US Pacific Command: अमेरिका ने Indo-Pacific Command का नाम क्यों बदला, भारत और चीन के लिए क्या हैं इसके मायने?

 

अमेरिका ने अपने सबसे बड़े सैन्य कमांड US Indo-Pacific Command (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से US Pacific Command (USPACOM) कर दिया है। 2018 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान इस कमांड का नाम Pacific Command से बदलकर Indo-Pacific Command रखा गया था। उस समय इसे भारत और प्रशांत महासागर क्षेत्र के बढ़ते रणनीतिक महत्व का प्रतीक माना गया था।

अब आठ साल बाद अमेरिकी रक्षा विभाग ने एक बार फिर पुराने नाम को बहाल कर दिया है। हालांकि पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल नाम तक सीमित है। कमांड का क्षेत्र, सैन्य जिम्मेदारियां और रणनीतिक मिशन पहले जैसे ही रहेंगे।

लेकिन सवाल यह है कि जब सब कुछ पहले जैसा ही रहने वाला है तो फिर नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? और क्या इसका भारत, चीन और पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर कोई प्रभाव पड़ेगा?

क्या है US Pacific Command?

US Pacific Command अमेरिका के सबसे पुराने और सबसे बड़े सैन्य कमांडों में से एक है। इसकी स्थापना 1 जनवरी 1947 को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने की थी।

यह कमांड अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैले विशाल क्षेत्र की निगरानी करता है। इसके अधिकार क्षेत्र में प्रशांत महासागर, हिंद महासागर का बड़ा हिस्सा और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देश आते हैं।

करीब 3.75 लाख सैन्य और नागरिक कर्मचारी इस कमांड के तहत काम करते हैं। यह अमेरिकी सेना, नौसेना, वायुसेना, मरीन कॉर्प्स और स्पेस फोर्स के संयुक्त संचालन का नेतृत्व करता है।

 

2018 में नाम बदलकर Indo-Pacific Command क्यों किया गया था?

2018 में अमेरिका ने Pacific Command का नाम बदलकर Indo-Pacific Command कर दिया था। तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा था कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच बढ़ती कनेक्टिविटी को देखते हुए यह बदलाव किया जा रहा है।

उस समय अमेरिका की विदेश और सुरक्षा नीति में “इंडो-पैसिफिक” शब्द तेजी से उभर रहा था। इसका मकसद यह दिखाना था कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर अब एक साझा रणनीतिक क्षेत्र बन चुके हैं।

 

भारत को मिला था बड़ा रणनीतिक संदेश

नाम परिवर्तन को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत माना गया था। पहली बार अमेरिका ने अपने सबसे बड़े सैन्य कमांड के नाम में सीधे तौर पर “Indo” शब्द जोड़ा था। इससे यह संदेश गया कि भारत अब अमेरिका की एशिया रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

इसी दौर में Quad (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) को भी नई मजबूती मिली और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की कोशिशें तेज हुईं।

 

अब फिर Pacific Command नाम पर लौटने की वजह क्या है?

अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि यह फैसला ऐतिहासिक पहचान को बहाल करने के लिए लिया गया है। पेंटागन के मुताबिक Pacific Command नाम सात दशक से अधिक समय तक अमेरिकी सैन्य इतिहास का हिस्सा रहा है। कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और कई बड़े मानवीय अभियानों में इसी नाम से कमांड ने काम किया था।

अमेरिका का तर्क है कि पुराने नाम को वापस लाकर संगठन की विरासत और पहचान को मजबूत किया जा रहा है। हालांकि कई रणनीतिक विशेषज्ञ इसे केवल ऐतिहासिक फैसला नहीं मान रहे।

 

क्या भारत की अहमियत कम हुई है?

यह सबसे बड़ा सवाल है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने साफ कहा है कि भारत कमांड के अधिकार क्षेत्र में पहले की तरह शामिल रहेगा। भारत के साथ रक्षा सहयोग, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रणनीतिक साझेदारी में कोई बदलाव नहीं होगा। भारत आज भी अमेरिका का महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार है।

दोनों देशों के बीच:

  • मालाबार नौसैनिक अभ्यास
  • रक्षा तकनीक सहयोग
  • QUAD साझेदारी
  • इंडो-पैसिफिक समुद्री सुरक्षा सहयोग

जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम जारी हैं। इसलिए केवल नाम बदलने को भारत की भूमिका कम होने के संकेत के रूप में नहीं देखा जा रहा।

 

क्या यह चीन को कोई संदेश है?

