NASA का ऐतिहासिक कदम: 50 साल बाद इंसान फिर चांद की ओर, Artemis-II मिशन हुआ लॉन्च

अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने 2 अप्रैल 2026 को अपने ऐतिहासिक ‘आर्टेमिस-II’ मिशन को लॉन्च कर दुनिया का ध्यान एक बार फिर चांद की ओर खींच लिया है। फ्लोरिडा स्थित Kennedy Space Center से सुबह 4:05 बजे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) रॉकेट के जरिए ‘ओरियन’ स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में भेजा गया। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री सवार हैं, जो चांद के करीब जाकर उसकी परिक्रमा करेंगे और फिर पृथ्वी पर लौट आएंगे।

यह मिशन इसलिए खास है क्योंकि 1972 में हुए Apollo 17 के बाद पहली बार कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) से आगे जाकर चांद के पास पहुंच रहा है। यानी लगभग 50 साल बाद मानव अंतरिक्ष यात्रा का यह नया अध्याय शुरू हुआ है।

 

आर्टेमिस मिशन क्या है और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

‘आर्टेमिस’ मिशन केवल एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं है, बल्कि यह भविष्य की बड़ी योजना का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य है – चांद पर इंसानों की वापसी, वहां स्थायी ठिकाना बनाना और आगे चलकर मंगल ग्रह तक पहुंचने की तैयारी करना।

NASA Artemis-II mission launched

इसे तीन मुख्य चरणों में बांटा गया है:

 

  1. आर्टेमिस-I (2022): यह एक मानवरहित मिशन था। इसमें ‘ओरियन’ स्पेसक्राफ्ट को बिना अंतरिक्ष यात्रियों के चांद की कक्षा में भेजा गया। इस मिशन ने करीब 25 दिन अंतरिक्ष में बिताए और सुरक्षित लौट आया। इससे कई तकनीकी जानकारियां मिलीं।
  2. आर्टेमिस-II (2026): यह वर्तमान मिशन है, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। वे चांद के पास जाकर उसकी परिक्रमा करेंगे, लेकिन वहां उतरेंगे नहीं। यह पूरी यात्रा लगभग 10 दिन की है।
  3. आर्टेमिस-III (संभावित 2028): इस मिशन में इंसानों को चांद की सतह पर उतारने की योजना है, खासकर उसके दक्षिणी ध्रुव पर।

 

लॉन्च के समय आई तकनीकी चुनौतियां

हर बड़े मिशन की तरह इसमें भी कुछ दिक्कतें सामने आईं।

  1. लॉन्च अबॉर्ट सिस्टम में खराबी: उड़ान से एक घंटे पहले ‘लॉन्च अबॉर्ट सिस्टम’ में गड़बड़ी आ गई थी। यह सिस्टम आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित अलग कर देता है। इंजीनियरों ने समय रहते इसे ठीक किया और लॉन्च को आगे बढ़ाया गया।
  2. काउंटडाउन रोका गया: सेफ्टी चेक के लिए काउंटडाउन को 10 मिनट पर रोक दिया गया था। सभी सिस्टम की जांच के बाद ही अंतिम अनुमति दी गई।
  3. सिग्नल में रुकावट: उड़ान के लगभग 51 मिनट बाद ओरियन कैप्सूल का संपर्क कुछ समय के लिए टूट गया। मिशन कंट्रोल की आवाज तो क्रू तक पहुंच रही थी, लेकिन उनका जवाब नीचे नहीं आ पा रहा था। बाद में यह समस्या ठीक कर ली गई।
  4. टॉयलेट खराब: लॉन्च के थोड़ी देर बाद कैप्सूल का टॉयलेट खराब हो गया, जिसे अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच ने ठीक किया। यह छोटी समस्या लग सकती है, लेकिन 10 दिन के मिशन में यह बहुत महत्वपूर्ण थी।

 

मिशन के दौरान क्या-क्या होगा?

यह मिशन कई चरणों में पूरा होगा:

10 दिनों का शेड्यूल

  • पहला दिन: रॉकेट की लॉन्चिंग और ओरियन कैप्सूल का पृथ्वी की ऊंची कक्षा में प्रवेश
  • दूसरा दिन: कैप्सूल के लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जांच और मैन्युअली चलाने का अभ्यास
  • तीसरा दिनः ‘ट्रांस-लूनर इंजेक्शन’ बर्न से पृथ्वी की कक्षा छोड़कर यान चांद के रास्ते पर
  • चौथा दिनः अंतरिक्ष यात्री अपने भारी सूट उतारकर साधारण कपड़े पहनेंगे
  • पांचवां दिनः ओरियन कैप्सूल का चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश
  • छठा दिन: चांद के 6,400 किमी दूर से पिछले हिस्से का चक्कर लगाकर पृथ्वी की ओर मुड़ना
  • सातवां दिन: चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल कर स्लिंगशॉट’ से पृथ्वी की ओर वापसी शुरू
  • आठवां दिन: वापसी के सफर के दौरान यान के रास्ते को सटीक बनाने के लिए इंजन फायर
  • नौवां दिनः पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश और लैंडिंग की प्रक्रियाओं का रिहर्सल
  • दसवां दिन: तेज रफ्तार से वायुमंडल को पार कर प्रशांत महासागर में गिरकर वापसी

पूरे मिशन में अंतरिक्ष यात्री लगभग 11 लाख किलोमीटर की दूरी तय करेंगे।

 

मिशन का असली उद्देश्य क्या है?

