Mercedes E20 Fuel Advisory: भारत में E20 पेट्रोल को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इसकी वजह बने देश के लोकप्रिय यूट्यूबर सौरव जोशी, जिन्होंने दावा किया कि उनकी Mercedes-Benz SUV का माइलेज महज 48 घंटे में 17 किमी प्रति लीटर से घटकर सिर्फ 5 किमी प्रति लीटर रह गया। उन्होंने इसका कारण पेट्रोल में मिलाए जा रहे एथेनॉल (E20 Fuel) को बताया और आशंका जताई कि इससे उनकी जर्मन SUV के इंजन पर भी असर पड़ सकता है।
वीडियो वायरल होने के कुछ ही समय बाद Mercedes-Benz India ने आधिकारिक एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया कि उसके सभी BS VI पेट्रोल वाहन E20 ईंधन के साथ पूरी तरह संगत (Compatible) हैं और संबंधित सरकारी एजेंसियों से प्रमाणित भी हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने भी E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया और कहा कि यह कार्यक्रम वैज्ञानिक परीक्षणों और ऑटोमोबाइल कंपनियों से व्यापक सलाह-मशविरा करने के बाद लागू किया गया है।

सौरव जोशी ने क्या दावा किया?
सौरव जोशी ने अपने यूट्यूब व्लॉग में बताया कि उनकी Mercedes-Benz SUV पहले लगभग 17 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज दे रही थी, जो पहले 9 और फिर अगले ही दिन घटकर 5 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया। उन्होंने कहा कि पहले फुल टैंक पर कार लगभग 800 किलोमीटर तक चलने का अनुमान दिखाती थी, जबकि अब यही रेंज घटकर करीब 480 किलोमीटर रह गई है।
उन्होंने दावा किया कि यह बदलाव पेट्रोल में बढ़े हुए एथेनॉल मिश्रण की वजह से हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि अब उन्हें हर बार पेट्रोल भरवाते समय डर लगता है कि कहीं इससे उनकी कार के इंजन को नुकसान न हो जाए। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि उनके पास इलेक्ट्रिक Mercedes G-Wagon भी है, इसलिए उस वाहन में उन्हें ऐसी चिंता नहीं रहती।
Mercedes-Benz India ने क्या कहा?
सौरव जोशी का वीडियो वायरल होने के बाद Mercedes-Benz India ने सोशल मीडिया पर ग्राहकों के लिए एक आधिकारिक एडवाइजरी जारी की। कंपनी ने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन E20 ईंधन को लेकर फैल रही आशंकाओं पर अपना पक्ष स्पष्ट किया।

कंपनी ने कहा कि ग्राहकों की सुरक्षा, वाहन की विश्वसनीयता और प्रदर्शन उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। Mercedes-Benz के सभी BS VI पेट्रोल वाहन E20 ईंधन के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं और संबंधित नियामक संस्थाओं द्वारा प्रमाणित हैं। यदि किसी ग्राहक को तकनीकी समस्या या कोई सवाल है तो कंपनी सहायता देने के लिए तैयार है। साथ ही Mercedes-Benz ने दोहराया कि वह टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

