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Sixth Positive Indigenisation List 405 Items – सुखोई से लेकर T-90 टैंक तक, अब भारत में बनेंगे 405 अहम पार्ट्स; रक्षा मंत्रालय के बड़े फैसले से ₹3,070 करोड़ का कारोबार?

Positive Indigenisation List 2026: रक्षा मंत्रालय ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए छठी पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट (PIL) जारी की है। इसमें 405 ऐसे रक्षा सामान शामिल किए गए हैं, जिन्

Sixth Positive Indigenisation List 405 Items – सुखोई से लेकर T-90 टैंक तक, अब भारत में बनेंगे 405 अहम पार्ट्स; रक्षा मंत्रालय के बड़े फैसले से ₹3,070 करोड़ का कारोबार?

Positive Indigenisation List 2026: रक्षा मंत्रालय ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए छठी पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट (PIL) जारी की है। इसमें 405 ऐसे रक्षा सामान शामिल किए गए हैं, जिन्हें तय समयसीमा के बाद भारतीय कंपनियों से ही खरीदा जाएगा। इनमें लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर, टैंक, मिसाइल, रडार, सोनार और दूसरे सैन्य सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट, स्पेयर पार्ट्स, सब-सिस्टम, सब-असेंबली और रॉ मटेरियल शामिल हैं। सरकार के मुताबिक, इन सामान के स्वदेशी उत्पादन से करीब 3,070 करोड़ रुपए का कारोबार भारतीय उद्योग को मिल सकता है।

सुखोई, टैंक और मिसाइलों के पार्ट्स भी लिस्ट में

नई लिस्ट में भारतीय सेना और वायुसेना में इस्तेमाल होने वाले कई प्रमुख हथियारों और प्लेटफॉर्म से जुड़े सामान शामिल किए गए हैं। इनमें एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH), लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (LUH), सुखोई-30MKI, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और AL-31FP इंजन से जुड़े कंपोनेंट शामिल हैं।

AL-31FP सुखोई-30MKI में इस्तेमाल होने वाला इंजन

जमीनी युद्धक प्लेटफॉर्म में T-72, T-90 और BMP-II जैसे टैंक और बख्तरबंद वाहनों के सामान को भी स्वदेशी बनाने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा Konkurs-M, Invar और MRSAM जैसे मिसाइल सिस्टम से जुड़े आइटम भी लिस्ट में हैं।

 

रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स भी इस पहल का अहम हिस्सा है। इसमें रडार, सोनार, फायर कंट्रोल सिस्टम और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम से जुड़े सामान शामिल किए गए हैं। हाई एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक (HEAT) गोला-बारूद से जुड़े महत्वपूर्ण सामान को भी इसमें जगह मिली है।


405 सामान भारतीय कंपनियों से ही खरीदे जाएंगे

पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट का मतलब यह है कि इन सामान को एक तय समयसीमा के भीतर भारत में विकसित और तैयार किया जाएगा। इसके बाद इनकी खरीद घरेलू उद्योग से की जाएगी।

 

इस काम में बड़ी रक्षा कंपनियों के साथ MSME और स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इससे भारतीय कंपनियों को रक्षा सप्लाई चेन में शामिल होने के नए अवसर मिलेंगे और देश में कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का आधार मजबूत होगा।

 

खास बात यह है कि इसमें सिर्फ तैयार हथियार ही नहीं, बल्कि उनके छोटे-छोटे पार्ट्स और स्पेयर भी शामिल हैं। यही पार्ट्स किसी बड़े हथियार सिस्टम को लंबे समय तक ऑपरेशनल बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

 

SRIJAN पोर्टल से कैसे बढ़ रहा स्वदेशी रक्षा उत्पादन?

