कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने दी राहुल को नसीहत: ममता बनर्जी को बनाओ INDIA का चेहरा, वरना गठबंधन बिखर जाएगा!

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान INDIA गठबंधन के नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया। अय्यर ने कहा कि अगर ममता बनर्जी इस गठबंधन में नहीं रहीं, तो इसके नाम के ‘I’, ‘N’, ‘D’, ‘I’, ‘A’ अक्षरों का कोई मतलब नहीं बचेगा। उनके मुताबिक ममता बनर्जी इस गठबंधन की सबसे अहम नेता हैं और उनके बिना इसकी पहचान कमजोर पड़ सकती है।

 

ममता बनर्जी को बताया मजबूत चेहरा

अय्यर ने कहा कि राहुल गांधी को गठबंधन का नेतृत्व खुद करने की बजाय छोटी और क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि स्टालिन, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव जैसे नेताओं को जिम्मेदारी दी जा सकती है। उनका मानना है कि विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए नेतृत्व साझा होना चाहिए।

 

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद अपनी रणनीति को लेकर मंथन कर रहे हैं। अय्यर का कहना है कि गठबंधन की ताकत उसकी विविधता में है, इसलिए नेतृत्व भी उसी भावना के अनुसार होना चाहिए।

Mani Shankar Aiyar statement

TMC से जुड़ा पुराना रिश्ता

कोलकाता में ही अय्यर ने यह भी याद दिलाया कि वह तृणमूल कांग्रेस के शुरुआती दौर में ममता बनर्जी के साथ काम कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि दिसंबर 1997 के अंत में वह पार्टी से जुड़े थे और करीब तीन हफ्तों तक ममता बनर्जी के साथ राष्ट्रीय सचिव के तौर पर काम किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में खुद को उस समय “राइट-हैंड मैन” भी बताया।

 

हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें जल्द ही एहसास हो गया कि यह पार्टी मुख्य रूप से बंगालियों की है और वह खुद बंगाली नहीं हैं। इसलिए उन्होंने पार्टी छोड़ दी। लेकिन उन्होंने ममता बनर्जी की राजनीतिक क्षमता की तारीफ की।

 

राहुल गांधी पर लगातार टिप्पणी

मणिशंकर अय्यर पिछले कुछ दिनों में राहुल गांधी को लेकर भी बयान दे चुके हैं। 16 फरवरी को उन्होंने कहा था कि वह खुद को गांधियन, नेहरूवियन और राजीवियन मानते हैं, लेकिन “राहुलियन” नहीं कह सकते। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी उनसे करीब 30 साल छोटे हैं और उन्हें उनके साथ काम करने का ज्यादा अवसर नहीं मिला, इसलिए वह खुद को राहुलवादी कैसे कह सकते हैं।

 

इस बयान के बाद पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चा तेज हो गई। इससे पहले भी अय्यर ने कहा था कि INDIA ब्लॉक को मजबूत करने के लिए एमके स्टालिन बेहतर विकल्प हो सकते हैं, जबकि राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं।

 

राजीव गांधी पर शिक्षा को लेकर बयान

हाल ही में अय्यर ने एक इंटरव्यू में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की शिक्षा को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, तो उन्हें आश्चर्य हुआ क्योंकि उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड मजबूत नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि राजीव गांधी एयरलाइन पायलट थे और दो बार फेल हुए थे, ऐसे में उन्हें प्रधानमंत्री बनाए जाने पर उन्हें हैरानी हुई थी।

 

इस बयान पर भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने भी इस पर नाराजगी जताई और कहा कि वह किसी निराश व्यक्ति पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने राजीव गांधी को आधुनिक सोच वाला नेता बताया।

 

गांधी परिवार पर भी की टिप्पणी

करीब तीन महीने पहले अय्यर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि गांधी परिवार ने उनका राजनीतिक करियर बनाया भी और खत्म भी किया। उन्होंने बताया कि पिछले 10 साल में उन्हें सोनिया गांधी से सिर्फ एक बार मिलने का मौका मिला। उन्होंने यह भी कहा कि वह कभी भाजपा में नहीं जाएंगे, चाहे जो भी हो।

 

उन्होंने एक किस्सा भी साझा किया था कि एक बार राहुल गांधी को शुभकामनाएं भेजने के लिए उन्हें प्रियंका गांधी से संपर्क करना पड़ा। एक और मौके पर जब उन्होंने सोनिया गांधी को क्रिसमस की बधाई दी, तो उन्होंने जवाब दिया कि वह क्रिश्चियन नहीं हैं।

 

अपनी किताब ‘मणिशंकर अय्यर: ए मैवेरिक इन पॉलिटिक्स’ में उन्होंने लिखा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया। उनके अनुसार राहुल गांधी ने कहा था कि उन्हें टिकट नहीं मिलेगा क्योंकि वह काफी उम्रदराज हो चुके हैं। अय्यर तमिलनाडु की मयिलादुथुराई सीट से तीन बार सांसद रह चुके हैं और राज्यसभा के सदस्य भी रहे हैं।

 

प्रणब मुखर्जी को लेकर राय

अय्यर ने यह भी कहा कि अगर प्रणब मुखर्जी प्रधानमंत्री बने होते, तो 2014 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस इतनी बुरी तरह नहीं हारती। उन्होंने बताया कि 2012 के बाद कांग्रेस की स्थिति कमजोर होने लगी थी। सोनिया गांधी की तबीयत खराब रहती थी और मनमोहन सिंह की सेहत भी ठीक नहीं थी। ऐसे में पार्टी का नेतृत्व सक्रिय नहीं दिख रहा था। उनके मुताबिक प्रणब मुखर्जी इस स्थिति को बेहतर तरीके से संभाल सकते थे।

 

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 282 सीटें जीतकर पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल किया था, जबकि कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई थी।

 

पहले भी विवादों में रहे

मणिशंकर अय्यर पहले भी कई बार अपने बयानों को लेकर विवादों में घिरे हैं।

  • 2018 में कराची में उन्होंने कहा था कि उन्हें कश्मीर पर पाकिस्तान की नीति पर गर्व है और वह पाकिस्तान से भी उतना ही प्यार करते हैं जितना भारत से।
  • अगस्त 2023 में उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के लोग भारत को दुश्मन नहीं मानते और बातचीत बंद रहने से वहां की जनता परेशान होती है।
  • 2019 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें निलंबित कर दिया था।
  • अगस्त 2023 में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को सांप्रदायिक बताया था और कहा था कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने के समय वह पूजा कर रहे थे।

 

राजनीतिक संदेश या व्यक्तिगत नाराजगी?

लगातार दिए जा रहे बयानों से यह सवाल उठ रहा है कि अय्यर के ये बयान सिर्फ निजी राय हैं या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश है। एक तरफ वह क्षेत्रीय नेताओं को आगे लाने की बात कर रहे हैं, दूसरी ओर राहुल गांधी और गांधी परिवार पर टिप्पणी भी कर रहे हैं। इससे कांग्रेस के भीतर असहज स्थिति बनती दिख रही है।

 

हालांकि अय्यर खुद को पार्टी का पुराना और ईमानदार कार्यकर्ता बताते हैं। उनका कहना है कि वह खुलकर अपनी बात रखने में विश्वास करते हैं।