एक रात में तबाह होगा ईरान ! डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा वैश्विक तनाव?

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। Donald Trump ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर ईरान तय समय सीमा तक समझौता नहीं करता और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से नहीं खोलता, तो अमेरिका एक ही रात में ईरान को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन किसी ठोस नतीजे के संकेत अभी तक नहीं मिले हैं।


क्या है ट्रंप की चेतावनी?
व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान को मंगलवार रात 8 बजे (वॉशिंगटन समय) तक एक “स्वीकार्य समझौता” करना होगा। इस समझौते में सबसे अहम शर्त यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल और ऊर्जा की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहे।
ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि अगर ईरान ने समय पर कदम नहीं उठाया, तो अमेरिका उसके ऊर्जा और परिवहन ढांचे को निशाना बना सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि “पूरा देश एक रात में खत्म किया जा सकता है।” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे ऐसा करना नहीं चाहते, लेकिन विकल्प उनके पास मौजूद है।


क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां से गुजरने वाली सप्लाई पर कई देशों की ऊर्जा जरूरतें निर्भर करती हैं। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद करने या सीमित करने की खबरों ने पहले ही बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। इसी वजह से अमेरिका इस मुद्दे को लेकर काफी सख्त रुख अपनाए हुए है।

Donald Trump warning Iran to destroyed

बातचीत जारी, लेकिन अनिश्चितता बरकरार
ट्रंप ने यह जरूर कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के कुछ नेता “ईमानदारी से बातचीत” कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ईरान ने अमेरिका के अस्थायी युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और इसके बजाय स्थायी समाधान तथा प्रतिबंध हटाने की मांग की है।
एक क्षेत्रीय अधिकारी के अनुसार, बातचीत में सबसे बड़ी समस्या संचार की है। ईरान तक संदेश पहुंचाने और जवाब पाने में काफी समय लग रहा है, जिससे बातचीत की गति धीमी हो गई है। पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश इस विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी है।


सैन्य कार्रवाई की चेतावनी
ट्रंप ने साफ कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट, पुल और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों पर बड़े पैमाने पर हमले कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई कुछ ही घंटों में पूरी की जा सकती है।
हालांकि, इस तरह की कार्रवाई को लेकर कई कानूनी विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि नागरिक ढांचे को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध माना जा सकता है। लेकिन ट्रंप ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि वे इस बात से चिंतित नहीं हैं।


युद्ध और हमलों का असर
अमेरिका की सेना के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक ईरान में 13,000 से ज्यादा हमले किए जा चुके हैं। इन हमलों ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के आम लोग भी अपनी सरकार से नाराज हैं और बदलाव चाहते हैं। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया।


हालिया रेस्क्यू ऑपरेशन का जिक्र
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने एक अमेरिकी एयरमैन के रेस्क्यू ऑपरेशन का भी जिक्र किया, जिसे ईरान में गिराए गए एक लड़ाकू विमान से बचाया गया था। उन्होंने इस ऑपरेशन को अमेरिकी सेना की ताकत और क्षमता का उदाहरण बताया।
बताया गया कि यह एयरमैन पहाड़ी इलाके में छिपा हुआ था और काफी समय तक दुश्मन से बचता रहा। अमेरिकी एजेंसियों ने उसे ढूंढने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया और आखिरकार सुरक्षित बाहर निकाल लिया।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ रही है। कई देशों का मानना है कि अगर स्थिति और बिगड़ी, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को झेलना पड़ेगा।
नाटो और अन्य सहयोगी देशों को लेकर भी ट्रंप ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस संघर्ष में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला है।


आगे क्या हो सकता है?
अब सबकी नजर ट्रंप द्वारा दी गई समय सीमा पर टिकी हुई है। अगर ईरान कोई समझौता करता है, तो तनाव कम हो सकता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े सैन्य कदम से पहले कूटनीतिक प्रयासों को और समय दिया जाना चाहिए। क्योंकि युद्ध की स्थिति में न सिर्फ जान-माल का नुकसान होगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।