अब चीन में घरों में अस्थियां रखना होगा गैरकानूनी – सरकार क्यों लाई नया ‘बोन ऐश अपार्टमेंट’ कानून?

चीन में अंतिम संस्कार और शहरी जीवन से जुड़ा एक नया और अहम बदलाव सामने आया है। सरकार ने एक ऐसा कानून लागू किया है, जिसके तहत लोग अपने परिजनों की राख (अस्थियां) को खाली फ्लैट या अपार्टमेंट में नहीं रख पाएंगे। इस नियम को आम तौर पर “बोन ऐश अपार्टमेंट” कानून कहा जा रहा है। इसका मकसद न सिर्फ शहरी व्यवस्था को बनाए रखना है, बल्कि अंतिम संस्कार से जुड़े बढ़ते खर्च और जमीन की कमी जैसी समस्याओं को भी नियंत्रित करना है।

 

क्या है ‘बोन ऐश अपार्टमेंट’ का ट्रेंड?

पिछले कुछ सालों में चीन के बड़े शहरों में एक नया चलन तेजी से बढ़ा है। लोग खाली पड़े फ्लैट खरीदकर उन्हें अपने पूर्वजों की याद में एक छोटे मंदिर या स्मारक स्थल में बदल देते हैं। इन जगहों पर अस्थियां रखी जाती हैं, मोमबत्तियां जलाई जाती हैं और परिवार के लोग समय-समय पर श्रद्धांजलि देने जाते हैं।

इन फ्लैट्स को आम तौर पर “गुहुई फांग” कहा जाता है। बाहर से देखने पर ये साधारण बंद घर लगते हैं, लेकिन अंदर इन्हें पूजा स्थल जैसा बना दिया जाता है। कई मामलों में खिड़कियां हमेशा बंद रहती हैं और फ्लैट पूरी तरह सील किए जाते हैं।

 

ऐसा क्यों करने लगे लोग?

इस ट्रेंड के पीछे सबसे बड़ी वजह है कब्रिस्तान की बढ़ती कीमत और जमीन की कमी। चीन में तेजी से शहरीकरण हो रहा है और आबादी भी बूढ़ी होती जा रही है। ऐसे में शहरों में कब्रिस्तान के लिए जगह कम पड़ रही है और जो जमीन उपलब्ध है, वह बेहद महंगी हो चुकी है।

बीजिंग जैसे शहरों में एक सामान्य कब्र की कीमत करीब 1.5 लाख युआन (लगभग 20 लाख रुपए) से शुरू होकर 3 लाख युआन (करीब 40 लाख रुपए) तक पहुंच जाती है। यह आम लोगों के लिए बहुत महंगा विकल्प है।

दूसरी ओर, हाल के वर्षों में प्रॉपर्टी के दाम में गिरावट आई है। 2021 के मुकाबले 2025 तक घरों की कीमतों में लगभग 40% तक कमी आई। ऐसे में कई लोगों को लगा कि एक फ्लैट खरीदकर उसमें अस्थियां रखना ज्यादा सस्ता और सुविधाजनक विकल्प है।

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नया कानून क्या कहता है?

सरकार ने इस बढ़ते चलन पर रोक लगाने के लिए साफ नियम बनाए हैं। नए कानून के अनुसार:

  • किसी भी रिहायशी फ्लैट का इस्तेमाल अस्थियां रखने के लिए नहीं किया जा सकता
  • सार्वजनिक कब्रिस्तान के अलावा कहीं और शव दफनाने या मकबरा बनाने पर रोक होगी
  • केवल उन्हीं जगहों पर अंतिम संस्कार की अनुमति होगी, जिन्हें सरकार ने मान्यता दी है

यह कानून 31 मार्च से लागू हो चुका है और इसे लागू करने का समय भी खास तौर पर चुना गया है, क्योंकि इसके कुछ दिन बाद चीन में छिंगमिंग त्योहार आता है।

 

छिंगमिंग त्योहार से पहले क्यों लागू हुआ नियम?

छिंगमिंग त्योहार, जिसे “टॉम्ब स्वीपिंग डे” भी कहा जाता है, चीन में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों की कब्रों की सफाई करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।

सरकार ने इस त्योहार से ठीक पहले कानून लागू करके यह संदेश देने की कोशिश की है कि पारंपरिक तरीकों से ही अंतिम संस्कार किया जाए और अनौपचारिक व्यवस्थाओं को रोका जाए।

 

कब्रिस्तान इतने महंगे क्यों हैं?

