Strait of Hormuz से गुजरने पर लगेगा शुल्क ! ईरान-ओमान वसूल सकते हैं शुल्क, दुनिया की बढ़ी चिंता

मध्य पूर्व में लंबे समय तक चले तनाव के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों का युद्धविराम लागू हो गया है। लेकिन इस सीजफायर के साथ एक ऐसा प्रस्ताव सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। प्रस्ताव यह है कि Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से ईरान और ओमान शुल्क वसूल सकते हैं। यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई गुजरती है।


क्यों अहम है यह प्रस्ताव?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी का संकरा रास्ता है, जिसकी चौड़ाई करीब 34 किलोमीटर है। यह ईरान और ओमान दोनों के समुद्री क्षेत्र में आता है, लेकिन इसे हमेशा एक अंतरराष्ट्रीय मार्ग माना गया है। अब तक यहां से गुजरने वाले जहाजों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था।
अगर ईरान और ओमान वाकई इस पर शुल्क लागू करते हैं, तो यह वैश्विक समुद्री व्यापार के नियमों में एक बड़ा बदलाव होगा। इससे न सिर्फ तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है, बल्कि कई देशों की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।


ईरान की क्या है योजना?
ईरान के अधिकारियों के अनुसार, इस शुल्क से मिलने वाला पैसा युद्ध के बाद देश के पुनर्निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा। हाल के संघर्ष में ईरान के रक्षा, प्रशासनिक और नागरिक ढांचे को काफी नुकसान हुआ है, जिसे ठीक करने के लिए भारी संसाधनों की जरूरत है।
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने संकेत दिए हैं कि एक नया नियम तैयार किया जा रहा है, जिसमें जहाजों को इस जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए अनुमति या लाइसेंस लेना पड़ सकता है। हालांकि ईरान का कहना है कि इसका उद्देश्य व्यापार को रोकना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से संचालित करना है।

Iran and Oman may charge a fee crossing Strait of Hormuz

सीजफायर के बाद क्या बदला?
करीब 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद दोनों देशों ने युद्धविराम पर सहमति जताई है। इसके तहत ईरान ने शर्तों के साथ इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने का फैसला किया है। युद्ध के दौरान इस रास्ते पर हमले हुए थे, जिससे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई और वैश्विक बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं।
Donald Trump ने कहा कि ईरान ने 10 बिंदुओं का एक प्रस्ताव दिया है, जो बातचीत के लिए एक अच्छा आधार बन सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दो हफ्तों के अंदर इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।


क्या दुनिया इसे स्वीकार करेगी?
ईरान के इस प्रस्ताव को लेकर कई देशों ने चिंता जताई है। खाड़ी क्षेत्र के देश, जैसे संयुक्त अरब अमीरात और कतर, इस विचार के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि इस मार्ग पर सभी देशों को बिना किसी रुकावट के आवाजाही की आजादी मिलनी चाहिए।
इन देशों का मानना है कि किसी भी तरह का शुल्क या नियम तभी लागू होना चाहिए जब पूरी तरह शांति बहाल हो जाए। फिलहाल इस तरह के कदम से व्यापार और सप्लाई चेन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।


अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?
समुद्री कानून के अनुसार, किसी भी जलडमरूमध्य के किनारे बसे देश सिर्फ इस आधार पर शुल्क नहीं ले सकते कि जहाज उनके क्षेत्र से गुजर रहा है। हालांकि वे कुछ खास सेवाओं के लिए सीमित शुल्क ले सकते हैं, जैसे जहाज को दिशा दिखाना या बंदरगाह सेवाएं देना।
इसका मतलब यह है कि अगर ईरान सामान्य ट्रांजिट फीस लागू करता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ हो सकता है। इसलिए यह मुद्दा आगे चलकर कानूनी विवाद भी बन सकता है।


क्या पहले कहीं ऐसा हुआ है?
दुनिया में कुछ जगहों पर जहाजों से शुल्क लिया जाता है, लेकिन वहां स्थिति अलग होती है। जैसे स्वेज नहर और पनामा नहर – ये मानव निर्मित रास्ते हैं, इसलिए वहां शुल्क लेना सामान्य है।
इसके विपरीत, प्राकृतिक जलडमरूमध्य जैसे होर्मुज या सिंगापुर स्ट्रेट में आमतौर पर मुफ्त आवाजाही की परंपरा रही है। यही कारण है कि ईरान का यह प्रस्ताव असामान्य माना जा रहा है।


क्या यह लागू हो पाएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रस्ताव को लागू करना आसान नहीं होगा। अगर ईरान अकेले यह कदम उठाता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, मौजूदा हालात में यह भी साफ नहीं है कि दुनिया इस पर क्या कदम उठाएगी। चीन जैसे देश, जो इस रास्ते से गुजरने वाले तेल के बड़े खरीदार हैं, इस मुद्दे पर अहम भूमिका निभा सकते हैं।


अन्य समुद्री रास्तों पर असर?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। अगर यहां कोई बदलाव होता है, तो इसका असर अन्य समुद्री रास्तों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि फिलहाल अन्य प्रमुख मार्गों जैसे जिब्राल्टर या मलक्का जलडमरूमध्य पर कोई खतरा नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक व्यापार में अस्थिरता बढ़ सकती है।


आगे क्या?
अब सबकी नजर अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली आगे की बातचीत पर है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर और चर्चा हो सकती है।
अगर दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंचते हैं, तो यह न सिर्फ क्षेत्र में शांति ला सकता है, बल्कि वैश्विक व्यापार को भी स्थिर कर सकता है। लेकिन अगर सहमति नहीं बनती, तो स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो सकती है।