देश की संवैधानिक व्यवस्था में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को सात राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल और उपराज्यपालों की नई नियुक्तियों को मंजूरी दी। इस फैसले के तहत कई राज्यों में राज्यपाल बदले गए, कुछ का स्थानांतरण किया गया और कुछ नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई।
सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल में हुए बदलाव को लेकर हो रही है। वहां के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह अब तमिलनाडु के राज्यपाल रहे आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल भेजा गया है। इसी के साथ कई अन्य राज्यों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
राज्य / UT (State/UT) | नए राज्यपाल/उपराज्यपाल (New Governor/LG) | पूर्व राज्यपाल/उपराज्यपाल (Former Governor/LG) |
पश्चिम बंगाल (West Bengal) | आर.एन. रवि (R.N. Ravi) | सी.वी. आनंद बोस (C.V. Ananda Bose) |
महाराष्ट्र (Maharashtra) | जिष्णु देव वर्मा (Jishnu Dev Varma) | आचार्य देवव्रत (Acharya Devvrat) अतिरिक्त प्रभार |
बिहार (Bihar) | ले. जनरल (रिटा.) सैयद अता हसनैन (Lt Gen Syed Ata Hasnain) | आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammed Khan) |
तमिलनाडु (Tamil Nadu) | राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर (R.V. Arlekar) अतिरिक्त प्रभार | आर.एन. रवि (R.N. Ravi) |
तेलंगाना (Telangana) | शिव प्रताप शुक्ला (Shiv Pratap Shukla) | जिष्णु देव वर्मा (Jishnu Dev Varma) |
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) | कवींद्र गुप्ता (Kavinder Gupta) | शिव प्रताप शुक्ला (Shiv Pratap Shukla) |
नगालैंड (Nagaland) | नंदकिशोर यादव (Nand Kishore Yadav) | अजय कुमार भल्ला (Ajay Kumar Bhalla) अतिरिक्त प्रभार |
दिल्ली (Delhi) – UT | तरनजीत सिंह संधू (Taranjit Singh Sandhu) | विनय कुमार सक्सेना (Vinai Kumar Saxena) |
लद्दाख (Ladakh) – UT | विनय कुमार सक्सेना (Vinai Kumar Saxena) | कवींद्र गुप्ता (Kavinder Gupta) |
पश्चिम बंगाल में नया राज्यपाल
पश्चिम बंगाल में सीवी आनंद बोस नवंबर 2022 से राज्यपाल के पद पर थे। उनके इस्तीफे के बाद केंद्र ने आर.एन. रवि को इस पद की जिम्मेदारी दी है। आर.एन. रवि पहले तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में काम कर रहे थे। अब उन्हें बंगाल का राज्यपाल बनाया गया है।
इस नियुक्ति के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल देखने को मिली है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस नियुक्ति के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उनका कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री ने बाद में उन्हें सूचना दी कि आर.एन. रवि को बंगाल का राज्यपाल बनाया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि इस मामले में उनकी राय नहीं ली गई और यह पूरी तरह केंद्र का फैसला है। उनके बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

लद्दाख और हिमाचल में भी बदलाव
राज्यपालों के इस फेरबदल में लद्दाख और हिमाचल प्रदेश से जुड़े पदों में भी बदलाव हुआ है। लद्दाख के उपराज्यपाल कवींद्र गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
वहीं दिल्ली के उपराज्यपाल रहे विनय कुमार सक्सेना को अब लद्दाख का नया उपराज्यपाल बनाया गया है। इस बदलाव के साथ दिल्ली में भी नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है।
दिल्ली को मिला नया उपराज्यपाल
दिल्ली के नए उपराज्यपाल के रूप में तरनजीत सिंह संधू को नियुक्त किया गया है। इससे पहले इस पद पर विनय कुमार सक्सेना कार्य कर रहे थे। अब उनकी नई जिम्मेदारी लद्दाख में होगी।
दिल्ली, जो एक केंद्र शासित प्रदेश है, वहां उपराज्यपाल की भूमिका प्रशासन में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए यह बदलाव भी प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
अन्य राज्यों में भी राज्यपाल बदले
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद महाराष्ट्र, बिहार, तेलंगाना, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश और नगालैंड में भी राज्यपालों की नियुक्ति में बदलाव किए गए हैं।
महाराष्ट्र में जिष्णु देव वर्मा को नया राज्यपाल बनाया गया है। इससे पहले गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के पास महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार भी था।
बिहार में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इससे पहले इस पद पर आरिफ मोहम्मद खान कार्य कर रहे थे।
तेलंगाना में शिव प्रताप शुक्ला को नया राज्यपाल बनाया गया है, जबकि तमिलनाडु में राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को राज्यपाल की जिम्मेदारी दी गई है। आर्लेकर पहले केरल के राज्यपाल थे और उनके पास अतिरिक्त प्रभार भी था।