कई विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य चीन को संतुलित करना ही बना रहेगा। अमेरिकी सैन्य दस्तावेजों में “Free and Open Indo-Pacific” यानी “मुक्त और खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र” की अवधारणा लगातार मौजूद है।

इस अवधारणा का सीधा संबंध दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति से जोड़ा जाता है। नाम बदलने के बावजूद कमांड की रणनीतिक प्राथमिकताएं नहीं बदली हैं। यानी चीन के खिलाफ अमेरिकी सैन्य और कूटनीतिक नीति में फिलहाल किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं।

 

आखिर US Combatant Commands क्या होते हैं?

दुनिया भर में अमेरिकी सैन्य संचालन को संभालने के लिए अमेरिका ने पूरे विश्व को अलग-अलग सैन्य कमांड में बांट रखा है। इन्हें Unified Combatant Commands कहा जाता है। 

आसान शब्दों में कहें तो: अमेरिकी रक्षा विभाग (Department of Defense) ने पूरी दुनिया (और अंतरिक्ष) को अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों और विशेष कार्यों में बांट रखा है। हर क्षेत्र या कार्य का नेतृत्व एक सर्वोच्च सैन्य कमांडर करता है, जो उस डोमेन में काम करने वाली अमेरिकी सेना की सभी शाखाओं (थल सेना, नौसेना, वायु सेना, मरीन और स्पेस फोर्स) को कमांड करता है।

वर्तमान में, अमेरिकी सेना के पास 11 यूनिफाइड कॉम्बैटेंट कमांड हैं। इन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है: भौगोलिक (Geographic) (नक्शे पर आधारित) और कार्यात्मक (Functional) (विशिष्ट क्षमताओं पर आधारित)।

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अमेरिका के 7 प्रमुख भौगोलिक सैन्य कमांड

  1. USPACOM (U.S. Pacific Command): यह अमेरिका का सबसे बड़ा भौगोलिक सैन्य कमांड है। जून 2026 में इसका नाम फिर से USPACOM कर दिया गया है। इसका जिम्मेदारी क्षेत्र (Area of Responsibility – AOR) भारत की पश्चिमी सीमा से लेकर प्रशांत महासागर तक फैला हुआ है। भारत इसी कमांड के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसका मुख्य उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, समुद्री मार्गों को खुला रखना तथा क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखना है।
  2. USCENTCOM (U.S. Central Command): यह मध्य पूर्व, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों को कवर करता है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सऊदी अरब, इराक, ईरान और खाड़ी क्षेत्र के अधिकांश देश इसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। हाल के दशकों में अमेरिका के प्रमुख सैन्य अभियान, जैसे इराक और अफगानिस्तान युद्ध, इसी कमांड के नेतृत्व में संचालित हुए थे।
  3. USEUCOM (U.S. European Command): यह पूरे यूरोप तथा यूरेशिया के कुछ हिस्सों को कवर करता है। इसका मुख्य कार्य NATO सहयोगियों के साथ मिलकर यूरोप की सुरक्षा सुनिश्चित करना, क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना तथा रूस से जुड़े सुरक्षा खतरों का सामना करना है।
  4. USAFRICOM (U.S. Africa Command): यह पूरे अफ्रीकी महाद्वीप को कवर करता है, लेकिन मिस्र (Egypt) इसके अंतर्गत नहीं आता और CENTCOM के अधिकार क्षेत्र में रहता है। इसका मुख्य फोकस आतंकवाद का मुकाबला करना, साझेदार देशों की सैन्य क्षमता बढ़ाना और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना है।
  5. USNORTHCOM (U.S. Northern Command): यह अमेरिका की “होमलैंड डिफेंस” (मातृभूमि की रक्षा) के लिए जिम्मेदार है। इसके क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको और आसपास के कुछ क्षेत्र शामिल हैं। यह प्राकृतिक आपदाओं, बड़े तूफानों और राष्ट्रीय आपात स्थितियों के दौरान नागरिक प्रशासन को सैन्य सहायता भी प्रदान करता है।
  6. USSOUTHCOM (U.S. Southern Command): यह मध्य अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र को कवर करता है। इसका मुख्य फोकस मादक पदार्थों की तस्करी से निपटना, सुरक्षा सहयोग बढ़ाना, मानवीय सहायता प्रदान करना और बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों का संचालन करना है।
  7. USSPACECOM (U.S. Space Command): यह अमेरिका का सबसे नया भौगोलिक सैन्य कमांड है, जिसे 2019 में पुनः स्थापित किया गया था। इसकी जिम्मेदारी अंतरिक्ष क्षेत्र (Space Domain) में अमेरिकी हितों की रक्षा करना, सैन्य सैटेलाइटों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, अंतरिक्ष अभियानों का संचालन करना और अंतरिक्ष से उत्पन्न खतरों का मुकाबला करना है। इसका संचालन क्षेत्र पृथ्वी की सतह से लगभग 100 किलोमीटर ऊपर से शुरू माना जाता है।

