के भी काम कर सकेंगे। इसलिए भारत अभी से अपनी तकनीक मजबूत करने में जुटा है।

 

भारत की नई तैयारी का बड़ा संकेत

‘वायु अस्त्र-1’ का सफल परीक्षण सिर्फ एक ड्रोन की कामयाबी नहीं है, बल्कि यह भारत की बदलती सैन्य सोच का संकेत भी है। अब भारत तेजी से ऐसी तकनीकों पर काम कर रहा है जो भविष्य के युद्धों में निर्णायक साबित हो सकती हैं।

रेगिस्तान से लेकर बर्फीले पहाड़ों तक सफल परीक्षण ने साफ कर दिया है कि भारत अब आधुनिक ड्रोन युद्ध की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में ऐसे स्वदेशी सिस्टम भारतीय सेना की ताकत को और ज्यादा बढ़ा सकते हैं।