Gaza Mass Funeral: तीन साल बाद मलबे से निकले 112 लोगो के शव, गाजा के इस सामूहिक अंतिम संस्कार ने क्यों झकझोर दी पूरी दुनिया? 

Gaza Mass Funeral

Gaza Mass Funeral : गाजा युद्ध शुरू हुए लगभग तीन साल हो चुके हैं, लेकिन उसके घाव आज भी भर नहीं पाए हैं। अगस्त 2026 में मध्य गाजा के देर अल-बलाह (Deir al-Balah) में एक ऐसा सामूहिक अंतिम संस्कार हुआ, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यहां 112 फिलिस्तीनियों को दफनाया गया, जिनके शव नवंबर 2023 में हुए एक बड़े इजरायली हवाई हमले के बाद मलबे में दब गए थे। इनमें 40 बच्चे, 38 महिलाएं और सात दिव्यांग भी शामिल थे।

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इन लोगों की मौत 22 नवंबर 2023 को हुई थी, लेकिन लगातार जारी बमबारी और भारी मशीनों की कमी के कारण उनके शव अब तक बाहर नहीं निकाले जा सके थे। अक्टूबर 2025 में लागू युद्धविराम के बाद कुछ इलाकों में राहत और बचाव कार्य आसान हुआ, जिसके चलते हाल ही में मलबे से इन शवों को निकाला गया।

 

तीन साल तक मलबे में दबे रहे शव

22 नवंबर 2023 को इजरायली लड़ाकू विमानों ने गाजा सिटी के साबरा (Sabra) इलाके में स्थित हसैना (Hassayna) और अबू शारिया (Abu Sharia) परिवारों के रिहायशी परिसर पर हमला किया था। हमास से जुड़े नागरिक सुरक्षा विभाग के अनुसार उस समय इस हमले में 300 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

हमले के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने नंगे हाथों और साधारण औजारों से मलबा हटाकर करीब 40 शव निकाले थे, लेकिन बाकी लोग भारी कंक्रीट के नीचे दबे रह गए। लगातार जारी बमबारी के कारण बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन संभव नहीं हो सका।

Image : फ़िलिस्तीनी लोग पास के कब्रिस्तान में दफ़नाने के लिए देर अल-बलाह की मलबे से भरी सड़कों से शव ले जा रहे हैं। Credit : मोहम्मद साबेर/EPA

जुलाई 2026 में गाजा की सिविल डिफेंस टीम ने दोबारा खुदाई शुरू की। लगभग 136 घंटे तक चले अभियान के बाद 112 शव बरामद किए गए, जबकि अधिकारियों का कहना है कि अभी भी 157 लोग उसी जगह लापता हैं और संभवतः मलबे के नीचे दबे हुए हैं।

 

देर अल-बलाह में हुआ युद्ध का सबसे बड़ा सामूहिक अंतिम संस्कार

शवों को फिलिस्तीनी झंडों में लपेटकर देर अल-बलाह में कतारों में रखा गया। सैकड़ों लोग अंतिम विदाई देने पहुंचे। नमाज-ए-जनाजा के बाद शवों को स्ट्रेचर पर उठाकर तबाह हो चुकी सड़कों से होते हुए पास के कब्रिस्तान तक ले जाया गया।

कई लोगों के हाथों में अपने परिवार के सदस्यों की तस्वीरें थीं। युद्ध में उजड़ चुके मकानों और मलबे के बीच निकला यह अंतिम यात्रा जुलूस गाजा युद्ध की सबसे भावुक तस्वीरों में शामिल हो गया।

पीड़ित परिवारों का कहना था कि तीन साल बाद भी उनके जख्म वैसे ही ताजा हैं। हसैना परिवार के सदस्य तैसीर अल-हसैना ने कहा कि यह दिन उनके लिए फिर से उसी दर्द को वापस ले आया, जिसे वे कभी भूल नहीं पाए।

 

शवों की पहचान करना भी बड़ी चुनौती बना

तीन साल तक मलबे में दबे रहने के कारण अधिकांश शव पूरी तरह सड़ चुके थे। ऐसे में उनकी पहचान करना बेहद कठिन था।

गाजा की सिविल डिफेंस के प्रवक्ता महमूद बसाल के अनुसार कई शवों की पहचान कपड़ों, गहनों, शरीर में लगी धातु की प्लेटों, पुराने फ्रैक्चर और परिजनों की यादों के आधार पर की गई। कुछ महिलाओं की पहचान उनके गले के हार और आभूषणों से संभव हो सकी।

अधिकारियों का कहना है कि यदि पर्याप्त खुदाई मशीनें और क्रेन उपलब्ध हों तो गाजा में दबे अधिकांश शवों को तीन महीने के भीतर निकाला जा सकता है, लेकिन फिलहाल संसाधनों की भारी कमी है।

