Foreign Visit Gifts: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्रा केवल कूटनीतिक बैठकों और व्यापारिक समझौतों तक सीमित नहीं रही। इन दौरों के दौरान उन्होंने विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों, प्रधानमंत्रियों और अन्य प्रमुख नेताओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, हस्तशिल्प, लोककला और पारंपरिक शिल्पकला से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों का उद्देश्य केवल औपचारिक सम्मान प्रकट करना नहीं था, बल्कि भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना भी था। हर उपहार भारत के किसी न किसी राज्य की विशिष्ट कला, परंपरा या शिल्प का प्रतिनिधित्व करता है।

इंडोनेशिया की संसद अध्यक्ष को ओडिशा की प्रसिद्ध इकत साड़ी
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की संसद अध्यक्ष पुआन महारानी को ओडिशा की प्रसिद्ध इकत (Bandha) सिल्क भेंट की। यह भारत की सबसे प्रतिष्ठित हस्तकरघा परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसमें धागों को बुनाई से पहले विशेष तरीके से बांधकर रंगा जाता है, जिससे कपड़े के दोनों ओर एक जैसी डिजाइन दिखाई देती है।

संभलपुर, नुआपटना और बरगढ़ जैसे क्षेत्रों में बनने वाली यह कला ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान मानी जाती है। इसकी घुमावदार आकृतियां, चमकीले रंग और महीन बुनाई इसे दुनिया भर में अलग पहचान दिलाते हैं।
ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर-जनरल को बिहार की माधुबनी पेंटिंग
ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर-जनरल को प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के मिथिला क्षेत्र की प्रसिद्ध माधुबनी पेंटिंग भेंट की। इस कलाकृति में मोर और हरे-भरे वृक्षों के माध्यम से प्रकृति और मानव के सामंजस्य को दर्शाया गया है। प्राकृतिक रंगों और हाथ से बनाई गई बारीक रेखाओं वाली यह लोककला भारत की सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक चित्रकला शैलियों में गिनी जाती है।

मोर समृद्धि और सौंदर्य का प्रतीक है, जबकि वृक्ष जीवन, विकास और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। यह उपहार भारतीय लोककला के साथ-साथ ग्रामीण कलाकारों की पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का भी प्रतिनिधित्व करता है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री की पत्नी को कश्मीर की कढ़ाईदार शॉल
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ की पत्नी को कश्मीर की शुद्ध ऊनी कढ़ाईदार स्टोल (Pure Wool Embroidered Stole) भेंट की। उच्च गुणवत्ता वाली ऊन से तैयार इस शॉल पर कश्मीर घाटी के प्राकृतिक फूलों से प्रेरित पारंपरिक कढ़ाई की गई है।

इसे स्थानीय कारीगर हाथ से तैयार करते हैं, जिसके कारण हर शॉल अपनी अलग पहचान रखती है। यह उपहार कश्मीर की सदियों पुरानी वस्त्र कला और भारतीय हस्तकरघा परंपरा को सम्मान देने का प्रतीक है।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ को मिले दो खास उपहार
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ को दो विशेष उपहार दिए। पहला था जनजातीय धातु कला से बनी धोकरा नाव (Tribal Dhokra Boat Sculpture) और दूसरा था इंडियन प्रीमियम कॉफी बॉक्स।

धोकरा कला भारत की सबसे प्राचीन धातु शिल्प परंपराओं में शामिल है। इसे ‘लॉस्ट वैक्स कास्टिंग’ तकनीक से तैयार किया जाता है। उपहार में दी गई नाव में जनजातीय पुरुषों और महिलाओं की आकृतियां बनाई गई हैं, जो सामूहिक सहयोग, एकता और साझा प्रगति का संदेश देती हैं। पक्षियों की आकृतियों से सजी यह कलाकृति प्रकृति के साथ संतुलन और भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत साझेदारी का भी प्रतीक मानी जाती है।