 

अमेरिका के 4 कार्यात्मक कॉम्बैटेंट कमांड (Functional Combatant Commands)

भौगोलिक कमांडों के विपरीत, ये कमांड किसी निश्चित क्षेत्र तक सीमित नहीं होते। इनकी जिम्मेदारी पूरी दुनिया में विशिष्ट सैन्य कार्यों का संचालन और सभी भौगोलिक कमांडों को विशेष सहायता प्रदान करना है।

  1. USSTRATCOM (U.S. Strategic Command): यह अमेरिका की रणनीतिक सैन्य क्षमताओं का प्रमुख कमांड है। इसकी जिम्मेदारी परमाणु प्रतिरोध (Nuclear Deterrence), वैश्विक स्ट्राइक अभियानों, मिसाइल चेतावनी प्रणालियों और रणनीतिक सुरक्षा अभियानों का संचालन करना है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी देश अमेरिका या उसके सहयोगियों के खिलाफ परमाणु हमला करने का जोखिम न उठाए।
  2. USSOCOM (U.S. Special Operations Command): यह अमेरिका की सभी विशेष अभियान बलों (Special Operations Forces) की देखरेख करता है, जिनमें Navy SEALs, Army Green Berets, Delta Force, Marine Raiders और Air Force Special Operations Forces शामिल हैं। यह आतंकवाद-रोधी अभियानों, बंधक बचाव मिशनों, विशेष टोही (Special Reconnaissance) और अन्य गुप्त सैन्य अभियानों का नेतृत्व करता है।
  3. USCYBERCOM (U.S. Cyber Command): यह अमेरिकी सैन्य साइबर अभियानों का संचालन और समन्वय करता है। इसकी जिम्मेदारी सैन्य नेटवर्कों और डेटा को साइबर हमलों से सुरक्षित रखना, दुश्मन की साइबर गतिविधियों की निगरानी करना तथा आवश्यकता पड़ने पर आक्रामक साइबर अभियान चलाना है। आधुनिक युद्ध में इसे अमेरिका की प्रमुख रक्षा पंक्ति माना जाता है।
  4. USTRANSCOM (U.S. Transportation Command): इसे अमेरिकी सेना की वैश्विक रसद (Global Logistics) प्रणाली की रीढ़ माना जाता है। यह दुनिया के किसी भी हिस्से में सैनिकों, हथियारों, सैन्य वाहनों, ईंधन और अन्य आवश्यक संसाधनों को वायु, समुद्र और भूमि मार्गों से तेजी से पहुंचाने के लिए जिम्मेदार है। किसी भी बड़े अमेरिकी सैन्य अभियान की सफलता काफी हद तक इसी कमांड की क्षमता पर निर्भर करती है।

 

भारत और पाकिस्तान अलग-अलग अमेरिकी कमांड के तहत क्यों आते हैं?

यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। भारत US Pacific Command के तहत आता है, जबकि पाकिस्तान US Central Command के अधिकार क्षेत्र में है।

इसका मतलब यह है कि अमेरिका भारत को मुख्य रूप से हिंद-प्रशांत सुरक्षा, समुद्री रणनीति और चीन से जुड़े मामलों के संदर्भ में देखता है। वहीं पाकिस्तान को मध्य पूर्व, अफगानिस्तान और आतंकवाद विरोधी अभियानों के संदर्भ में देखा जाता है। यही वजह है कि दोनों देशों के प्रति अमेरिकी सैन्य और कूटनीतिक दृष्टिकोण में काफी अंतर दिखाई देता है।

 

क्या Indo-Pacific रणनीति खत्म हो रही है?

फिलहाल ऐसा नहीं लगता। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत आज भी Indo-Pacific शब्द का व्यापक इस्तेमाल कर रहे हैं।

QUAD, समुद्री सुरक्षा सहयोग, सप्लाई चेन नेटवर्क और क्षेत्रीय साझेदारियों में “इंडो-पैसिफिक” अवधारणा पहले की तरह मौजूद है। अमेरिकी विदेश विभाग और व्हाइट हाउस की रणनीतिक दस्तावेजों में भी Indo-Pacific क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है। इसलिए यह बदलाव अधिकतर प्रतीकात्मक माना जा रहा है, न कि रणनीतिक।

 

भारत के लिए इसका क्या मतलब है?

