Ram Temple Donation Theft: राम मंदिर में अब AI करेगा दान की रखवाली! चोरी के बाद बदल सकती है पूरी व्यवस्था..

Ram Temple Donation Theft

Ram Temple Donation Theft: अयोध्या के राम मंदिर में सामने आए कथित दान चोरी मामले के बाद अब मंदिर की दान व्यवस्था में बड़ा तकनीकी बदलाव किया जा सकता है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अपनी अंतिम रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने की सिफारिश करने जा रही है। इसका उद्देश्य दान पेटियों से नकदी और अन्य चढ़ावे की निगरानी को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को दान में मिली नकदी और कीमती सामान के कथित गबन की जांच के लिए लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में SIT का गठन किया था। जांच 15 जून से शुरू हुई और 23 जून को टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इस रिपोर्ट में केवल 40 दिनों के भीतर दान चोरी की 70 घटनाओं का उल्लेख किया गया, जिनके समर्थन में CCTV फुटेज भी जुटाए गए थे। जांच का दायरा बढ़ने के बाद सरकार ने 1 जुलाई को SIT का कार्यकाल 15 दिन बढ़ा दिया और 15 जुलाई तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।

AI आधारित निगरानी प्रणाली में क्या हो सकता है?

सूत्रों के अनुसार SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट में AI आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने की सिफारिश करेगी। इस प्रणाली के माध्यम से दान पेटियों से नकदी निकालने, उसकी गिनती, कर्मचारियों की गतिविधियों और पूरी प्रक्रिया पर डिजिटल निगरानी रखी जा सकेगी। यदि किसी भी स्तर पर असामान्य गतिविधि या नियमों का उल्लंघन होता है तो सिस्टम स्वतः अलर्ट जारी कर सकेगा। इससे मानव त्रुटियों और संभावित गड़बड़ियों पर काफी हद तक नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

जांच में सामने आईं सुरक्षा व्यवस्था की खामियां

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि दान की नकदी गिनने के दौरान कई सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट में यह जांच की गई कि क्या निगरानी और पर्यवेक्षण में हुई लापरवाही के कारण कथित गबन संभव हुआ।

पूर्व महासचिव चंपत राय ने SIT के सामने अपने बयान में आरोप लगाया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ओर से नकदी गिनती के दौरान आवश्यक सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया गया। उनके अनुसार कर्मचारियों की अनिवार्य तलाशी, बिना जेब वाली यूनिफॉर्म (Pocketless Uniform) और बड़े पैमाने पर नकदी गिनने से जुड़े अन्य मानक सुरक्षा उपाय प्रभावी ढंग से लागू नहीं किए गए।

दान जमा करने की व्यवस्था में भी हो सकता है बदलाव

वर्तमान में राम मंदिर की दान पेटियों से प्राप्त पूरी नकदी अयोध्या के नया घाट स्थित SBI शाखा में जमा कराई जाती है। लेकिन अब ट्रस्ट इस व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट किसी दूसरे बैंक को शामिल करने या दान राशि को एक से अधिक बैंकों में जमा कराने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। हाल ही में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने एक निजी बैंक के अधिकारियों के साथ इस संबंध में बैठक भी की है।

 

वित्तीय जांच का दायरा बढ़ाया गया

SIT और पुलिस ने अब जांच को केवल नकदी चोरी तक सीमित नहीं रखा है। जांच एजेंसियों ने आरोपियों की आय, बैंक खातों, निवेश, चल-अचल संपत्तियों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जानकारी आयकर विभाग, बैंकों, तहसील कार्यालयों और सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों से मांगी है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों ने अयोध्या के बाहर संपत्तियां खरीदीं या रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर निवेश किया।

अब तक दान गिनने की प्रक्रिया से जुड़े ट्रस्ट कर्मचारियों सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने आरोपियों के पास से लगभग 80 लाख रुपये नकद और कुछ आभूषण भी बरामद किए हैं।

 