दूसरा उपहार इंडियन प्रीमियम कॉफी बॉक्स था, जिसमें भारत के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों की चुनिंदा प्रीमियम कॉफी शामिल थी। अलग-अलग ऊंचाई, जलवायु और प्रसंस्करण तकनीकों से तैयार इन कॉफी किस्मों के माध्यम से भारत की उभरती कॉफी इंडस्ट्री, टिकाऊ खेती और गुणवत्ता आधारित उत्पादन को प्रदर्शित किया गया। यह उपहार भारत के कृषि क्षेत्र और वैल्यू एडिशन की क्षमता को भी दर्शाता है।
ऑस्ट्रेलिया के विपक्ष के नेता को राजस्थान की लकड़ी की नक्काशी
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के विपक्ष के नेता को राजस्थान की पारंपरिक शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण लकड़ी से बना हाथी (Wooden Hand-Carved Elephant with Lattice Work) भेंट किया। एक ही लकड़ी के टुकड़े से तैयार इस कलाकृति में महीन जालीदार नक्काशी और सजावटी डिज़ाइन बनाई गई हैं।

भारतीय संस्कृति में हाथी बुद्धिमत्ता, शक्ति, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। यह उपहार भारत और ऑस्ट्रेलिया के बहुआयामी संबंधों तथा साझा इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण का भी प्रतीक है.
ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर-जनरल को मार्बल इनले वर्क बॉक्स
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर-जनरल को भारत की प्रसिद्ध मार्बल इनले वर्क बॉक्स (Marble Inlay Work Box) भेंट किया। यह आगरा की विश्वप्रसिद्ध पीएत्रा ड्यूरा (Pietra Dura) शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस कला में सफेद संगमरमर पर अर्ध-कीमती पत्थरों को बेहद बारीकी से काटकर और तराशकर फूलों तथा अन्य सजावटी आकृतियों के रूप में जड़ा जाता है।

प्रत्येक डिज़ाइन पूरी तरह हाथ से तैयार की जाती है, जिसके लिए वर्षों का अनुभव और अत्यधिक सटीकता की आवश्यकता होती है। यह उपहार विविधता में एकता, समृद्धि और रचनात्मकता का प्रतीक होने के साथ-साथ भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक संबंधों का भी संदेश देता है।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को मिले दो विशेष उपहार
प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को दो विशेष उपहार भेंट किए। पहला उपहार था उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी टोपी (Uttarakhandi Cap) और दूसरा भारतीय महिला हॉकी टीम के सभी खिलाड़ियों के हस्ताक्षरों वाली हॉकी स्टिक।

उत्तराखंडी टोपी हिमालयी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान मानी जाती है। ऊन से बनी यह टोपी उत्तराखंड के त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे सम्मान, आत्मीयता और स्थानीय परंपराओं के प्रतीक के रूप में पहना जाता है। साथ ही यह राज्य की पारंपरिक बुनाई कला और स्थानीय कारीगरों की सदियों पुरानी शिल्प परंपरा को भी आगे बढ़ाती है।
दूसरा उपहार भारतीय महिला हॉकी टीम द्वारा हस्ताक्षरित हॉकी स्टिक थी। यह स्टिक न्यूजीलैंड में आयोजित FIH हॉकी महिला नेशंस कप में भारत की ऐतिहासिक जीत की स्मृति को दर्शाती है। टीम के प्रत्येक खिलाड़ी के हस्ताक्षर इस उपलब्धि में उनके योगदान, मेहनत और समर्पण का प्रतीक हैं। यह उपहार खेल भावना, महिला सशक्तिकरण और भारत की समृद्ध हॉकी विरासत को सम्मान देने का संदेश भी देता है।
न्यूजीलैंड के विपक्ष के नेता को लखनऊ की जरी-जरदोजी कला
प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के विपक्ष के नेता को उत्तर प्रदेश के लखनऊ की प्रसिद्ध जरी-जरदोजी वॉल हैंगिंग भेंट की। यह भारत की पारंपरिक कढ़ाई कला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें सुनहरे और चांदी जैसे धातु के धागों, सीक्विन, मोतियों और अन्य सजावटी तत्वों का उपयोग कर आकर्षक फूलों एवं पारंपरिक डिज़ाइनों को उकेरा जाता है।

