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RSS पर बैन की मांग और RAW पर अमेरिकी रिपोर्ट… क्या भारत की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया?

अमेरिका की एक सरकारी संस्था की रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई।

RSS पर बैन की मांग और RAW पर अमेरिकी रिपोर्ट… क्या भारत की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया?

अमेरिका की एक सरकारी संस्था की रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई।

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कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका को आरएसएस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। पार्टी ने यह मांग अमेरिकी संस्था यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम (USCIRF) की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए की है।

कांग्रेस का कहना है कि इस रिपोर्ट में आरएसएस को धार्मिक स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया गया है और ऐसे संगठन देश की एकता और भाईचारे के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।

 

USCIRF की रिपोर्ट में क्या कहा गया

यह विवाद उस समय सामने आया जब USCIRF ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है।

रिपोर्ट में अमेरिका सरकार से यह सिफारिश की गई है कि वह भारत को “कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न” यानी ऐसे देशों की श्रेणी में रखे जहां धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर गंभीर समस्याएं बताई जाती हैं।

 

इसके अलावा आयोग ने कुछ संगठनों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की भी सिफारिश की है। इनमें आरएसएस के साथ भारत की विदेशी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) का भी नाम शामिल किया गया है।

 

रिपोर्ट में लगाए गए आरोप

USCIRF की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 2025 के दौरान धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति और कमजोर हुई है।

 

रिपोर्ट के अनुसार कई राज्यों में धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों को और कड़ा किया गया है, जिनमें सजा को भी बढ़ाया गया है।

 

इसके अलावा आयोग ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और तनाव की घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट में महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में हुए साम्प्रदायिक टकराव का भी जिक्र किया गया है।

 

कुछ कानूनों पर भी उठाए सवाल

इस रिपोर्ट में भारत के कुछ कानूनों की भी आलोचना की गई है। उदाहरण के तौर पर वक्फ संशोधन कानून को लेकर कहा गया कि इससे इस्लामी धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन में बड़े बदलाव किए गए हैं।

 

इसके अलावा उत्तराखंड राज्य प्राधिकरण अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम का भी उल्लेख किया गया है और कहा गया है कि इससे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर असर पड़ सकता है।

 

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ जगहों पर धार्मिक समुदायों के खिलाफ भीड़ द्वारा हमले की घटनाओं को रोकने में प्रशासन पर्याप्त सख्ती नहीं दिखा पाया।

 

कांग्रेस ने क्या कहा

कांग्रेस पार्टी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यदि कोई संगठन संविधान का विरोध करता है और देश को मनुस्मृति के आधार पर चलाने की बात करता है, तो वह देश की एकता के लिए खतरा हो सकता है।

 

पार्टी ने यह भी याद दिलाया कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था।

 

कांग्रेस का कहना है कि देश में सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए ऐसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।

 

विदेश मंत्रालय का रुख

भारत सरकार की ओर से इस नई रिपोर्ट पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि इससे पहले भी भारत सरकार USCIRF की रिपोर्टों पर कड़ी प्रतिक्रिया देती रही है।

 

पिछले साल विदेश मंत्रालय ने आयोग की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक प्रेरित बताया था।

 

मंत्रालय का कहना था कि भारत एक बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक देश है जहां सभी धर्मों के लोग साथ रहते हैं और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था इसका प्रमाण है।

 

भारत ने पहले भी जताई आपत्ति

भारत ने पहले भी USCIRF की कई टिप्पणियों को खारिज किया है। सरकार का कहना रहा है कि यह संस्था भारत की स्थिति को सही तरीके से नहीं समझती और कुछ अलग-थलग घटनाओं के आधार पर पूरे देश की तस्वीर पेश करती है।

 

भारत ने 2019 में नागरिकता संशोधन कानून पर की गई टिप्पणी को भी अस्वीकार कर दिया था।

 

इतना ही नहीं, भारत ने कई बार USCIRF के प्रतिनिधिमंडल को देश में आने की अनुमति भी नहीं दी है।

 

USCIRF क्या है

USCIRF की स्थापना 1998 में अमेरिकी संसद के एक कानून के तहत की गई थी। इसका काम दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर नजर रखना और अमेरिका सरकार को सुझाव देना है।

 

यह संस्था राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और अमेरिकी संसद को अपनी रिपोर्ट भेजती है।

 

हालांकि आयोग खुद को स्वतंत्र संस्था बताता है, लेकिन इसके नौ सदस्य अमेरिका के राष्ट्रपति और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।

 

RSS का इतिहास और विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS की स्थापना 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी।

 

शुरुआत में इसका उद्देश्य समाज को संगठित करना और राष्ट्रवादी विचारों को बढ़ावा देना बताया गया।

 

समय के साथ संघ का विस्तार तेजी से हुआ और आज इसके स्वयंसेवक देश के कई हिस्सों में शाखाएं चलाते हैं।

 

संघ से प्रेरित होकर 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई, जो बाद में भारतीय जनता पार्टी के रूप में सामने आई।

 

आज संघ परिवार का प्रभाव भारतीय राजनीति और समाज के कई क्षेत्रों में देखा जाता है।

 

संघ ने सामाजिक कार्यों में भी भागीदारी की है। उदाहरण के तौर पर कोरोना महामारी के दौरान स्वयंसेवकों ने राहत और सहायता कार्य किए।

 

संघ पर पहले भी लग चुका है प्रतिबंध

भारत के इतिहास में कुछ समय ऐसे भी आए जब आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया गया।

 

1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ पर प्रतिबंध लगाया गया था, हालांकि बाद में इसे हटा लिया गया।

 

1975 में आपातकाल के दौरान भी संघ पर प्रतिबंध लगा और कई स्वयंसेवकों को गिरफ्तार किया गया।

 

RAW क्या है और क्या करती है

USCIRF की रिपोर्ट में जिस दूसरी संस्था का नाम आया है, वह है भारत की विदेशी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी RAW।

इस एजेंसी की स्थापना 21 सितंबर 1968 को की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशों से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर नजर रखना है।

 

RAW सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है और यह कैबिनेट सचिवालय के अधीन काम करती है।

 

RAW की भूमिका

RAW का काम विदेशों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना, आतंकवाद से जुड़ी जानकारी जुटाना और भारत के हितों की रक्षा करना है।

 

यह एजेंसी पाकिस्तान, चीन और अन्य पड़ोसी देशों की गतिविधियों पर भी निगरानी रखती है।

 

इसके अलावा साइबर खुफिया, सैटेलाइट निगरानी और मानव खुफिया के जरिए भी जानकारी जुटाई जाती है।

 

कई बड़े ऑपरेशन में भूमिका

RAW ने भारत के कई महत्वपूर्ण अभियानों में भूमिका निभाई है।

 

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भी एजेंसी की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जाती है।

 

इसके अलावा 1975 में सिक्किम के भारत में विलय और 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक से पहले खुफिया जानकारी जुटाने में भी इसकी भूमिका मानी जाती है।

 

निष्कर्ष:

USCIRF की रिपोर्ट और कांग्रेस की मांग के बाद भारत में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ विपक्ष इस रिपोर्ट को गंभीर मानते हुए कार्रवाई की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर सरकार पहले भी ऐसी रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण बताती रही है।

 

आरएसएस और RAW जैसे संगठनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ रहे सवाल और देश के भीतर हो रही राजनीतिक प्रतिक्रिया आने वाले समय में इस मुद्दे को और चर्चा में ला सकती है।

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