ITR Filing Rules 2026: इस बार टैक्स रिटर्न भरने से पहले जान लें ये बड़े बदलाव, वरना हो सकती है परेशानी

ITR Filing Rules 2026

ITR Filing Rules 2026: इस बार क्या बदला?

ITR Filing Rules 2026 के तहत वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस बार सरकार ने ITR फॉर्म, फाइलिंग की आखिरी तारीख, F&O ट्रेडिंग के खुलासे और कैपिटल गेन टैक्स रिपोर्टिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अगर आप नौकरीपेशा हैं, बिजनेस करते हैं या शेयर बाजार में निवेश और F&O ट्रेडिंग करते हैं, तो ये बदलाव जानना बेहद जरूरी है।

 

ITR Filing Rules 2026: किस ITR की आखिरी तारीख कब है?

इस साल सबसे बड़ा बदलाव ITR-3 और ITR-4 की फाइलिंग डेडलाइन में हुआ है।

  • ITR-1, ITR-2 (Non-Audit Cases): 31 जुलाई 2026
  • ITR-3 और ITR-4 (Non-Audit Cases): 31 अगस्त 2026

सरकार ने यह अतिरिक्त समय खासकर कारोबारियों, प्रोफेशनल्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को राहत देने के लिए दिया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय समय रहते दस्तावेज तैयार कर लेना बेहतर होगा।

 

ITR फॉर्म में क्याक्या बड़े बदलाव हुए हैं?

इस बार ITR Form Changes के तहत कई नए प्रावधान जोड़े गए हैं।

  • अब दो मकानों (Two House Properties) वाले पात्र करदाता भी ITR-1 या ITR-4 का उपयोग कर सकते हैं।
  • ITR-1 और ITR-4 में Unrealised Rent की जानकारी देने के लिए नया कॉलम जोड़ा गया है।
  • विदेशी रिटायरमेंट अकाउंट रखने वाले रेजिडेंट टैक्सपेयर्स अब ITR-1 और ITR-4 में Section 89A की छूट का दावा नहीं कर पाएंगे।
  • नए फॉर्म में संशोधित Capital Gains Tax दरों के अनुसार रिपोर्टिंग करनी होगी।
  • Section 80GGC के तहत राजनीतिक दल को दिए गए दान पर टैक्स छूट लेने के लिए अब पार्टी का नाम और PAN दर्ज करना अनिवार्य होगा।

 

F&O ट्रेडिंग करने वालों के लिए नए नियम

अगर आपने पिछले वित्त वर्ष में Futures & Options (F&O), इंट्राडे ट्रेडिंग या शेयर बायबैक किया है, तो इस बार टैक्स रिटर्न भरते समय अतिरिक्त जानकारी देनी होगी। नए नियमों के अनुसार टैक्सपेयर्स को निम्नलिखित जानकारी देनी होगी

  • F&O ट्रेडिंग का कुल टर्नओवर
  • लाभ या हानि (Profit/Loss)
  • ओपनिंग और क्लोजिंग स्टॉक
  • खरीद और बिक्री का विवरण
  • डायरेक्ट खर्च

अगर आप सैलरीड कर्मचारी हैं लेकिन F&O या इंट्राडे ट्रेडिंग भी करते हैं, तो सामान्यतः आपको ITR-3 भरना होगा। वहीं, यदि आप Section 44AD के तहत Presumptive Taxation Scheme चुनते हैं, तो ITR-4 लागू हो सकता है।

ITR Filing Rules 2026

Image Source: ET

 

इस बार टैक्स विभाग की नजर और सख्त रहेगी

विशेषज्ञों का मानना है कि आयकर विभाग अब डेटा आधारित जांच (Data-Driven Scrutiny) पर ज्यादा जोर दे रहा है। इसलिए बैंक, डीमैट अकाउंट, AIS (Annual Information Statement), TIS और Form 26AS में दर्ज जानकारी और आपके ITR में दी गई जानकारी का मिलान होना बेहद जरूरी है। किसी भी तरह की गलत या अधूरी जानकारी नोटिस का कारण बन सकती है।

 

टैक्सपेयर्स को क्या करना चाहिए?

ITR भरने से पहले इन बातों का ध्यान रखें

  • सही ITR फॉर्म का चयन करें।
  • Form 16, AIS, TIS और Form 26AS का मिलान करें।
  • F&O, कैपिटल गेन और अन्य निवेश का पूरा रिकॉर्ड रखें।
  • अंतिम तारीख का इंतजार करें।
  • सभी बैंक खातों और आय के स्रोतों की सही जानकारी दें।

 

निष्कर्ष

ITR Filing Rules 2026 के तहत किए गए बदलावों का उद्देश्य टैक्स प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डेटा आधारित बनाना है। इस बार डेडलाइन, ITR फॉर्म, F&O डिस्क्लोजर और कैपिटल गेन रिपोर्टिंग में हुए बदलावों को समझकर ही रिटर्न दाखिल करें। समय पर और सही जानकारी के साथ ITR फाइल करना आपको नोटिस, जुर्माने और अनावश्यक परेशानियों से बचा सकता है।

 

FAQs

Q1. ITR भरने की आखिरी तारीख क्या है?

सामान्य करदाताओं के लिए ITR-1 और ITR-2 की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है, जबकि गैरऑडिट मामलों में ITR-3 और ITR-4 की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है।

 

Q2. ITR फॉर्म में क्या बदलाव हुए हैं?

दो मकानों वाले पात्र करदाता अब ITR-1/ITR-4 भर सकते हैं। Unrealised Rent, Capital Gains और Section 80GGC से जुड़े नए कॉलम भी जोड़े गए हैं।

 

Q3. F&O नियमों में क्या नए बदलाव आए हैं?

अब F&O ट्रेडर्स को टर्नओवर, लाभहानि, खरीदबिक्री, स्टॉक और अन्य वित्तीय विवरण अलग से रिपोर्ट करने होंगे।

 

Q4. कौन सा ITR फॉर्म किसके लिए है?

ITR-1 सामान्य वेतनभोगी और छोटे करदाताओं के लिए है, जबकि F&O ट्रेडिंग या व्यवसाय करने वालों के लिए सामान्यतः ITR-3 या ITR-4 लागू होता है।

 

Q5. देर से ITR भरने पर क्या होगा?

अंतिम तिथि के बाद ITR दाखिल करने पर आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार विलंब शुल्क, ब्याज और कुछ मामलों में अन्य कर लाभों पर असर पड़ सकता है।