दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच स्थित क्षेत्र में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ रहा है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल के दिनों में सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। इस बीच रूस और चीन जैसे बड़े देश अब इस तनाव को कम करने के लिए सक्रिय हो गए हैं।
रूस ने फिर दिया मध्यस्थता का प्रस्ताव
रूस ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच बातचीत कराने की पेशकश की है। रूस के अफगानिस्तान मामलों के विशेष प्रतिनिधि जमीर काबुलोव ने कहा कि मॉस्को इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए है और बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है।
उन्होंने साफ कहा कि इस समय सबसे जरूरी है कि दोनों देश लड़ाई रोकें और बातचीत की राह अपनाएं। काबुलोव ने बताया कि रूस ऐसा समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है जिससे संघर्ष खत्म हो और कूटनीति के जरिए आगे का रास्ता निकले।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस तब तक मध्यस्थता नहीं करेगा, जब तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों एक साथ औपचारिक रूप से इसकी मांग नहीं करते।

बिना सहमति हस्तक्षेप नहीं करेगा रूस
रूस ने यह साफ कर दिया है कि वह इस मामले में खुद से दखल नहीं देगा। काबुलोव के मुताबिक, दोनों देशों की सहमति के बिना कोई भी मध्यस्थता संभव नहीं है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में पूर्ण युद्ध की संभावना कम है, लेकिन तनाव बना हुआ है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
चीन भी हुआ सक्रिय
इस पूरे मामले में चीन ने भी अपनी भूमिका बढ़ा दी है। वांग यी ने दोनों देशों के नेताओं से फोन पर बात की और संयम बरतने की अपील की।
चीन के विशेष दूत भी लगातार काबुल और इस्लामाबाद के बीच संपर्क बनाए हुए हैं। बीजिंग का कहना है कि वह बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने में मदद करता रहेगा।
ईद के मौके पर अस्थायी युद्धविराम
तनाव के बीच एक राहत की खबर भी सामने आई। पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद-उल-फितर के मौके पर अस्थायी रूप से लड़ाई रोकने का ऐलान किया।
यह फैसला सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के अनुरोध पर लिया गया। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बताया कि यह विराम 18/19 मार्च की रात से 23/24 मार्च तक लागू रहेगा।
हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान पर कोई हमला हुआ तो ऑपरेशन तुरंत फिर से शुरू कर दिया जाएगा।
अफगानिस्तान की प्रतिक्रिया
अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने भी इस अस्थायी युद्धविराम की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि ईद के मौके पर रक्षात्मक कार्रवाई रोकी जाएगी, लेकिन किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा।
ऑपरेशन ‘ग़ज़ब-लिल-हक़’ क्या है?
पाकिस्तान ने 26 फरवरी से “ऑपरेशन ग़ज़ब-लिल-हक़” शुरू किया था। यह कार्रवाई अफगान तालिबान की ओर से सीमा पर हमलों के जवाब में की गई।
पाकिस्तान का दावा है कि इस ऑपरेशन में अब तक 700 से ज्यादा तालिबान लड़ाके मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। इसके अलावा कई ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है।
हवाई हमले और आरोप-प्रत्यारोप
अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसके अनुसार, काबुल में एक ड्रग रिहैबिलिटेशन सेंटर पर हुए हमले में करीब 400 लोगों की मौत हुई और 250 घायल हुए।
लेकिन पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि हमला एक हथियार डिपो पर किया गया था, जहां ड्रोन और गोला-बारूद रखा गया था।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर वहां अस्पताल था तो उसके पास हथियार क्यों रखे गए थे।
सीमा पर बढ़ती झड़पें
पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान के अंदर 80 से ज्यादा हवाई हमले किए और 200 से ज्यादा ठिकानों को नष्ट किया। इसके अलावा कुछ ठिकानों पर कब्जा भी किया गया।
नॉर्थ वजीरिस्तान और साउथ वजीरिस्तान क्षेत्रों में भी घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम किया गया है।
TTP और आतंकवाद का मुद्दा
पाकिस्तान ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को लेकर भी चिंता जताई है। उसका कहना है कि अफगान तालिबान इन संगठनों को शरण दे रहा है।
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से साफ कहा है कि उसे तय करना होगा कि वह आतंकवाद के खिलाफ खड़ा है या उसके साथ।
भारत पर लगाए गए आरोप
इस पूरे मामले में पाकिस्तान ने भारत पर भी आरोप लगाया है कि वह अफगान तालिबान को ड्रोन और अन्य सहायता दे रहा है। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया गया है।
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है। रूस और चीन की सक्रियता यह दिखाती है कि बड़े देश भी इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं।
अगर यह तनाव बढ़ता है, तो इसका असर व्यापार, सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।
क्या आगे बढ़ेगी बातचीत?
फिलहाल स्थिति नाजुक बनी हुई है। अस्थायी युद्धविराम से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए बातचीत जरूरी है।
रूस और चीन जैसे देश कोशिश कर रहे हैं कि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आएं, लेकिन अंतिम फैसला पाकिस्तान और अफगानिस्तान को ही लेना होगा।
निष्कर्ष:
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता तनाव एक गंभीर चुनौती बन चुका है। सैन्य कार्रवाई, आरोप-प्रत्यारोप और अंतरराष्ट्रीय दखल-इन सबके बीच हालात जटिल होते जा रहे हैं।
अब यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश कूटनीति का रास्ता अपनाते हैं या फिर यह संघर्ष और गहरा होता है।

