प्रीपेड बिजली मीटर पर सरकार का बड़ा बयान: आम लोगों के लिए अनिवार्य नहीं, संसद में साफ किया रुख

केंद्र सरकार ने 2 अप्रैल 2026 को लोकसभा में साफ किया कि आम उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड बिजली मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं है। ऊर्जा मंत्री Manohar Lal Khattar ने प्रश्नकाल के दौरान यह स्पष्ट किया कि सरकार किसी पर भी जबरदस्ती स्मार्ट प्रीपेड मीटर थोप नहीं रही है। उन्होंने उन आशंकाओं को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि निजी कंपनियों की तरह सरकार भी लोगों को मजबूर कर रही है।


क्या है सरकार का रुख?
ऊर्जा मंत्री ने संसद में कहा कि सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा देना है, न कि उन पर कोई अतिरिक्त बोझ डालना। उन्होंने बताया कि बिजली कंपनियां व्यावसायिक तरीके से काम करती हैं, इसलिए उन्हें अपनी लागत निकालने और सेवाएं जारी रखने के लिए भुगतान की जरूरत होती है।
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि जो लोग बार-बार बिजली बिल नहीं चुकाते, यानी “सीरियल डिफॉल्टर”, उनके लिए प्रीपेड मीटर जरूरी किए जा सकते हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बिजली का उपयोग करने वाले उपभोक्ता समय पर भुगतान करें।

prepaid electricity meters not mandatory for common people

गरीब और किसानों के लिए क्या व्यवस्था?
संसद में उठे एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि गरीब और छोटे किसान, जो रोज कमाकर खर्च करते हैं, उनके लिए छोटे-छोटे रिचार्ज का विकल्प उपलब्ध है। यानी वे 5 से 10 दिन तक की बिजली के लिए भी रिचार्ज कर सकते हैं। इससे उन पर एक साथ बड़ा भुगतान करने का दबाव नहीं पड़ेगा।


कई राज्यों में जारी है स्मार्ट मीटर लगाने का काम
देश के कई राज्यों में इस समय स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। लेकिन इस दौरान कुछ उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उनके बिजली बिल पहले की तुलना में बढ़ गए हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या स्मार्ट मीटर वास्तव में महंगे साबित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट मीटर में खपत का सही और रियल टाइम हिसाब मिलता है, जिससे कई बार लोगों को अपनी असली खपत का पता चलता है। यही वजह है कि शुरुआत में बिल ज्यादा लग सकता है।


कैसे कम कर सकते हैं बिजली बिल?
अगर आपको भी लग रहा है कि स्मार्ट मीटर से आपका खर्च बढ़ गया है, तो कुछ आसान तरीकों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।


1. रियल टाइम ट्रैकिंग का इस्तेमाल करें: स्मार्ट मीटर के साथ मिलने वाली ऐप के जरिए आप हर समय देख सकते हैं कि घर में कितनी बिजली खर्च हो रही है। इससे आपको पता चलता है कि कौन सा उपकरण ज्यादा बिजली खा रहा है। उसी हिसाब से आप उसका इस्तेमाल सीमित कर सकते हैं।


2. भारी उपकरण सही समय पर चलाएं: कई जगहों पर दिन और रात के अलग-अलग रेट होते हैं। ऐसे में वॉशिंग मशीन, गीजर या पानी की मोटर जैसे उपकरण उस समय चलाएं, जब बिजली सस्ती हो।


3. छिपे हुए लोड से बचें: अक्सर लोग टीवी, चार्जर या माइक्रोवेव जैसे उपकरण प्लग में ही लगे छोड़ देते हैं। इससे धीरे-धीरे बिजली खर्च होती रहती है। इस्तेमाल न होने पर इनका प्लग निकाल देना चाहिए।


4. तय लोड के अनुसार ही इस्तेमाल करें: हर घर के लिए एक तय बिजली लोड निर्धारित होता है। अगर आप इससे ज्यादा लोड लेते हैं, तो पेनल्टी लग सकती है। इसलिए एक साथ ज्यादा भारी उपकरण चलाने से बचें।


5. ऐप के स्मार्ट फीचर्स अपनाएं: स्मार्ट मीटर ऐप में डेली बजट सेट करने का विकल्प होता है। इससे अगर आपका खर्च तय सीमा से ज्यादा होता है, तो आपको तुरंत अलर्ट मिल जाता है। इससे आप समय रहते खपत कम कर सकते हैं।


स्मार्ट मीटर और पुराने मीटर में क्या फर्क?
पारंपरिक बिजली मीटर में उपभोक्ता को महीने के अंत में ही पता चलता है कि कितनी बिजली खर्च हुई। वहीं, स्मार्ट मीटर में यह जानकारी तुरंत मिल जाती है। उपभोक्ता अपने मोबाइल से ही खपत देख सकते हैं और ऑनलाइन रिचार्ज या भुगतान कर सकते हैं।
इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ती है, बल्कि उपभोक्ता खुद अपने उपयोग को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं।


क्या मीटर लगवाने के लिए पैसे देने होंगे?
सरकार ने साफ किया है कि स्मार्ट मीटर लगवाने के लिए उपभोक्ताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति मीटर लगाने के नाम पर पैसे मांगता है, तो उससे सावधान रहने की जरूरत है। यह सेवा पूरी तरह मुफ्त है और सरकार द्वारा दी जा रही है।


आगे क्या संकेत मिलते हैं?
सरकार का यह बयान लोगों के बीच फैली उस चिंता को कम करता है कि कहीं उन्हें जबरदस्ती प्रीपेड मीटर न लगवाना पड़े। साथ ही यह भी साफ हो गया है कि यह सिस्टम मुख्य रूप से उन लोगों के लिए सख्ती लाएगा, जो समय पर बिल नहीं चुकाते।
दूसरी ओर, स्मार्ट मीटर को सही तरीके से इस्तेमाल करके उपभोक्ता अपने खर्च को भी काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।