Supreme Court Pending Cases : भारत की न्यायपालिका (Indian Judiciary) में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। संसद में केंद्र सरकार ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में 10 साल से अधिक समय से 10,094 मामले लंबित हैं, जबकि देश के विभिन्न हाई कोर्ट (High Courts) में 80,660 मामले ऐसे हैं जो 30 साल से भी ज्यादा समय से फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल (Arjun Ram Meghwal) ने राज्यसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (National Judicial Data Grid-NJDG) के अनुसार देशभर में सुप्रीम कोर्ट, 25 हाई कोर्ट और जिला एवं अधीनस्थ अदालतों को मिलाकर करीब 5.64 करोड़ मामले लंबित हैं।
सरकार के मुताबिक, मामलों का निपटारा पूरी तरह न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है और अदालतों के लिए समयसीमा तय करना कार्यपालिका का अधिकार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट में कितने पुराने मामले अभी भी लंबित हैं?
सरकार के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में 96,024 मामले लंबित हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है, जिनका वर्षों से फैसला नहीं हो पाया है।
आंकड़ों के मुताबिक 10,094 मामले 10 साल से अधिक समय से लंबित हैं। इसके अलावा 558 मामले 20 साल से ज्यादा पुराने हैं, जबकि 26 मामले ऐसे हैं जो 30 साल से भी अधिक समय से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
यह स्थिति बताती है कि देश की सर्वोच्च अदालत में भी पुराने मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
हाई कोर्ट में 30 साल से लंबित 80 हजार से ज्यादा केस
हाई कोर्टों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। सरकार ने बताया कि देश के 25 हाई कोर्टों में 80,660 मामले ऐसे हैं जो 30 साल से अधिक समय से लंबित हैं।
इसके अलावा 4,52,152 मामले 20 साल से अधिक, 16,14,657 मामले 10 साल से अधिक, 29,75,161 मामले पांच साल से अधिक और 52,43,328 मामले एक साल से अधिक समय से लंबित हैं।
इन सभी को मिलाकर हाई कोर्टों में 64,72,536 मामले लंबित हैं।
16 जुलाई तक सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में राज्यों के हिसाब से लंबित मामलों की स्थिति
क्र. | न्यायालय | 30 वर्ष से अधिक | 20 वर्ष से अधिक | 10 वर्ष से अधिक | 5 वर्ष से अधिक | 1 वर्ष से अधिक | कुल लंबित मामले |
– | भारत का सर्वोच्च न्यायालय | 26 | 558 | 10,094 | 24,611 | 49,248 | 96,024 |
1 | इलाहाबाद उच्च न्यायालय | 53,787 | 1,61,598 | 4,88,359 | 7,30,562 | 10,76,285 | 12,28,353 |
2 | बॉम्बे उच्च न्यायालय | 3,901 | 55,255 | 1,85,261 | 3,19,478 | 5,30,094 | 6,57,813 |
3 | कलकत्ता उच्च न्यायालय | 11,417 | 34,551 | 75,268 | 1,09,456 | 1,72,644 | 2,00,173 |
4 | गुवाहाटी उच्च न्यायालय | 0 | 81 | 4,802 | 23,712 | 50,314 | 65,001 |
5 | तेलंगाना उच्च न्यायालय | 63 | 2,610 | 36,319 | 1,02,105 | 1,96,407 | 2,42,625 |
6 | छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय | 0 | 94 | 6,149 | 23,454 | 55,270 | 74,109 |
7 | राजस्थान उच्च न्यायालय | 2,111 | 33,296 | 1,31,370 | 2,96,248 | 5,51,038 | 6,96,348 |
8 | आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय | 1,650 | 7,331 | 56,067 | 1,16,340 | 2,12,266 | 2,53,617 |
9 | दिल्ली उच्च न्यायालय | 126 | 2,129 | 20,515 | 42,324 | 93,070 | 1,25,478 |
10 | गुजरात उच्च न्यायालय | 19 | 2,143 | 25,287 | 70,017 | 1,39,725 | 1,75,436 |
11 | हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय | 3 | 90 | 8,521 | 40,777 | 81,010 | 1,04,770 |
12 | जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय | 4 | 395 | 6,133 | 13,514 | 33,950 | 44,595 |
13 | झारखंड उच्च न्यायालय | 59 | 3,855 | 14,952 | 29,117 | 55,241 | 72,751 |
14 | कर्नाटक उच्च न्यायालय | 44 | 569 | 22,221 | 78,333 | 2,49,161 | 3,37,159 |
15 | केरल उच्च न्यायालय | 74 | 2,004 | 41,511 | 1,06,117 | 2,03,002 | 2,46,302 |
16 | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय | 92 | 24,938 | 1,54,860 | 2,54,713 | 4,14,465 | 4,90,363 |
17 | मणिपुर उच्च न्यायालय | 0 | 5 | 133 | 1,111 | 4,426 | 6,230 |
18 | मेघालय उच्च न्यायालय | 0 | 0 | 7 | 99 | 821 | 1,996 |
19 | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय | 303 | 25,247 | 1,32,924 | 2,28,758 | 3,51,759 | 4,23,169 |
20 | सिक्किम उच्च न्यायालय | 0 | 0 | 4 | 16 | 153 | 318 |
21 | त्रिपुरा उच्च न्यायालय | 0 | 0 | 1 | 13 | 533 | 1,613 |
22 | उत्तराखंड उच्च न्यायालय | 0 | 869 | 6,291 | 23,431 | 50,824 | 63,263 |
23 | मद्रास उच्च न्यायालय | 3,118 | 76,298 | 1,19,699 | 2,05,815 | 4,17,639 | 5,67,814 |
24 | ओडिशा उच्च न्यायालय | 376 | 7,035 | 38,866 | 69,684 | 1,31,359 | 1,69,320 |
25 | पटना उच्च न्यायालय | 3,513 | 11,759 | 39,137 | 89,967 | 1,71,872 | 2,23,920 |
कुल | सभी उच्च न्यायालय | 80,660 | 4,52,152 | 16,14,657 | 29,75,161 | 52,43,328 | 64,72,536 |
Source: National Judicial Data Grid (NJDG)
किन हाई कोर्टों में सबसे ज्यादा लंबित मामले हैं?