इस मिशन का मुख्य लक्ष्य ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ यानी जीवन-रक्षक प्रणाली की जांच करना है। नासा यह जानना चाहता है कि क्या इंसान लंबे समय तक गहरे अंतरिक्ष में सुरक्षित रह सकते हैं।

इसके अलावा:

  • नेविगेशन और संचार सिस्टम की जांच
  • रेडिएशन के प्रभाव का अध्ययन
  • भविष्य के मिशनों के लिए डेटा इकट्ठा करना

 

अंतरिक्ष यात्री कौन हैं?

इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं:

  • रीड वाइजमैन: मिशन कमांडर, अनुभवी अंतरिक्ष यात्री
  • क्रिस्टीना कोच: सबसे लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने वाली महिला
  • विक्टर ग्लोवर: चांद के पास पहुंचने वाले पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री
  • जेरेमी हैनसन: कनाडा के पहले व्यक्ति जो चांद के करीब जाएंगे

यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार कोई महिला चांद के इतने करीब पहुंचेगी।

 

ओरियन स्पेसक्राफ्ट कितना आधुनिक है?

‘ओरियन’ स्पेसक्राफ्ट को पुराने अपोलो यानों से काफी बेहतर बनाया गया है:

  • ज्यादा जगह और आराम
  • उन्नत कंप्यूटर सिस्टम
  • सोलर पैनल से बिजली
  • आधुनिक टॉयलेट सिस्टम
  • व्यायाम करने की सुविधा

यह आंशिक रूप से दोबारा इस्तेमाल (रीयूजेबल) भी किया जा सकता है।

 

50 साल बाद चांद पर क्यों लौट रहा है अमेरिका?

  1. चीन से अंतरिक्ष प्रतियोगिता: दिसंबर 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। इसमें कहा गया कि 2030 तक चाँद पर अंतरिक्ष यात्री भेजना अमेरिका की अंतरिक्ष शक्ति का प्रतीक होगा। चीन भी 2030 तक चाँद पर अपना मिशन भेजने की योजना बना रहा है। भारत 2040 तक चाँद मिशन का लक्ष्य रखता है और वह नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम के साथ सहयोग कर रहा है।
  2. चाँद पर मिलने वाले कीमती संसाधन: चाँद पर बहुत मूल्यवान चीजें हैं। पूर्व नासा प्रमुख शॉन ओ’कीफ के अनुसार, चाँद में हीलियम-3 नामक गैस है, जिसकी कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये प्रति किलोग्राम है। इसे परमाणु रिएक्टर में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा चाँद पर बर्फ के भंडार हैं, जो रॉकेट ईंधन बनाने में काम आएंगे। साथ ही लिथियम, प्लैटिनम और सोना जैसे दुर्लभ तत्व भी मौजूद हैं।
  3. देश के अंदर राजनीतिक कारण: 1969 में अपोलो 11 मिशन के समय अमेरिका वियतनाम युद्ध की वजह से दबाव में था। चाँद पर उतरने से पूरे देश का मनोबल बढ़ा था। आज डोनाल्ड ट्रंप सैन्य संघर्षों के कारण घरेलू दबाव में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े अंतरिक्ष उपलब्धियाँ लोगों को एकजुट कर सकती हैं और देश में गर्व की भावना पैदा कर सकती हैं।

 

अपोलो मिशन क्यों बंद हो गया था?

1972 के बाद अमेरिका ने चांद मिशन रोक दिए थे। इसके तीन मुख्य कारण थे:

  • लक्ष्य पूरा हो गया था (सोवियत संघ से आगे निकलना)
  • खर्च बहुत ज्यादा था
  • अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा चिंता का विषय थी

इसके बाद ध्यान स्पेस शटल और अन्य कार्यक्रमों पर चला गया।

 

क्या चांद पर लैंडिंग फेक थी?

कई लोगों ने दावा किया कि Apollo 11 फर्जी था। लेकिन ये सभी दावे गलत साबित हुए।

  • झंडा इसलिए हिलता दिखा क्योंकि उसमें रॉड लगी थी
  • सितारे नहीं दिखे क्योंकि कैमरा सेटिंग अलग थी
  • परछाइयों का कारण रोशनी का कोण था

यह मिशन पूरी दुनिया ने देखा था और सोवियत संघ ने भी इसे स्वीकार किया था।

 

आगे क्या होगा?

आर्टेमिस-II के बाद अगला कदम आर्टेमिस-III होगा, जिसमें इंसान चांद की सतह पर उतरेंगे। इसके बाद चांद पर एक स्थायी बेस बनाने की योजना है।

यह बेस भविष्य में:

  • लंबी अवधि के मिशनों के लिए
  • वैज्ञानिक रिसर्च के लिए
  • मंगल मिशन की तैयारी के लिए उपयोग होगा