E20 पेट्रोल को लेकर सरकार ने क्या कहा?
केंद्र सरकार ने भी E20 पेट्रोल को लेकर उठ रही शंकाओं पर विस्तृत जवाब दिया। सरकार के अनुसार भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम अचानक लागू नहीं किया गया, बल्कि इसकी शुरुआत वर्ष 2001 में पायलट प्रोजेक्ट से हुई थी। इसके बाद 2013 में नीतिगत बदलाव हुए, 2018 के बाद संस्थागत सुधार किए गए और 2021 से बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता बढ़ाई गई।
सरकार के मुताबिक देश ने 2022 में 10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E10) का लक्ष्य हासिल किया और 2025 में 20 प्रतिशत मिश्रण (E20) तक पहुंच गया। इसके लिए एथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 500–600 करोड़ लीटर से बढ़ाकर करीब 1,200 करोड़ लीटर तक की गई।
सरकार ने यह भी कहा कि E20 पेट्रोल लागू करने से पहले वाहन निर्माता कंपनियों, ऑटो कंपोनेंट उद्योग, परीक्षण एजेंसियों और शोध संस्थानों के साथ व्यापक परीक्षण किए गए थे। इनमें इंजन कैलिब्रेशन, मटेरियल कम्पैटिबिलिटी, फ्यूल सिस्टम, माइलेज, टिकाऊपन और उत्सर्जन जैसे सभी पहलुओं का परीक्षण किया गया।
क्या E20 पेट्रोल से माइलेज कम होता है?
सरकार ने माना कि कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल के उपयोग से करीब 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि इसे केवल माइलेज के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।
सरकार के अनुसार E20 पेट्रोल का ऑक्टेन रेटिंग अधिक होती है, जिससे इंजन में बेहतर दहन होता है। इससे इंजन अधिक स्मूद चलता है, पिकअप बेहतर मिलता है, नॉकिंग कम होती है और पार्टिकुलेट प्रदूषण भी बेहद कम होता है। सरकार का दावा है कि E20 ईंधन जीवनचक्र के दौरान कार्बन उत्सर्जन में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी ला सकता है।
क्या E20 पुराने वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचाता है?
इंजन खराब होने और रबर पाइप या अन्य पार्ट्स पर असर पड़ने के दावों को सरकार ने वैज्ञानिक प्रमाणों से असमर्थित बताया है।
सरकार ने उदाहरण देते हुए कहा कि केवल Maruti Suzuki ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विस की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे पुराने वाहन भी थे जो मूल रूप से E20 प्रमाणित नहीं थे। कंपनी को इनमें एथेनॉल के कारण जंग लगने, असामान्य घिसावट या पार्ट्स की उम्र कम होने जैसी कोई व्यापक समस्या नहीं मिली। इसी तरह Hero MotoCorp ने भी ऐसे किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं की।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पुराने वाहन की मैनुअल में केवल E10 लिखा है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि बाद में लागू किए गए E20 मानक उस वाहन के लिए स्वतः असुरक्षित हो जाते हैं।
E20 पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं है?
कई लोगों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल सस्ता होना चाहिए, लेकिन सरकार का कहना है कि ऐसा जरूरी नहीं है। सरकार के अनुसार मक्का आधारित एथेनॉल की खरीद कीमत लगभग 71.86 रुपये प्रति लीटर है, जिसमें जीएसटी, परिवहन, भंडारण और अन्य खर्च शामिल नहीं हैं।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो कई बार E20 तैयार करने की लागत सामान्य पेट्रोल से अधिक भी हो सकती है। सरकार का कहना है कि E20 कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोल सस्ता करना नहीं, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा बचाना और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना है।
E20 कार्यक्रम से सरकार को क्या लाभ दिख रहे हैं?
सरकार के अनुसार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से देश ने वर्ष 2014-15 के बाद से 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाई है। इससे गन्ना और मक्का उत्पादक किसानों की आय बढ़ी है, घरेलू बायोफ्यूल उद्योग को प्रोत्साहन मिला है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है।
सरकार का कहना है कि देशभर में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप, रिफाइनरी, डिपो और पाइपलाइन नेटवर्क को E20 आपूर्ति के अनुरूप तैयार किया जा चुका है।
निष्कर्ष
सौरव जोशी के वायरल वीडियो के बाद E20 पेट्रोल को लेकर बहस फिर चर्चा में आ गई है। हालांकि Mercedes-Benz India ने स्पष्ट किया है कि उसके सभी BS VI पेट्रोल वाहन E20 ईंधन के साथ पूरी तरह संगत हैं। वहीं केंद्र सरकार का भी कहना है कि E20 कार्यक्रम वर्षों के वैज्ञानिक परीक्षण, उद्योग से सलाह और व्यापक तैयारी के बाद लागू किया गया है। सरकार मानती है कि कुछ वाहनों में माइलेज में 3–5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है, लेकिन इसके बदले देश को ऊर्जा सुरक्षा, कम प्रदूषण, विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों की आय बढ़ने जैसे दीर्घकालिक लाभ मिल रहे हैं। फिलहाल किसी एक वाहन के अनुभव के आधार पर पूरे E20 कार्यक्रम की प्रभावशीलता तय करना उचित नहीं माना जा रहा है।
FAQ
- Mercedes-Benz India ने E20 ईंधन को लेकर एडवाइजरी क्यों जारी की?
सौरव जोशी के वायरल वीडियो के बाद E20 पेट्रोल को लेकर उठी चिंताओं के बीच Mercedes-Benz India ने स्पष्ट किया कि उसके सभी BS VI पेट्रोल वाहन E20 ईंधन के साथ पूरी तरह संगत (Compatible) हैं। कंपनी ने कहा कि उसके वाहन संबंधित नियामक संस्थाओं द्वारा E20 के लिए प्रमाणित हैं और ग्राहकों को किसी भी तकनीकी सवाल पर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। - Sourav Joshi के माइलेज दावे क्या थे?
सौरव जोशी ने दावा किया कि उनकी Mercedes-Benz SUV का माइलेज 48 घंटे के भीतर लगभग 17 किमी/लीटर से घटकर 5 किमी/लीटर रह गया। उन्होंने कहा कि पहले फुल टैंक पर करीब 800 किमी की रेंज मिलती थी, जो घटकर लगभग 480 किमी रह गई। उन्होंने इस बदलाव के लिए E20 पेट्रोल को जिम्मेदार बताया। - E20 ईंधन क्या होता है?
E20 एक मिश्रित ईंधन (Blended Fuel) है, जिसमें 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। भारत सरकार ने इसे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, प्रदूषण घटाने, किसानों की आय बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से लागू किया है। - क्या सभी Mercedes कारें E20 ईंधन के अनुकूल हैं?
Mercedes-Benz India के अनुसार, उसके सभी BS VI पेट्रोल वाहन E20 ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल और प्रमाणित हैं। हालांकि यह दावा विशेष रूप से BS VI पेट्रोल मॉडलों पर लागू होता है। - E20 ईंधन से माइलेज पर क्या असर पड़ता है?
केंद्र सरकार के अनुसार, कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर करीब 3–5% तक माइलेज कम हो सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि इसके बदले बेहतर ऑक्टेन रेटिंग, साफ दहन, कम उत्सर्जन और ऊर्जा सुरक्षा जैसे दीर्घकालिक लाभ मिलते हैं। - Mercedes-Benz ने ग्राहकों को क्या सलाह दी है?
Mercedes-Benz ने कहा है कि यदि ग्राहकों को E20 ईंधन या वाहन के प्रदर्शन को लेकर कोई तकनीकी शंका हो तो वे कंपनी के अधिकृत सर्विस नेटवर्क से संपर्क करें। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि वह ग्राहकों की सहायता के लिए पूरी तरह उपलब्ध है। - क्या E20 ईंधन इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है?
सरकार का कहना है कि E20 से इंजन या फ्यूल सिस्टम को व्यापक नुकसान होने के दावों का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है। सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों के सर्विस डेटा का हवाला देते हुए कहा कि करोड़ों वाहनों के अनुभव में एथेनॉल के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या कंपोनेंट फेल होने जैसी स्थिति सामने नहीं आई है। हालांकि किसी वाहन में तकनीकी समस्या होने पर निर्माता कंपनी की सलाह के अनुसार जांच कराना उचित माना जाता है।