नगालैंड में नंदकिशोर यादव को नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इससे पहले अजय कुमार भल्ला के पास मणिपुर के साथ नगालैंड का अतिरिक्त प्रभार था।
बंगाल में पहले भी रहे विवाद
सीवी आनंद बोस के कार्यकाल के दौरान पश्चिम बंगाल की सरकार और राजभवन के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आए थे। इन विवादों ने कई बार राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया।
2023 में राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ था। राज्यपाल ने कई विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर नियुक्त किए थे, जिस पर राज्य सरकार ने आपत्ति जताई थी। सरकार का कहना था कि यह नियुक्तियां उनकी सलाह के बिना की गईं।
दूसरी ओर राज्यपाल का कहना था कि कानून के अनुसार उन्हें यह अधिकार प्राप्त है। यह मामला अदालत तक पहुंच गया था और इससे राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ा।
विधेयकों की मंजूरी को लेकर भी तनाव
राज्य सरकार ने यह आरोप भी लगाया था कि कई विधेयकों को राज्यपाल द्वारा मंजूरी देने में देरी की जा रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा बताया था।
हालांकि राज्यपाल की ओर से कहा गया कि किसी भी विधेयक पर निर्णय लेने से पहले उसकी संवैधानिक जांच जरूरी होती है। इस मुद्दे ने भी सरकार और राजभवन के बीच संबंधों को और तनावपूर्ण बना दिया था।
केंद्रीय योजनाओं पर टिप्पणी
राज्यपाल बोस ने मनरेगा और अन्य केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कुछ योजनाओं में कथित अनियमितताओं की बात कही थी।
राज्य सरकार ने इन टिप्पणियों को राजनीतिक बताया था। इस मुद्दे पर भी दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी देखने को मिली।
जिलों के दौरे पर भी विवाद
राज्यपाल के जिलों के दौरे और आम लोगों से सीधे संवाद को लेकर भी सरकार ने आपत्ति जताई थी। सरकार का कहना था कि इससे समानांतर प्रशासन की स्थिति बन सकती है।
वहीं राज्यपाल ने कहा था कि जनता से मिलना और उनकी समस्याएं सुनना उनके संवैधानिक दायित्व का हिस्सा है।
अन्य विवाद भी सामने आए
2024 में राजभवन से जुड़े कुछ कर्मचारियों द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायतें सामने आई थीं। इस मामले में राज्य सरकार ने जांच और कार्रवाई की मांग की थी।
हालांकि राज्यपाल ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा था कि यह राजनीतिक कारणों से लगाए जा रहे हैं। यह मामला आगे बढ़ने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रहा।
सीवी आनंद बोस का प्रशासनिक और साहित्यिक जीवन
78 वर्षीय सीवी आनंद बोस 1977 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने अपने प्रशासनिक करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।
वे केरल के मुख्यमंत्री के सचिव भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा, वन एवं पर्यावरण, श्रम और सामान्य प्रशासन जैसे विभागों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
प्रशासन के साथ-साथ वे एक लेखक के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने अंग्रेजी, मलयालम और हिंदी भाषाओं में लगभग 40 किताबें लिखी हैं। इनमें उपन्यास, कहानियां, कविताएं और निबंध शामिल हैं। उनकी कुछ किताबें काफी लोकप्रिय भी रही हैं।
अपने योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
राज्यपाल की नियुक्ति कैसे होती है
भारत के संविधान के अनुसार राज्यपाल किसी भी राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। यह नियुक्ति राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और मुहर वाले आदेश के माध्यम से होती है।
राज्यपाल सीधे जनता द्वारा चुने नहीं जाते। वे केंद्र सरकार के नामित प्रतिनिधि होते हैं। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि राज्यपाल का पद केंद्र सरकार के अधीन नौकरी नहीं माना जाता, बल्कि यह एक स्वतंत्र संवैधानिक पद है।
संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार हर राज्य में एक राज्यपाल होना जरूरी है। आवश्यकता होने पर एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल भी बनाया जा सकता है।
राज्यपाल अपने पद पर तब तक बने रहते हैं जब तक राष्ट्रपति का विश्वास उन पर बना रहता है। यानी उन्हें किसी भी समय पद से हटाया भी जा सकता है।
आगे क्या असर पड़ेगा
राज्यपालों और उपराज्यपालों की इस बड़ी नियुक्ति को प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन कुछ राज्यों में इसके राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकते हैं, खासकर पश्चिम बंगाल में जहां पहले से ही सरकार और राजभवन के बीच कई मुद्दों पर टकराव की स्थिति रही है।
अब नए राज्यपालों के आने के बाद केंद्र और राज्यों के संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

