तेजी से बढ़ती भारत की बायोइकोनॉमी: क्या वैश्विक बायोटेक सेक्टर में अब भारत करेगा नेतृत्व?

भारत अब सिर्फ आईटी या सेवा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत की बायोइकोनॉमी 2014 में करीब 10 अरब डॉलर थी, जो अब 2025 में बढ़कर 195 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई है। यानी सिर्फ एक दशक में इस क्षेत्र ने कई गुना वृद्धि दर्ज की है।


यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि भारत अब वैश्विक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी के बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। खास बात यह है कि पिछले एक साल में ही इस क्षेत्र में लगभग 17–18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो इसकी तेजी को दिखाती है।


बायोटेक अब विकास का नया इंजन
दिल्ली में आयोजित BIRAC (बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल) के 14वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी अब भारत की विकास यात्रा का अहम हिस्सा बन चुकी है।


उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, जलवायु समाधान और टिकाऊ उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भी बड़ा योगदान दे रहा है।


भारत अब 2030 तक 300 अरब डॉलर की बायोइकोनॉमी का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसके पीछे वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों की मजबूत भूमिका है।


BIRAC की भूमिका क्यों अहम?
BIRAC को इस पूरे इकोसिस्टम का मुख्य आधार माना जा रहा है। यह संस्था रिसर्च और उद्योग के बीच पुल का काम करती है। यानी लैब में जो आइडिया बनते हैं, उन्हें बाजार तक पहुंचाने में BIRAC मदद करता है।


इसके जरिए कई स्टार्टअप्स को फंडिंग, मेंटरशिप और जरूरी संसाधन मिलते हैं। यही वजह है कि देश में बायोटेक स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है।

India rapidly growing bioeconomy

BioE3 नीति: भविष्य की तैयारी

सरकार ने इस क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए BioE3 नीति (Biotechnology for Economy, Environment and Employment) भी लागू की है। इसका मकसद बायो-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना और टिकाऊ उत्पादन को मजबूत करना है।

 

इस नीति के तहत कई नई तकनीकों पर काम हो रहा है, जैसे-

  • सटीक बायो-थेरेपी
  • स्मार्ट प्रोटीन
  • जलवायु के अनुकूल खेती
  • बायो-आधारित केमिकल
  • कार्बन कैप्चर तकनीक

इन सबका लक्ष्य है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना विकास किया जाए।

 

1 लाख करोड़ का RDI फंड

सरकार ने रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का बड़ा फंड भी बनाया है। इस फंड के जरिए बायोटेक स्टार्टअप्स और प्रोजेक्ट्स को लंबे समय तक वित्तीय सहायता दी जाएगी।

 

इसका मकसद सिर्फ नए आइडिया लाना नहीं, बल्कि उन्हें बड़े स्तर पर लागू करना भी है, ताकि वे बाजार में सफल हो सकें।

 

IBER 2026 रिपोर्ट क्या कहती है?

कार्यक्रम के दौरान India Bioeconomy Report (IBER) 2026 भी जारी की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत की बायोइकोनॉमी 2025 में 195.3 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।

 

यह देश के कुल GDP का करीब 4.8 प्रतिशत हिस्सा है, जो पहले के मुकाबले ज्यादा है। इस क्षेत्र की ग्रोथ दर लगभग 18 प्रतिशत रही है, जो हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा है।

 

सबसे खास बात यह है कि 2020 के बाद से यह सेक्टर दोगुना हो चुका है।

 

कौन से सेक्टर आगे हैं?

बायोइकोनॉमी के अंदर अलग-अलग सेक्टर काम करते हैं, जिनमें सबसे बड़ा योगदान BioIndustrial सेक्टर का है, जिसकी वैल्यू करीब 90 अरब डॉलर है।

 

इसके बाद BioPharma सेक्टर आता है, जो 64.5 अरब डॉलर का है। इसमें भविष्य में और तेजी आने की उम्मीद है, क्योंकि कई दवाओं के पेटेंट खत्म होने वाले हैं।

 

BioServices और BioAgri सेक्टर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। BioServices का योगदान 26 अरब डॉलर है, जबकि BioAgri का हिस्सा 14.6 अरब डॉलर है।

 

स्टार्टअप्स की बड़ी भूमिका

भारत में अब 11,800 से ज्यादा बायोटेक स्टार्टअप्स हैं। सिर्फ 2025 में ही 1,700 से ज्यादा नए स्टार्टअप्स शुरू हुए हैं।

 

ये स्टार्टअप्स नई तकनीक, सस्ती दवाइयां और टिकाऊ समाधान तैयार कर रहे हैं। इससे रोजगार भी बढ़ रहा है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

 

बायोइकोनॉमी क्या है?

अगर आसान भाषा में समझें तो बायोइकोनॉमी का मतलब है-प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करके ऐसे उत्पाद और सेवाएं बनाना, जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित हों और आर्थिक विकास में मदद करें।

 

इसमें खेती, मछली पालन, वानिकी, खाद्य उत्पादन और बायो-आधारित उत्पाद जैसे बायोप्लास्टिक और बायोडिग्रेडेबल कपड़े शामिल हैं।

 

सर्कुलर बायोइकोनॉमी क्या है?

सर्कुलर बायोइकोनॉमी का मतलब है-संसाधनों का बार-बार इस्तेमाल करना। यानी चीजों को फेंकने के बजाय उन्हें फिर से उपयोग, मरम्मत या रीसायकल करना।

 

इससे कचरा कम होता है, ऊर्जा बचती है और पर्यावरण को कम नुकसान होता है।

 

आगे क्या अवसर हैं?

भारत के पास इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के कई बड़े मौके हैं-

  • बायोसिमिलर दवाओं का उत्पादन
  • ग्लोबल रिसर्च सेंटर (GCC) का विस्तार
  • बायोमैन्युफैक्चरिंग में बढ़त
  • स्टार्टअप्स को बड़े स्तर पर लाना

अगर इन अवसरों का सही इस्तेमाल किया जाए, तो भारत वैश्विक स्तर पर नेतृत्व कर सकता है।

 

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि इस क्षेत्र में कई चुनौतियां भी हैं। जैसे-

  • पेटेंट और कानूनी अड़चनें
  • लंबे समय तक फंडिंग की जरूरत
  • जटिल नियम और प्रक्रियाएं
  • उच्च तकनीक वाले कर्मचारियों की कमी

इसके अलावा BioAgri सेक्टर अभी भी बाकी सेक्टर के मुकाबले पीछे है, जिसे मजबूत करने की जरूरत है।

 

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार, उद्योग और शिक्षा संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। इससे रिसर्च को सीधे बाजार तक पहुंचाया जा सकेगा।

 

साथ ही, स्टार्टअप्स को ज्यादा समर्थन देना और उन्हें लंबे समय तक टिकाए रखना भी जरूरी है।

 

भारत ने 2047 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की बायोइकोनॉमी का लक्ष्य रखा है। इसे हासिल करने के लिए लगातार प्रयास और सही रणनीति की जरूरत होगी।