रक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2020 में SRIJAN डिफेंस पोर्टल शुरू किया था। इसका उद्देश्य DPSU और सर्विस हेडक्वार्टर की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले उन रक्षा सामान को भारतीय उद्योग के सामने रखना है, जिन्हें देश में ही विकसित और बनाया जा सकता है। जून 2026 तक SRIJAN पोर्टल के जरिए 33,000 से ज्यादा रक्षा आइटम भारतीय कंपनियों के सामने इंडिजिनाइजेशन के लिए रखे जा चुके हैं। इनमें पहली पांच पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट के 5,012 आइटम भी शामिल हैं।

 

सरकार के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में 15,700 से ज्यादा रक्षा आइटम सफलतापूर्वक स्वदेशी बनाए जा चुके हैं। इससे करीब 9,000 करोड़ रुपए के आयात का घरेलू उत्पादन से विकल्प तैयार होने का अनुमान है। मार्च 2026 तक DPSUs ने घरेलू विक्रेताओं को करीब 10,000 करोड़ रुपए के खरीद ऑर्डर भी दिए हैं। इसमें इन-हाउस प्रोडक्शन से जुड़े ऑर्डर भी शामिल हैं।

 

सिर्फ हथियार नहीं, पूरी डिफेंस सप्लाई चेन भारत में बनाने की तैयारी

सरकार की इस नीति का मकसद केवल विदेशी हथियारों का आयात कम करना नहीं है। असली लक्ष्य उन हथियारों के पीछे मौजूद पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करना है। किसी लड़ाकू विमान, टैंक या मिसाइल का कोई छोटा लेकिन महत्वपूर्ण पार्ट विदेश से आता है और उसकी सप्लाई किसी कारण से रुक जाती है, तो पूरे हथियार सिस्टम की ऑपरेशनल क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में जरूरी कंपोनेंट और स्पेयर पार्ट भारत में उपलब्ध होना रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है।

 

नई 405 आइटम वाली लिस्ट से भारतीय कंपनियों को इन क्षेत्रों में तकनीक विकसित करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र में लंबे समय के लिए कारोबार खड़ा करने का मौका मिलेगा। यही वजह है कि सरकार आत्मनिर्भर भारत के तहत बड़े हथियारों के साथ-साथ उनके कंपोनेंट और स्पेयर पार्ट्स को भी देश में बनाने पर जोर दे रही है।

FAQs

यह रक्षा मंत्रालय की छठी Positive Indigenisation List है, जिसमें 405 रणनीतिक रक्षा सामान शामिल हैं। इनके स्वदेशी विकास के बाद इन्हें भारतीय उद्योग से खरीदा जाएगा।

इनका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना, भारतीय कंपनियों को उत्पादन के अवसर देना और देश में रक्षा निर्माण की पूरी सप्लाई चेन मजबूत करना है।

इसका उद्देश्य ऐसे रक्षा सामानों का देश में विकास और उत्पादन बढ़ाना है, जिन्हें पहले विदेशी स्रोतों से हासिल किया जाता था। इससे आत्मनिर्भरता और घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलता है।

इसमें हेलिकॉप्टर और लड़ाकू विमान से जुड़े कंपोनेंट, Su-30MKI और AL-31FP इंजन से जुड़े सामान, T-72 और T-90 जैसे टैंकों के आइटम, BMP-II, युद्धपोत, Konkurs-M, Invar और MRSAM मिसाइल सिस्टम, रडार, सोनार, फायर कंट्रोल सिस्टम, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और HEAT गोला-बारूद शामिल हैं।

इससे भारतीय कंपनियों को रक्षा सामान विकसित करने और बाद में उसकी सप्लाई करने का बाजार मिलेगा। खासकर MSME और स्टार्टअप्स को डिफेंस सप्लाई चेन में शामिल होने के नए अवसर मिलेंगे।

जब विदेश से आने वाले स्पेयर, कंपोनेंट और सब-सिस्टम भारत में ही विकसित और बनाए जाएंगे, तो उनकी खरीद के लिए विदेशी सप्लायर पर निर्भरता घटेगी। इससे आयात खर्च कम करने के साथ संकट के समय जरूरी रक्षा सामान की घरेलू उपलब्धता मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।

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