भारत के लिए तत्काल कोई प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई नहीं देता।

  • भारत कमांड के अधिकार क्षेत्र में बना रहेगा।
  • रक्षा सहयोग जारी रहेगा।
  • QUAD साझेदारी प्रभावित नहीं होगी।
  • संयुक्त सैन्य अभ्यास पहले की तरह चलते रहेंगे।
  • हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिका-भारत सहयोग जारी रहेगा।

हालांकि यह जरूर देखा जाएगा कि आने वाले वर्षों में अमेरिका अपनी एशिया नीति में “Indo-Pacific” शब्द का इस्तेमाल किस स्तर तक जारी रखता है।

 

निष्कर्ष

US Indo-Pacific Command का नाम बदलकर फिर से US Pacific Command करना पहली नजर में एक साधारण प्रशासनिक फैसला लग सकता है, लेकिन इसके पीछे अमेरिका की सैन्य विरासत, रणनीतिक संदेश और वैश्विक शक्ति संतुलन की राजनीति भी जुड़ी हुई है।

अमेरिका का दावा है कि केवल नाम बदला है, मिशन नहीं। भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य साझेदार देशों के साथ उसकी रणनीतिक प्रतिबद्धता पहले जैसी ही रहेगी। वहीं चीन पर नजर रखने और “मुक्त एवं खुला क्षेत्र” बनाए रखने की नीति में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इसलिए फिलहाल इसे अमेरिकी सैन्य इतिहास की वापसी के रूप में देखा जा रहा है, न कि भारत की भूमिका में कमी या इंडो-पैसिफिक रणनीति के अंत के संकेत के रूप में।

 

FAQ

  1. Why did the US revert to Pacific Command?
    अमेरिका ने US Indo-Pacific Command का नाम बदलकर फिर से US Pacific Command इसलिए किया क्योंकि पेंटागन के अनुसार यह नाम कमांड की ऐतिहासिक विरासत और पहचान से जुड़ा हुआ है। हालांकि, इस बदलाव से कमांड के क्षेत्र, मिशन या सैन्य जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं होगा।
  2. What was the Indo-Pacific Command?
    US Indo-Pacific Command (USINDOPACOM) अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य कमांड था, जो भारत की पश्चिमी सीमा से लेकर प्रशांत महासागर तक फैले क्षेत्र की सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों की निगरानी करता है। 2018 में इसका नाम Pacific Command से बदलकर Indo-Pacific Command किया गया था।
  3. Why was the Indian Ocean reference removed?
    अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि यह केवल एक नाम परिवर्तन है और इसका उद्देश्य ऐतिहासिक पहचान को बहाल करना है। भारतीय महासागर या भारत की रणनीतिक भूमिका को कम करने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।
  4. What are the strategic implications of the change?
    रणनीतिक रूप से इस फैसले को प्रतीकात्मक माना जा रहा है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उसकी Indo-Pacific नीति, क्षेत्रीय साझेदारियां और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति पहले की तरह जारी रहेगी।
  5. How could the decision affect the Indo-Pacific region?
    फिलहाल इस फैसले से Indo-Pacific क्षेत्र में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं दिखती। अमेरिका की सैन्य मौजूदगी, QUAD सहयोग, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय साझेदारियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है।
  6. Will India-US defence cooperation be affected?
    नहीं। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग, संयुक्त सैन्य अभ्यास, तकनीकी साझेदारी और Indo-Pacific क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग पहले की तरह जारी रहने की संभावना है।
  7. Why was the command renamed to Indo-Pacific in 2018?
    2018 में अमेरिका ने हिंद और प्रशांत महासागरों के बीच बढ़ती रणनीतिक कनेक्टिविटी को देखते हुए Pacific Command का नाम बदलकर Indo-Pacific Command किया था। यह भारत के बढ़ते महत्व का भी संकेत माना गया था।
  8. Does the name change benefit China?
    ऐसा कोई संकेत नहीं है कि इस बदलाव से चीन को कोई सीधा लाभ मिलेगा। अमेरिका ने साफ किया है कि उसकी “Free and Open Indo-Pacific” नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
  9. What is the area of responsibility of US Pacific Command?
    US Pacific Command का अधिकार क्षेत्र अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है। इसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण देश और समुद्री मार्ग शामिल हैं।
  10. Is the Indo-Pacific strategy ending?
    नहीं। अमेरिका, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य साझेदार देश अभी भी Indo-Pacific रणनीति पर काम कर रहे हैं। नाम बदलने का मतलब यह नहीं है कि Indo-Pacific अवधारणा या उससे जुड़ी नीतियां खत्म हो रही हैं।