मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालात के बीच भारत में पेट्रोल, डीजल और LPG को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई थी। कई जगहों पर पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं और कुछ इलाकों में लोगों ने जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदना शुरू कर दिया।
लेकिन अब केंद्र सरकार ने इन सभी आशंकाओं को साफ तौर पर खारिज करते हुए कहा है कि देश में किसी भी तरह की कमी नहीं है। सरकार ने इसे “जानबूझकर फैलाई गई गलत जानकारी” बताया है, जिसका मकसद लोगों में डर पैदा करना है।
सरकार ने क्या कहा?
Ministry of Petroleum and Natural Gas ने गुरुवार को पहली बार विस्तार से देश के तेल और गैस भंडार की जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि भारत के पास अभी करीब 60 दिनों का तेल स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा LPG की सप्लाई के लिए भी एक महीने का पूरा इंतजाम पहले से किया जा चुका है।
सरकार ने साफ कहा कि देश के किसी भी हिस्से में पेट्रोल, डीजल या गैस की कमी नहीं है और सभी पेट्रोल पंप सामान्य तरीके से काम कर रहे हैं।
अफवाहों से बढ़ी घबराहट
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो और मैसेज वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि देश में ईंधन खत्म होने वाला है। इन खबरों के चलते कुछ जगहों पर लोग घबराकर ज्यादा मात्रा में पेट्रोल और LPG खरीदने लगे।
सरकार का कहना है कि यह “संगठित तरीके से फैलाया गया गलत प्रचार” है, जिसका मकसद सिर्फ डर पैदा करना है। लोगों से अपील की गई है कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें।

पेट्रोल पंपों की स्थिति
सरकार और तेल कंपनियों के अनुसार, देशभर के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप पूरी तरह चालू हैं और कहीं भी सप्लाई रोकी नहीं गई है। किसी भी पंप पर पेट्रोल या डीजल की राशनिंग नहीं की जा रही है। यानी हर ग्राहक को सामान्य रूप से ईंधन मिल रहा है।
हालांकि कुछ छोटे शहरों में कुछ पंपों को सप्लाई उठाने में दिक्कत आई थी, लेकिन सरकार ने इसे दूर करने के लिए कदम उठाए हैं।
पेट्रोल पंप मालिकों के लिए राहत
कुछ पेट्रोल पंप मालिकों को पहले “कैश-एंड-कैरी” व्यवस्था के कारण परेशानी हो रही थी, यानी उन्हें पहले पैसे देकर ही ईंधन लेना पड़ता था। अब सरकार ने इस नियम में ढील देते हुए क्रेडिट अवधि बढ़ा दी है। पहले जहां सिर्फ 1 दिन का क्रेडिट मिलता था, अब इसे बढ़ाकर 3 दिन से ज्यादा कर दिया गया है।
इससे पंप मालिकों को कामकाज चलाने में आसानी होगी और सप्लाई प्रभावित नहीं होगी।
कच्चे तेल की सप्लाई कैसे बनी हुई है?
मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है, खासकर Strait of Hormuz के रास्ते पर। लेकिन भारत ने पहले से ही वैकल्पिक स्रोतों से तेल की व्यवस्था कर ली है।
सरकार के मुताबिक, अब भारत को 41 से ज्यादा देशों से तेल मिल रहा है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो गई है।
रिफाइनरी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं
भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पांचवां सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक है। सरकार ने बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां 100% से ज्यादा क्षमता पर काम कर रही हैं।
इसका मतलब है कि कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों में बदलने का काम पूरी गति से चल रहा है और सप्लाई में कोई रुकावट नहीं है।
LPG की स्थिति क्या है?
LPG को लेकर भी लोगों में चिंता थी, क्योंकि मिडिल ईस्ट के हालात से इसकी सप्लाई प्रभावित हो सकती थी। लेकिन सरकार ने बताया कि घरेलू उत्पादन बढ़ाकर 50,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है, जो देश की कुल जरूरत का 60% से ज्यादा है।
बाकी जरूरत के लिए आयात किया जा रहा है और अब इसकी मात्रा पहले से कम हो गई है।
अतिरिक्त LPG सप्लाई का इंतजाम
सरकार ने यह भी बताया कि 8 लाख टन LPG की अतिरिक्त खेप पहले से ही बुक की जा चुकी है। यह सप्लाई अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आ रही है।
देशभर में 22 LPG टर्मिनल के जरिए यह गैस पहुंचाई जा रही है, जो पहले की तुलना में दोगुनी क्षमता है।
सिलेंडर की मांग और सप्लाई
हाल के दिनों में घबराहट के कारण LPG सिलेंडर की मांग अचानक बढ़ गई थी। एक समय यह मांग 89 लाख सिलेंडर प्रति दिन तक पहुंच गई थी, लेकिन अब यह घटकर फिर से करीब 50 लाख सिलेंडर प्रतिदिन हो गई है।
सरकार के अनुसार, तेल कंपनियां हर दिन 50 लाख से ज्यादा सिलेंडर की सप्लाई कर रही हैं।
प्राकृतिक गैस (PNG) पर भी अपडेट
सरकार ने यह भी साफ किया कि PNG (पाइप से मिलने वाली गैस) को LPG के विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि LPG खत्म हो रही है। PNG सिर्फ एक सस्ता और सुविधाजनक विकल्प है।
भारत रोजाना करीब 92 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस खुद पैदा करता है, जबकि कुल जरूरत 191 mmscmd है।
दुनिया के मुकाबले भारत की स्थिति
सरकार ने बताया कि कई देशों में ईंधन की कमी के कारण राशनिंग, ऑड-ईवन नियम और पेट्रोल पंप बंद करने जैसी स्थिति बन गई है। कुछ देशों ने तो “नेशनल एनर्जी इमरजेंसी” तक घोषित कर दी है।
लेकिन भारत में ऐसी कोई जरूरत नहीं पड़ी है और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं।
कुल स्टॉक कितना है?
भारत के पास कुल मिलाकर 74 दिनों तक का तेल और ईंधन स्टोर करने की क्षमता है। अभी वास्तविक स्टॉक करीब 60 दिनों का है, जिसमें कच्चा तेल, तैयार ईंधन और रणनीतिक भंडार शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि आने वाले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की खरीद पहले ही तय कर ली गई है, इसलिए किसी तरह की कमी की संभावना नहीं है।
सरकार की सख्त चेतावनी
सरकार ने चेतावनी दी है कि जो लोग सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैला रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी खबरें देश में बेवजह डर और अफरा-तफरी पैदा करती हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है।
निष्कर्ष:
मिडिल ईस्ट के संकट के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत तैयारी की है।सरकार और तेल कंपनियों के मुताबिक, देश में पेट्रोल, डीजल और LPG की कोई कमी नहीं है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य है।लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा खरीदारी न करें।