सरकार द्वारा संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार इलाहाबाद हाई कोर्ट में सबसे अधिक 12.28 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट में लगभग 6.58 लाख, राजस्थान हाई कोर्ट में करीब 6.96 लाख, मद्रास हाई कोर्ट में 5.67 लाख, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 4.90 लाख और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में 4.23 लाख मामले लंबित हैं।
30 साल से अधिक पुराने मामलों की बात करें तो अकेले इलाहाबाद हाई कोर्ट में 53,787 मामले इस श्रेणी में हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं।
16 जुलाई तक उच्च न्यायालयों एवं सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों का राज्यवार विवरण
क्र. सं. | न्यायालय | 30 वर्ष से अधिक | 20 वर्ष से अधिक | 10 वर्ष से अधिक | 5 वर्ष से अधिक | 1 वर्ष से अधिक | कुल लंबित मामले |
– | भारत का सर्वोच्च न्यायालय | 26 | 558 | 10,094 | 24,611 | 49,248 | 96,024 |
1 | इलाहाबाद उच्च न्यायालय | 53,787 | 1,61,598 | 4,88,359 | 7,30,562 | 10,76,285 | 12,28,353 |
2 | बॉम्बे उच्च न्यायालय | 3,901 | 55,255 | 1,85,261 | 3,19,478 | 5,30,094 | 6,57,813 |
3 | कलकत्ता उच्च न्यायालय | 11,417 | 34,551 | 75,268 | 1,09,456 | 1,72,644 | 2,00,173 |
4 | गुवाहाटी उच्च न्यायालय | 0 | 81 | 4,802 | 23,712 | 50,314 | 65,001 |
5 | तेलंगाना उच्च न्यायालय | 63 | 2,610 | 36,319 | 1,02,105 | 1,96,407 | 2,42,625 |
6 | छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय | 0 | 94 | 6,149 | 23,454 | 55,270 | 74,109 |
7 | राजस्थान उच्च न्यायालय | 2,111 | 33,296 | 1,31,370 | 2,96,248 | 5,51,038 | 6,96,348 |
8 | आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय | 1,650 | 7,331 | 56,067 | 1,16,340 | 2,12,266 | 2,53,617 |
9 | दिल्ली उच्च न्यायालय | 126 | 2,129 | 20,515 | 42,324 | 93,070 | 1,25,478 |
10 | गुजरात उच्च न्यायालय | 19 | 2,143 | 25,287 | 70,017 | 1,39,725 | 1,75,436 |
11 | हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय | 3 | 90 | 8,521 | 40,777 | 81,010 | 1,04,770 |
12 | जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय | 4 | 395 | 6,133 | 13,514 | 33,950 | 44,595 |
13 | झारखंड उच्च न्यायालय | 59 | 3,855 | 14,952 | 29,117 | 55,241 | 72,751 |
14 | कर्नाटक उच्च न्यायालय | 44 | 569 | 22,221 | 78,333 | 2,49,161 | 3,37,159 |
15 | केरल उच्च न्यायालय | 74 | 2,004 | 41,511 | 1,06,117 | 2,03,002 | 2,46,302 |
16 | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय | 92 | 24,938 | 1,54,860 | 2,54,713 | 4,14,465 | 4,90,363 |
17 | मणिपुर उच्च न्यायालय | 0 | 5 | 133 | 1,111 | 4,426 | 6,230 |
18 | मेघालय उच्च न्यायालय | 0 | 0 | 7 | 99 | 821 | 1,996 |
19 | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय | 303 | 25,247 | 1,32,924 | 2,28,758 | 3,51,759 | 4,23,169 |
20 | सिक्किम उच्च न्यायालय | 0 | 0 | 4 | 16 | 153 | 318 |
21 | त्रिपुरा उच्च न्यायालय | 0 | 0 | 1 | 13 | 533 | 1,613 |
22 | उत्तराखंड उच्च न्यायालय | 0 | 869 | 6,291 | 23,431 | 50,824 | 63,263 |
23 | मद्रास उच्च न्यायालय | 3,118 | 76,298 | 1,19,699 | 2,05,815 | 4,17,639 | 5,67,814 |
24 | ओडिशा उच्च न्यायालय | 376 | 7,035 | 38,866 | 69,684 | 1,31,359 | 1,69,320 |
25 | पटना उच्च न्यायालय | 3,513 | 11,759 | 39,137 | 89,967 | 1,71,872 | 2,23,920 |
कुल | सभी उच्च न्यायालय | 80,660 | 4,52,152 | 16,14,657 | 29,75,161 | 52,43,328 | 64,72,536 |
Source: National Judicial Data Grid (NJDG)
आखिर अदालतों में इतने मामले लंबित क्यों हैं?
