UPI Transaction Charges क्यों लाने की बात हो रही है?
सरकार और बैंकिंग सेक्टर का कहना है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने और लगातार बेहतर बनाने में बड़ी लागत आती है। वर्तमान में UPI ट्रांजैक्शन पर कोई Merchant Discount Rate (MDR) नहीं लिया जाता, जबकि RTGS और NEFT जैसी सेवाओं पर शुल्क लगता है। बैंक और पेमेंट कंपनियां लंबे समय से मांग कर रही हैं कि डिजिटल भुगतान सेवाओं के लिए भी एक टिकाऊ राजस्व मॉडल बनाया जाए ताकि–
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो।
- पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स की लागत निकल सके।
- UPI नेटवर्क का विस्तार जारी रहे।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने क्या कहा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि फिलहाल UPI पर MDR लागू होने पर चर्चा करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कोई न कोई जरूर वहन करेगा। उनके अनुसार दो विकल्प हैं–
- सरकार टैक्स के जरिए खर्च उठाए।
- या फिर User Pays मॉडल के तहत MDR लगाया जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी सरकार संशोधन लेकर आई है और आगे की स्थिति पर नजर रखी जाएगी।
क्या आम UPI यूजर्स पर इसका असर पड़ेगा?
फिलहाल आम उपभोक्ताओं को किसी अतिरिक्त शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में MDR लागू होता है, तो यह संभव है कि–
- बड़े मूल्य के व्यापारी (Merchant) ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाया जाए।
- Peer-to-Peer (P2P) यानी व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह मुफ्त रहें।
लेकिन इस संबंध में सरकार ने अभी कोई अंतिम अधिसूचना जारी नहीं की है।
सरकार ने यह बदलाव क्यों किया?
सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है। UPI का इस्तेमाल लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहा है और इसके संचालन, सुरक्षा और तकनीकी अपग्रेड पर लगातार निवेश की जरूरत होती है। इसी कारण सरकार ने कानून में संशोधन कर भविष्य में जरूरत पड़ने पर शुल्क लगाने का विकल्प खुला रखा है।
निष्कर्ष
Lok Sabha passes UPI Bill का मतलब यह नहीं है कि आज से UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगने लगे हैं। इस बिल के जरिए केवल सरकार को यह अधिकार मिला है कि वह भविष्य में अधिसूचना जारी कर UPI Transaction Charges लागू करने का निर्णय ले सके। फिलहाल UPI पहले की तरह मुफ्त है, लेकिन आने वाले समय में सरकार के फैसले के आधार पर इसमें बदलाव संभव है।
FAQs
- लोकसभा ने UPI लेनदेन शुल्क से जुड़ा कौन-सा विधेयक पारित किया?
लोकसभा ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 में संशोधन करने वाला विधेयक पारित किया है, जिससे सरकार को UPI सहित अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार मिलेगा।
- क्या अब UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा?
नहीं। फिलहाल UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त हैं। सरकार ने अभी केवल कानून में संशोधन किया है, शुल्क लागू करने का अंतिम फैसला अधिसूचना के बाद होगा।
- बैंकों को UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की अनुमति क्यों दी जा रही है?
डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत, रखरखाव और विस्तार के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल तैयार करने के उद्देश्य से यह बदलाव प्रस्तावित किया गया है।
- UPI लेनदेन शुल्क कौन तय करेगा?
केंद्र सरकार अधिसूचना जारी कर तय करेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाया जाएगा और किन शर्तों के तहत।
- क्या UPI से पैसे भेजने वाले आम यूजर्स पर भी इसका असर पड़ेगा?
फिलहाल नहीं। यदि भविष्य में शुल्क लागू होता है, तो संभावना है कि यह पहले बड़े व्यापारी लेनदेन पर लागू हो, जबकि व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रह सकते हैं। हालांकि, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।