VIP पास व्यवस्था भी जांच के दायरे में

जांच के दौरान ट्रस्ट ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करते हुए पूर्व पदाधिकारियों चंपत राय, गोपाल राव और ट्रस्टी अनिल मिश्रा से जुड़े VIP दर्शन पास जारी करने वाले पहचान-पत्र (ID Credentials) निष्क्रिय कर दिए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि बाद में ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास महाराज ने इन खबरों का खंडन करते हुए कहा कि चंपत राय की आईडी से अभी भी VIP पास जारी किए जा रहे हैं। इस कारण इस मुद्दे पर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

इधर पुलिस ने जेल में बंद दो आरोपियों की सात दिन की पुलिस रिमांड भी मांगी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान मिली नई जानकारियों की पुष्टि और अतिरिक्त साक्ष्य बरामद करने के लिए यह रिमांड आवश्यक है। इस याचिका पर भ्रष्टाचार निरोधक अदालत 14 जुलाई को सुनवाई करेगी।

आगे क्या हो सकता है?

SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने से पहले एक बार फिर अयोध्या जाकर रिकॉर्ड की जांच करेगी और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तथा दान प्रबंधन से जुड़े लोगों से पूछताछ कर सकती है। यदि AI आधारित निगरानी प्रणाली की सिफारिश स्वीकार कर ली जाती है, तो राम मंदिर देश के उन प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो सकता है जहां दान प्रबंधन के लिए आधुनिक डिजिटल और AI तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे दान की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनने की उम्मीद है।

 

1. राम मंदिर में दान चोरी का मामला क्या है?

राम मंदिर में दान पेटियों से नकदी और कीमती सामान के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी जांच के लिए SIT का गठन किया। प्रारंभिक जांच में 40 दिनों के भीतर दान चोरी की 70 घटनाओं के संकेत मिले और अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

 

2. AI आधारित दान ट्रैकिंग सिस्टम क्या है?

यह एक प्रस्तावित निगरानी प्रणाली है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से दान पेटियों से नकदी निकालने, उसकी गिनती, कर्मचारियों की गतिविधियों और पूरी प्रक्रिया पर डिजिटल निगरानी रखी जाएगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर सिस्टम स्वतः अलर्ट दे सकेगा।

 

3. मंदिर प्रशासन AI तकनीक का उपयोग क्यों करना चाहता है?

दान चोरी के आरोप सामने आने के बाद पारदर्शिता बढ़ाने, नकदी की सुरक्षित निगरानी करने, मानवीय त्रुटियों को कम करने और भविष्य में गबन जैसी घटनाओं को रोकने के लिए AI आधारित निगरानी व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।

 

4. क्या सभी दान का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा?

SIT की सिफारिशों के अनुसार दान की पूरी प्रक्रिया को अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने और सरकार तथा ट्रस्ट के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि डिजिटल रिकॉर्ड किस स्तर तक रखा जाएगा।

 

5. दान चोरी की जांच कैसे की जा रही है?

SIT CCTV फुटेज, दस्तावेजों और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर जांच कर रही है। साथ ही पुलिस आरोपियों के बैंक खाते, आय, निवेश, चल-अचल संपत्तियों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

 

6. AI सिस्टम से क्या लाभ होंगे?

AI आधारित निगरानी प्रणाली से दान प्रबंधन अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बन सकता है। इससे नकदी गिनने की प्रक्रिया पर बेहतर निगरानी रहेगी, संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान हो सकेगी और भविष्य में दान चोरी या गबन की संभावना कम हो सकती है।

 

7. क्या यह व्यवस्था अन्य मंदिरों में भी लागू हो सकती है?

फिलहाल यह केवल राम मंदिर से जुड़ा प्रस्ताव है। हालांकि यदि यह प्रणाली प्रभावी साबित होती है, तो भविष्य में अन्य बड़े धार्मिक स्थलों और मंदिरों में भी ऐसी तकनीक अपनाने पर विचार किया जा सकता है।

 

8. राम मंदिर ट्रस्ट ने क्या बयान दिया है?

ट्रस्ट ने दान प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है और नकदी जमा करने की मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था में बदलाव सहित कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। वहीं VIP पास से जुड़ी कुछ खबरों का ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास महाराज ने खंडन करते हुए कहा कि चंपत राय की आईडी से अभी भी VIP पास जारी किए जा रहे हैं।