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में बताया कि अदालतों में मामलों के लंबित रहने की कोई एक वजह नहीं है। यह कई प्रशासनिक, कानूनी और व्यावहारिक कारणों का परिणाम है।
सरकार के अनुसार कई मामलों में तथ्य और साक्ष्य (Evidence) काफी जटिल होते हैं। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट, गवाहों की उपलब्धता, वकीलों का सहयोग, पक्षकारों की उपस्थिति और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन भी मुकदमों की गति को प्रभावित करता है। कई मामलों में बार-बार स्थगन (Adjournment) मिलने से भी सुनवाई लंबी खिंच जाती है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालतों में मामलों का निपटारा पूरी तरह न्यायपालिका का विषय है और कार्यपालिका अदालतों के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं करती।
जजों की कमी भी बड़ी वजह
सरकार ने माना कि न्यायपालिका में लंबित मामलों का एक बड़ा कारण जजों की कमी भी है।
देश के 25 हाई कोर्टों में 1,122 स्वीकृत पदों के मुकाबले 341 पद खाली हैं। वहीं जिला और अधीनस्थ अदालतों में 30,868 स्वीकृत पदों के विरुद्ध 7,311 न्यायिक पद रिक्त हैं।
सरकार ने कहा कि समय पर मामलों के निपटारे के लिए पर्याप्त संख्या में न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी, कोर्ट स्टाफ और आधुनिक न्यायिक ढांचे (Infrastructure) की उपलब्धता बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियां अपेक्षाकृत तेजी से हुई हैं, लेकिन हाई कोर्ट और निचली अदालतों में रिक्तियां अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की स्थिति क्या है?
सरकार ने संसद में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (Fast Track Special Courts) का भी डेटा साझा किया, जो दुष्कर्म और POCSO Act से जुड़े मामलों की सुनवाई करती हैं।
2023 के अंत तक इन अदालतों में 2,02,175 मामले लंबित थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 2,04,122 हो गई। वहीं 2025 में लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 2,45,579 तक पहुंच गई।
2025 में इन अदालतों में 1,43,936 नए मामले दर्ज हुए, जबकि केवल 66,500 मामलों का निपटारा हो सका। इससे साफ है कि नए मामलों की संख्या निपटाए गए मामलों से काफी अधिक रही।
सरकार ने समाधान को लेकर क्या कहा?
सरकार का कहना है कि न्यायिक लंबित मामलों की समस्या का समाधान केवल जजों की संख्या बढ़ाने से नहीं होगा। इसके लिए अदालतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों की पर्याप्त नियुक्ति, डिजिटल तकनीक का अधिक उपयोग, बेहतर केस मैनेजमेंट और सभी संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी है।
सरकार ने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर सुधारों पर लगातार काम किया जा रहा है, लेकिन मामलों का अंतिम निपटारा अदालतों के अधिकार क्षेत्र में ही आता है।
FAQ
- सुप्रीम कोर्ट में 10 साल से अधिक पुराने कितने मामले लंबित हैं?
सरकार के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में 10,094 मामले ऐसे हैं जो 10 साल से अधिक समय से लंबित हैं। - हाई कोर्ट में 30 साल से लंबित मामलों की संख्या कितनी है?
देश के विभिन्न हाई कोर्टों में 80,660 मामले 30 साल से अधिक समय से लंबित हैं। - न्यायपालिका में लंबित मामलों की समस्या क्यों बढ़ रही है?
जजों की कमी, मामलों की जटिलता, गवाहों और जांच एजेंसियों से जुड़ी देरी, बार-बार स्थगन और सीमित न्यायिक संसाधन इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं। - लंबित मामलों को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
सरकार न्यायिक ढांचे को मजबूत करने, रिक्त पद भरने, डिजिटल कोर्ट व्यवस्था और न्यायिक सुधारों पर काम कर रही है। हालांकि मामलों के निपटारे की प्रक्रिया पूरी तरह न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आती है। - सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर क्या कहा है?
इस विषय पर संसद में सरकार ने बताया कि मामलों के निपटारे का अधिकार न्यायपालिका के पास है। सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर लंबित मामलों को कम करने और न्यायिक सुधारों के लिए विभिन्न प्रशासनिक कदम भी उठाता रहा है।

