Mohan Yadav को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। The Indian Express की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री Mohan Yadav और उनके परिवार की जमीनों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ोतरी हुई। कांग्रेस इसे सत्ता के दुरुपयोग का मामला बता रही है, जबकि BJP इन आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक और तथ्यों से परे बता रही है। अब सवाल यह है कि क्या यह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप है या फिर मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए? आइए पूरे विवाद को आसान भाषा में समझते हैं।
क्या है पूरा मामला?
Mohan Yadav Land Purchase Controversy मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार द्वारा कथित तौर पर 2021 से 2025 के बीच बड़ी मात्रा में जमीन खरीदने से जुड़ा है। कांग्रेस इसे सत्ता के प्रभाव से जुड़ा मामला बता रही है, जबकि BJP का कहना है कि सभी खरीद कानूनी हैं और किसी भी तरह की अंदरूनी जानकारी (Insider Information) का इस्तेमाल नहीं हुआ।रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2023 के बीच, जब मोहन यादव राज्य सरकार में मंत्री थे, उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने कम से कम 85 एकड़ जमीन खरीदी।इसके बाद 2024 से 2025 के बीच, मुख्यमंत्री बनने के बाद परिवार ने 168 एकड़ अतिरिक्त जमीन खरीदी।रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि परिवार के पास पहले से मौजूद या जिनकी खरीद की तारीख स्पष्ट नहीं है, ऐसी करीब 82 एकड़ जमीन भी है।
इन आंकड़ों के आधार पर दावा किया गया कि–
- 2020 तक लगभग 82 एकड़ जमीन
- 2021-2023 में बढ़कर करीब 167 एकड़
- 2024-2025 में बढ़कर लगभग 335 एकड़
यानी कुछ वर्षों में कुल जमीन लगभग चार गुना होने का दावा किया गया।
Mohan Yadav पर सड़क परियोजनाओं के पास जमीन खरीदने का आरोप
जांच रिपोर्ट का सबसे बड़ा दावा यह है कि खरीदी गई करीब 168 एकड़ जमीन में से लगभग 111 एकड़ ऐसी जगहों पर है जहां बाद में नई सड़कें या हाईवे परियोजनाएं घोषित की गईं, रिपोर्ट में कहा गया कि–
- कई जमीनें उज्जैन के गंगेड़ी, उनहेल, जयवंतपुर और चंदेसरा जैसे इलाकों में हैं।
- मार्च-अप्रैल 2023 में सावराखेड़ी में लगभग 30 एकड़ जमीन खरीदी गई।
- इसके कुछ सप्ताह बाद उज्जैन मास्टर प्लान 2035 सार्वजनिक हुआ।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद कई नई सड़क परियोजनाओं की घोषणा हुई और परिवार की कई जमीनें उन्हीं इलाकों के आसपास स्थित हैं।हालांकि रिपोर्ट में यह आरोप नहीं लगाया गया कि कोई अपराध सिद्ध हो चुका है, बल्कि इन खरीदों के समय और स्थान को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

BJP ने Mohan Yadav के बचाव में क्या कहा?
BJP IT सेल के राष्ट्रीय संयोजक अमित मालवीय ने कहा कि पूरे मामले की नींव केवल अटकलों पर आधारित है। उनका कहना है कि–
- मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव और उनकी पत्नी के व्यक्तिगत नाम पर जमीन नहीं बढ़ी।
- उज्जैन मास्टर प्लान मई 2023 से सार्वजनिक था।
- यदि विकास योजनाएं पहले से सार्वजनिक थीं तो अंदरूनी जानकारी का सवाल ही नहीं उठता।
मध्य प्रदेश BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी कहा कि–
- मुख्यमंत्री ने चुनावी हलफनामे में अपनी और पत्नी की जमीन घोषित की थी।
- बेटे वैभव यादव की जमीन में भी मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।
रिश्तेदार अपने निजी कारोबार स्वतंत्र रूप से करते हैं, इसलिए उनकी खरीद को मुख्यमंत्री से जोड़ना उचित नहीं है।
BJP के दावों पर क्या सवाल उठ रहे हैं?
The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार BJP का यह दावा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद परिवार की जमीन नहीं बढ़ी, रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। रिपोर्ट में कहा गया कि–
- बहू शालिनी यादव ने 2025 में 10 एकड़ से अधिक जमीन खरीदी।
- श्री सिद्धिविनायक देवकॉन्स प्राइवेट लिमिटेड, जिसमें मोहन यादव और उनकी पत्नी की बड़ी हिस्सेदारी है, ने भी 2024-25 में नई जमीन खरीदी।
- कंपनी द्वारा कुछ जमीन बेचे जाने के बावजूद अन्य स्थानों पर नई खरीद भी हुई।
- इसी वजह से विपक्ष लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
क्या जांच होगी?
मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यदि विपक्ष जांच की मांग करता है तो उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं है।उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित हुई है तो उसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए।हालांकि अब तक सरकार की ओर से किसी औपचारिक जांच की घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मध्य प्रदेश में विकास, निवेश और शहरी विस्तार को लेकर सरकार लगातार बड़े दावे कर रही है।यदि भविष्य में किसी एजेंसी द्वारा जांच होती है तो यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और बड़ा बन सकता है। दूसरी ओर यदि आरोप साबित नहीं होते हैं तो BJP इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति बताकर जनता के सामने पेश कर सकती है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और अंतिम निष्कर्ष किसी आधिकारिक जांच या न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
निष्कर्ष
Mohan Yadav से जुड़ा यह भूमि विवाद फिलहाल राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बना हुआ है। एक ओर जांच रिपोर्ट जमीन खरीद के पैटर्न पर सवाल उठा रही है, वहीं BJP इन सभी आरोपों को राजनीतिक और तथ्यहीन बता रही है। जब तक किसी सक्षम एजेंसी की जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी पक्ष के दावों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। फिलहाल Mohan Yadav और उनकी सरकार पर विपक्ष का दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
FAQs:
यह विवाद मुख्यमंत्री मोहन यादव, उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों द्वारा 2021 से 2025 के बीच कथित रूप से बड़ी मात्रा में जमीन खरीदने के आरोपों से जुड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में खरीदी गई कई जमीनें नई सड़क परियोजनाओं और मास्टर प्लान वाले इलाकों के पास स्थित हैं।
BJP का कहना है कि सभी खरीद कानूनी हैं, विकास योजनाएं पहले से सार्वजनिक थीं और मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके व्यक्तिगत नाम पर जमीन नहीं बढ़ी।
कांग्रेस का आरोप है कि सत्ता में आने के बाद परिवार की जमीन तेजी से बढ़ी और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
यदि जांच होती है तो यह मध्य प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है। वहीं यदि आरोप साबित नहीं होते तो BJP इसे विपक्ष की राजनीति करार दे सकती है।