 

युद्धविराम के बाद भी पूरी तरह नहीं रुकी बमबारी

अक्टूबर 2025 में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बाद भी गाजा में पूरी तरह शांति नहीं लौटी।

रिपोर्टों के अनुसार युद्धविराम के बाद भी इजरायल ने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाते हुए कई हवाई हमले किए। केवल पिछले सप्ताहांत में 26 फिलिस्तीनियों के मारे जाने की खबर सामने आई।

Iamge: 17 अगस्त, 2025 को गाज़ा पट्टी में IDF के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर (बाएं) और सदर्न कमांड के चीफ़ मेजर जनरल यानीव असोर दिखाई दे रहे हैं। (इज़राइल डिफेंस फोर्सेस)

हालांकि इजरायली सेना ने स्वीकार किया है कि अब गाजा में टारगेटेड स्ट्राइक के नियम पहले से अधिक सख्त कर दिए गए हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत किसी भी बड़े हमले की मंजूरी अब सीधे आईडीएफ प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर (Eyal Zamir) से लेनी पड़ती है।

 

इजरायल का कहना- हम नागरिकों को नहीं, सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हैं

इजरायली सेना (IDF) ने इस सामूहिक अंतिम संस्कार या नवंबर 2023 के साबरा हमले पर अलग से कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य कभी भी आम नागरिक नहीं होते।

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आईडीएफ के अनुसार हर हवाई हमले से पहले विस्तृत सैन्य योजना बनाई जाती है, जिसमें यह आकलन किया जाता है कि संभावित नागरिक नुकसान सैन्य लक्ष्य के मुकाबले कितना होगा। सेना का कहना है कि हर स्ट्राइक अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और युद्ध संबंधी नियमों के तहत ही मंजूर की जाती है।

इजरायल का आरोप है कि हमास घनी आबादी वाले इलाकों, स्कूलों, अस्पतालों और रिहायशी इमारतों के आसपास अपने लड़ाकों और हथियारों को छिपाता है। ऐसे में सैन्य कार्रवाई के दौरान नागरिक हताहतों का जोखिम बढ़ जाता है।

दूसरी ओर हमास और गाजा के नागरिक सुरक्षा अधिकारी लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि इजरायली हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिकों को निशाना बनाया गया।

 

गाजा में अब भी हजारों लोग मलबे के नीचे दबे होने का दावा

गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के रिकॉर्ड विभाग के प्रमुख जाहेर अल-वाहीदी के अनुसार अब भी कम से कम 7,400 लोगों को उनके परिजनों ने लापता बताया है और माना जा रहा है कि वे मलबे के नीचे दबे हुए हैं।

उनका कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई हमलों में पूरे-के-पूरे परिवार खत्म हो गए। ऐसे मामलों में किसी ने भी उनके लापता होने की आधिकारिक सूचना दर्ज नहीं कराई।

गाजा सिविल डिफेंस का कहना है कि यदि पर्याप्त खुदाई मशीनें, बुलडोजर और क्रेन उपलब्ध करा दिए जाएं तो पूरे क्षेत्र में दबे शवों को निकालने में करीब तीन महीने का समय लग सकता है।

 

मृतकों के आंकड़ों पर क्यों बना रहता है विवाद

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि 7 अक्टूबर 2023 से अब तक 73 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। मंत्रालय नागरिकों और लड़ाकों के आंकड़े अलग-अलग जारी नहीं करता।

इजरायली सेना का कहना है कि कुल मृतकों का आंकड़ा काफी हद तक सही हो सकता है, लेकिन उसमें बड़ी संख्या में हमास के लड़ाके भी शामिल हैं। आईडीएफ का दावा है कि युद्ध के दौरान लगभग हर एक लड़ाके के मुकाबले दो से तीन नागरिकों की मौत हुई है।

इसी वजह से नागरिक और लड़ाकों की वास्तविक संख्या को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बहस होती रही है।

 

संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट ने बढ़ाई बहस

गाजा युद्ध को लेकर संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों ने भी वैश्विक विवाद को और गहरा किया है।

संयुक्त राष्ट्र की एक जांच आयोग, ह्यूमन राइट्स वॉच (Human Rights Watch) और एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने अपनी रिपोर्टों में आरोप लगाया कि गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हुआ। संयुक्त राष्ट्र आयोग ने जून 2026 की अपनी रिपोर्ट में कहा कि गाजा में बच्चों सहित बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत गंभीर चिंता का विषय है।