हाथ से तैयार की गई यह कलाकृति समृद्धि, सौंदर्य, सृजनशीलता और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। साथ ही यह लखनऊ की सदियों पुरानी जरदोजी परंपरा और उससे जुड़े कारीगरों की अद्भुत शिल्पकला को वैश्विक पहचान दिलाने का माध्यम भी है।
सांस्कृतिक कूटनीति का मजबूत संदेश
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए ये सभी उपहार केवल औपचारिक राजनयिक भेंट नहीं थे, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोककलाओं और स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का माध्यम भी बने। ओडिशा की इकट बुनाई, बिहार की माधुबनी कला, कश्मीर की कढ़ाई, जनजातीय धोकरा शिल्प, भारतीय कॉफी, राजस्थान की लकड़ी की नक्काशी, आगरा की मार्बल इनले कला, उत्तराखंड की पारंपरिक टोपी, भारतीय महिला हॉकी टीम की उपलब्धि और लखनऊ की जरी-जरदोजी—इन सभी उपहारों ने यह संदेश दिया कि भारत अपनी सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक शिल्प और आधुनिक उपलब्धियों को समान महत्व देता है।
FAQ
- प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश यात्राओं के दौरान कौन-कौन से उपहार दिए?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा के दौरान ओडिशा इकट, मधुबनी पेंटिंग, कश्मीरी कढ़ाई वाला स्टोल, ट्राइबल धोकरा बोट स्कल्प्चर, इंडियन प्रीमियम कॉफी बॉक्स, राजस्थान की लकड़ी से बनी हाथी की नक्काशी, मार्बल इनले वर्क बॉक्स, उत्तराखंडी पहाड़ी टोपी, भारतीय महिला हॉकी टीम के हस्ताक्षर वाली हॉकी स्टिक और लखनऊ की जरी-जरदोजी वॉल हैंगिंग जैसे पारंपरिक भारतीय उपहार भेंट किए। - मधुबनी पेंटिंग का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
मधुबनी पेंटिंग बिहार के मिथिला क्षेत्र की प्रसिद्ध लोककला है। इसमें प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक डिजाइनों के माध्यम से प्रकृति, संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और लोक जीवन को दर्शाया जाता है। यह भारत की समृद्ध लोक कला और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। - मार्बल इनले बॉक्स क्या होता है?
मार्बल इनले वर्क बॉक्स संगमरमर पर अर्ध-कीमती पत्थरों की जड़ाई से तैयार की जाने वाली पारंपरिक कलाकृति है। इसे पीएत्रा ड्यूरा (Pietra Dura) कला कहा जाता है। आगरा के कारीगर सदियों से इस शिल्प को संरक्षित किए हुए हैं और इसे भारतीय हस्तशिल्प की उत्कृष्ट पहचान माना जाता है। - भारत विदेशी नेताओं को पारंपरिक उपहार क्यों देता है?
भारत पारंपरिक उपहारों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय हस्तशिल्प, लोककलाओं और कारीगरों की कला को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है। ऐसे उपहार केवल सम्मान का प्रतीक नहीं होते, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति को भी मजबूत करते हैं। - इन उपहारों का चयन कैसे किया जाता है?
विदेशी नेताओं के लिए उपहारों का चयन उनकी सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक महत्ता को ध्यान में रखकर किया जाता है। इनमें भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, वस्त्र, खेल उपलब्धियां और स्थानीय विशेषताओं को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि भारत की विविधता और सांस्कृतिक पहचान प्रभावी ढंग से प्रदर्शित हो सके। - क्या ये उपहार भारत की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं?
हाँ। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए सभी उपहार भारत के अलग-अलग राज्यों की कला, शिल्प, वस्त्र, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनके माध्यम से भारत की विविधता, पारंपरिक कौशल और सांस्कृतिक समृद्धि को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जाता है।

