दिल्ली-एनसीआर (NCR) में बढ़ती आबादी, प्रदूषण, ट्रैफिक और बुनियादी सुविधाओं पर बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा शहरी विकास प्लान तैयार किया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की 42वीं बैठक में चार नए सेमी-ग्रीनफील्ड शहर विकसित करने का फैसला लिया गया है, जिन्हें “Namo Cities” नाम दिया जाएगा।

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। इन शहरों का उद्देश्य भविष्य की बढ़ती आबादी को व्यवस्थित तरीके से बसाना, प्रदूषण कम करना और आधुनिक शहरी सुविधाओं के साथ टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना है।
NCR के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र वर्तमान में करीब 7.86 करोड़ लोगों का घर है। क्षेत्रफल की बात करें तो NCR लगभग 55,083 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जिसमें दिल्ली के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के 27 जिले शामिल हैं।

क्षेत्रीय योजना 2041 (Regional Plan 2041) के अनुसार वर्ष 2041 तक NCR की आबादी बढ़कर लगभग 14.73 करोड़ पहुंच सकती है। यानी अगले 15 वर्षों में करीब 7 करोड़ अतिरिक्त लोगों को आवास, परिवहन, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। सबसे अधिक दबाव शहरी क्षेत्रों और बड़े शहरों पर पड़ेगा। इसी चुनौती को देखते हुए (Namo Cities) की अवधारणा सामने लाई गई है।
क्या हैं Namo Cities?
(Namo Cities) ऐसे आधुनिक शहर होंगे जिन्हें क्षेत्रीय तीव्र परिवहन प्रणाली यानी नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर के मौजूदा और प्रस्तावित स्टेशनों के आसपास विकसित किया जाएगा। इन शहरों को मिश्रित उपयोग (Mixed Use) और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसका मतलब है कि आवासीय क्षेत्र, कार्यालय, व्यावसायिक केंद्र, सार्वजनिक सेवाएं और परिवहन सुविधाएं एक-दूसरे के करीब होंगी। इससे लोगों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और ट्रैफिक तथा प्रदूषण दोनों में कमी आएगी।

चार राज्यों में बनेंगे चार Namo Cities
NCR योजना बोर्ड ने फैसला किया है कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में एक-एक (Namo City) विकसित की जाएगी। इन शहरों का चयन प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। यानी राज्यों को अपनी-अपनी परियोजनाएं प्रस्तुत करनी होंगी, जिसके बाद सर्वोत्तम प्रस्तावों का चयन किया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 5,000 करोड़ रुपये का प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया है। इस पैकेज में अनुदान (Grant), ऋण (Loan) और गारंटी (Guarantee) का मिश्रण होगा। इसमें 1,000 करोड़ रुपये का सीधा अनुदान भी शामिल रहेगा।
दिल्ली में किन जगहों पर बन सकती है Namo City?
दिल्ली सरकार ने फिलहाल तीन संभावित क्षेत्रों की पहचान की है।
- नरेला-बवाना: इस क्षेत्र में पर्याप्त खाली जमीन उपलब्ध है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से जुड़ा हुआ है और भविष्य में मेट्रो तथा RRTS कॉरिडोर से भी कनेक्ट होगा।
- अलीपुर-बुराड़ी: यह क्षेत्र भूमि पूलिंग नीति के कारण विकास के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। साथ ही एक्सप्रेसवे के निकट होने के कारण उत्तर प्रदेश और हरियाणा से इसकी बेहतर कनेक्टिविटी है।
- द्वारका फेज-2: द्वारका फेज-2 एयरपोर्ट और द्वारका एक्सप्रेसवे के करीब स्थित है। यहां यशोभूमि और डिप्लोमैटिक एन्क्लेव जैसी परियोजनाओं के कारण “वॉक-टू-वर्क” मॉडल विकसित किया जा सकता है।
इन तीनों स्थानों में से एक का अंतिम चयन तकनीकी, भौगोलिक और कनेक्टिविटी मूल्यांकन के बाद किया जाएगा।
Namo City को खास क्या बनाएगा?
Namo City Project को पूरी तरह भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है। इन शहरों में बड़े पैमाने पर हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। प्रदूषण नियंत्रण के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों और साइकिलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इसके अलावा 24 घंटे बिजली और पानी की सुविधा, भूमिगत यूटिलिटी नेटवर्क, स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम और डिजिटल शहरी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
शहरों की योजना इस प्रकार बनाई जाएगी कि लोगों के घर, कार्यालय और व्यावसायिक केंद्र एक-दूसरे के निकट हों। इससे रोजाना की यात्रा कम होगी और यातायात दबाव घटेगा।
NCR में प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या नया प्लान है?
बैठक में सिर्फ (Namo Cities) पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए भी बड़े फैसले लिए गए। केंद्र सरकार ने पुराने बस और ट्रक बेड़े को बदलने की योजना का नाम PARIVARTAN रखा है। इसका पूरा नाम Program for Accelerated Renewal and Incentivization of Vehicle Assets for Reducing Transport Air-Pollution and Network Emission है। इस योजना के तहत BS-IV और उससे पुराने ट्रकों तथा बसों को हटाकर BS-VI, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा। शुरुआत में यह योजना स्वैच्छिक होगी, लेकिन बाद में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।
NCR में हरित क्षेत्र बढ़ाने पर भी फोकस
योजना बोर्ड ने पूरे NCR में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए एक नई प्रोत्साहन योजना बनाने का भी फैसला लिया है। इसमें राज्य सरकारों के साथ-साथ निजी नागरिकों और कंपनियों की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। बैठक में ग्रीन कैनोपी क्रेडिट और विशेष विकास अधिकारों जैसे नवाचारी उपायों को प्रोत्साहित करने पर भी सहमति बनी। इसका उद्देश्य तेजी से शहरीकरण के बीच पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है।
- NCR की सीमा में कोई बदलाव नहीं
बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण निर्णय यह भी लिया गया कि NCR के मौजूदा भौगोलिक क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यानी दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के जो क्षेत्र वर्तमान में NCR का हिस्सा हैं, वही आगे भी बने रहेंगे।
- RP-2041 क्यों महत्वपूर्ण है?
Namo Cities से क्या बदलेगा?
(Namo Cities) का उद्देश्य केवल नए शहर बसाना नहीं है। यह परियोजना NCR में भविष्य की आबादी को व्यवस्थित तरीके से बसाने, प्रदूषण कम करने, ट्रैफिक दबाव घटाने और आधुनिक शहरी जीवनशैली उपलब्ध कराने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। यदि योजना सफल होती है, तो दिल्ली-NCR में आने वाले वर्षों में ऐसे शहर विकसित हो सकते हैं जहां रोजगार, आवास, परिवहन और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन देखने को मिलेगा।
FAQs
(Namo Cities) दिल्ली-NCR में प्रस्तावित चार आधुनिक सेमी-ग्रीनफील्ड शहर हैं, जिन्हें नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर के आसपास विकसित किया जाएगा।
इस परियोजना की घोषणा NCR योजना बोर्ड की 42वीं बैठक में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने की।
बढ़ती आबादी के लिए आधुनिक, प्रदूषण-मुक्त, स्मार्ट और टिकाऊ शहरी केंद्र विकसित करना इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है।
दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के वे क्षेत्र लाभान्वित होंगे जो NCR का हिस्सा हैं और जहां (Namo Cities) विकसित की जाएंगी।
इन शहरों में स्मार्ट ट्रांसपोर्ट, हरित क्षेत्र, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, 24×7 सुविधाएं, स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट और बेहतर शहरी योजना के माध्यम से आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।