चीन में कब्रिस्तान की जमीन आम तौर पर स्थायी नहीं होती। वहां कब्र के लिए जमीन अक्सर 20 साल की लीज पर मिलती है, जिसे बाद में नवीनीकरण करना पड़ता है। इसके विपरीत, घरों के लिए 70 साल तक इस्तेमाल का अधिकार मिलता है।

यही वजह है कि कई लोग कब्रिस्तान की बजाय फ्लैट खरीदना ज्यादा बेहतर समझने लगे। इससे न सिर्फ खर्च कम होता है, बल्कि लंबी अवधि के लिए जगह भी मिल जाती है।

 

सोशल मीडिया पर उठे सवाल

इस नए कानून को लेकर चीन में सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। कई लोगों ने इस पर सवाल उठाए हैं।

एक यूजर ने लिखा, “अगर कब्रिस्तान सस्ते होते, तो लोग ऐसा क्यों करते?”
दूसरे ने सवाल किया, “सरकार कैसे पता लगाएगी कि किसी फ्लैट में अस्थियां रखी हैं?” कुछ लोगों ने यह भी कहा कि कानून लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि यह निजी संपत्ति से जुड़ा मामला है।

 

क्या है सरकार की चिंता?

सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर इस तरह फ्लैट्स का इस्तेमाल होता रहा, तो हाउसिंग मार्केट का संतुलन बिगड़ सकता है। घरों का उपयोग रहने के बजाय स्मारक स्थल के रूप में होने लगेगा, जिससे शहरों की योजना प्रभावित होगी।

इसके अलावा, सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े मुद्दे भी सामने आ सकते हैं। सरकार चाहती है कि आवासीय क्षेत्रों का इस्तेमाल सिर्फ रहने के लिए ही हो।

 

पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों पर जोर

चीन सरकार अब “इकोलॉजिकल बुरियल” यानी पर्यावरण के अनुकूल अंतिम संस्कार के तरीकों को बढ़ावा दे रही है। इसमें ऐसे विकल्प शामिल हैं, जिनमें कम जमीन लगती है या जमीन की जरूरत ही नहीं होती।

इनमें शामिल हैं:

  • पेड़ों के नीचे दफनाना
  • बिना बड़े स्मारक के साधारण दफन
  • समुद्र में अस्थियों का विसर्जन

शंघाई जैसे शहरों में समुद्र में अस्थि विसर्जन का चलन तेजी से बढ़ रहा है। 2025 में पहली बार ऐसे मामलों की संख्या 10 हजार से ज्यादा पहुंच गई, जो इस बदलाव का संकेत है।

 

बढ़ती बुजुर्ग आबादी का असर

चीन में आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है। 2025 में लगभग 1.13 करोड़ लोगों की मौत हुई, जबकि जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या सिर्फ करीब 79 लाख रही। इसका मतलब है कि मौतों की संख्या जन्म से कहीं ज्यादा हो गई है।

इसका सीधा असर अंतिम संस्कार की व्यवस्था पर पड़ रहा है। कब्रिस्तान की मांग बढ़ रही है, लेकिन जमीन सीमित है। यही कारण है कि सरकार अब नए नियमों के जरिए इस स्थिति को नियंत्रित करना चाहती है।

 

आगे क्या होगा?

नया कानून लागू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसे कितनी सख्ती से लागू किया जाता है और लोग इसे कितना मानते हैं। साथ ही, सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि अंतिम संस्कार के सस्ते और सम्मानजनक विकल्प लोगों को आसानी से उपलब्ध हों।

यह मुद्दा सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक बदलाव का भी है। चीन में बदलती जीवनशैली और बढ़ती लागत ने लोगों को नए रास्ते अपनाने पर मजबूर किया है, लेकिन अब सरकार उन रास्तों को सीमित करना चाहती है।

आने वाले समय में यह साफ होगा कि यह कानून लोगों के व्यवहार में कितना बदलाव ला पाता है और क्या इससे कब्रिस्तान की समस्या का समाधान निकल पाएगा।