मिडिल ईस्ट में पहले से चल रहे तनाव के बीच हालात और गंभीर हो गए हैं। एक तरफ अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा हुई, तो दूसरी ओर उसी समय इजराइल ने लेबनान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला कर दिया। इस हमले ने न केवल क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है, बल्कि शांति की कोशिशों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारी तबाही: सैकड़ों की मौत, हजारों घायल
बुधवार को इजराइली सेना ने लेबनान के कई इलाकों पर एक साथ बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। लेबनान की सिविल डिफेंस एजेंसी के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 254 लोगों की मौत हो गई, जबकि 1,165 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मृतकों और घायलों की संख्या लगातार बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
हमले राजधानी बेरूत, बेक्का वैली, माउंट लेबनान, सैदोन और दक्षिण लेबनान के कई गांवों में किए गए। इन इलाकों में घनी आबादी होने के कारण नुकसान काफी ज्यादा हुआ। कई इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं और लोगों को अचानक हमलों का सामना करना पड़ा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लेबनान में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। अस्पतालों में घायलों की भीड़ बढ़ गई है और डॉक्टरों की भारी कमी महसूस की जा रही है।
अस्पतालों में हाहाकार, डॉक्टरों से अपील
लेबनान के डॉक्टर संगठन के प्रमुख एलियास शलेला ने सभी डॉक्टरों से तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब हैं कि हर विशेषज्ञ की जरूरत है। बेरूत के एक बड़े अस्पताल ने सभी ब्लड ग्रुप के रक्तदान की अपील की है, जिससे घायलों का इलाज किया जा सके।
यह स्थिति साफ दिखाती है कि हमला कितना बड़ा और अचानक था, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ गया है।

इजराइल का दावा: हिजबुल्लाह के ठिकानों पर निशाना
इजराइली सेना ने अपने बयान में कहा कि यह हमला 2 मार्च से शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद लेबनान पर अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन था। सेना के मुताबिक, इस कार्रवाई में हिजबुल्लाह के 100 से ज्यादा कमांड सेंटर और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इजराइल का कहना है कि उसका उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को कमजोर करना है। लेकिन जिस तरह से यह हमला घनी आबादी वाले इलाकों में हुआ, उस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
सीजफायर पर विवाद: कौन सही, कौन गलत?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा विवाद यह है कि हमला उस समय हुआ, जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा की गई थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या लेबनान भी इस समझौते का हिस्सा था या नहीं।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा कि लेबनान इस सीजफायर का हिस्सा नहीं है और इजराइल अपनी कार्रवाई जारी रखेगा।
वहीं, डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कहा कि लेबनान इस समझौते से अलग है और इसे एक अलग संघर्ष के रूप में देखा जाना चाहिए।
दूसरी तरफ, पाकिस्तान – जो इस सीजफायर में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है – का कहना है कि यह समझौता लेबनान को भी कवर करता है। इसी वजह से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका को तय करना होगा कि वह शांति चाहता है या युद्ध जारी रखना चाहता है। उनके अनुसार, दोनों चीजें एक साथ नहीं चल सकतीं।
लेबनान और हिजबुल्लाह की प्रतिक्रिया
लेबनान के संसद अध्यक्ष नबीह बेरी ने इस हमले को “युद्ध अपराध” बताया है। उनका कहना है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है और यह पूरी दुनिया के लिए एक परीक्षा है कि वह इस पर कैसे प्रतिक्रिया देती है।
हिजबुल्लाह ने भी साफ कर दिया है कि वह इस हमले का जवाब देगा। संगठन ने कहा कि उसके लोगों का खून व्यर्थ नहीं जाएगा और उसे जवाब देने का पूरा अधिकार है।
हिजबुल्लाह के एक वरिष्ठ नेता ने चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे, तो इसका असर पूरे क्षेत्रीय समझौते पर पड़ेगा।
अमेरिका और अन्य देशों की प्रतिक्रिया
अमेरिका की ओर से बयान थोड़ा संतुलित रहा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि लेबनान को लेकर कुछ “गलतफहमी” हो सकती है, लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इजराइल अपनी रणनीति के तहत काम कर रहा है।
इस बीच, कतर, मिस्र और तुर्किये जैसे देशों ने इस हमले की कड़ी आलोचना की है। इन देशों का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में शांति की कोशिशों को कमजोर करता है और हालात को और बिगाड़ सकता है।
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने तो यहां तक कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
इटली के विदेश मंत्री ने भी हमले को “अनुचित और अस्वीकार्य” बताया और कहा कि इससे एक और बड़े संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस की चिंता
संयुक्त राष्ट्र ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है। महासचिव के प्रवक्ता ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर नागरिकों की मौत बेहद चिंताजनक है और सभी पक्षों को तुरंत हिंसा रोकनी चाहिए।
मानवाधिकार प्रमुख ने इस घटना को “भयानक” बताया और कहा कि इतनी बड़ी तबाही शांति की उम्मीदों को कमजोर करती है।
रेड क्रॉस ने भी कहा कि घनी आबादी वाले इलाकों में इस तरह के हमले अस्वीकार्य हैं और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कतर की भूमिका और कूटनीतिक कोशिशें
इस पूरे संघर्ष में कतर की भूमिका भी अहम बनी हुई है। कतर लगातार दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है। हालांकि लेबनान पर हमले ने इन कोशिशों को झटका दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही हालात काबू में नहीं आए, तो यह संघर्ष और बड़े युद्ध में बदल सकता है।
क्या आगे और बढ़ेगा संघर्ष?
मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि आने वाले दिनों में स्थिति सुधरेगी या और बिगड़ेगी। एक तरफ सीजफायर की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी तरफ जमीन पर हमले हो रहे हैं।
अगर हिजबुल्लाह जवाबी कार्रवाई करता है, तो यह संघर्ष और फैल सकता है। इससे न केवल लेबनान और इजराइल, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ सकती है।
निष्कर्ष:
लेबनान पर हुआ यह हमला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में चल रही शांति प्रक्रिया के लिए एक बड़ा झटका है। जहां एक तरफ युद्धविराम की उम्मीद थी, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के हमले यह दिखाते हैं कि हालात अभी भी बेहद नाजुक हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति को संभाल पाएगा या फिर मिडिल ईस्ट एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रहा है।

