Blackout Challenge ने बढ़ाई दुनियाभर में चिंता: क्यों यह वायरल ट्रेंड बन रहा है बच्चों के लिए जानलेवा खतरा?

सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा एक खतरनाक ट्रेंड अब पूरी दुनिया में चिंता का कारण बन गया है। इसे “Blackout Challenge” कहा जाता है, जिसमें लोग जानबूझकर अपनी सांस रोकते हैं या ऑक्सीजन की सप्लाई कम करते हैं, जब तक कि वे बेहोश न हो जाएं। देखने में यह एक साधारण चैलेंज लग सकता है, लेकिन असल में यह बेहद खतरनाक है और कई मामलों में जानलेवा साबित हो चुका है।

 

हाल ही में अमेरिका के टेक्सास में एक दर्दनाक घटना ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया। 9 साल की बच्ची जैकलिन के ब्लैकवेल की मौत इस चैलेंज को आजमाने के दौरान हो गई। बताया गया कि उसने अपनी सांस रोकने की कोशिश की और इस दौरान उसकी जान चली गई। इस घटना के बाद उसके माता-पिता ने अन्य परिवारों को चेतावनी दी है कि इस तरह के ट्रेंड को हल्के में न लें।


क्या है Blackout Challenge?
Blackout Challenge, जिसे “Choking Challenge” या “Pass-out Challenge” भी कहा जाता है, एक ऐसा खतरनाक खेल है जिसमें व्यक्ति खुद को ऑक्सीजन से वंचित करता है। इसका उद्देश्य कुछ समय के लिए “हाई” या अजीब सा एहसास पाना होता है। इसमें लोग या तो अपनी सांस रोकते हैं या गर्दन पर दबाव डालकर दिमाग तक ऑक्सीजन का प्रवाह कम कर देते हैं।


यह गतिविधि खासकर बच्चों और किशोरों के बीच ज्यादा देखी जा रही है। कई बार यह अकेले किया जाता है, जबकि कई बार दोस्त मिलकर भी इसे करते हैं। लेकिन हर स्थिति में इसका जोखिम बहुत ज्यादा होता है।

Blackout Challenge sparks global concern

क्यों है यह इतना खतरनाक?

डॉक्टरों के अनुसार, दिमाग को लगातार ऑक्सीजन की जरूरत होती है। अगर कुछ सेकंड के लिए भी ऑक्सीजन की सप्लाई रुकती है, तो व्यक्ति बेहोश हो सकता है। अगर यह समय ज्यादा हो जाए, तो दिमाग को स्थायी नुकसान हो सकता है या मौत भी हो सकती है।

 

इस तरह के चैलेंज से कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:

  • दिमाग को नुकसान
  • स्ट्रोक
  • आंखों में खून आना
  • दौरे पड़ना
  • और कई मामलों में मौत

सबसे बड़ी बात यह है कि इसे करने वाले ज्यादातर बच्चे यह नहीं समझते कि वे कितने बड़े खतरे में हैं।

 

सोशल मीडिया की भूमिका

इस ट्रेंड के फैलने में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की बड़ी भूमिका है। TikTok जैसे प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो तेजी से वायरल होते हैं, जिनमें लोग इस चैलेंज को करते हुए दिखाई देते हैं।

 

समस्या यह है कि ये वीडियो अक्सर इसे मजेदार या रोमांचक दिखाते हैं, लेकिन इसके खतरों के बारे में पूरी जानकारी नहीं देते। इससे बच्चों को लगता है कि यह सुरक्षित है, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।

 

एल्गोरिद्म भी इस समस्या को बढ़ा देता है। अगर कोई बच्चा एक बार ऐसा वीडियो देख ले, तो उसे बार-बार उसी तरह के वीडियो दिखने लगते हैं। इससे वह धीरे-धीरे इस ट्रेंड की ओर आकर्षित हो सकता है।

 

पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का ट्रेंड सामने आया है। 2022 में ब्रिटेन में चार किशोरों की मौत इसी तरह के चैलेंज से जुड़ी बताई गई थी। इसके बाद 2025 में उनके माता-पिता ने TikTok के खिलाफ केस भी दर्ज किया था।

 

इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे कंटेंट को रोकने के लिए और सख्त कदम उठाने चाहिए।

 

बच्चे क्यों करते हैं यह खतरनाक काम?

विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:

  • दोस्तों का दबाव (peer pressure)
  • नई चीजें आजमाने की चाह
  • बिना ड्रग्स के “हाई” महसूस करने की गलत धारणा
  • इंटरनेट पर गलत जानकारी

कई बच्चों को लगता है कि अगर वे इसे किसी और के साथ करेंगे, तो सुरक्षित रहेंगे। लेकिन यह सोच भी गलत है, क्योंकि बेहोश होने के बाद शरीर पर नियंत्रण नहीं रहता और हादसा हो सकता है।

 

पहचान कैसे करें?

अक्सर माता-पिता को इस बारे में पता ही नहीं चलता कि उनका बच्चा ऐसे किसी ट्रेंड में शामिल है। लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है:

  • गर्दन पर निशान या चोट
  • आंखों का लाल होना
  • बार-बार सिरदर्द
  • कमरे में अजीब तरह से बंधी रस्सियां या कपड़े
  • अकेले ज्यादा समय बिताना और दरवाजा बंद रखना

अगर ऐसे लक्षण दिखें, तो तुरंत सावधान हो जाना चाहिए।

 

क्या है समाधान?

इस समस्या का सबसे बड़ा समाधान जागरूकता है। बच्चों को साफ और सीधे तरीके से समझाना जरूरी है कि यह कोई खेल नहीं, बल्कि जानलेवा हरकत है।

 

माता-पिता को चाहिए कि:

  • बच्चों से खुलकर बात करें
  • उनके ऑनलाइन व्यवहार पर नजर रखें
  • उन्हें सही और गलत में फर्क समझाएं

स्कूल और डॉक्टरों की भी इसमें अहम भूमिका है। उन्हें भी बच्चों और अभिभावकों को इस बारे में जानकारी देनी चाहिए।

 

सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी इस दिशा में और सख्त कदम उठाने होंगे। खतरनाक कंटेंट को हटाना, चेतावनी देना और एल्गोरिद्म को सुधारना जरूरी है, ताकि ऐसे वीडियो बच्चों तक न पहुंचें।

 

हालांकि कई प्लेटफॉर्म्स ने ऐसे कंटेंट को हटाने की कोशिश की है, लेकिन यह अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।

 

निष्कर्ष:

Blackout Challenge जैसे ट्रेंड दिखाते हैं कि डिजिटल दुनिया में एक छोटी सी लापरवाही भी कितनी बड़ी कीमत ले सकती है। बच्चों के लिए यह सिर्फ एक “चैलेंज” हो सकता है, लेकिन इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।

 

यह जरूरी है कि परिवार, समाज और सरकार मिलकर इस खतरे को समझें और समय रहते कदम उठाएं। क्योंकि एक पल की गलती जिंदगी भर का नुकसान बन सकती है।