RBI का बड़ा फैसला! अब ऑटो-डेबिट होगा आसान – बार-बार OTP की झंझट खत्म?

डिजिटल पेमेंट को और सरल और तेज बनाने के लिए Reserve Bank of India (RBI) ने एक नया ई-मैंडेट फ्रेमवर्क जारी किया है। 21 अप्रैल 2026 को जारी इस “डिजिटल पेमेंट्स – ई-मैंडेट फ्रेमवर्क 2026” में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जो सीधे तौर पर उन लोगों को प्रभावित करेंगे जो ऑटो-डेबिट या सब्सक्रिप्शन आधारित भुगतान करते हैं।

इस नए नियम के तहत अब एक निश्चित सीमा तक के बार-बार होने वाले ट्रांजैक्शन (Recurring Transactions) बिना अतिरिक्त सत्यापन यानी AFA (Additional Factor Authentication) के भी पूरे किए जा सकेंगे।

 

क्या है सबसे बड़ा बदलाव

नए फ्रेमवर्क के अनुसार, अब 15,000 रुपये तक के हर ऑटो-डेबिट ट्रांजैक्शन के लिए अलग से AFA की जरूरत नहीं होगी। इसका मतलब है कि अगर आपने किसी सेवा के लिए ई-मैंडेट सेट किया है, तो हर बार OTP या अन्य अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

हालांकि, अगर ट्रांजैक्शन की राशि 15,000 रुपये से ज्यादा होती है, तो उस स्थिति में AFA अनिवार्य रहेगा।

 

कुछ मामलों में खास छूट

RBI ने कुछ जरूरी भुगतानों के लिए खास राहत भी दी है। जैसे बीमा प्रीमियम, म्यूचुअल फंड निवेश और क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान के लिए यह सीमा बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है।

यानी इन मामलों में 1 लाख रुपये तक के भुगतान बिना AFA के भी किए जा सकेंगे, जिससे उपयोगकर्ताओं को काफी सुविधा मिलेगी।

 

किन पर लागू होंगे ये नियम

यह नया फ्रेमवर्क सभी पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स और उनसे जुड़े प्रतिभागियों पर लागू होगा। इसमें कार्ड, प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट (PPI) और UPI जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

साथ ही यह नियम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के ट्रांजैक्शन पर लागू होंगे, जहां ई-मैंडेट के जरिए भुगतान किया जाता है।

RBI big decision Auto-debit will now be easy

ई-मैंडेट कैसे होगा रजिस्टर

अगर कोई ग्राहक ई-मैंडेट सुविधा लेना चाहता है, तो उसे एक बार रजिस्ट्रेशन करना होगा। इस प्रक्रिया में AFA जरूरी रहेगा, यानी शुरुआत में सुरक्षा के सभी नियम लागू होंगे।

रजिस्ट्रेशन के बाद ही ई-मैंडेट सक्रिय होगा और आगे के ट्रांजैक्शन तय नियमों के अनुसार होंगे।

 

ग्राहक को मिलेगी ज्यादा आजादी

नए फ्रेमवर्क में ग्राहकों को कई नए अधिकार दिए गए हैं। अब वे अपने ई-मैंडेट की वैधता अवधि खुद तय कर सकते हैं।

इसके अलावा, वे किसी भी समय अपने मंडेट को बदल सकते हैं या पूरी तरह से रद्द भी कर सकते हैं।

यह जानकारी रजिस्ट्रेशन के समय ही ग्राहक को स्पष्ट रूप से दी जाएगी, ताकि उसे अपनी सुविधा के अनुसार फैसले लेने में आसानी हो।

 

ट्रांजैक्शन से पहले और बाद में अलर्ट

RBI ने ग्राहकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नोटिफिकेशन सिस्टम को भी मजबूत किया है।

हर ऑटो-डेबिट से 24 घंटे पहले ग्राहक को एक अलर्ट भेजा जाएगा, जिसमें व्यापारी का नाम, ट्रांजैक्शन की राशि, तारीख और समय जैसी जानकारी होगी।

इसके अलावा, ट्रांजैक्शन पूरा होने के बाद भी एक मैसेज भेजा जाएगा, जिसमें सभी जरूरी विवरण और शिकायत दर्ज कराने की जानकारी होगी।

 

AFA कब जरूरी रहेगा

हालांकि कई मामलों में AFA की जरूरत खत्म की गई है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह अभी भी जरूरी रहेगा।

जैसे – ई-मैंडेट रजिस्ट्रेशन के समय, पहली बार ट्रांजैक्शन करते समय, और अगर कोई बदलाव या रद्द करने की प्रक्रिया होती है, तो AFA अनिवार्य रहेगा।

इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

 

विवाद और शिकायत निपटान

नए नियमों में विवाद निपटान पर भी खास ध्यान दिया गया है। हर बैंक या पेमेंट प्रदाता को एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली बनानी होगी।

अगर किसी ग्राहक को किसी ट्रांजैक्शन को लेकर समस्या होती है, तो वह आसानी से शिकायत दर्ज करा सकेगा और उसका समाधान भी समय पर किया जाएगा।

 

कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं

RBI ने यह भी साफ किया है कि ई-मैंडेट सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

इससे डिजिटल पेमेंट को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उपयोगकर्ताओं पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

 

अन्य अहम प्रावधान

अगर किसी ग्राहक का कार्ड बदल जाता है या नया कार्ड जारी होता है, तो पुराने ई-मैंडेट को नए कार्ड से जोड़ा जा सकेगा।

इसके अलावा, ग्राहक को यह भी विकल्प मिलेगा कि वह ट्रांजैक्शन के लिए अधिकतम सीमा तय कर सके और नोटिफिकेशन के लिए SMS या ईमेल में से किसी एक माध्यम का चयन कर सके।

 

क्या होगा इसका असर

इन नए नियमों से डिजिटल पेमेंट पहले से ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा। खासकर उन लोगों के लिए जो हर महीने सब्सक्रिप्शन या बिल भुगतान करते हैं, उन्हें बार-बार OTP डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि AFA में ढील देने से सुरक्षा को लेकर थोड़ी चिंता भी बढ़ सकती है। लेकिन RBI ने जरूरी जगहों पर सुरक्षा के नियम बनाए रखकर संतुलन बनाने की कोशिश की है।

 

निष्कर्ष:

कुल मिलाकर, RBI का नया ई-मैंडेट फ्रेमवर्क डिजिटल भुगतान को सरल बनाने और उपयोगकर्ताओं को ज्यादा नियंत्रण देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।