भारत में कैंसर से जुड़ी एक नई और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। हाल ही में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के एक अध्ययन में पाया गया है कि पुरुषों में ओरल कैंसर यानी मुंह का कैंसर लगातार बढ़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह तंबाकू का लंबे समय तक इस्तेमाल माना गया है। यह अध्ययन ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी (GLOBOCAN) 2022 के आंकड़ों पर आधारित है और इसमें भारत समेत 11 देशों का विश्लेषण किया गया है।
इस रिपोर्ट में एक तरफ जहां पुरुषों में ओरल कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है, वहीं महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) के मामलों में गिरावट आई है। हालांकि, कुल मिलाकर भारत में कैंसर का बोझ अभी भी काफी ज्यादा बना हुआ है।
भारत में बढ़ता ओरल कैंसर: क्या कहता है अध्ययन?
ICMR के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज एपिडेमियोलॉजी (ICMR-NINE) द्वारा किए गए इस अध्ययन के अनुसार, भारत में पुरुषों में ओरल कैंसर के मामलों में हर साल लगभग 1.20% की वृद्धि हो रही है। यह एक गंभीर संकेत है, क्योंकि यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और अक्सर शुरुआती चरण में पहचान में नहीं आती।
अन्य देशों की बात करें तो:
- चीन में 10% की वृद्धि
- कनाडा में 94%
- अमेरिका में 57%
इन आंकड़ों से साफ है कि यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, लेकिन भारत में इसका प्रभाव ज्यादा गंभीर है।
क्यों बढ़ रहा है ओरल कैंसर?
इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण है तंबाकू का लगातार सेवन। डॉक्टरों के मुताबिक, भारत में बड़ी संख्या में लोग कम उम्र से ही तंबाकू का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। खासकर बिना धुएं वाले तंबाकू जैसे: गुटखा, पान, खैनी
इसके अलावा शराब का सेवन और सुपारी (बीटल नट) चबाने की आदत भी जोखिम को बढ़ाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये आदतें सामाजिक तौर पर इतनी गहराई से जुड़ी हैं कि लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। यही कारण है कि समय के साथ यह आदत कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले लेती है।

देर से पता चलना भी बड़ी समस्या
अध्ययन में यह भी सामने आया कि भारत में ज्यादातर ओरल कैंसर के मामले तब सामने आते हैं जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। इसका मतलब है कि मरीजों को इलाज में ज्यादा समय, पैसा और मेहनत लगती है।
अगर इस बीमारी को शुरुआती चरण में पहचान लिया जाए, तो इलाज आसान और सफल हो सकता है। इसलिए समय-समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।
महिलाओं में कैंसर की स्थिति
महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) अभी भी सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर है। अध्ययन में शामिल सभी 11 देशों में यह सबसे आम कैंसर रहा।
कुछ देशों में इसकी वृद्धि दर:
- दक्षिण कोरिया: 07%
- तुर्की: 42%
- चीन: 03%
- भारत: 83%
- इटली: 04%
वहीं, सर्वाइकल कैंसर के मामलों में भारत में हर साल 4.19% की गिरावट दर्ज की गई है। यह एक सकारात्मक संकेत है और इसका श्रेय बेहतर जांच और HPV वैक्सीनेशन को दिया जा रहा है।
वैश्विक स्थिति: कैंसर एक बड़ी चुनौती
दुनिया भर में कैंसर एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। GLOBOCAN के अनुसार, 2022 में:
- लगभग 2 करोड़ नए कैंसर के मामले सामने आए
- करीब 97 लाख लोगों की मौत हुई
भारत में 2024 के अनुमान:
- 6 लाख नए कैंसर केस
- 7 लाख मौतें
और अगर यही रुझान जारी रहा, तो 2045 तक हर साल 24.6 लाख नए मामले सामने आ सकते हैं।
ओरल कैंसर क्या होता है?
ओरल कैंसर मुंह के अंदर होने वाला कैंसर है। इसमें होंठ, जीभ, मसूड़े, गाल के अंदरूनी हिस्से और मुंह की छत शामिल होती है। यह आमतौर पर स्क्वैमस सेल्स से शुरू होता है, जो मुंह की सतह पर पाए जाते हैं।
अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह कैंसर गले, सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है।
शरीर के किन हिस्सों को प्रभावित करता है?
ओरल कैंसर मुख्य रूप से इन हिस्सों को प्रभावित करता है:
- होंठ
- मसूड़े
- गाल के अंदर का हिस्सा
- जीभ का आगे का हिस्सा
- मुंह का निचला हिस्सा
- मुंह की छत
अगर यह गले के हिस्से तक पहुंचता है, तो उसे ओरोफैरिंजियल कैंसर कहा जाता है।
इसके लक्षण क्या हैं?
ओरल कैंसर के लक्षण अक्सर सामान्य समस्याओं जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ सामान्य लक्षण हैं:
- मुंह में ऐसे घाव जो दो हफ्ते में ठीक न हों
- सफेद या लाल धब्बे
- मुंह में बिना कारण खून आना
- चबाने या निगलने में दिक्कत
- जीभ या जबड़े को हिलाने में परेशानी
- अचानक वजन कम होना
- कान में दर्द
- मुंह से लगातार बदबू
इनमें से कोई भी लक्षण लंबे समय तक बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
जोखिम किन लोगों को ज्यादा होता है?
लगभग 75% ओरल कैंसर के मरीजों में कुछ सामान्य आदतें पाई जाती हैं:
- धूम्रपान (सिगरेट, बीड़ी, सिगार)
- तंबाकू चबाना
- ज्यादा शराब पीना
- धूप में ज्यादा समय बिताना (होंठों के लिए खतरा)
- HPV संक्रमण
- परिवार में कैंसर का इतिहास
हालांकि, करीब 25% मामलों में ऐसे लोग भी होते हैं जिनमें कोई स्पष्ट कारण नहीं होता।
जांच कैसे होती है?
ओरल कैंसर की पहचान कई तरीकों से की जाती है:
- शारीरिक जांच – डॉक्टर मुंह, गले और गर्दन की जांच करते हैं
- ब्रश बायोप्सी – प्रभावित जगह से कोशिकाएं लेकर जांच
- टिश्यू बायोप्सी – छोटे हिस्से को निकालकर परीक्षण
- एंडोस्कोपी – गले के अंदर देखने के लिए कैमरा
कई बार दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट) भी शुरुआती संकेत पहचान सकते हैं।
क्या बचाव संभव है?
ओरल कैंसर से बचाव पूरी तरह संभव है, अगर कुछ आदतों में बदलाव किया जाए:
- तंबाकू का सेवन पूरी तरह बंद करें
- शराब सीमित मात्रा में लें या छोड़ दें
- नियमित रूप से मुंह की जांच कराएं
- HPV वैक्सीनेशन करवाएं
- मुंह की सफाई और देखभाल रखें
सरकार और स्वास्थ्य प्रणाली की भूमिका
भारत सरकार ने कैंसर की रोकथाम और इलाज के लिए कई कदम उठाए हैं। जागरूकता अभियान, स्क्रीनिंग प्रोग्राम और टीकाकरण जैसी पहलें इसमें मदद कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोगों में जागरूकता बढ़े और समय पर जांच हो, तो कैंसर से होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष:
भारत में ओरल कैंसर का बढ़ना एक गंभीर चेतावनी है। यह सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और व्यवहार से जुड़ा मुद्दा भी है। तंबाकू जैसी आदतों को छोड़ना और समय पर जांच कराना ही इसका सबसे बड़ा समाधान है।
हालांकि, सर्वाइकल कैंसर में गिरावट और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