हालांकि इजरायल इन आरोपों को खारिज करता है। उसका कहना है कि उसकी सेना अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार कार्रवाई करती है और नागरिकों की मौत के लिए हमास जिम्मेदार है, क्योंकि वह आबादी वाले इलाकों का सैन्य इस्तेमाल करता है।

 

युद्धविराम के दूसरे चरण पर फिर अटक गई बातचीत

अक्टूबर 2025 में लागू युद्धविराम के बाद उम्मीद थी कि दूसरे चरण में स्थायी शांति की दिशा में प्रगति होगी, लेकिन बातचीत बार-बार अटक रही है।

हमास का कहना है कि वह तभी पूरी तरह हथियार छोड़ेगा जब इजरायल गाजा से अपनी सेना पूरी तरह वापस बुलाएगा।

दूसरी ओर इजरायल का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह निरस्त्र नहीं होता, तब तक सेना की वापसी संभव नहीं है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में साफ कहा कि इजरायली सेना मौजूदा सैन्य स्थिति से पीछे नहीं हटेगी।

इस बीच अमेरिका समर्थित बोर्ड ऑफ पीस (Board of Peace) दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी तक किसी स्थायी समाधान पर सहमति नहीं बन सकी है।

 

गाजा का मानवीय संकट अब भी खत्म नहीं हुआ

लगभग तीन साल की लड़ाई के बाद गाजा का बड़ा हिस्सा मलबे में बदल चुका है। लाखों लोग अपने घर खो चुके हैं और अस्थायी टेंट शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

संयुक्त राष्ट्र और राहत एजेंसियों के अनुसार गाजा में भोजन, पीने के पानी, दवाओं, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी बनी हुई है। बड़ी संख्या में स्कूल और अस्पताल भी नष्ट हो चुके हैं।

इसी वजह से युद्धविराम लागू होने के बाद भी गाजा के लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।

 

तीन साल बाद हुआ अंतिम संस्कार, लेकिन कई परिवारों का इंतजार अभी बाकी

देर अल-बलाह में 112 लोगों का सामूहिक अंतिम संस्कार उन हजारों परिवारों की कहानी भी सामने लाता है, जो आज भी अपने लापता परिजनों का इंतजार कर रहे हैं।

मलबे के नीचे अब भी हजारों लोगों के दबे होने की आशंका है। सीमित संसाधन, लगातार जारी सैन्य तनाव और राहत कार्यों में आने वाली बाधाओं के कारण शवों की तलाश धीमी गति से चल रही है।

यही वजह है कि गाजा युद्ध केवल मैदान में खत्म हुई लड़ाई नहीं, बल्कि उन परिवारों की लंबी त्रासदी भी बन गया है, जिन्हें वर्षों बाद भी अपने प्रियजनों को दफनाने का अवसर नहीं मिल पाया।

FAQ

1. गाजा में 112 लोगों का सामूहिक अंतिम संस्कार क्यों किया गया?

ये सभी लोग नवंबर 2023 में गाजा सिटी के साबरा इलाके में हुए एक इजरायली हवाई हमले में मारे गए थे। उनके शव मलबे में दबे रह गए थे और लगभग तीन साल बाद उन्हें निकालकर सामूहिक अंतिम संस्कार किया गया।

 

2. शवों को तीन साल बाद ही क्यों निकाला जा सका?

लगातार इजरायली हवाई हमलों, भारी मशीनों की कमी और सुरक्षा जोखिमों के कारण राहत एवं बचाव कार्य लंबे समय तक प्रभावित रहे। अक्टूबर 2025 के युद्धविराम के बाद कुछ इलाकों में खुदाई संभव हो सकी।

 

3. गाजा में अब भी कितने लोग लापता बताए जा रहे हैं?

गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कम से कम 7,400 लोगों को उनके परिजनों ने लापता बताया है। अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई पूरे परिवार हमलों में खत्म हो गए।

 

4. इजरायल इस घटना पर क्या कहता है?

इजरायली सेना का कहना है कि वह आम नागरिकों को नहीं बल्कि हमास के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाती है। उसका आरोप है कि हमास घनी आबादी वाले इलाकों का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए करता है।

 

5. गाजा युद्ध में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?

गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 7 अक्टूबर 2023 से अब तक 73,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि इजरायल का कहना है कि इस आंकड़े में बड़ी संख्या में हमास के लड़ाके भी शामिल हैं।

 

6. क्या गाजा में युद्ध पूरी तरह खत्म हो गया है?

नहीं। अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू होने के बावजूद छिटपुट इजरायली हवाई हमले जारी हैं। स्थायी शांति और दूसरे चरण के युद्धविराम को लेकर इजरायल और हमास के बीच बातचीत अभी भी पूरी तरह सफल नहीं हो पाई है।